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' एक चुटकी इश्क़ ': डॉ.स्वाति चौधरी

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 हाल ही में,  डॉ. संजीव कुमार  प्रकाशक इंडिया नेटबुक्स , नॉएडा के आवास पर एक पारिवारिक स्नेह -मिलन में साहित्य जगत की कुछ प्रतिष्ठित हस्तियों के साथ ही साथ, एक नए चेहरे से मुलकात हुई;  ऊर्जावान , मृदुभाषी डॉ स्वाति चौधरी/  सौम्य,  विनम्र  व् मितभाषी डॉ.स्वाति ने पहली ही मुलाकात में मुझे प्रभावित किया/ सस्नेह अपना सद्य प्रकाशित काव्य-संग्रह ' एक चुटकी इश्क़ ' भेंट किया/  व्यस्तता के कारण पढ़ नहीं पायी/ आज पढ़ना शुरू किया तो पूरा पढ़े बिना रुक नहीं पायी/   लौकिक से अलौकिक प्रेम की कविताएँ / छोटी छोटी कविताएं , परन्तु इतने गहरे भाव समेटे हुए कि एक ही कविता को बार बार पढ़ा, गहराई तक पैंठने के लिए/ सीतामढ़ी से  मेरे वरिष्ठ मित्र, कला इतिहास विद व् छाया-चित्रकार ने मेरे काव्य-संग्रह 'आस की कूंची से 'पढ़ने के बाद टिप्पणी की थी ," बत्तख जब लहरों के ऊपर तैरती रहती है, कोई निशान नहीं छोड़ती; परन्तु जब पानी में और गहरे पाँव चलाती है ,स्वतः लहरें बनने लगती है और उथल-पुथल मच जाती है और गहरे निशान छोड़ जाती है/ ऐसी हैं आपकी कविताएँ /" कुछ ऐसी ही अनुभूति म...

एक्रोस द बॉर्डर' और स्काई इज द लिमिट

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  वर्ष 1979 में श्री आई. के. शर्मा ने राजस्थानी के 20 आधुनिक कवियों की चयनित कविताओं के अंग्रेजी भाषा में अनुवाद किए थे, जिसे राजस्थानी भाषा साहित्य संगम (अकादमी) बीकानेर ने प्रकाशित किया था। अब अकादमी का नाम बदल कर 'राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर' हो गया है। तब से अब तक इस दिशा में ऐसा कोई संपादन और अनुवाद का कार्य मेरे ध्यान में नहीं आया, यदि ऐसा कोई कार्य हुआ है तो मित्र बताएं.... इस प्रकाशन के चालीस से अधिक वर्षों बाद अब कवयित्री-अनुवादक रजनी छाबड़ा Rajni Chhabra जी ने इस महत्त्वपूर्ण दिशा में दो पुस्तकों के माध्यम से सार्थक हस्तेक्षप किया है। वर्ष 2022 में Gyan Geeta Prakashan से प्रकाशित 'एक्रोस द बॉर्डर' में 51 कवियों और Surya Prakashan Mandir से प्रकाशित 'स्काई इज द लिमिट' में 25 कवयित्रियों को शामिल करते हुए राजस्थानी का परचम विश्व कविता समुदाय के समक्ष प्रस्तुत करने का अद्वितीय कार्य किया है। उनके इस कार्य के आगे मैं नतमस्तक हूं, क्योंकि जब तक राजस्थानी के आधुनिक साहित्य को हिंदी-अंग्रेजी भाषाओं के माध्यम से देश-दुनिया की विभन्न भा...

समीक्षा ****** काव्य संग्रह : ख़ामोशी की चीखें

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काव्य संग्रह : सूरज में तारों की तलाश समीक्षक : रजनी छाबड़ा

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काव्य संग्रह : सूरज में तारों की तलाश  कवि : राजेन्द्र जोशी  पेपर बैक : मूल्य रु 200 /- मात्र  हार्ड बाउंड : मूल्य रु. 350 /- मात्र  प्रकाशक : इंडिया नेटबुक्स  समीक्षक : रजनी छाबड़ा  स्पष्टवादी, संवेदनशील व् यथार्थ के धरातल पर साहित्य सृजनकर्ता  राजेन्द्र जोशी  का यह चतुर्थ काव्य संग्रह है , जो ' उजाले की साखी ', 'रात के पिछले पहर ' और 'वक़्त अभी शेष है ' नामक तीन खण्डों में विभाजित है/ सामाजिक परिवेश, प्राकृतिक सौंदर्य, आस्था , पर्यावरण चेतना, राजनैतिक पतन पर कटाक्ष ,  प्रेम की कोमल भावनाओं और आस विश्वास के रंगो से उकेरा गया यह काव्य संग्रह  पाठकों के मन के दरवाज़े पर आहट देता प्रतीत होता है/ मानव  मन की कोमल भावनाओं का चित्रण और जीवन की विभिन्न स्थितियों में सामंजस्य का आह्वान सीधे, सरल शब्दों में किया गया हैं /  निष्ठुरता से दमन की जा रही मानवीय संवेदनाओं से कवि मन आहत है/  'अब मेरे रोम रोम में बसी है तुम्हारी पीड़ा'  और 'पी लूँगा तुम्हारी हर वेदना', आश्वस्त करती प्रतीत होती है/ कवि  मानवी...

डॉ. संजीव कुमार : पारदर्शी व्यक्तित्व एवं बेजोड़ साहित्यकर्म : आलेख : रजनी छाबड़ा

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  डॉ. संजीव कुमार : पारदर्शी व्यक्तित्व एवं बेजोड़ साहित्यकर्म/  आलेख : रजनी छाबड़ा  व्यक्तित्व :मनस्वी , तेजस्वी , लोकप्रिय कवि , साहित्यकर्मी ,समीक्षक, प्रकाशक ,  समाजसेवक, बी पी एल एडवायज़री बोर्ड केअध्यक्ष व् उच्चतम न्यायालय में अधिवक्ता , बजाज ग्रुप से कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में सेवानिवृत /  मैं अलग अलग व्यक्तियों का ज़िक्र नहीं कर रही हूँ/  विस्मित हूँ कि इतनी खूबियां एक ही व्यक्ति में कैसे समाहित हैं/ यह बहुआयामी शख्सियत है ----डॉ. संजीव कुमार  डॉ. संजीव से प्रथम परिचय फेसबुक पर हुआ/ मैं उन दिनों बीकानेर से सेवानिवृत होकर बैंगलोर में मेरा बसेरा था  और डॉ. साहिब उस समय, अमेरिका से भारत आकर स्थाई रूप से बसने के साथ ही साथ , एक पब्लिशिंग हाउस की स्थापना की योजना बनाये हुए नॉएडा आये थे/ यह मेरा सौभाग्य है कि मेरी नुमेरोलॉजी करियर गाइड के साथ आपके प्रकाशन कार्य की शुरुआत हुई और आपके साथ यह जुड़ाव लगातार बना हुआ है / मेरी अब तक विभिन्न आयामों पर लिखी १३ पुस्तकें आप द्वारा प्रकाशित हो चुकी हैं/ एक प्रकाशक के रूप में उनकी प्रशंसनीय बात यह है कि जब जब ...
 गत कुछ वर्षों में मेरे काव्य संसार पर जो समीक्षाएं सुधि आलोचकों एवं समीक्षकों ने लिखी और मैंने जो समीक्षाएं लिखी, समय के अभाव के कारण, मैं उन्हें संकलित नहीं कर पायी/ आज अपने इस नवीन ब्लॉग 'तीसरी आँख ' में इनका संचयन किया है और भविष्य में इस ब्लॉग के माध्यम से आप तक समीक्षा पहुँचाने का सिलसिला बना रहा, इसके लिए प्रयासरत रहूंगी/  आपकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार रहेगा/ रजनी छाबड़ा 

समीक्षा काव्य संग्रह : सांवर दइया की चयनित राजस्थानी कवितायेँ

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   समीक्षा  काव्य संग्रह : सांवर दइया की चयनित राजस्थानी कवितायेँ  चयन-अनुवाद : नीरज दइया  पेपरबैक: मूल्य रु. 200 /- मात्र  प्रकाशक : इंडिया नेटबुक्स , नोएडा  सांवर दइया आधनिक राजस्थानी साहित्य के प्रमुख हस्ताक्षर / सशक्त कथाकार, कवि  व् व्यंग लेखक के रूप में हिंदी व् राजस्थानी साहित्य जगत में उनकी विशिष्ट पहचान है/ राजस्थानी के साथ साथ हिंदी, अंग्रेज़ी और गुजराती भाषाओँ पर उनका अधिकार था/ उन्होंने जीवन के अंतिम वर्षों में साहित्य अकादेमी से पुरस्कृत गुजराती निबन्ध संग्रह ' स्टेच्यू '{ अनिल जोशी ) का राजस्थानी अनुवाद भी किया जो साहित्य अकादेमी से वर्ष 2000 में प्रकाशित हुआ/ 1985  में उन्हें कहानी संग्रह पर साहित्य अकादमिक का मुख्य पुरस्कार मिला/ आधुनिक राजस्थानी कविता के इतिहास में सांवर दइया को प्रयोगशील कवि  के रूप में विशेष रूप से पहचाना गया है/ मात्र 44  वर्ष की आयु में असमायिक निधन/ नश्वर शरीर दुनिया में न रहने के बाद भी, उनका साम्रज्य कायम है साहित्य प्रेमियों के दिलों पर/  उनकी कई रचनाएँ , उनके जीवनकाल...