डॉ. संजीव कुमार : पारदर्शी व्यक्तित्व एवं बेजोड़ साहित्यकर्म : आलेख : रजनी छाबड़ा
डॉ. संजीव कुमार : पारदर्शी व्यक्तित्व एवं बेजोड़ साहित्यकर्म/ आलेख : रजनी छाबड़ा
व्यक्तित्व :मनस्वी , तेजस्वी , लोकप्रिय कवि , साहित्यकर्मी ,समीक्षक, प्रकाशक , समाजसेवक, बी पी एल एडवायज़री बोर्ड केअध्यक्ष व् उच्चतम न्यायालय में अधिवक्ता , बजाज ग्रुप से कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में सेवानिवृत / मैं अलग अलग व्यक्तियों का ज़िक्र नहीं कर रही हूँ/ विस्मित हूँ कि इतनी खूबियां एक ही व्यक्ति में कैसे समाहित हैं/ यह बहुआयामी शख्सियत है ----डॉ. संजीव कुमार
डॉ. संजीव से प्रथम परिचय फेसबुक पर हुआ/ मैं उन दिनों बीकानेर से सेवानिवृत होकर बैंगलोर में मेरा बसेरा था और डॉ. साहिब उस समय, अमेरिका से भारत आकर स्थाई रूप से बसने के साथ ही साथ , एक पब्लिशिंग हाउस की स्थापना की योजना बनाये हुए नॉएडा आये थे/ यह मेरा सौभाग्य है कि मेरी नुमेरोलॉजी करियर गाइड के साथ आपके प्रकाशन कार्य की शुरुआत हुई और आपके साथ यह जुड़ाव लगातार बना हुआ है / मेरी अब तक विभिन्न आयामों पर लिखी १३ पुस्तकें आप द्वारा प्रकाशित हो चुकी हैं/ एक प्रकाशक के रूप में उनकी प्रशंसनीय बात यह है कि जब जब किसी भी लेखक से किसी कारण विशेष उन से अपनी कृति के एक विशिष्ट समयबद्ध प्रकाशन का अनुरोध किया, प्रकाशक महोदय से उस अनुरोध को पूर्ण मनोयोग से पूरा किया/
दुनिया के विभिन्न देशों का भ्रमण कर चुके है व् शैक्षणिक योग्यता भी उच्च स्तरीय है/ लगभग ४० वर्ष तक विभिन्न कार्यक्षेत्रों में शीर्षस्थ पद पर रहे / विनम्रता उनके स्वभाव का विशिष्ट गुण है/ बड़ा व्यक्ति वह होता है जो अपने पास बैठे व्यक्ति को अपने से छोटा न महसूस होने दे/ डॉ. संजीव ऐसे ही है/मिलन- सारिता का सजीव उदाहरण / फलों से लदा वृक्ष सदैव झुका ही तो रहता है/ उनका यही अनुकरणीय गुण उनकी लोकप्रियता का राज है/ परिवार और कार्य क्षेत्र में सामंजस्य बनाये हुए निरंतर प्रगति की ओर बढ़ रहे हैं और जीवनसंगिनी से भी दोनों क्षेत्रों में भरपूर सहयोग मिल रहा है/
कृतित्व : डॉ. संजीव निरंतर सृजन क्षेत्र में अचंभित करने वाली गति से आगे बढ़ रहे हैं/ अनेक साहित्यिक सम्मानों से समादृत उनकी साहित्यिक यात्रा अनवरत ज़ारी है/ अब तक कानून विषयों पर ३६ और साहित्य सृजन के क्षेत्र में आपकी ७५ पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है/ हाल ही में अनुस्वार पत्रिका का संपादन दायित्व भी आपने संभाला है/ और सोशल मीडिया पर भी काफ़ी सक्रिय है /आप प्रयोगधर्मी कवि हैं / प्रवासी साहित्य को प्रोत्साहित करते रहे है व् इ- बुक्स का प्रकाशन भी वृहद स्तर पर कर रहे है/अनुस्वार मंच के माध्यम से अब तक लगभग १०० साहित्यकारों के साक्षात्कार ले चुके हैं व् उनके काव्य पाठ भी प्रशंसनीय है/
आपने जीवन के विभिन्न आयामों पर लिखा है/ सरल, सहज भाषा में मन के उदगार व्यक्त करते है/ आपके लेखन में अथाह गहराई है/ किसी भी विषय पर लिखने से पहले, उसका दीर्घ विश्लेषण करते है/ पात्र के दर्द को आत्मसात करते है/ उसकी चुभन से स्वंय को एकाकार करते है/ अत्यंत भावुक, संवेदनशील, मन की आँखों से देखने वाले कवि साहित्य जगत की एक प्रतिष्ठित हस्ती है/ डॉ संजीव की अधिकांश कृतियाँ मैंने पढ़ी है/ प्राकृतिक सौंदर्य, सांस्कृतिक विरासत, तार तार होते सामाजिक ताने बाने, राजनैतिक पतन पर लिखी गयी उनकी रचनाएँ, विशेषतः , स्त्री विमर्श और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर लिखी उनकी रचनाएँ प्रबुद्ध पाठकों के मन पर गहरी छाप छोड़ती है/ अपने आस पास घटित हो रही घटनाओं को कवि मन कैसे अनदेखा कर दे/ उन्हें कलमबद्ध करना , लेखक का सामाजिक व् साहित्यिक दायित्व बन जाता है/ इस दायित्व को बखूबी निभा रहे हैं डॉ संजीव , जोकि एक साहित्यकार होने के साथ साथ सामाजिक कार्यकर्ता भी है/ मुझे सर्वाधिक प्रभवित किया, उनके हाल ही में प्रकाशित काव्य संग्रह 'खामोशी की चीखें ' ने/ कवि ने कश्मीर की वादियों के ज़र्रे ज़र्रे के दर्द को निजता से महसूस किया है/ पात्रों के दर्द की चुभन से कवि ने स्वयं को एकाकार किया है और पाठक भी इस दर्द की गहराईयों से अछूता नहीं रह पाता /
आपके काव्य संग्रह इंग्लिश, हिंदी, बंगाली , गुजराती ,राजस्थान, डोगरी व् तमिल में अनुदित हो चुके है/ बाल साहित्य में व् अंग्रेज़ी साहित्य सृजन में भी आपका योगदान है/
दुनिया के सृजनहार से प्रार्थना हैं कि वह डॉ संजीव् की सृजनयात्रा को अनवरत कामयाबियों की बुलयाँदियों तक ले जाये/
रजनी छाबड़ा
बहु भाषीय कवयित्री व् अनुवादिका
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