' एक चुटकी इश्क़ ': डॉ.स्वाति चौधरी



 हाल ही में,  डॉ. संजीव कुमार  प्रकाशक इंडिया नेटबुक्स , नॉएडा के आवास पर एक पारिवारिक स्नेह -मिलन में साहित्य जगत की कुछ प्रतिष्ठित हस्तियों के साथ ही साथ, एक नए चेहरे से मुलकात हुई;  ऊर्जावान , मृदुभाषी डॉ स्वाति चौधरी/  सौम्य,  विनम्र  व् मितभाषी डॉ.स्वाति ने पहली ही मुलाकात में मुझे प्रभावित किया/ सस्नेह अपना सद्य प्रकाशित काव्य-संग्रह ' एक चुटकी इश्क़ ' भेंट किया/  व्यस्तता के कारण पढ़ नहीं पायी/ आज पढ़ना शुरू किया तो पूरा पढ़े बिना रुक नहीं पायी/  

लौकिक से अलौकिक प्रेम की कविताएँ / छोटी छोटी कविताएं , परन्तु इतने गहरे भाव समेटे हुए कि एक ही कविता को बार बार पढ़ा, गहराई तक पैंठने के लिए/ सीतामढ़ी से  मेरे वरिष्ठ मित्र, कला इतिहास विद व् छाया-चित्रकार ने मेरे काव्य-संग्रह 'आस की कूंची से 'पढ़ने के बाद टिप्पणी की थी ," बत्तख जब लहरों के ऊपर तैरती रहती है, कोई निशान नहीं छोड़ती; परन्तु जब पानी में और गहरे पाँव चलाती है ,स्वतः लहरें बनने लगती है और उथल-पुथल मच जाती है और गहरे निशान छोड़ जाती है/ ऐसी हैं आपकी कविताएँ /" कुछ ऐसी ही अनुभूति मुझे हुई, प्रिय स्वाति की  परिपक़्वता से  सनी कविताएँ पढ़ने के बाद/ 

शीघ्र ही इस काव्य संग्रह के बारे में कुछ विस्तार से लिखना चाहती हूँ और आप सब सुधि पाठकों से सांझा करना पसंद करूंगी/ बस  थोड़ा इंतज़ार और अभी 

रजनी छाबड़ा 


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