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लस्टस full file

       लस्टस   सेटन का उत्तराधिकारी  अन्धकार के साम्राज्य का अधिपति  मानसिक विद्रूपता का भयानक आईना दिखाता नाटकीय एकालाप ' लस्टस ' मूल रचना इंग्लिश : डॉ.जे. एस. आनंद  हिंदी अनुवाद :  रजनी छाबड़ा  लस्टस   पात्र परिचय  लस्टोनिआ  : लस्टस का राज्य, ईडन का  एक  विकल्प शहर / लस्टोनिआ में संविधान को लुस्टिटूयशन कहा जाता है/ लोग जो भी करते हैं , उसको लसटिफाई करते हैं/और जस्टिस को लस्टिस कहते हैं/ प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्मों के लसटिफिकेशन में आस्था रखता है, अन्यथा उसे भटका हुआ कहा जाता है/ लस्टस  : महान दैत्य राजकुमार, जिसे सेटन का अंधकार का राज्य विरासत में मिला है / प्रभु : महान सर्जक , जिसे सेटन के बाद लस्टस  चुनौती देता है/ दुर्गा, ब्रह्मा,विष्णु, इन्द्र : हिन्दू पौराणिकी में देवी देवता  ग्रेडा (चंचल माँ ): धन लोलुपता की देवी (नव पौराणिक कथा में ) अमाज़ीनिआ : सेटन के पुत्री जिसने ऑक्सफ़ोर्ड विश्व विद्यालय से भौतिक शास्त्र में पी. एच.डी. की          ...

कोना मन का में एक सुप्रसिद्ध कवयित्री-लेखिका अनुवादक से सीधी बात @TheRaj...

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बात सिर्फ इतनी सी।।काव्य की समीक्षा।।रचयिता रजनी छाबड़ा।। @dr.anjuduagemini

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अंजु जी, मेरे काव्य संग्रह की गहन समीक्षा लिए हार्दिक आभार/ आपकी प्रस्तुति अत्यंत रोचक रही और चुनिंदा कविताओं की पेशकश भी निहायत उम्दा/ 

मीठी मुलाकात कवयित्री, अनुवादक, अंकशास्त्री रजनी छाबड़ा से।। #podcast epi...

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मेरी अनुदित कृति SWAYAMPRABHA :श्री राम शरण अग्रवाल जी की पाठकीय प्रतिक्रिया

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  मित्रों , आप सब के साथ सांझा कर रही हूँ मेरी नवीनतम अनुदित कृति SWAYAMPRABHA पर मेरे सुधि मित्र श्री राम शरण अग्रवाल जी की पाठकीय प्रतिक्रिया/ स्वयंप्रभा' मिली। आभारी हूँ आपका आपके स्नेह भाव के लिए। भारत में भारतीय विरासत के जीवंत रहने का एक निर्णायक कारण है संवाद की सहजता। बुद्ध से तुलसी तक यह परंपरा साहित्य का श्रृंगार बन गयी। मीरा, कबीर,बिहारी ने इसे नए आयाम दिए। प्रस्तुत रचना ने, कविताओं ने मुझे भाव विभोर किया है,उसमें अभिव्यक्ति की सहजता, मनोभावों का प्रवाह, अंत: स्पर्श बन जाता है। प्रस्तुत पुस्तक की प्रकृति और प्रस्तुति तथा अनुवाद में यह सब कुछ अक्षुण्ण है। मानस के उद्धरण कहीं न कहीं मुझे स्वनामधन्य अज्ञेय का स्मरण कराते हैं, उनकी पंक्ति है " विगत हमारे कर्मों का लक्ष्य नहीं है परंतु उसकी अनिवार्य पृष्ठभूमि तो है।" यदि ऐसा नहीं होता तो न " Path" होता और ना ही " The Earth" यह भी शाश्वत है कि " They have been shown as victorious; but ultimately, they are being conquered by our moral attributes." पुस्तक के आमुख से। यह तो हमारा प...

जीवन के पल पल की महक संजोये 'गुलाबी गलियारे'

   पुस्तक- गुलाबी गलियारे- संस्मरण लेखिका- डॉ. अंजु दुआ जैमिनी पृष्ठ संख्या- 116 प्रकाशक- अयन प्रकाशन,वर्ष 2023 मूल्य 280 रुपये जीवन के पल पल की महक संजोये  'गुलाबी गलियारे' ************************************* जीवन पथ पर चलते चलते कुछ यादें ऐसी अमिट छाप छोड़ जाती हैं स्मृति पटल पर कि उनकी महक आजीवन हमारे साथ रहती है/ 'गुलाबी गलियारे' संस्मरण में  जीवन के पल पल की महक संजोये, अंजू दुआ जेमिनी ने बचपन से अब तक की अनुभूतियाँ सहज, सरल, सरस व् रुचिकर ढंग से कलमबद्ध की हैं / बचपन से लेकर अब तक की जीवन यात्रा के विभिन्न छोटे -बड़े अवसरों का उल्लेख इतने जीवंत ढंग से किया गया है कि पाठक अनायास ही स्वयं को उमसे एकाकार करने लगता है / लेखिका का भोगा हुआ यथार्थ , केवल एक व्यक्तत्व के रूप में नहीं उभरता, अपितु कई घटनाओं व् बिम्बों के माध्यम से हम जीवन के कई पहलुओं को गहनता से समझ पाते हैं/ बचपन की छोटी-छोटी नादानियाँ, शोखियाँ व् शरारतें , सहजता व् सरसता से लेखिका अपने पाठकों के समक्ष रखती है/ धीरे -धीरे जीवन परिपक्वता की राह पर चलने लगता है/ शिक्षा, व्यवसाय, वैवाहिक जीवन की जिम्मेव...