लस्टस full file
लस्टस
सेटन का उत्तराधिकारी
अन्धकार के साम्राज्य का अधिपति
मानसिक विद्रूपता का भयानक आईना दिखाता नाटकीय एकालाप ' लस्टस '
मूल रचना इंग्लिश : डॉ.जे. एस. आनंद
हिंदी अनुवाद : रजनी छाबड़ा
लस्टस
लस्टस
आह्वान
मेरी लेखनी को नई ऊर्जा दो
मानव के पतन के कारण खोजने के लिए
और लस्टस के उत्थान के
बाध्य कर दिया जिसने प्रभु और उसके शक्तिवान फ़रिश्तों को
आत्म -विश्लेषण के लिए , क्यों परास्त होना पड़ा मानव को दानव से
और किसने विमुख किया मानव को
दैवीय शक्तियों से और बाध्य किया
लस्ट्स के दिन प्रतिदिन बढ़ते आधिपत्य और शक्ति की
शरण में जाने के लिए।
लस्टस जो इच्छुक था मानव के रवैये को देव के समक्ष उचित ठहराने का
खिलवाढ़ कर रहा था मानवीय मन की दुर्बलता के साथ
सम्मान, स्वतंत्रता और इच्छा शक्ति की आड़ में
और उसकी उच्च श्रेणी की बौद्धिक वाकपटुता ने
कैद कर दी उनकी कल्पना शक्ति
ताकि शीघ्र ही उन्हें यह आभास होने लगा
यदि वे चाहते हैं कि मन-वांछित ही घटे
केवल लस्टस और उसका राज्य ही है
जो उन्हें बेलग़ाम आज़ादी दे सकते हैं/
प्रभु और उसकी दिनों-दिन क्षीण होती जा रही सेना
अपने बलपूर्वक रवैये के साथ जारी रखे हुए थी
मृतकों की उपासना
और उनके अनुयायियों के लिए निर्धारित करती
आचरण की एक सारणी
जिससे आमआदमी साधारण खुशियों से भी वंचित हो जाता
इस तरह, उन्होंने मुख मोड़ लिए मंदिरों से
और भीड़ बढ़ ने लगी मदिरालयों, सिनेमाघरों
रेस्त्रां और क्लबों में
लोग,जो मुक्ति चाहते थे
कमरतोड़ काम के बोझ से
एकत्रित होते खेल खेलने, महिलाओं से मिलने के लिए
और मदिरा पान व् मौज़ मस्ती के लिए
परन्तु, जैसे जैसे सामूहिक अर्थव्यवस्था की पकड़
बढ़ने लगी, राष्ट्र की आर्थिक व्यवस्था पर
अधिकाधिक युवा धकेल दिए गए नौकरियों की ओर
जहाँ न तो उन्हें खुशी मिलती, न आशा की कोई किरण
केवल आकांक्षा परोसी जाते उन्हें
मात्र स्व -केंद्रित अतिरंजित जुनून
रुग्ण मानसिकता और निरंतर दर्द से युक्त /
इन सशक्त लोगों की सेना
जो दानव के नाम पर जी रहे थे
दिखने में धार्मिक लगते थे
और प्रभु के प्रति पूर्णतः समर्पित
मंदिरों में अर्चना करते
धार्मिक स्थलों पे सजदे में सिर झुकाते
स्पष्ट रूप से अपनी दमित भावनाओं से मुक्ति पाने के लिए
फिर भी, उनकी निष्ठा तो शैतान के प्रति ही थी
मानवीय इच्छाओं की पूर्ण स्वतंत्रता में यकीन के साथ /
हे, सरस्वती! मुझे सामर्थ्य दो वर्णन करने की
कैसे घटित होता है यह देवत्व को लूटने का काम
कैसे यह दुष्ट लोग इस संसार को बदल देते हैं
आध्पित्य हो जाता हैं अन्धकार के साम्राज्य का,
और कैसे दैवीय साम्राज्य के दुर्ग एक के बाद एक
लस्टस के कोप के आगे धराशायी होने लगते है,
और किस तरह अंततः प्रभु प्रयास करता है
अपने खोये स्वर्ग को पुनः प्राप्त करने के लिए।
मुझे शक्तिदान दो इस अधार्मिक युद्ध के
अनपेक्षित विवरण करने हेतु
जोकि लस्टस और उसके समूह ने
प्रभु पर थोपा
जिसमें कितने ही फ़रिश्ते घातक रूप से घायल हुए
और, अंत में दुर्गा का आह्वान किया गया
दानवों के नरसंहार के लिए
अराजकता के अंत के लिए
और ईश्वरीय व्यवस्था के पुनर्स्थापन के लिए
मूल रचना: डॉ. जे. एस. आनंद
अनुवाद : रजनी छाबड़ा
सर्ग १
ज्ञान: खतरे का कार्यक्षेत्र
सहगान :
आदम :
दैवीय वाणी :
कैसे कायम रखते हैं वे
अपनी मर्यादा और उत्तेजनाहीनता
वे शान्तिप्रद जीवन में यकीन रखते हैं /
मानवता की सहस्त्रों वस्तुएँ प्रदान करते हैं
और कोई भेद-भाव नहीं करते/
पक्षियों की प्रजाति में अनुपात का तीव्र बोध होता है
आवश्यकता से अधिक एक भी दाना नहीं खाते ,
भविष्य के लिए एक भी दाना संग्रहित नहीं करते /
वे प्रकृति का ही एक अंश है, ख़ुश और आनंदित
और सदैव उचित संतुलन में रहते है/
मानव प्रजाति की शांति भंग होती है
क्योंकि वे इस प्रवाह को भंग करते हैं
और शाश्वत संतुलन को बिगाड़ते हैं /
केवल मनुष्य ही ऐसा प्राणी है
जो शांत-प्रिय लोगों की दयालुता पूर्ण जाति से विदा हो जाता है
और इस ग्रह के संतुलन को नष्ट करने में लिप्त है/
सूर्य के प्रकाश को दबोचना चाहता है, पानी का स्वामीतित्त्व चाहता है/
हवा को झपटना चाहता है और सारी खुशियां क़ैद करना चाहता है /
वह सनकी इंसान !
हवा पर हुकूमत जताना चाहता है
घोटाले करता है
और भगवान का प्रचार करता है /
गायक :
हे देवों, अरे दानवों
मेरा तुम से कोई सम्बद्ध नहीं
मैं दीवाना हूँ ,
क्या मैं लीयर हूँ?
अरे नहीं. मैं मेकबेथ हूँ।
नहीं, नहीं, नहीं, मैं फ़ॉस्टस हूँ/
फ़ॉस्टस,जो दानवों के पास गया
क्या मैं एक दानव हूँ ?
सेटन ! तुम कहाँ हो?
मुझे कुछ धुंधला धुंधला याद है
मैंने विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की थी
कोई नौकरी नहीं
कोई ज्ञान नहीं
कोई प्यार नहीं
केवल अधिक से अधिक पाने की ललक,
किस लिए? किसके लिए?
क्या मैं इस दुनिया में केवल आजीविका कमाने के लिए आया हूँ
और उधार की किश्तें चुकाते चुकाते मरने के लिए आया हूँ
अपने बच्चों का भरण -पोषण करने के अलावा क्या और कुछ भी नहीं ?
अरे .... मंदिर, मस्ज़िद , गिरिजाघरो
जहां वे चर्चा करते हैं राजनीति पर
हे,... देवगण
क्या आप भी शैतान में यकीन रखते हैं?
यह जन्म, यह संसार, यह शिक्षा ,
यह प्यार, यह करुणा ,
यह धनवान संसार और बेचारा मैं
क्या यह सब अप्रासंगिक हैं /
क्या मुझ में विषमता है ?
एक मूर्खता है ?
हे बैकेट !
मुझे समझने में मदद करो
गोडोट कौन था और वह आया या नहीं?
मैं जा रहा हूँ
अरे गायको , अरे कवियो, अरे दार्शनिक लोगो
सुनो !
तुम्हारा आदमी अप्रासंगिक है /
वह मरने के लिए ही पैदा हुआ है/
केवल मरने के लिए /
कुछ भी नहीं करने के लिए/
हा हा हा हा हा हा
दानवों ! तुम्हे सलाम
तुम्हे सलाम , हे,सेटन!
और तुम्हारे सगे सम्बन्धियों को, हे लस्टस !
मेरे पास करने लायक कुछ नहीं,
विचारने लायक कुछ नहीं,
करने लायक कुछ नहीं ,
मुझे तो बस नष्ट ही होना है /
हा हा हा हा हा हा
सेटन :
सेटन :
काल :
विचित्र समय आ गया है, नारद /
कुछ वस्तुएं नहीं हैं, फिर भी उनकी उपस्थिति का आभास होता है/
मनुष्यों के चेहरे में चिंता की लकीरें दिखती हैं /
किसी भी कार्य में जुनून नहीं है/
मैंने लोगों को बहुत जल्दबाजी में देखा है
क्या हम किसी लौकिक दुर्भाग्य से घिर गए हैं ?
नारद :
हाँ , विचित्र समय आ गया है /
ऐसा प्रतीत आता है जैसे कि
देवताओं और दानवों के बीच के
इस प्रतिरोध रहित शीत युद्ध में
दानवों की ही सब ओर विजय हो रही है/
कुरु :
नारद, में भी यह विचित्र समय देख कर सदमे में हूँ /
हवाएँ गरजना बंद नहीं कर रहीं /
और कितनी ही बार, सूर्य भी गायब हो जाता है/
ऐसा मौसम तो हम ने पहले कभी नहीं देखा था /
यह रातें कितनी भयावह हैं
बुराई का पूर्वाभास कराती हुई सी /
मुझे एक अजीबोग़रीब सपना आया, नारद/
मैंने किताबों से भरा एक पुस्तकालय देखा/
लिखित पाठ्य-सामग्री
और लाखों विद्वान
फिर भी, उन किताबों में केवल भस्मवर्णी सामग्री थी
और सीखने लायक कुछ नहीं
विद्यार्थी जिन्होंने बरसों तक इनका अध्ययन किया
और परीक्षा दी
उन्हें उच्च स्तरीय उपाधियाँ मिली,
पर इन डिग्रियों में ज्ञान-विहीनता थी
और यह केवल उनकी फाइलों की शोभा बढ़ा रही थी/
डॉक्ट्रेट की डिग्री के बावजूद, उनका बर्ताव तो मति -मंद था/
नारद :
यह चौंकाने वाला है और पूर्वाभास देता है कि
कुछ बुरा घटित होने वाला है /
एक पुस्तकालय, लाखों पुस्तकें/
हज़ारों की संख्या में विद्वान ,
फिर भी नहीं कोई ज्ञान ?
हे, प्रभु! कौन कह सकता था कि
हमें यह दिन भी देखने पड़ेंगे ?
( काल ने जो कि वक़्ता की जानकारी के बिना सुन रहा था, हस्तक्षेप किया ) ,
काल :
कुरु, मैंने भी कल एक सपना देखा /
मैंने भैसें देखीं जिनके थन दूध से भरपूर थे ,
दूध से लबालब भरी बाल्टियां देखीं ,
फिट भी, जब उनमें लोटा डाला गया, उस में कोई दूध नहीं था /
सब ओर हरी घास थी , दूर दूर तक हरी घास,
पर उन में उत्कृष्टता की कमी थी/
वृक्ष केवल आकार में ही वृक्ष लग रहे थे,
और घास केवल रंग से ही घास लग रही थी /
सपने में, मैंने कुछ लोगों से बातचीत की,
वे केवल दिखने में आदमी लग रहे थे,
वे परछाईयां थे/
मैं सहमा हुआ हूँ, नारद /
मैंने फैंटम को देखा मनुष्य का मुखौटा धारण किये हुए /
नारद :
पृथ्वीवासी नहीं जानते
प्रभु की क्रोध से भस्म करने वाली आग के बारे में
और ब्रह्मांड से जुड़ी जानकारी /
निश्चित रूप से आसमान में खतरे के बादल तैर रहे हैं
मैंने प्रभु की आँखों में खून उतरते देखा है
और उसकी भौहों पर चिंता के चिन्ह
(प्रस्थान )
समूहगान :
जब सेटन ने अनुभव किया कि वह वृद्ध हो रहा है
और संगठनात्मक परिवेश के कार्यों की
क्षति हो रही है,
तब लस्टस ही था
अन्धकार का उज्जवल राजकुमार
और सेटन का एक युवा चचेरा भाई,
इस अन्धकार की आकाशगंगा में
एकमात्र वही उजले सितारे सा चमकता/
उसे आमंत्रित किया गया सिंहासन पर आसीन होने के लिए /
लोगों में और सत्ता के गलियारों में
यह बातें प्रचलित हो रही थी
कि सेटन के कार्य काल में
कुछ खामियाँ थी
जिनसे अन्धकार के साम्राज्य पर दुष्प्रभाव पड़ रहा था /
बुराई करने वाले लोग भ्रान्ति में थे
और अक्सर प्रभु से प्रार्थना करते दिखाई देते थे
पूर्णतः असमंजस के समय में/
सेटन, एक महानायक
जिसने सफलतापूर्वक नेतृत्व किया था
बुराई की सेनाओं का , प्रभु के विरुद्ध
उसे श्रेय मिला
एक अन्धकार के वंश को स्थापित करने का
और लोगो को प्रतिकार के डर से दूर करने का
नर्क में और शोधन गृह में /
फलतः, अत्याधिक विस्तार होने लगा
अंधकार के राज्य का /
यह महसूस किया जा रहा था कि
प्रभु का प्रकाश टिमटिमाने लगा था /
और बस एक और ज़ोरदार फूँक
पवित्र आग को बुझाने के लिए काफ़ी थी /
और समूची ज़िन्दगियां एक गहरे गर्त में गिर जाएंगी
जहाँ का पूर्ण नियंत्रण दानवों के हाथ में होगा
ऊपर, नीचे सब ओर/
सेटन अनुभव कर रहा था कि
उसके हाथ से सब फ़िसलता जा रहा है
और उसने लस्ट्स को आमंत्रित किया
जिसने हमेशा उस का साथ निभाया था
और एक कुशल वक्ता और राजनैतिक दावपेंचों
की ढाल से सुसज्जित
अत्याधिक साहसी दानव था /
आमंत्रित किया उसे राज्य की नई चुनौतियों का सामना करने के लिए
जो कि अतुलनीय रूप से बढ़ गयी थी /
दैवीय स्वर :
गिलास आधा भरा हुआ था
सब ओर प्रभु का आशीर्वाद और वरदान था
तब साँप ने अपनी दृष्टि पुनः केंद्रित की
आधे खाली गिलास पर /
और लोगों ने शोध शुरू किया
कि लापता वरदान कहाँ था
उन्होंने भगवान के स्वर्ग को तलाशा
और इसे गायब पाया /
अचानक उन्हें एक कारखाना मिला
जहाँ बहुतायत से परम आनंद बनाये जाते थे
उस में प्रवेश करने से पहले, उन्हें बुद्धि को
लॉकर -रूम में रखना पड़ता था
यह आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस के बल पर चलता था
ऑक्सीजन और सूर्य के प्रकाश का भी विकल्प दे सकता था
इसने अपना खुद का ख़ुदा बना लिया था
यह लस्टस था जो सिंहासन पर आसीन हुआ/
सर्ग -3 लस्ट्स का अभिवादन
अभिषेक समारोह
सेटन, लस्टस , अमाजीनिआ एवं अन्य दानवों का प्रवेश
सेटन
साथियों
लस्टस के अभिषेक समारोह में
आप सब का स्वागत है
मैं महान लस्टस को
अंधकार का राजकुमार
पदांकित करता हूँ/
अब हम यहाँ जश्न मनाएंगे
सत्ता के परिवर्तन का
सर्वाधिक शक्तिशाली से
सर्वाधिक शक्तिशाली को /
वह सब से ऊंचाई पर है
उन चंद लोगों से अलग,
जो कि ब्रह्मांडीय विस्तार में विचर सकता है
और असीमित आकाश को अस्त व्यस्त कर सकता है/
लस्टस अपनी शक्तियों से ब्रह्माण्डीय विस्तार,
धरती और अनंत आकाश तक पहुँच रखता है/
अपरिमित हवाओं को सी सकता है
और एक ही झटके में , अनंत समुंद्रों को सोख सकता है/
ईश्वर नहीं, यह लस्टस ही है
जो कि गगनचुम्बी बुलंदी के साथ
मानवता का प्रतिनिधित्व कर रहा है
अपने सम्पूर्ण बहुरंगी गुणों के सामुच्य के साथ/
(अभिषेक समारोह)
सेटन :
स्वागत है आपका डॉ. वैनआल , डॉ. फायरआल
और उस अंतर्भासी धर्मांतरित डॉ. फ़ॉस्टस को यहाँ लाओ/
मैं कुछ विशिष्ट अतिथियों की
विशेष उपस्थिति के लिए कृतज्ञ हूँ/
हिटलर और मुसोलिनी को बुलाओ
और उन सब ईदी अमीनों को भी
जिन्होंने मनुष्यों में मतभेद पैदा कर दिए
ईश्वर की सत्ता और उसकी दयालुता पर
प्रश्न -चिन्ह लगा दिए/
और हमें एक ऐसा गुनाह दिया जिस से
हम ईश्वर की न्याय प्रणाली को
अप्रत्याशित रूप से रोक पाए/
हम *रेटालिया के किंग कॉसमॉस का भी स्वागत करते हैं
जिस ने कि अपने स्वामी को ही देश निकाला दे दिया
जिससे उसकी प्रजा ने विद्रोह कर दिया
और इस तरह अपनी तबाही मोल ली/
आओ मैकबेथ , आपकी उपस्थिति का स्वागत है
ताकि लस्ट्स को स्नान करवाया जा सके/
*(नोट: डॉ. आनंद के महाकाव्य 'मास्टर ' के प्रकरण में से उद्धृत: राजा कॉसमॉस एक अत्याचारी है जो पैग़म्बर को देश निकला दे देता है और एक आन्दोलन की यातना झेलता है/)
जुनून और आकांक्षा के तामसिक रक्त से
और लेपित हो
निर्दयतापूर्ण बेपरवाही की मोटी परत से /
ताकि वह कभी भी न बेध पाए
कभी भी न पार कर पाये
घृणा की उस घातक दीवार को,
जोकि दानवों की अमूल्य निधि है
और प्यार, मानवता की नाउम्मीद /
फ़ॉस्टस!
मेरे दिल में हमेशा तुम्हारा बसेरा रहेगा
नर्क में तुम्हारी यातनाओं का कोई अंत नहीं ,
शैतान के प्रति तुम्हारे प्रेम के लिए हम तुम्हारा सम्मान करते हैं
और तुम्हारी स्वामिभक्ति की प्रशंसा करते हैं /
विचिस , आओ और पवित्र मंत्रों का उच्चारण करो
दानवों की पवित्र पुस्तक 'डेलिस्या 'से '
विचिस मंत्रोचारण करती हैं :
श्रम और मुसीबत को दोगुना और दोगुना करते जाओ
आग जलने दो और कड़ाही में बुलबुले उठने दो /
जय हो महान राजा की!
जय हो लूसिफ़ेर की!
जय हो लस्टस की, सदैव के लिए राजकुमार !
लस्टस के राज्याभिषेक के बाद उसे सिंहासन के पास लाया जाता है /
सेटन सब औपचारिकताएं पूरी करता है/
तदुपरांत, अंधकार के नए राजकुमार का झुक कर अभिवादन करता है /
सेटन :
इस क्षत विक्षत गद्दी के आगे
मैं समर्पित करता हूँ अपना सर्वस्व
जुनून, आकांक्षा और शक्ति
युद्ध करने के लिए और कभी भी पराजय न स्वीकार करने के लिए
मुझे खुशी है की जिस क्षण से मेरी उत्पति हुए
तब से अब जब कि मैं सब गतिविधियां समाप्त करने वाला हूँ
मैंने कभी एक पल भी देवताओं को चैन से नहीं जीने दिया/
लस्टस , यह मेरी लिए बहुत तसल्लीबक्श है
कि मैं तुम्हे एक ऐसा राज्य सौँप कर जा रहा हूँ
जिसकी प्रभुत्व छोटे से छोटे देश से लेकर, बड़े से बड़े देश तक है/
तुम्हारा जहाँ मन करे तुम जाओ/
हे, अंधकार के राज्य के राजकुमार!
तुम्हे शाही स्वागत मिलेगा।
और तुम्हे साथ देने के लिए
और नीति निर्धारण के मामलों में सलाह देने के लिए
तुम्हारा साथ देंगे डॉ. डैडमेन
और मेकबेथ और फ़ास्टस के सारे झुंड,
जिनके आक्रोशित दिमाग ने कभी भी
संयम और सब्र का ख़्याल निकट नहीं आने दिया
और उनका जिक्र ऐसे पिशाचों के रूप में किया जाता है
जिन्होंने मानवीय सहनशीलता को
घिसट घिसट कर चलने की हद तक ला दिया/
अमाजीनिआ,
आगे आओ और लस्टस का साथ दो
वह सदैव तुम्हारे साथ रहेगी
युवा राजकुमार,
तुम्हारी सगी बहन
जिसमें जुनून और विश्वास
प्रचुर मात्रा में है /
लस्टस :
सुयोग्य सेटन, आप मेरी लिए बेशक़ीमती बुजुर्ग़ हैं
मैं आपका ऋणी हूँ आपकी पैनी दृष्टि के लिए
आपने मेरा चुनाव किया
मुझ में आपने यह योग्यता देखी
वह विशिष्ट गंध जो
मानवता की तरकारी को ख़टास दे देती है /
मुझे याद है कैसे हमारे महान राजा को
ईडन के लिए युद्ध लड़ना पड़ा था
और उसे कितना बेइज़्ज़त करके वहां से धकेला गया था
मात्र इसलिए कि उसने ईव को एक सेब पेश किया था
हालाँकि उसकी ईव को प्रभावित करने की या खुश करने की कोई मंशा नहीं थी /
यह कोई कामुक मामला नहीं था
फिर भी देवताओं ने इसे अपराध मानते हुए ,
उसके विरुद्ध ईश्वर से शिकायत की/
जिन्होंने बिना उस से कोई स्पष्टीकरण माँगे
बस फरमान ज़ारी कर दिया
आग के दरिया में धकेल दिया, प्रधान देवदूत को /
उन दिनों मैं अल्पायु था
परन्तु मैंने अपने महान बुजुर्ग की यातना देखी,
निर्वासन और निराशा के उन वर्षों में
कैसे उस महान बैचैन आत्मा ने
सर्वाधिक शोभनीय काम किया
और देवताओं के विरुद्ध एक लाख वर्ष के लिए
युद्ध का एलान कर दिया/
अगर ईश्वर हमें नष्ट करने की कोशिश करता ,
बदले में, हम उसके प्राणियों की ओर
हमारे विष को निर्देशित कर देते/
और उनमें निराशा का संचार कर देते/
जिसके परिणामस्वरूप, वे तर्क के लाभ से वंचित हो जाते
जिस तर्क का प्रचार वे साल के चारों मौसमों में करते रहे थे /
विनाश के मित्रो, साथियो और प्रेमियो
जब उचित को अनुचित और अनुचित को उचित
ठहराया जाने लगे
तब निराश होने लायक़ कुछ भी नहीं रहता/
किसी के लिए कोई आशा नहीं बचती
सिवाय इसके कि आज
हम और दृढ़तापूर्वक कदम रखेंगे
पतन के रास्ते पर/
अगर तुम अधिक से अधिक पाने में यकीन नहीं रखते
तब तुम्हारा मेरे साथ सम्बन्ध न के बराबर है
क्योंकि मेरे मंत्रिमंडल में वही सदस्य रह पाएंगे
जिनके मन घातक क्षय में धँस चुके हों
हमें तो यह सुनिश्चित करना है कि
लोगों में संतुलन की भावना ही समाप्त हो जाये
जिसकी वजह से जानवर तो शांत प्रकृति से रहें
और दुनिया के लोग, अशांत स्वभाव युक्त
हवाओं पर मंत्र फूंको कि
वे मुफ़्त में गुनगुनाना बंद के दें/
नदियों को मना करो निष्फल प्रवाह के लिए
पक्षियों को पशुविहार में डाल दो
और सुयोग्य मनुष्यों का संगरोध कर दो /
प्यार नाम के वायरस को हमारे पवित्र मंदिर में तबाही का कारण न बनने दो/
शास्त्रवेता!
ईश ने मासूमयित को बढ़ावा दिया
उस ने कहा , अज्ञानता परमानंद है/
उसके पुत्र को सूली पर लटका दिया गया/
उन्ही लोगों के द्वारा जिनके लिया उसने अपना खून बहाया था/
वह पाप स्वीकरण में
और माफ़ी देने में यकीन रखता था
यह ईसाई धर्म के सद्गुण हैं
वृह्द स्तर पर प्रसारित
और सदाचारी लोगों द्वारा इनका पालन किया गया/
कौन यह यकीन करेगा कि
यह सुझाव सेटन ने दिया था
एडम को
न ही ईव समझ पायी कि
इस स्वप्न का वास्तविक तात्प्र्य क्या था।
ईशु भी असफल रहे
उन प्रावधानों के बारे में जानने में
जिनके द्वारा उनकी ओर की दीवार में छिद्र हो गया
और पाप को क़ानूनी स्वीकृति मिल गयी /
पाप स्वीकरोक्ति करो और दोषमुक्त हो जाओ
ताकि तुम कर सको
वही बड़ी भूल बारम्बार /
भूल करना मानवीय स्वभाव है
और भूल करने के लिए शर्मसार क्यों होना ?
और यह समाज माफी देता रहता है
और इतने विशाल ह्रदय से समायोजित कर लेता है
व्याभिचारी लोगों को भी
जोकि अंत में कलयुग पर शासन करते हैं /
क्या यह धर्म की लड़ाई बोध के विरुद्ध है
वे वस्तुएँ जो उलझाती हैं
अन्ततः उन्ही की जीत होती है/
स्वीकरोक्ति एक विलक्षणता है
और क्षमादान, एक पाप/
सेटन से प्रेरित हो कर
और उसके आदेश की अनुपालना में
आप हर उस काम को बर्बाद कर रहे हो
जोकि भगवान् करना चाहते हैं/
सेटन एक महान नायक था
जिसने हर युग के लोगों पर राज किया /
और तुम, जोकि सच्चे देशभक्त हो,
तुमने शुरू किया है
इन धर्मनिन्दकों के विरुद्ध, एक धर्मयुद्ध /
अमाजिनिआ :
लस्टस, क्या यह दयनीय नहीं है
वे लोग, जो हमारे आदेश की अनुपालना में
पाप करते हैं और स्वीकारते हैं
वे खुद पूर्णयतः नास्तिक कहलाते हैं /
और यह उत्कृष्ट कहलाये जाने वाले लोग
सफ़ेद झूठ बोलने वाले लोग षड्यंत्र रचते हुए कहते हैं कि
आर्कएंजेल (सेटन ) के यह अनुयायी
नर्क की आग में झुलसेंगे/
लस्टस :
अमाजिनिआ,
हमने मिल्टन को बंदी बना लिया है
जिसने इतना आतंक फैला रखा है
इतनी सदियों से
मानव की कल्पना शक्ति उसकी जकड़ में है /
मिल्टन कभी यातनागृह में तो गया ही नहीं /
वह अर्द्ध -सत्य ही फैलाता रहा /
उसे दफ़न कर दिया गया है, मर चुका है वह/
यहाँ हम न्यायोचित ठहराते हैं
मनुष्य के प्रभु के प्रति कार्य
यह जवाबी विस्फोट है
उस ज्ञान का जौ
मिल्टन और उसकी किस्म के लोगों ने दिया /
दैवीय वाणी :
लस्ट्स में दानवों को
निश्चितता दिखती है
कि सम्पूर्ण ईसाई जगत
भयानक ख़तरे में है/
*केओस और *पान्डेमोनियम
अराजकता के प्रेमियों को आमंत्रित करते हैं
ईश्वर और उसके देवदूतों को
किसी अज्ञात कोने में धकेलने के लिए /
जिस समय, दानवों के ओहदों में
परिवर्तन किये जा रहे हैं
थरथराहट महसूस की जा रही है
स्वर्ग के साम्राज्य में /
देवता, जो अमृत रसपान से मदहोश है .
अकर्मण्यता की दुनिया में निवृत हो गए है
इस सब से बेख़बर हो कर/
*केओस : दानवों का सम्मलेन कक्ष
*पान्डेमोनियम : दानवों का संसद भवन
सर्ग ४ भव्य कार्य योजना
ओरैकल : जुनून के पार्क में (पार्क ऑफ़ पैशन्स में)
मुझे दिखाई दे रहा है जूनून का एक विशाल जुलूस पवित्र मंदिर की ओर चलते हुए जहाँ पर शैतान एकत्रित हुए हैं लस्टस का अभिषेक करने के लिए, जश्न मनाने और भोज करने के लिए।
यह जूनून का पार्क है दानव की भूमि पर बना एक रेस्टोरेंट जिसके आकर्षण से आत्माओं पर जादुई असर होता है यहाँ तक कि उन पर जो लावारिस भूमि से हों/
आर्कएंजेल का पसंदीदा बसेरा यह पार्क एक स्थान के रूप में प्रयुक्त किय जाता है जोकि, आने वाली पीढ़ियों को तैय्यार करती हैं मुक्ति और अनुग्रह के विरुद्ध /
लस्टस झुक कर अभिवादन करता है ग्रेडा माँ का लोलुपता की देवी जोकि इस महा दानव को आशीर्वाद देती है अदम्य विश्वास के साथ एक अथक भाग्य के लिए/
सेटन :
अगर तुम चाहते हो कि तुम सेटन से भी आगे बढ़ जाओ
अरे, लस्टस !
ग्रेडा से आशीर्वाद प्राप्त करो (चंचल माँ)
बहुमुखी राक्षस देवी
जोकि बुराई की प्रदायक है
अपने बहुत से शानदार प्रतिरूपों के साथ
ग्रेडा(चंचल माँ) के मंदिर में
स्वर :
जय हो ! ग्रेडा (चंचल माँ ) बहुमुखी राक्षस देवी की जय हो ! लालसा की जय हो! छल कपट की जय हो! दोगलेपन की जय हो! आकाँक्षा की जय हो! प्रतिशोध की जय हो! ज्वाला की
ग्रेडा (चंचल माँ ) प्रकट होती है अपने सात चेहरों के साथ और लस्ट्स को सम्बोधित करती है/
ग्रेडा (चंचल माँ )तुमने मुझे ख़ुश किया है/
जब कभी भी तुम्हें आवश्यकता पड़े यह रहा तंत्र (उसकी दायीं भुजा पर एक टोने का धागा बांध देती है)और मंत्र उच्चारण करना:अपकर्ष ,अपकर्ष, अपकर्ष और मैं पहुँच जाऊंगी/
लूसिफ़र :
अरे, इस शापित धरती के निवासी अरे! लौकिक प्राणियों अरे! ऊँचे पहाड़ों विशाल महासागर
सुनो!
जैसे जैसे आयु बढ़ती है हर कोई क़ब्र में लुढ़क जाता है सेटन भी गुजरते वक़्त के साथ उद्वेग रहित हो गया है और उसकी बुद्धि लय और छंद को भ्रमित करती है/
उसका शक्तिवान चचेरा भाई लस्टस सत्ता में आ गया है/शक्तिवान होने के साथ ही साथ, उसे ग्रेडा (चंचल माँ) का आशीर्वाद प्राप्त है कि वह क्रांति ला सके और बुराई को पूरी तरह निगमित कर सके/
पुराना समय भिन्न था
सेटन के आदमी व्यक्तियों को लालायित करते थे और उन्हें आसक्ति के लिए बहलाते फुसलाते थे
परन्तु गुप्त रूप से /
महान सेटन बाग़ में प्रविष्ट हो गया छिपे तौर पर सरीसृप मार्ग अपना कर
ताकि सेंध लगा सके ईव के सपने में निषिद्ध फल की इच्छा के साथ
यह सब एक गुप्त मामला था और सेटन. यद्यपि एक शक्तिशाली देवदूत था उस ने कभी भी बुराई में गर्व करने का भाव नहीं दिखाया, जो भाव लस्ट्स में बसता है जोकि जब चलता है तो, आग की तरह जलता है अंधेरी इच्छाओं के जंगल में /
आज के बाद, अरे! अन्धकार के राजकुमार के प्रेमियों बिलकुल वैसे ही, जैसे पाश्चात्य देशो के लोगों ने साम्राज्य जमा लिया था संसार के विभिन्न देशों पर लोगों को घूँस दी थी उन्हें अपनी संस्कृति सिखाई और शिक्षित किया और अंत में उन पर शासन किया और छीन ली उनसे उनकी दौलत, उनकी पहचान ,इसी तरह, हम भी एक नयी निगम संस्कृति निर्मित कर रहे हैं ताकि हम मानवता को देवत्व से दूर कर सकें /
(घोषणा)
आओ! इस अन्धकार के साम्राज्य के महान देवदूतोकेओस के और आगे बढ़ो/ जहाँ पर कि नया राजकुमार जिसने कि अभी अभी शपथ ग्रहण की है, जनसाधारण को सम्बोधित करेगा /
लस्टस :
फ़ॉस्टस :
संकल्प
लस्टस :
किल्लर इंस्टिक्ट (एक नया चैनल)
लस्टस :
किल्लर इंस्टिक्ट:
लस्टस :
आवाज़ें:
दैवीय वाणी:
सर्ग 5
साक्षात्कारकर्त्ता :
साक्षात्कारकर्त्ता :
साक्षात्कारदाता :
लस्टस :
भय :
टेंसोनिआ :
लस्ट्स :
सैमुएल :
यह एक नुक्कड़ नाटक है, राजकुमार/
(कुछ लोग जिनकी पीठ नहीं है,
गली में इधर उधर चल रहे हैं
और वे रो रहे हैं /
जैसे कि कोई बहुत भारी बोझ उठाने के कारण टूटी हो/)
लस्टस :
यह मैं क्या देख रहा हूँ? इनकी पीठ कहाँ हैं?
सैमुएल :
राजा साहिब, उनकी पीठ टूट चुकी है
करों के भार और ज़बर्दस्ती वसूली के कारण
लस्टस:
यह बढ़िया है/ इन में से किसी को भी
सीधी गर्दन के साथ मत छोड़ो /
इनके चेहरे क्यों नहीं दिखाई दे रहे ?
क्या इस पर कोई पाबंदी है?
सैमुएल :
प्रभु ! बीते समय में इनके चेहरे थे
परन्तु अब ,
आपके शासनाधीन होने के बाद
लोग व्यक्तिगत तीखे नैन नक्श पसंद नहीं करते/
वे अपने चेहरे को कपड़े से ढके रखना पसंद करते हैं/
उनका चेहरे से किसी आदमी या औरत की
हलकी सी साम्यता झलकती है/
और इसके अलावा कुछ नहीं /
यह चेहरे जो आपको दिखाई दे रहे हैं, राजकुमार
यह मुखौटे हैं/
वे बेवजह मुस्कुराते रहते है/
और इन मुखौटों के पीछे, निष्ठाहीनता छुपी है/
लस्टस :
यह दो व्यक्ति कौन हैं
इन में से एक ने आदमी की पोशाक पहनी है
और दूसरा औरत जैसा लग रहा है/
सैमुएल :
यह दोनों इस नाटक का हिस्सा हैं /
राजा साहिब, यह समलैंगिक हैं/
लेसबिआ , लेसबिआ, वह पुकारता है
एक युवती सामने आती है/
लेसबिआ, झुक कर राजकुमार का अभिवादन करो/
(वह झुक कर अभिवादन करती है/)
लस्टस:
इस में क्या विशेषता है सिवाय इसके कि सुंदर दिखती है/
सैमुएल :
लेस्बिआ और उसकी मित्र अमारा आज शादी कर रहे हैं/
लस्टस:
दो लड़कियां आपस में शादी रच रही हैं/
क्या आदमियों का अकाल पड़ गया है?
लेस्बिआ:
क्योंकि हम एक दूसरे को प्रेम करते हैं और गृहस्थी बनाना चाहते हैं/
लस्टस:
जो स्वतंत्रता हमने तुम्हें दी है, उसका आनंद उठाओ /
यह एक नया राज्य है,
जहाँ नए विचारों का निषेध नहीं किया जाता /
जो तुम्हारे मन में आए , तुम सोचो/
और हमारे पास अमीर निजी निवेशक भी हैं/
यह कौन हैं जो दिखने में विकृत पुरुष जैसे लगते हैं?
सैमुएल:
राजा साहब , आप उन्हें 'महंत' कहिये (किन्नर )
यह वह लोग हैं जो
सब से पहले नवजात शिशु की ख़ुशख़बर देते हैं/
लस्टस:
वे किसी श्राप के शिकार हैं ,
या कुछ पापों के परिणाम भुगत रहे हैं
हम यहाँ उन सब को ताज पहनाये रखते हैं
क्योंकि उन्हे घातक दंड दिए गए हैं/
कभी कभी देवताओं से भी ग़लती हो जाती है
और यह उनकी गल्तियो का परिणाम है/
विनिर्माण दोष के साथ उत्पन्न हुए ,
उन्हें संसार द्वारा अस्वीकरण का दुःख भोगना पड़ता है/
लस्टस :
सैमुएल , इन महान प्राणियों को देखना अच्छा लगा/
अब मुझे कुछ रैप सुनाओ /
रैप संगीत बजाया जाता है/
(लस्टस को अपने मोबाइल पर कॉल आती है/ वह नाटक को अधूरा ही छोड़ कर चल देता है/)
दैवीय वाणी :
लस्टस जैसे लोग
गलतफहमियों पर ही केंद्रित रहतें है/
और उसी मनोस्थिति से चलते हुए
साधारण सी बात को भी उलझा देते हैं/
देवताओं का मानवता से कोई मतभेद नहीं
यद्यपि 'मात लोक' में कुछ भी सही नहीं है/
दानव अपनी साजिशों के तहत
बढ़ती हुई हलचल देख रहे हैं /
विवेक और अविवेक की सीमा रेखाओं पर,
मानवता वहशीपन की बाँहों में है/
लस्टस और उसके चालित अपवित्र प्रशासन के कारण,
नैतिक शुष्कता के भंवर में दम तोड़ रही है/
दैवीय इच्छा से परे कुछ भी नहीं है /
जो मारे गए और जिन्होंने ने मारा
लस्टस की रचना किसने की ?
और अफवाहों की चक्की कौन चलाता है ?
सर्ग 6
राक्षसीय राजनीति की तैयारियां
ब्रासिल :
अमाजीनिआ की ताज़पोशी हुुई है सौंदर्य साम्राज्ञी के रूप में /
उसने संसार के विभिन्न भागों से आयी 70 सुंदर प्रतिद्वंदी युवतियों के साथ मुक़ाबला किया था./
कैओस में कार्यक्रम चल रहा है
जहाँ लस्टस भी उपस्थित है/
समूहगान :
अमाजीनिआ जिसका वास्तविक नाम तमर था
वे लिलिथ की बेटी थी
जोकि एक मादा-राक्षस थी
अत्यंत सुन्दर और विचारहीन आकर्षण युक्त
और उसे क्रोध आया जब सेटन ने
ईव का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की /
उसने देखा था उसे उस महिला पर अति अनुरक्त होते हुए,
परन्तु जब सेटन ने उसे इसका प्रयोजन बताया
उसे यकीन हो गया और उसने पहली बातें अनदेखी कर दीं /
और सेटन को पहले से भी अधिक प्यार करने लगी/
अमाजीनिआ उसकी बेटी है/
वह सुंदर देश यू. एस. का भ्रमण कर आयी है/
वह कनाडा भी घूम कर आयी है/
उसने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से अध्ययन किया था/
उसके पास भौतिक केमिस्ट्री में डॉक्ट्रेट की डिग्री है/
ज्ञान के बिंना मुक्ति नहीं है /
यदि इसे घातक खुराक में ले लिया जाये
यह मानसिक भय का कारक बन जाता है
और मानवीय अनुभूति को नष्ट कर देता है/
लस्टस को प्रबुद्ध विकृति की लपटों से पकाया गया था/
वह शारीरिक रूप से भी उतना ही सशक्त है,
जितना कि वह बौद्धिक रूप से जीवंत है/
लस्टस की आयु अधिक नहीं है, पर अधिक समृद्ध है
बुराइयों के साम्राज्य के मार्गदर्शन हेतु,
अपनी खतरनाक योजना के विस्तार के लिए
मनुष्यों से जानवरों, पक्षियों और पौधों तक /
ग्रेडा लस्टस पर विशेष मेहरबान है
और उसने उसे अतिरिक्त शक्तियां प्रदान की हैं/
मानव में स्वाद सम्बंधित विकार पैदा करने की
और उन सभी को हानि पहुँचाने की
जो शांति, करुणा और क्षमा में विश्वास रखते हैं
बिल्कुल बेकार की बातें /
लस्टस:
अमाज़ीनिआ, पाताल लोक को तुम पर गर्व है
देवता रोते रहे, ईव लालायित हो गयी
परन्तु वे हमारी तैयारियों का आंकलन नहीं कर पाए/
तुमने तो सभी अवरोधों को दूर फ़ेंक दिया/
और अब एक नये संसार का प्रतिनिधित्व कर रही हो
जोकि सुंदरता में यकीन रखता है
और अपनी बुद्धि के सहारे चलता है,
ईमानदारी और पवित्रता का लिहाज न करते हुए/
अमाज़ीनिआ:
मैं आपकी आभारी हूँ
कि मैं इस अन्धकार के साम्राज्य का प्रतिनिधित्व कर रही हूँ/
हम चाहते हैं कि और महिलाऐं सामने आएं/
यह कोई पुराना संसार नहीं है, जहां औरतें
केवल गृहस्थी सँभालने के लिए ही होती थी/
अब गावों का परित्याग कर
औरतों को शहर जाना ही चाहिए/
अपनी आजीविका को आगे बढ़ाते हुए, अपनी मर्ज़ी करनी चाहिए/
अब से, कुछ सदियों तक,
पति घर में बच्चे संभालेंगे और रसोई में आराम से काम करेंगे/
यह एक नई दुनिया है/
यहाँ बुद्धिमानी का कोई मूल्य नहीं
समानता ही आपकी सम्पति है/
आप अपना मूल्य स्वंय निर्धारित कीजिये/
आप मुझ से किस काम की उम्मीद रखते हैं,लस्टस ?
लस्टस :
आप वापिस जायें और साथ में अपने मित्रों को भी लेती जाएँ
अन -सिविल इंजीनियरिंग में
एक छः महीने का डिप्लोमा करने के लिए/
अमाज़ीनिआ:
यह अन -सिविल इंजीनियरिंग क्या है?
लस्टस :
यह दानवों की एक सूक्ष्म स्तर की राजनीति है/
पुरातन समय में, हमारे लोग धरती पर जाते थे ,
डकैतों का वेश धारण कर के ,
छल पूर्वक कार्य करते थे
परन्तु सभ्य होने का दिखावा करते थे /
पुराने षड्यंत्रों की ओर देखो /
राजा के दरबार के षड़यंत्रकारी
दिखने में बहुत सभ्य दरबारी प्रतीत होते थे
जो गुप्त रूप से कार्य करने के लिए
बहुत प्रयत्न करते थे/
और राजा अथवा उनके राजकुमारों की
सुरक्षा की जड़ें खोख़ली करने में लगे रहते थे /
अब, हालात बदल गए हैं /
बुराई, जिस का ज़िक्र करना भी वर्जित था
अब सिखाई जाती है और उसका अभ्यास करवाया जाता हे
इन विश्वविद्यालयों में भारी मात्रा में /
अमाज़ीनिआ:
मैं हैरान हूँ/ ऐसा कैसे ?
लस्टस :
वह समय पवन वेग से बीत गया
जब लोगों के दिमाग में कुछ शब्द तैरते रहते थे /
भलाई, ईमानदारी, यथार्तता और चरित्र ,
प्रामाणिकता, पारदर्शिता , धर्मशीलता
देवभक्ति और पवित्रता /
मैं खुश हूँ कि हमने रिकॉर्ड कायम किया है
और आभारी हूँ यह स्वीकारते हुए
हमारी पूर्व-व्यव्सथा ने
इस महान कार्य को सम्पन्न किया है/
अमाज़ीनिआ, वह विष जिसने सुकरात की जान ली थी
उसका प्राधान्य अभी भी है
तुम्हें हर घर में 'क्रॉस' दिखाई देगा/
जो एक प्रेत अस्तित्व में सिमट गया है/
ज्ञान की अत्याधिक ख़ुराक से बिगड़ गया है
ईश्वर का क्षेत्र /
लोग अब उस से आगे सोचने लगे हैं
उन वस्तुओं के बारे में
जिनका अभी तक कोई अस्तित्व ही नहीं ,
वे वस्तुए, जिन्हे वे खुद रच रहे हैं /
भविष्य क्या है ?
यह भगवान नहीं जो हर प्राणी का भविष्य लिखता है
यह लिखा जाता है मनुष्य के अपने कर्म, अपने वचनों ,
अपने विचारो के द्वारा /
और प्रिय अमाज़ीनिआ,
इन विचारों को हम नियंत्रित करते है,
यद्यपि बीता हुआ कल, हो सकता है
ईश्वर के नाम लिखा गया हो, पर भविष्य तो लस्टस का है/
अमाजीनिआ :
पर कैसे, लस्ट्स ,
सभी लोग अपनी धार्मिक मान्यताओं के साथ जीते हैं/
उनके अपने धार्मिक ग्रन्थ होते हैं/
गीता है, बाइबल है/
क़ुरान है, तल्मूड है/
आप ऐसा सोच भी कैसे सकते हैं
कि सुदृढ़ धार्मिक परिशोधन वाले यह लोग
अपनी राह से हटाए जा सकते हैं
और आपका अनुकरण करने के लिए बाध्य किये जा सकते हैं?
लस्टस :
बेचारी लड़की / तुम मुझे बताओ
क्या धार्मिक प्रतिष्ठान में सब कुछ सही चल रहा है/
क्या वहां वासना नहीं/ घोटाले नहीं ?
कोई अपराध नहीं? कोई पाप नहीं?
वास्तविक प्रश्न तो यह है :
कि कैसे इन स्थलों की पवित्रता को और अधिक नष्ट किया जाए
ताकि वे लोग जो इन धार्मिक रीति -रिवाज़ों में यकीन रखते हैं
उन्हें आंतरिक रूप से कोई समर्थन न मिले/
हमें, यह सुनिश्चित करना होगा
कि उनके दिल ओ -दिमाग इतना अधिक औपचारिकताओं से भर दिए जाएँ
कि वे हमारे संधि योजन को समझ ही न पाएं/
मैं तुमसे सहमत हूँ, अमाजीनिआ , ईश्वर ने ईसा की उत्पति की
और उसका सन्देश प्रकाश की एक प्रखर तरंग की तरह है/
पर एक अँधेरे ज्ञानक्षेत्र के आगे
एक मोमबत्ती कहाँ टिक पाएगी/
एक टिमटिमाती रौशनी
कितनी देर तक तेज़ हवाओं का दबाव झेल पाएगी?
पंजाब में भी कुछ गुरु थे
जिन्होंने सारे माहौल को आलोकित कर दिया /
इसी भाँति , प्रभु कृष्ण, प्रभु राम
महान ईश्वरीय सृष्टि
जिन्होंने हमारे कई महान लोगों की जान ली.
परन्तु वास्तविकता यह है, प्रिय
कि वे सब आये और चले गए ,
परन्तु अँधेरा हर चमकते सितारे पर हावी रहता है/
हम कुछ और नाम भी जानते है ,
ओशो, रामतीर्थ, विवेकानंद, दयानन्द
और ईसाई समुदाय के कई महान संत
जैसे कि सेंट ज़ेवियर
जिन्होंने हमारी शक्ति से उलझने की कोशिश की/
अंधकार सब प्रकार के प्रकाश की माँ है /
इसी प्रकाश में वे हमारे चेहरे देखते हैं
और ख़ुद के भी/
और जब प्रकाश गायब हो जाता है
वे भी अन्धकार की आग़ोश में चले जाते हैं/
ज़िंदगी भी तो एक टिमटिमाती लौ है/
रात के गर्भ से उत्पन्न
रात में ही निवृत हो जाती है/
जैसे जैसे समय इस आग को बुझाता है/
इसलिए , प्रिय अमाजिनिआ/
हम सभी इस अधर्मी विस्तार के सहभागी हैं/
मृत्य एक भय की तलवार है
जिसे ईश्वर ने मनुष्य के सिर पर लटकाया हुआ है
ताकि वे अपने अनिश्चित भाग्य से भयभीत रहें/
और ऐसी भीड़ हमारे स्टालों पर एकत्रित हो रही है
कि सारी गणनाएं गलत हो गयी/
एक के बाद एक, एक पंक्ति के बाद दूसरी
मृतक नर्क की ओर रवाना हो रहे है/
नर्क की ओर दस हज़ार
और शाश्वतता की ओर एक/
यह हमारे लिए गर्व का विषय है
कि हमें आशातीत लोकप्रियता मिली है
हालाँकि यह संतुष्टि का विषय है
कि वे सारी प्रणालियाँ
जिन्होंने मनुष्यो को दैवीय गुण सिखाये
इस समय अस्त -व्यस्त हो चुकी हैं/
अगर आप मंदिरों की बात करें,
वे अब केवल संगमरमर की प्रतिमाएं हैं/
और पुजारी केवल भौतिक स्तर पर व्यस्त हैं/
अधिकतर संतों ने एक सीधा लिंक बना लिया है
नर्क के सर्वर्स के साथ
और हमारे आइवरी टावर से
उन्हें रिमोट कण्ट्रोल किया जाता है /
संसार के कैदखानों में संतो की संख्या देखो /
सुधारगृह तो नाममात्र के हैं
यह सभी हमारे सर्रोगेट नर्क हैं/
जहाँ पर हमारे एजेंट्स हमारे उत्पाद बेचते हैं
और परिपूर्ण व प्रचुर मात्रा में राक्षसी वृति पैदा करते हैं/
अमाजिनिआ :
आप किस तरह के संसार की परिकल्पना कर रहे है, लस्टस ?
किस चीज़ की कमी है?
जहाँ तक मुझे समझ आता है ,
संसार में सभी कुछ गलत ही तो है/
अब आप और किस तबाही की योजना बना रहे हैं/
लस्ट्स :
ईव के साथ मुख्य मुद्दा था, वर्जित फल।
इसे हमने पीछे छोड़ दिया है /
सभ्यता की रगों में ,
ज्ञान विष की तरह प्रवाहित हो रहा है/
सेटन ने इस मासूम वरदान को भृष्ट कर दिया,
और मानवता में दखल करते हुए
इसे विकृत भाईचारे में बदल डाला/
निःसंदेह ,वे ईश्वर की संतति है
उसके बेहद प्रिय
पर अब मुझे उसका चेहरा सदैव मायूस दिखता है/
विचारों में खोया,
उसके माथे पर चिंता की लकीरें दिखती है/
वह किसी सर्वनाश की प्रतीक्षा करता है/
सब कुछ अब उसके नियंत्रण से परे है/
मनुष्य जिन्होंने ने ज्ञान प्राप्त किया था
उन्होंने भी अपनी राह स्व-नियंत्रित करने के
ढंग खोज लिए हैं/
जिन लोगों को वह अपना संमझता था, नकली हैं /
केवल उन पर उसके ब्रांड का लेबल लगा हुआ है/
आंतरिक रूप से, वे दैवीय गुण खो चुके हैं/
हर धर्म अब संगमरमर की मूर्तियों का व्यापार करता है/
जबकि देवताओं की मूर्तियां अपने मोबाइल फोन पर व्यस्त हैं/
अब और क्या जानना बाकी है?
फेफड़ों को कितनी वायु की आवश्यकता होती है /
तुम कितना खा सकते हो?
तुम कितना ऊँचा सुन सकते हो?
हर वस्तु की एक सीमा होती है/
यहाँ तक की बुद्धिमता की भी सीमा होती है/
परन्तु , मूर्खता ,,,,,,
अमाजिनिआ
मूर्खता सीमाहीन है/
और सेटन ने अत्याधिक ज्ञान फ़ैला दिया
रोशनी के तीव्र प्रकाश सरीख़ा, जो आँखों को अँधा कर देता है/
अगर आपको किसी व्यक्ति की पाचन शक्ति बिगाड़नी है
मिठास भरे व्यंजन बनाओं
और उसे भरपेट खिलाओ /
ज्ञान जो जानकारी का जन्मदाता है
इतना लालायित करने वाला व्यंजन था
इस से मनुष्य के मुँह में पानी आ जाता था/
और देखो उसे
वह बिना भूख़ के खा रहा है,
और बिना कोई हास्य चैनल देखे, उसे हँसी ही नहीं आती /
ज्ञान के फल का अत्याहार करने से
मनुष्य को इसका नशा महसूस होता है,
इसका जादुई असर होता है/
और वह सीधे नर्क की राह पकड़ लेता है/
दैवीय वाणी :
सभी मृतकों को निर्देशित किया जाता है स्टालों की ओर
जोकि नर्क के द्वार पर सहायता की पेशकश कर रहे हैं /
एक सप्ताह या लगभग इतने ही समय में ,
मात्र एक या दो आत्माएं ही ऐसी दिखाई देती हैं
जिन्हे स्वर्ग की राह पर भेजा जाता है/
अगर हम भीड़ के हिसाब से देखें,
ऐसा प्रतीत होता है कि दानवो ने देवदूतों से बाज़ी मार ली है/
देवता संकट ग्रस्त प्रतीत होते हैं/
क्या उन्होंने इस ओर ध्यान दिया ?
याकि, वे केवलअपने सुखद निवास में नृत्य देखने में व्यस्त हैं?
या फ़िर, वे पृथ्वी के प्राणियों को कोसने में लगे हैं,
उनके दोषों के लिए जिस वजह से असमंजस फ़ैला
संसार में/
जबकि दानव तो परवाह ही नहीं करते उनकी धृष्टताओं की/
नरकद्वार पर बढ़ती हुए भीड़ ने
लस्टस को और शक्ति दी है
जिसका घमंड तो अपरिमित हो गया है/
यह प्रसन्नचित लोग उसका नया खोजा गया खज़ाना हैं/
लस्टस :
सर्ग 7 : दस आज्ञा-पत्र
लस्टस :
लस्टस : सर्ग 8
जवाबी विस्फ़ोट
आपकी धरती को तो गंभीर खतरा है/
चित्रगुप्त:
किलर इंस्टिंक्ट :
चित्रगुप्त :
किलर इंस्टिंक्ट :
चित्रगुप्त :
दैवीय वाणी :
लस्टस : सर्ग 9
निकट भविष्य में युद्ध
एक घोषणा :
एक घंटे के बाद पेंडीमोनियम में सत्र शुरू हो जाएगा/
दानवों की संसद, पेंडीमोनियम, एक गोल हॉल जैसी लगती है, जिसमें उच्च गुणवत्ता वाली कुर्सियां,, ए. सी. , वाई फाई और एक बड़ा स्क्रीन लगे हैं/
एक आवाज़ :
तबाही के अधिपति , महान लस्टस पधारने वाले हैं/सब खड़े हो जाते हैं और लस्टस केन्द्रीय मेज़ की ओर जाता है और अपना आसान ग्रहण करता है/ उसके दोनों और उसके राज्य के सचिव बैठे हैं /
हाल में लाखों पंखधारी जीव बैठे थे ,
जोकि इतना बड़ा था जितना कि भारत और अफ़ग़ान के बीच की दूरी जितना क्षेत्र /
क्वारंटाइन : ( महाराधिराज का विशेष सचिव)
मित्रों, साथियों और महान ज्वलंत आत्माओ,आज हमें ख़बर मिली है कि
देवगण बहुत निराश हैं/
और उन्होंने इस सारे मुद्दे पर
बहुत गंभीरता से सोचा है/
और वे योजना बना रहे हैं कि
किसी महान आत्मा को धरती पर भेजें /
और आप अच्छी तरह से जानते हैं, क्यों.
इस से पता चलता है कि वे कितने मायूस हैं/
वे कितना घिरा हुआ महसूस कर रहें हैं/
सर्वप्रथम, मुझे आपको बधाई देने दो /
आपने नदियों का रुख़ बदल दिया है
मानवता दिशाहीन हो चुकी है/
कवि , गायक और दार्शनिक
महसूस करते हैं जैसे कि वे अप्रासंगिक हैं/
ऐसा युद्ध पहले न कभी लड़ा गया था, न जीता गया था,
जिसमें शरीर आत्मा को भीतर से नष्ट कर देता है/
अब मैं, आदरपूर्वक,
महान लस्टस को आमंत्रित करता हूँ , आपको संबोधित करने के लिए/
लस्टस :
शैतानो , सेनापतियो, उच्च अधिकारियो, बदला लेने वालो, रक्षको , दावेदारो, छापा मारनेवालो औरछद्मवेशियो राजनीतिज्ञो, अध्यापको, वकीलों षडयंत्रकारियो , मिलावटखोरो, कॉरपोरेट मित्रो साथियो और अन्धकार प्रेमियो
क्वारंटाइन ने सही कहा है
ईश्वर इस समय गहन चिकित्सा इकाई में है
और उसका संसार लगभग मर चुका है/
तुमने उस प्रकाश पर अन्धकार के परदे डाल दिए हैं
जो स्वर्ग से उत्पन्न होता है/
मनुष्य अब मुसीबत के समय,
ईश्वर को या उसके ऊतकों को याद नहीं करते
पर हमें पुकारते हैं उनकी समस्याएं हल करने के लिए/
मैं एक बात पर आपका ध्यान पुनः केंद्रित करना चाहता हूँ
तुम्ही सब से मूल धारक हो
इस संसार के सभी अधिकारों के
सब से पहले, एक शून्य के अलावा कुछ भी नहीं था/
अन्धकार के अलावा कुछ भी नहीं था/
और यही अँधेरा प्रकाश का उत्पति स्त्रोत है/
केवल हम में ही अन्धकार देखने की शक्ति है
जबकि देवगण और उनके मनुष्य,
प्रकाश की उपस्थिति में भी कुछ नहीं देख पाते/
ईसा ने उन्हें कहा कि मदद मांगो,
पर उसने उन्हें यह नहीं बताया कि जब वे,
ऊपर की ओर देखते हुए चलेंगे,
सम्भवतः वे बुराई से टकरा कर अपना संतुलन खो देंगे,
जो लोगों की नज़र से बच कर रहती है
परन्तु एक साँप की तरह कुन्डली मारे रहती है
और मनुष्य के दिमाग को वास्तव में अव्यवस्थित कर देती है/
वह प्रकाश -पुँज जो देवदूतों के पास है
और जिसे वे लोगो में बिखेरते हैं,
जिनके दिमाग तो टिमटिमाते ही रहते हैं
मृत्यु के क्षण तक भयग्रस्त और प्रार्थनारत रहते हैं/
वे हमारी इस शक्ति से अनभिज्ञ हैं
कि हम तो एक ही फूँक से इसे बुझा सकते हैं/
दुनिया में जितनी भी शमाएँ हैं, जितने भी लैम्प हैं
उन सब में एक अंतर्निर्मित अदृढ़ता है;
वे लड़खड़ा जाते हैं,
जब उनका सामना गहरे रहस्यों से होता है/
आप जागते हैं
और दोबारा सो जाते हैं
लहरों की और कोई मंज़िल नहीं होती
सागर के अलावा/
कौन हमेशा के लिए चमकता रह सकता है?
कौन इतना शूरवीर है?
जीवन, प्रकाश की तरह ही, वापिस धकेल दिया जाता है
कब्र के अँधेरे की ओर /
इसलिए, आप जो इस महान साम्रज्य के गौरान्वित उत्तराधिकारी हैं
जिनका सूर्य कभी अस्त नहीं होता
याद रखना, ईसा आएँगे और जाएंगे,
परन्तु तुम अपनी चमक को बनाये रखोगे/
वे सोचते हैं
कि ईसा बहुत निर्बल थे
हमारी गर्म सांसों को झेलने के लिए/
इसलिए, प्रभु योजना बना रहे हैं कि
धरती को सुरक्षित रखने के लिए
भगवान कृष्ण या उनके जैसा ही कोई भेजें/
तुम्हे, चिंतित होने की आवश्यकता नहीं ,
डरने जैसी कोई बात नहीं /
दुर्योधन ! कहाँ हो तुम ?
अपनी उपस्थिति बताओ और अपने निन्यानवे भाइयों की भी/
तुम सोचते हो कि तुम महाभारत में पराजित हुए/
भगवान कृष्ण के कारण।
बिलकुल नहीं /
तुम इसलिए हारे क्योंकि कर्ण पांडवों का जवाबी विस्फोट नहीं था/
तुम्हे अपने दिमाग से काम लेना चाहिए था
जिसे कि तुमने अपने मामा शकुनि को रहन रख दिया था/
जिसके निजी स्वार्थ थे
और उसने अपनी लड़ाई तुम्हारे कन्धों पर लाद दी , छिपे तौर पर/
कृष्ण का सामना करने के लिए/
इस बार अच्छे से तैय्यारी करना/
यहाँ, हमारे पास अधिक अनुभवी योद्धा हैं/
मुझे संदेह है कि देवता कृष्ण को दोबारा चुनेंगे/
क्योंकि कृष्ण ने बहुत हत्याएं की,
फिर भी दानव तो अभी भी फलफूल रहें हैं/
हमारे अस्तित्व को कोई ख़तरा नहीं है/
क्योंकि हम अदृश्य हैं/
हम अमूर्त हैं/
हम आभासी वास्तविकता हैं/
हम लोगों के दिलों में बसते हैं /
हम उनके विश्वास में जीते हैं/
हम अमर हैं/
निडर /
और उतने ही शाश्वत
और चिरस्थायी जितना कि भगवान/
(लस्टस मंच से नीचे आ जाता है/)
दैवीय वाणी :
भगवान उनके गर्व के अभिकथन सुन रहे हैं/और उनके स्वयं -निर्मित संसार में
उन्हें इस विश्वास की घुड़सवारी करने दे रहें है/
कौन जानता है
कि आज का सूर्य किस प्रतिशोध के साथ उदित होगा/
वही सूर्य जो कल कोमलता से अस्त हो गया था/
लस्टस : सर्ग १०
ब्रम्हांड में भूकम्प
ब्रह्मा इंद्र और विष्णु से विचार विमर्श कर रहे हैं/
ब्रह्मा :
संसार में एक विचित्र स्थिति उत्पन्न हो रही है/
हमें ऐसी प्रतिध्वनियो की अनुभूति हो रही है
जैसे कि युद्ध की पूर्व सूचना हो/
दानव दोबारा अपना सिर उठा रहे हैं,
और एक के बाद एक चुनौतियां दिए जा रहे हैं/
लस्टस सिँहासनासीन हो चुका है /
और उसने दृढ़तापूर्वक दावा किया है
कि सम्पूर्ण धरती उसके क़ानूनी अधिकार- क्षेत्र में है/
विष्णु, जाइये और तथ्यों की पुष्टि कीजिये/
और वापिस आकर स्थिति से अवगत करवाएं /
यह एक खतरनाक विस्तार है/
विष्णु :
क्या मैं इंद्र को साथ ले जा सकता हूँ ?
ब्रह्मा :
इंद्र ,आप विष्णु के साथ जाईये/
मुझे स्थिति का सही जायज़ा मिलना चाहिए/
(रास्ते में उन्हें नारद मिलते हैं/)
नारद:
तो, आप धरती की ओर बढ़ रहे हैं/
आपको पासपोर्ट लेना पड़ेगा /
विष्णु :
पासपोर्ट? हमारी जाँच कौन करेगा?
नारद :
यह देखिये/ मैं पासपोर्ट-धारी हूँ.
आपको प्रवेश द्वार पर ही रोक दिया जायेगा/
अब संसार की घेराबंदी हो चुकी है/
विष्णु :
नारद, अगर ऐसा बदलाव आ चुका है
आपने मुझे अभी तक सूचित क्यों नहीं किया?
क्या दानव इतने अभिमानी,
इतने गर्वीले और इतने मूर्ख हो सकते हैं
कि देवदूतों की शक्ति को ललकारें/
क्या वे दुर्गा को भूल चुके हैं ?
क्या वे भूल चुके हैं *शुंम्भ और *निशुम्भ को
कहाँ पहुंचा दिया गया था/
नारद :
आपको ज्ञात है बुराई में
जीवित रहने की प्रबल भावना होती है/
यह कभी मरती नहीं/
यह केवल अपने रूप बदलती रहती है/
मैंने वहां दुर्योधन को देखा है/
मैंने *शुंम्भ और *निशुम्भ को भी देखा है
पेंडीमोनियम में गरजते हुए /
देवराज इंद्र , क्या आप यकीन करेंगे
*महिषासुर लौट आया है आप से लड़ने के लिए/
* रक्तबीज भी वहीँ पर है/
* शुंम्भ, निशुम्भ, महिषासुर और रक्तबीज पौराणिक कथाओं में दानव
आपके पास कोई भी नहीं है, इन राक्षसों का सामना करने के लिए/
यह बेहतर विकल्प होगा यदि आप दुर्गा को ही भेजें
एक बार फिर से /
वे धरती की बाहरी सीमा पहुँच जाते हैं/और देखते हैं कि सीमा रेखा पर अंधकार के साम्राज्य के रक्षक योद्धा तैनात है/ उन्हें पता चलता हैं कि यहाँ तक हवाई-मार्ग अवरुद्ध हैं/
अब वे केवल दूर से ही संसार की झलक देख सकते थे. यह रात में जगमगा रहा था /
विष्णु :
(इंद्र, मुझे अपनी दूरबीन दो/)
confirm
विष्णु:
मुझे एक जुलूस दिखाई दे रहा है /
लोगों ने गणेश की मूर्ति उठायी हुई है /
वे उसे नदी तक ले कर जाते है
और जल में विसर्जित कर देते है/
और उसके तुरन्त बाद ,
कुछ लोग धड़ पर झपटते है
इसे तोड़ देते है और मोती ले कर चल् देते हैं/
बहुत से ऐसे धार्मिक जुलूस होते हैं
जिन में विभिन्न नारे लगाए जाते है/
और लोग एक दुसरे से धक्का-मुक्की करते हैं
लड़ाई करते हैं/
हत्याएं, दंगे, रक्तस्नान
धर्म के नाम पर/
इंद्र:
देखो तो, यह क्या है वहां?
विष्णु:
वहां बहुत से झंडे हैं
और एक नेता
और बहुत से लोग उसका भाषण सुनने आये हैं/
इंद्र :
नेता! क्या वहां कोई चुनाव है?
विष्णु :
यह विचित्र लग रहा है/
उनकी कल्पना शीलता पर
लस्टस कैसे अपनी शक्ति का प्रयोग कर रहा है?
जस्टिस की जगह वे *लस्टिस की बातें कर रहे हैं/
जस्टिफिकेशन की बजाय, वे लस्टिफिकेशन की बात कर रहे हैं
और वे *लस्टिट्यूशन के प्रति अपनी निष्ठा दर्शा रहे हैं/
(भौंचकित हो कर, वे ब्रह्मा के पास लौट आते हैं)
विष्णु:
स्थिति वास्तव में बुरी है, देवराज ब्रह्मा
हमारे पास 'टेली शॉटस' (वीडियो) हैं
कि दानव धरती पर किस तरह काम कर रहे हैं
जहाँ हमारे प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया था /
यह रही एक 'पेन ड्राइव '
आप इसे फुर्सत से देखिये/
पर जितने जल्दी सम्भव हो, देख लीजिये/
ऐसा प्रतीत होता है, स्थिति हाथ से निकली जा रही है/
(अगले दिन)
ब्रह्मा: (विष्णु से)
विष्णु, मैंने 'पेन ड्राइव' देख ली है/
इंद्र को भी बुलाइये ,
धरती पर जो पूरी स्थिति चल रही है
हमें उसका पूरा लेखा जोखा रखना होगा/
एक निर्णायक युद्ध का वक़्त आ गया लगता है/
(इंद्र भी उनके साथ शामिल हो जाता है/)
आओ सब प्रभु के पास चले और जा कर सारी ख़बर दें/
यह एक बहुत गंभीर मुद्दा है/
(वे प्रभु के समक्ष उपस्थित होते हैं.)
प्रभु:
क्या आप फिर से दानवों को ठिकाने लगाने में असमर्थ रहे हैं
ब्रह्मा?
मैं गुरु नानक और नौ गुरुओं को भेजा
जिन की गुरबाणी अभी तक गूँज रही है
पूरे ब्रह्माण्ड में /
अनगिनत लोग उनका पाठ करते हैं/
और धन्य महसूस करते हैं/
मैंने ओशो को भेजा, मैंने बुद्ध को भेजा /
मैंने महावीर को भेजा, मैंने विवेकानंद को भेजा/
ऐसा नहीं कि हमने प्रयास नहीं किये/
वो आग जो दानवों ने भड़कायी है
दफ़न होने से इंकार कर रही है/
मैं लस्टस की प्रेस कांफ्रेंस देख रहा था/
वह तो हर हद से गुज़र रहा है/
बुराई तो अच्छाई का ज़ोरदार खंडन है/
दोनों खतरनाक संतुलन के कग़ार पर हैं/
इसके बावजूद , यदि बुराई मैदान पर कब्ज़ा करने की कोशिश करती है
जोकि अच्छाई की धरोहर है,
असंतुलन हो कर ही रहेगा,
और सारी धरती हिल सकती है/
और नीचे भी भूकंप आ सकते
और यहाँ ब्रह्माण्ड में भी।
लस्टस को एक चुनौती भेजो कि
वह अपने तौर तरीके सुधार ले/
यदि वह ऐसा नहीं करता, तब
वह विनाश को आमंत्रित कर रहा है /
(प्रभु आराम करने चले जाते हैं)
लस्टस को प्रभु की चेतावनी मिल जाती है/
(धरती के किसी भाग में
एक गायक काले कपड़ों में प्रकट होता है/
वह विलियम वर्ड्सवर्थ से मिलता है/
विलियम वर्ड्सवर्थ शोकाकुल है)
गायक :
आप रो क्यों रहे हैं विलियम वर्ड्सवर्थ?
विलियम वर्ड्सवर्थ :
लूसी ग्रे की मृत्यु हो चुकी है/
गायक:
उसकी मृत्यु तो आपके जीवन काल में ही हो गयी थी/
आपने लिखा था कि
वह धरती के दैनिक चक्र का भाग बन चुकी है
अब क्या मसला है?
विलियम वर्ड्सवर्थ :
उसका उत्तर भारत में पुनर्जन्म हुआ था
चरवाहों के एक परिवार में
मेरी लूसी ग्रे ,
उसका अपहरण किया गया और
सामूहिक बलात्कार किया गया/
और उसके बाद, उसे मार दिया गया/
और उसने एक समाचारपत्र की कटिंग दिखाई
जिसमें लिखा था कि उच्च -वर्गीय लोगों ने
उस नन्ही मासूम का अपहरण किया
सामूहिक बलात्कार किया और उसके बाद
उसका क़त्ल कर दिया/
(गायक को सांस लेना दूभर हो जाता है/
वह बेहोश हो कर वर्ड्सवर्थ की बाँहों में गिर जाता है/)
दैवीय वाणी :
देवदूतों आओ! अब समय आ गया है
चिंतित होने का/
प्रतीत होता है कि तुम्हारे लोग
पथभृष्ट हो चुके है और बहुत निराश हैं/
कहाँ गयी आपकी शक्ति ?
कहाँ गया आपका ख़ौफ़ ?
अब राजा की सुनता ही कौन है ?
क्या आप अभी भी इसे साम्राज्य कहते हैं?
लस्टस : सर्ग 11
महायुद्ध
किल्लर इंस्टिंक्ट :
आकाशवाणी :
किल्लर इंस्टिंक्ट:
ईश्वर :
चित्रगुप्त :
राँझा
ब्रह्मा:
विष्णु :
1990 में संसार बदल गया
इंद्र:
आवाज़ें :
आवाज़ें :
लस्ट्स :
आवाज़ें :
आवाज़ें :
लस्टस :
ईश्वर :
इसलिए, ये यहाँ आपके साथ रह कर यातनाएं झेल रहे हैं/
आप क्या सोचते हैं कि आपको बक़्श दिया जाएगा/
और यह सारे लोग यहाँ से सही सलामत और जीवित वापिस जा पाएंगे/?
जो कोई भी युद्ध-भूमि में गया , जीवित नहीं छोड़ा गया/
कुरुक्षेत्र में , कौरवों की तरफ
महान भीष्म, द्रोण, कर्ण
और वह सिरफिरा दुर्योधन था/
क्या वे सब केवल पांच पांडवों का सामना कर पाये ?
हम यह देख कर उदास हैं
कितने ही लोग, जिन्हें हमने शान्ति और खुशी की पेशकश की थी
उन्होंने आप की ओर रहने का विलल्प चुना /
इसबात से बेपरवाह कि उनके इस कदम का क्या मतलब निकलेगा/
यह अध्यापक, यह डॉक्टर,
यह धर्म के ठेकेदार
हमने कभी नहीं सोचा था कि यह हमें धोखा देंगे/
यह दयनीय बात है कि आपके शूरवीरों की सेना को विश्वास है
कि वे हमारे संभावनाओं को ग्रहण लगा देंगे/
मैं हमेशा से एक स्नेही पिता रहा हूँ,
पर क्या वे मुझे इस तरह से धोखा देंगे,
और बेईमानी करेंगे?
यह उनके स्वभाव के विरुद्ध है
और मेरे स्वाभाव् से भी मेल नहीं खाता
कि मैं उन्हें माफ़ कर दूँ/
तुम्हारी खातिर, अरे ओ मानव की विशेष प्रजाति
अध्यापक, यूनिवर्सिटी प्रोफेसर और डॉक्टर,
जिन्हे विशेष शक्तियां और प्रतिष्ठा दी गयी थी
मानवता की सहायता करने के लिए
मुझे उन सब पर तरस आ रहा है
जिन्हे अच्छी नौकरियां औरअच्छी तनख्वाह नहीं मिली
यद्यपि वे जो उद्यमी बन गए
और उन्होंने बहुत से कॉलेज शुरू कर दिए/
और मेडिकल संसथान
वे माफ़ी के लायक नहीं है/
क्या आप सोचते हैं कि सभी कुछ बिकाऊ है?
आपको कभी भी माफ़ नहीं किया जायेगा/
मैं विशेष निर्देश दूंगा कि
इस पवित्र युद्ध में आपकी जान न ली जाये
आप जीवित बचेंगे और आपको त्याग दिया जायेगा/
आपको कभी भी क्षमा नहीं मिलेगी/
और राजनीतिज्ञों के लिए भी कोई क्षमादान नहीं है
वे तो इस पूरी खेप में सब से गंदे हैं/
हम घोषित करते हैं कि आपका अपराध अक्षम्य है/
और आपको दानवों के सुपुर्द करते हैं/
(जब यह महान व्यक्ति युद्ध सम्मेलन में हैं, स्वर्ग के अर्ध -भूमि क्षेत्र में युद्ध ज़ोर शोर से लड़ा जा रहा है/
ईश्वर चिंतित मुद्रा में प्रकट होते हैं/)
ईश्वर :
ब्रह्मा! मैं बहुत खून खराबा देख रहा हूँ/
हमने अपने बहुत से महान योद्धा गवाँ दिए हैं/
और मुझे क्षोभ है कि ये सारी सेनाएं
दानवों की ओर हो गयी हैं/
लस्टस हम पर बहुत भारी पड़ रहा है /
अच्छा रहेगा यदि हम कुछ समय के लिए कदम पीछे हटा लें /
युद्ध विराम संधि की बात करो
और वार्ताकारों को भेजो इस युद्ध का अंत करने के लिए/
ब्रह्मा :
पिताश्री , केवल इतना ही नहीं
यदि परिचालन को विराम दिया जाता है
हम अपनी सेनाएं पुनः संयोजित कर पाएंगे/
और इसी दौरान
हम देखेंगे कि कैसे इस असुंतलन को
ठीक किया जा सके,
पिताश्री, हमें समय चाहिए/
(एक युद्ध परिषद् को बुलाया जाता है)
चित्रगुप्त एक प्रस्ताव रखते हैं, जिसका अनुमोदन सभी के द्वारा किया जाता है/ परन्तु दुर्गा इसे मानने से इंकार कर देती है/)
दुर्गा:
मैं उनके खून की नदियाँ बहा दूंगी/
देख ती हूँ, वे कैसे मुड़ कर आ सकते हैं?
"केवल एक बार मुझे उन्हें रोकने का प्रयास करने दीजिये/"
" दुर्गा आ रही है, इंद्र, जाओ और उन्हें बताओ/''
सब ख़ामोश हो जाते हैं/
ईश्वर दुर्गा के इस अंतिम प्रहार की प्रतीक्षा करते हैं/)
किल्लर इंस्टिक्ट :
दुर्गा दानवों पर प्रहार करती है
जो मिसाइलों से सुसज्जित थे और जिनके पास
सशस्त्र प्रणालियाँ, टैंक्स और रॉकेट् थे/
विस्फ़ोटक सामग्री का खुल कर उपयोग हो रहा था
जिस से वे स्वर्ग के स्टेशनों को आग लगा रहे थे /
इस से दुर्गा क्रोधित हो गयी/
और दानव् समूह पर टूट पड़ी
अपने शस्त्र और अस्त्र के साथ
जिसके परिणाम स्वरूप
मामोँन , एसमॉडस , लेविथान और बेलफिगोर
की मृत्यु हो गयी/
( लस्टस युद्ध परिषद् बुलवाता है)
किल्लर इंस्टिंक्ट :
दुर्गा के इस क्रुद्ध प्रहार ने दानवों के होश उड़ा दिए हैं/
लस्ट्स ने युद्ध परिषद को बुलाया है/
मध्यस्थ लोग युद्ध विराम संधि की कोशिश कर रहें हैं/
जबकि आग लगने वाली स्थिति ज़ारी है/
मृत्यु -दर बढ़ रही है
और दोनों ओर के लोगों ने लाखों जानें ली हैं/
इतना लहू बहा दिया गया है
कि आँखों के आगे भीष्ण महाभारत का
भयानक दृश्य उभरने लगा है/
अप्पोलीअन मुख्यालय से आ रही
नवीनतम खबर बता रही है कि
युद्ध विराम संधि हो गयी है/
युद्ध रुक गया है /
और युद्धविराम की यह शर्ते हैं/
ब्रह्मा और सेटन द्वारा हस्ताक्षरित युद्ध-विराम संधि :
युद्ध की गतिविधियाँ तुरंत प्रभाव से रोक दी जाएँ/
इस युद्ध में न तो कोई विजेता है
और न ही कोई पराजित हुआ है/
लस्टस स्वर्ग की सीमाओं से पीछे हट जायेगा
और दैवीय सेनाएं भी वापिसी का रुख़ लेंगी/
उन क्षेत्रों से जो पहले लूसिफर के अधिकार क्षेत्र में थी/
अब से, दोनों दल अपने अपने कार्यक्षेत्र में कार्यरत होंगे/
लस्टस दैवीय शक्तियों का अधिकार प्राप्त करके,
मासूम मानवता को पथ भ्रमित करना बंद करेगा/
अपने प्रचुर आशीर्वाद के साथ/
देवता वादा करते हैं कि वे पीछे हट जायेंगे
और वापिस चिंतन मनन में लग जाएंगे/
लस्टस धार्मिक पूजा स्थलों से दूर रहेगा/
लस्ट :
यह बहुत रोचक बात लग रही है कि
देवताओं ने राजनेताओं को भी वर्जित लोगों की सूची में डाला है/
पर लस्ट्स इस मांग पर अड़ गया
कि यह अधिकार क्षेत्र उसका ही रहे/
शिक्षा को समवर्ती सूची में रखा गया/
और लस्टस ने वादा किया कि वह
धरती और आकाश में जितने भी देवीय सैन्य शिविर निगरानी हेतु हैं
उन्के काम में कभी भी बाधा नहीं डालेगा/
टाइम :
सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में एक असहज सी शांति व्याप्त है/
वृक्ष , पक्षी , नदियाँ ,पहाड़
एक सधी हुई ख़ामोशी ओढ़े हुए हैं/\
कोई भी खुलकर बात नहीं कर रहा
न तो किसी के समर्थन में, न किसी के विरोध में
न लस्ट्स के और न देवताओं के/
हवाएं वापिस अपना संतुलन प्राप्त कर रही हैं/
धरती फिर से सामान्य हो रही है/
दोनों ओर के इतने वज्रपातों से हिलने के बाद भी/
लस्टस का अभिमान खंडित हो गया है
और पूरे ब्रह्माण्ड पर साम्राज्य स्थापित करने की
जो उसकी भव्य योजना थी,वह भी धराशायी हो गई /
उस के पर क़तर दिए गए हैं
और वह ईर्ष्यालु झील में डूब रहा है
वे देवता जो दुर्गा द्वारा, विनाश से बचा लिए गए
उन्हें पछतावा हो रहा हैं
और वे अनुभव क र रहे हैं कि उन्होंने धरती के प्राणियों की अवहेलना की
और इस तरह दानवों को जगह दे दी
अपने पंख पसारने के लिए/
लोग अपने काम पर पहले जैसे सामान्य रूप से जा रहे हैं
वे अभी भी घातक पाप के बीज अपने कन्धों पर लादे हुए हैं/
ऐसा लगता है जैसे कुछ भी घटित नहीं हुआ था/
ऐसी है हमारी मानव प्रजाति /
उदासीन, संवेदनहीन /
अपनी ही होनी के प्रति उदासीन /
हमेशा की तरह, भावनाओं में बह कर
अनैतिक तत्वों के हाथों में खेली जाने वाली
और पूर्ण अनभिज्ञता के कारण
दानव और उसके अभिकर्ताओं के आगे अपनी आत्मा गवाँ देने वाली /
फ़ॉस्टस बिलजेबब से
कुछ भी नहीं गवायाँ हम ने, अगर हम अभी भी जीवित हैं /
भूल जाओ, उस संघर्ष को
उम्मीद पर ही तो दुनिया क़ायम है/
बिलजेबब:
फ़ॉस्टस, तुमसे बेहतर कौन जानता है
स्वर्ग खोने का मतलब
और आशा भी/
लस्टस :
आदरणीय भाई,सेटन
देवता हमारे लिए यातनाएँ और क्षति लाये /
शायद हमने अधिक ऊंची उड़ान ले ली थी ,
और बहुत ऊँचे सपने देखने लगे थे /
हमारे पंख पिघल गए
और हम समुद्र में गिर गए/
क्या हम अपना मिशन त्याग दें ?
देवदूतों से डरने लग जाएँ और विषाद ग्रस्त हो जाएँ/
क्या हम इस महान आक्रमण से मिले फायदे
यूं ही व्यर्थ जाने दें ?
क्या हुआ ,अगर हम ये युद्ध हार गए तो/
हमने धरती और आकाश को हिला के रख दिया/
हमारा सम्मान, हमारी शक्ति
सब कुछ तो दाँव पर लगा था /
मैंने उस महान कौतुक को देखा है/
हमारे भृत्य इतने शौर्य से लड़े /
हमारे सेनापति, हमारे योद्धाओं ने
स्वर्गदूतों को युद्ध में व्यस्त दिया/
भय :
तुम सभी साझेदारों,
अध्यापकों, अभियंताओं
वास्तुकारों, व्यापारियों को नोटिस भेजो
जिन्होंमे अथक मेहनत की युवा वर्ग से
काम, काम और काम करवाने के लिए
जब तक के वे स्वचालित नहीं हो गए ,
अपना चमकता अस्तित्व खो कर ,
लस्टस के आधिपत्य में सुरक्षित रहने करने के लिए /
हम दोबारा आक्रमण करेंगे/
केवल एक हिस्सा ही दो,
जब पूरा खोने का खतरा हो /
हम ने सब कुछ नहीं गंवाया, अगर हम अब भी नियन्त्रण में रहें /
(प्रस्थान)
लस्टस
हमारा ब्रह्माण्ड तो एक विभाजित घर है,
बुराई की उपस्थिति से अच्छाई पूर्णतः संतुलित है/
दानव नमक की तरह हैं जो कि
सभी स्वर्गदूतों के, सभी शक्कर युक्त खाद्य पदार्थों को
ख़लाओं के लिए सुपाच्य बनाते हैं/
अतीत में कौन से युग ,
सतयुग, त्रेता, द्वापर बुराइयों से मुक्त थे ?
कलयुग में जो एक मात्र भिन्नता हम देखते हैं, वह यह है
कि बुराई का मानवीकरण किसी एक व्यक्ति के रूप में नहीं किया गया
जैसे कि पहले रावण या कंस अथवा दुर्योधन के रूप में किया गया था /
कलयुग एक् टाइम कैप्सूल है, जिस में
ज्ञान ने अपनी बुरी शक्तियां दिखाई हैं
लोग ईश्वर के प्रति आस्था-हीन हो जाते हैं/
हठधर्मी हो जाते हैं
और अपने वैकल्पिक देवता बना लेते हैं/
लस्टस सेटन का एक काल्पनिक पुनः रूप है/
अधिक ख़ौफ़नाक क्योंकि वह प्रयत्न करता है
देवताओं और बुराईयों के संगठनों में
युद्ध छिड़ जाता है
युद्ध के वीभत्स हादसे बाध्य करते हैं दोनों पक्षों को
एक युद्ध -संधि विराम के लिए ताकि
अंतिम आक्रमण से पूर्व थोड़ा समय जुटाया जा सके/
लस्टस अभी भी अपने ओहदे पर क़ायम है/
अग्नि के सबसे महत्वपूर्व प्रारूप सम
यहाँ-वहाँ यदि कुछ उलट-फेर करने पड़ें
इसे केवल कुछ क्षति ही आंका जाएगा, व्यवसाय के साम्राज्य में /
अब समय आ गया है कि देवता पुनर्विचार करें
किस तरह से वे पुनः प्राप्त सकते हैं
मानव हृदय पर अपनी खोयी हुई पकड़ /
उन्हें दूसरों को अधिक भावनात्मक समर्थन देना होगा
और कम लापरवाह और कम निर्दयी बनना पड़ेगा/
क्या वे सूचना मिलते ही तुरंत ध्यान देंगे
यदि कहीं कोई मानवीय क्षति हुई हो/
दानवों जैसे, जो हमेशा मनुष्यों के आदेश मानते हैं
और उनके लिए तत्परता से कार्यशील रहते हैं?
दानव उनके मन की बात समझते हैं
उनके लिए मल्हम जुटाते हैं/
और उन्हें ऐसे स्थानों में जाने के लिए लालायित करते हैं
जहाँ पर अंत में उनकी शांति नष्ट हो जाती है/
सृजना और कुशलक्षेम के देवताओ
लस्टस और उसके दानवों ने
मानवता का संतुलन बिगाड़ दिया है /
लोग विक्षिप्त हो गए हैं/
पुनर्विचार कीजिये उन्हें इस उत्तेजना के संसार से
वास्तिविकता और स्थिरबुद्धिता के संसार में
कैसे वापिस लाया जाये /
*******************************************************************************
मूल लेखक : डॉ. जे. एस। आनन्द
अनुवादिका : रजनी छाबड़ा
*लस्टिस : लस्टस के द्वारा बनाई गयी न्याय-प्रणाली
*लस्टीटूटूशन : लस्टस द्वारा बनाया गया संविधान
(भौंचकित हो कर , वे ब्रह्मा के पास लौट आते हैं)
लस्टस
सेटन का उत्तराधिकारी
अन्धकार के साम्राज्य का अधिपति
मानसिक विद्रूपता का भयानक आईना दिखाता नाटकीय एकालाप ' लस्टस '
मूल रचना इंग्लिश : डॉ.जे. एस. आनंद
हिंदी अनुवाद : रजनी छाबड़ा
लस्टस
लस्टस
आह्वान
मेरी लेखनी को नई ऊर्जा दो
मानव के पतन के कारण खोजने के लिए
और लस्टस के उत्थान के
बाध्य कर दिया जिसने प्रभु और उसके शक्तिवान फ़रिश्तों को
आत्म -विश्लेषण के लिए , क्यों परास्त होना पड़ा मानव को दानव से
और किसने विमुख किया मानव को
दैवीय शक्तियों से और बाध्य किया
लस्ट्स के दिन प्रतिदिन बढ़ते आधिपत्य और शक्ति की
शरण में जाने के लिए।
लस्टस जो इच्छुक था मानव के रवैये को देव के समक्ष उचित ठहराने का
खिलवाढ़ कर रहा था मानवीय मन की दुर्बलता के साथ
सम्मान, स्वतंत्रता और इच्छा शक्ति की आड़ में
और उसकी उच्च श्रेणी की बौद्धिक वाकपटुता ने
कैद कर दी उनकी कल्पना शक्ति
ताकि शीघ्र ही उन्हें यह आभास होने लगा
यदि वे चाहते हैं कि मन-वांछित ही घटे
केवल लस्टस और उसका राज्य ही है
जो उन्हें बेलग़ाम आज़ादी दे सकते हैं/
प्रभु और उसकी दिनों-दिन क्षीण होती जा रही सेना
अपने बलपूर्वक रवैये के साथ जारी रखे हुए थी
मृतकों की उपासना
और उनके अनुयायियों के लिए निर्धारित करती
आचरण की एक सारणी
जिससे आमआदमी साधारण खुशियों से भी वंचित हो जाता
इस तरह, उन्होंने मुख मोड़ लिए मंदिरों से
और भीड़ बढ़ ने लगी मदिरालयों, सिनेमाघरों
रेस्त्रां और क्लबों में
लोग,जो मुक्ति चाहते थे
कमरतोड़ काम के बोझ से
एकत्रित होते खेल खेलने, महिलाओं से मिलने के लिए
और मदिरा पान व् मौज़ मस्ती के लिए
परन्तु, जैसे जैसे सामूहिक अर्थव्यवस्था की पकड़
बढ़ने लगी, राष्ट्र की आर्थिक व्यवस्था पर
अधिकाधिक युवा धकेल दिए गए नौकरियों की ओर
जहाँ न तो उन्हें खुशी मिलती, न आशा की कोई किरण
केवल आकांक्षा परोसी जाते उन्हें
मात्र स्व -केंद्रित अतिरंजित जुनून
रुग्ण मानसिकता और निरंतर दर्द से युक्त /
इन सशक्त लोगों की सेना
जो दानव के नाम पर जी रहे थे
दिखने में धार्मिक लगते थे
और प्रभु के प्रति पूर्णतः समर्पित
मंदिरों में अर्चना करते
धार्मिक स्थलों पे सजदे में सिर झुकाते
स्पष्ट रूप से अपनी दमित भावनाओं से मुक्ति पाने के लिए
फिर भी, उनकी निष्ठा तो शैतान के प्रति ही थी
मानवीय इच्छाओं की पूर्ण स्वतंत्रता में यकीन के साथ /
हे, सरस्वती! मुझे सामर्थ्य दो वर्णन करने की
कैसे घटित होता है यह देवत्व को लूटने का काम
कैसे यह दुष्ट लोग इस संसार को बदल देते हैं
आध्पित्य हो जाता हैं अन्धकार के साम्राज्य का,
और कैसे दैवीय साम्राज्य के दुर्ग एक के बाद एक
लस्टस के कोप के आगे धराशायी होने लगते है,
और किस तरह अंततः प्रभु प्रयास करता है
अपने खोये स्वर्ग को पुनः प्राप्त करने के लिए।
मुझे शक्तिदान दो इस अधार्मिक युद्ध के
अनपेक्षित विवरण करने हेतु
जोकि लस्टस और उसके समूह ने
प्रभु पर थोपा
जिसमें कितने ही फ़रिश्ते घातक रूप से घायल हुए
और, अंत में दुर्गा का आह्वान किया गया
दानवों के नरसंहार के लिए
अराजकता के अंत के लिए
और ईश्वरीय व्यवस्था के पुनर्स्थापन के लिए
मूल रचना: डॉ. जे. एस. आनंद
अनुवाद : रजनी छाबड़ा
सर्ग १
ज्ञान: खतरे का कार्यक्षेत्र
सहगान :
आदम :
दैवीय वाणी :
कैसे कायम रखते हैं वे
अपनी मर्यादा और उत्तेजनाहीनता
वे शान्तिप्रद जीवन में यकीन रखते हैं /
मानवता की सहस्त्रों वस्तुएँ प्रदान करते हैं
और कोई भेद-भाव नहीं करते/
पक्षियों की प्रजाति में अनुपात का तीव्र बोध होता है
आवश्यकता से अधिक एक भी दाना नहीं खाते ,
भविष्य के लिए एक भी दाना संग्रहित नहीं करते /
वे प्रकृति का ही एक अंश है, ख़ुश और आनंदित
और सदैव उचित संतुलन में रहते है/
मानव प्रजाति की शांति भंग होती है
क्योंकि वे इस प्रवाह को भंग करते हैं
और शाश्वत संतुलन को बिगाड़ते हैं /
केवल मनुष्य ही ऐसा प्राणी है
जो शांत-प्रिय लोगों की दयालुता पूर्ण जाति से विदा हो जाता है
और इस ग्रह के संतुलन को नष्ट करने में लिप्त है/
सूर्य के प्रकाश को दबोचना चाहता है, पानी का स्वामीतित्त्व चाहता है/
हवा को झपटना चाहता है और सारी खुशियां क़ैद करना चाहता है /
वह सनकी इंसान !
हवा पर हुकूमत जताना चाहता है
घोटाले करता है
और भगवान का प्रचार करता है /
गायक :
हे देवों, अरे दानवों
मेरा तुम से कोई सम्बद्ध नहीं
मैं दीवाना हूँ ,
क्या मैं लीयर हूँ?
अरे नहीं. मैं मेकबेथ हूँ।
नहीं, नहीं, नहीं, मैं फ़ॉस्टस हूँ/
फ़ॉस्टस,जो दानवों के पास गया
क्या मैं एक दानव हूँ ?
सेटन ! तुम कहाँ हो?
मुझे कुछ धुंधला धुंधला याद है
मैंने विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की थी
कोई नौकरी नहीं
कोई ज्ञान नहीं
कोई प्यार नहीं
केवल अधिक से अधिक पाने की ललक,
किस लिए? किसके लिए?
क्या मैं इस दुनिया में केवल आजीविका कमाने के लिए आया हूँ
और उधार की किश्तें चुकाते चुकाते मरने के लिए आया हूँ
अपने बच्चों का भरण -पोषण करने के अलावा क्या और कुछ भी नहीं ?
अरे .... मंदिर, मस्ज़िद , गिरिजाघरो
जहां वे चर्चा करते हैं राजनीति पर
हे,... देवगण
क्या आप भी शैतान में यकीन रखते हैं?
यह जन्म, यह संसार, यह शिक्षा ,
यह प्यार, यह करुणा ,
यह धनवान संसार और बेचारा मैं
क्या यह सब अप्रासंगिक हैं /
क्या मुझ में विषमता है ?
एक मूर्खता है ?
हे बैकेट !
मुझे समझने में मदद करो
गोडोट कौन था और वह आया या नहीं?
मैं जा रहा हूँ
अरे गायको , अरे कवियो, अरे दार्शनिक लोगो
सुनो !
तुम्हारा आदमी अप्रासंगिक है /
वह मरने के लिए ही पैदा हुआ है/
केवल मरने के लिए /
कुछ भी नहीं करने के लिए/
हा हा हा हा हा हा
दानवों ! तुम्हे सलाम
तुम्हे सलाम , हे,सेटन!
और तुम्हारे सगे सम्बन्धियों को, हे लस्टस !
मेरे पास करने लायक कुछ नहीं,
विचारने लायक कुछ नहीं,
करने लायक कुछ नहीं ,
मुझे तो बस नष्ट ही होना है /
हा हा हा हा हा हा
सेटन :
सेटन :
काल :
विचित्र समय आ गया है, नारद /
कुछ वस्तुएं नहीं हैं, फिर भी उनकी उपस्थिति का आभास होता है/
मनुष्यों के चेहरे में चिंता की लकीरें दिखती हैं /
किसी भी कार्य में जुनून नहीं है/
मैंने लोगों को बहुत जल्दबाजी में देखा है
क्या हम किसी लौकिक दुर्भाग्य से घिर गए हैं ?
नारद :
हाँ , विचित्र समय आ गया है /
ऐसा प्रतीत आता है जैसे कि
देवताओं और दानवों के बीच के
इस प्रतिरोध रहित शीत युद्ध में
दानवों की ही सब ओर विजय हो रही है/
कुरु :
नारद, में भी यह विचित्र समय देख कर सदमे में हूँ /
हवाएँ गरजना बंद नहीं कर रहीं /
और कितनी ही बार, सूर्य भी गायब हो जाता है/
ऐसा मौसम तो हम ने पहले कभी नहीं देखा था /
यह रातें कितनी भयावह हैं
बुराई का पूर्वाभास कराती हुई सी /
मुझे एक अजीबोग़रीब सपना आया, नारद/
मैंने किताबों से भरा एक पुस्तकालय देखा/
लिखित पाठ्य-सामग्री
और लाखों विद्वान
फिर भी, उन किताबों में केवल भस्मवर्णी सामग्री थी
और सीखने लायक कुछ नहीं
विद्यार्थी जिन्होंने बरसों तक इनका अध्ययन किया
और परीक्षा दी
उन्हें उच्च स्तरीय उपाधियाँ मिली,
पर इन डिग्रियों में ज्ञान-विहीनता थी
और यह केवल उनकी फाइलों की शोभा बढ़ा रही थी/
डॉक्ट्रेट की डिग्री के बावजूद, उनका बर्ताव तो मति -मंद था/
नारद :
यह चौंकाने वाला है और पूर्वाभास देता है कि
कुछ बुरा घटित होने वाला है /
एक पुस्तकालय, लाखों पुस्तकें/
हज़ारों की संख्या में विद्वान ,
फिर भी नहीं कोई ज्ञान ?
हे, प्रभु! कौन कह सकता था कि
हमें यह दिन भी देखने पड़ेंगे ?
( काल ने जो कि वक़्ता की जानकारी के बिना सुन रहा था, हस्तक्षेप किया ) ,
काल :
कुरु, मैंने भी कल एक सपना देखा /
मैंने भैसें देखीं जिनके थन दूध से भरपूर थे ,
दूध से लबालब भरी बाल्टियां देखीं ,
फिट भी, जब उनमें लोटा डाला गया, उस में कोई दूध नहीं था /
सब ओर हरी घास थी , दूर दूर तक हरी घास,
पर उन में उत्कृष्टता की कमी थी/
वृक्ष केवल आकार में ही वृक्ष लग रहे थे,
और घास केवल रंग से ही घास लग रही थी /
सपने में, मैंने कुछ लोगों से बातचीत की,
वे केवल दिखने में आदमी लग रहे थे,
वे परछाईयां थे/
मैं सहमा हुआ हूँ, नारद /
मैंने फैंटम को देखा मनुष्य का मुखौटा धारण किये हुए /
नारद :
पृथ्वीवासी नहीं जानते
प्रभु की क्रोध से भस्म करने वाली आग के बारे में
और ब्रह्मांड से जुड़ी जानकारी /
निश्चित रूप से आसमान में खतरे के बादल तैर रहे हैं
मैंने प्रभु की आँखों में खून उतरते देखा है
और उसकी भौहों पर चिंता के चिन्ह
(प्रस्थान )
समूहगान :
जब सेटन ने अनुभव किया कि वह वृद्ध हो रहा है
और संगठनात्मक परिवेश के कार्यों की
क्षति हो रही है,
तब लस्टस ही था
अन्धकार का उज्जवल राजकुमार
और सेटन का एक युवा चचेरा भाई,
इस अन्धकार की आकाशगंगा में
एकमात्र वही उजले सितारे सा चमकता/
उसे आमंत्रित किया गया सिंहासन पर आसीन होने के लिए /
लोगों में और सत्ता के गलियारों में
यह बातें प्रचलित हो रही थी
कि सेटन के कार्य काल में
कुछ खामियाँ थी
जिनसे अन्धकार के साम्राज्य पर दुष्प्रभाव पड़ रहा था /
बुराई करने वाले लोग भ्रान्ति में थे
और अक्सर प्रभु से प्रार्थना करते दिखाई देते थे
पूर्णतः असमंजस के समय में/
सेटन, एक महानायक
जिसने सफलतापूर्वक नेतृत्व किया था
बुराई की सेनाओं का , प्रभु के विरुद्ध
उसे श्रेय मिला
एक अन्धकार के वंश को स्थापित करने का
और लोगो को प्रतिकार के डर से दूर करने का
नर्क में और शोधन गृह में /
फलतः, अत्याधिक विस्तार होने लगा
अंधकार के राज्य का /
यह महसूस किया जा रहा था कि
प्रभु का प्रकाश टिमटिमाने लगा था /
और बस एक और ज़ोरदार फूँक
पवित्र आग को बुझाने के लिए काफ़ी थी /
और समूची ज़िन्दगियां एक गहरे गर्त में गिर जाएंगी
जहाँ का पूर्ण नियंत्रण दानवों के हाथ में होगा
ऊपर, नीचे सब ओर/
सेटन अनुभव कर रहा था कि
उसके हाथ से सब फ़िसलता जा रहा है
और उसने लस्ट्स को आमंत्रित किया
जिसने हमेशा उस का साथ निभाया था
और एक कुशल वक्ता और राजनैतिक दावपेंचों
की ढाल से सुसज्जित
अत्याधिक साहसी दानव था /
आमंत्रित किया उसे राज्य की नई चुनौतियों का सामना करने के लिए
जो कि अतुलनीय रूप से बढ़ गयी थी /
दैवीय स्वर :
गिलास आधा भरा हुआ था
सब ओर प्रभु का आशीर्वाद और वरदान था
तब साँप ने अपनी दृष्टि पुनः केंद्रित की
आधे खाली गिलास पर /
और लोगों ने शोध शुरू किया
कि लापता वरदान कहाँ था
उन्होंने भगवान के स्वर्ग को तलाशा
और इसे गायब पाया /
अचानक उन्हें एक कारखाना मिला
जहाँ बहुतायत से परम आनंद बनाये जाते थे
उस में प्रवेश करने से पहले, उन्हें बुद्धि को
लॉकर -रूम में रखना पड़ता था
यह आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस के बल पर चलता था
ऑक्सीजन और सूर्य के प्रकाश का भी विकल्प दे सकता था
इसने अपना खुद का ख़ुदा बना लिया था
यह लस्टस था जो सिंहासन पर आसीन हुआ/
सर्ग -3 लस्ट्स का अभिवादन
अभिषेक समारोह
सेटन, लस्टस , अमाजीनिआ एवं अन्य दानवों का प्रवेश
सेटन
साथियों
लस्टस के अभिषेक समारोह में
आप सब का स्वागत है
मैं महान लस्टस को
अंधकार का राजकुमार
पदांकित करता हूँ/
अब हम यहाँ जश्न मनाएंगे
सत्ता के परिवर्तन का
सर्वाधिक शक्तिशाली से
सर्वाधिक शक्तिशाली को /
वह सब से ऊंचाई पर है
उन चंद लोगों से अलग,
जो कि ब्रह्मांडीय विस्तार में विचर सकता है
और असीमित आकाश को अस्त व्यस्त कर सकता है/
लस्टस अपनी शक्तियों से ब्रह्माण्डीय विस्तार,
धरती और अनंत आकाश तक पहुँच रखता है/
अपरिमित हवाओं को सी सकता है
और एक ही झटके में , अनंत समुंद्रों को सोख सकता है/
ईश्वर नहीं, यह लस्टस ही है
जो कि गगनचुम्बी बुलंदी के साथ
मानवता का प्रतिनिधित्व कर रहा है
अपने सम्पूर्ण बहुरंगी गुणों के सामुच्य के साथ/
(अभिषेक समारोह)
सेटन :
स्वागत है आपका डॉ. वैनआल , डॉ. फायरआल
और उस अंतर्भासी धर्मांतरित डॉ. फ़ॉस्टस को यहाँ लाओ/
मैं कुछ विशिष्ट अतिथियों की
विशेष उपस्थिति के लिए कृतज्ञ हूँ/
हिटलर और मुसोलिनी को बुलाओ
और उन सब ईदी अमीनों को भी
जिन्होंने मनुष्यों में मतभेद पैदा कर दिए
ईश्वर की सत्ता और उसकी दयालुता पर
प्रश्न -चिन्ह लगा दिए/
और हमें एक ऐसा गुनाह दिया जिस से
हम ईश्वर की न्याय प्रणाली को
अप्रत्याशित रूप से रोक पाए/
हम *रेटालिया के किंग कॉसमॉस का भी स्वागत करते हैं
जिस ने कि अपने स्वामी को ही देश निकाला दे दिया
जिससे उसकी प्रजा ने विद्रोह कर दिया
और इस तरह अपनी तबाही मोल ली/
आओ मैकबेथ , आपकी उपस्थिति का स्वागत है
ताकि लस्ट्स को स्नान करवाया जा सके/
*(नोट: डॉ. आनंद के महाकाव्य 'मास्टर ' के प्रकरण में से उद्धृत: राजा कॉसमॉस एक अत्याचारी है जो पैग़म्बर को देश निकला दे देता है और एक आन्दोलन की यातना झेलता है/)
जुनून और आकांक्षा के तामसिक रक्त से
और लेपित हो
निर्दयतापूर्ण बेपरवाही की मोटी परत से /
ताकि वह कभी भी न बेध पाए
कभी भी न पार कर पाये
घृणा की उस घातक दीवार को,
जोकि दानवों की अमूल्य निधि है
और प्यार, मानवता की नाउम्मीद /
फ़ॉस्टस!
मेरे दिल में हमेशा तुम्हारा बसेरा रहेगा
नर्क में तुम्हारी यातनाओं का कोई अंत नहीं ,
शैतान के प्रति तुम्हारे प्रेम के लिए हम तुम्हारा सम्मान करते हैं
और तुम्हारी स्वामिभक्ति की प्रशंसा करते हैं /
विचिस , आओ और पवित्र मंत्रों का उच्चारण करो
दानवों की पवित्र पुस्तक 'डेलिस्या 'से '
विचिस मंत्रोचारण करती हैं :
श्रम और मुसीबत को दोगुना और दोगुना करते जाओ
आग जलने दो और कड़ाही में बुलबुले उठने दो /
जय हो महान राजा की!
जय हो लूसिफ़ेर की!
जय हो लस्टस की, सदैव के लिए राजकुमार !
लस्टस के राज्याभिषेक के बाद उसे सिंहासन के पास लाया जाता है /
सेटन सब औपचारिकताएं पूरी करता है/
तदुपरांत, अंधकार के नए राजकुमार का झुक कर अभिवादन करता है /
सेटन :
इस क्षत विक्षत गद्दी के आगे
मैं समर्पित करता हूँ अपना सर्वस्व
जुनून, आकांक्षा और शक्ति
युद्ध करने के लिए और कभी भी पराजय न स्वीकार करने के लिए
मुझे खुशी है की जिस क्षण से मेरी उत्पति हुए
तब से अब जब कि मैं सब गतिविधियां समाप्त करने वाला हूँ
मैंने कभी एक पल भी देवताओं को चैन से नहीं जीने दिया/
लस्टस , यह मेरी लिए बहुत तसल्लीबक्श है
कि मैं तुम्हे एक ऐसा राज्य सौँप कर जा रहा हूँ
जिसकी प्रभुत्व छोटे से छोटे देश से लेकर, बड़े से बड़े देश तक है/
तुम्हारा जहाँ मन करे तुम जाओ/
हे, अंधकार के राज्य के राजकुमार!
तुम्हे शाही स्वागत मिलेगा।
और तुम्हे साथ देने के लिए
और नीति निर्धारण के मामलों में सलाह देने के लिए
तुम्हारा साथ देंगे डॉ. डैडमेन
और मेकबेथ और फ़ास्टस के सारे झुंड,
जिनके आक्रोशित दिमाग ने कभी भी
संयम और सब्र का ख़्याल निकट नहीं आने दिया
और उनका जिक्र ऐसे पिशाचों के रूप में किया जाता है
जिन्होंने मानवीय सहनशीलता को
घिसट घिसट कर चलने की हद तक ला दिया/
अमाजीनिआ,
आगे आओ और लस्टस का साथ दो
वह सदैव तुम्हारे साथ रहेगी
युवा राजकुमार,
तुम्हारी सगी बहन
जिसमें जुनून और विश्वास
प्रचुर मात्रा में है /
लस्टस :
सुयोग्य सेटन, आप मेरी लिए बेशक़ीमती बुजुर्ग़ हैं
मैं आपका ऋणी हूँ आपकी पैनी दृष्टि के लिए
आपने मेरा चुनाव किया
मुझ में आपने यह योग्यता देखी
वह विशिष्ट गंध जो
मानवता की तरकारी को ख़टास दे देती है /
मुझे याद है कैसे हमारे महान राजा को
ईडन के लिए युद्ध लड़ना पड़ा था
और उसे कितना बेइज़्ज़त करके वहां से धकेला गया था
मात्र इसलिए कि उसने ईव को एक सेब पेश किया था
हालाँकि उसकी ईव को प्रभावित करने की या खुश करने की कोई मंशा नहीं थी /
यह कोई कामुक मामला नहीं था
फिर भी देवताओं ने इसे अपराध मानते हुए ,
उसके विरुद्ध ईश्वर से शिकायत की/
जिन्होंने बिना उस से कोई स्पष्टीकरण माँगे
बस फरमान ज़ारी कर दिया
आग के दरिया में धकेल दिया, प्रधान देवदूत को /
उन दिनों मैं अल्पायु था
परन्तु मैंने अपने महान बुजुर्ग की यातना देखी,
निर्वासन और निराशा के उन वर्षों में
कैसे उस महान बैचैन आत्मा ने
सर्वाधिक शोभनीय काम किया
और देवताओं के विरुद्ध एक लाख वर्ष के लिए
युद्ध का एलान कर दिया/
अगर ईश्वर हमें नष्ट करने की कोशिश करता ,
बदले में, हम उसके प्राणियों की ओर
हमारे विष को निर्देशित कर देते/
और उनमें निराशा का संचार कर देते/
जिसके परिणामस्वरूप, वे तर्क के लाभ से वंचित हो जाते
जिस तर्क का प्रचार वे साल के चारों मौसमों में करते रहे थे /
विनाश के मित्रो, साथियो और प्रेमियो
जब उचित को अनुचित और अनुचित को उचित
ठहराया जाने लगे
तब निराश होने लायक़ कुछ भी नहीं रहता/
किसी के लिए कोई आशा नहीं बचती
सिवाय इसके कि आज
हम और दृढ़तापूर्वक कदम रखेंगे
पतन के रास्ते पर/
अगर तुम अधिक से अधिक पाने में यकीन नहीं रखते
तब तुम्हारा मेरे साथ सम्बन्ध न के बराबर है
क्योंकि मेरे मंत्रिमंडल में वही सदस्य रह पाएंगे
जिनके मन घातक क्षय में धँस चुके हों
हमें तो यह सुनिश्चित करना है कि
लोगों में संतुलन की भावना ही समाप्त हो जाये
जिसकी वजह से जानवर तो शांत प्रकृति से रहें
और दुनिया के लोग, अशांत स्वभाव युक्त
हवाओं पर मंत्र फूंको कि
वे मुफ़्त में गुनगुनाना बंद के दें/
नदियों को मना करो निष्फल प्रवाह के लिए
पक्षियों को पशुविहार में डाल दो
और सुयोग्य मनुष्यों का संगरोध कर दो /
प्यार नाम के वायरस को हमारे पवित्र मंदिर में तबाही का कारण न बनने दो/
शास्त्रवेता!
ईश ने मासूमयित को बढ़ावा दिया
उस ने कहा , अज्ञानता परमानंद है/
उसके पुत्र को सूली पर लटका दिया गया/
उन्ही लोगों के द्वारा जिनके लिया उसने अपना खून बहाया था/
वह पाप स्वीकरण में
और माफ़ी देने में यकीन रखता था
यह ईसाई धर्म के सद्गुण हैं
वृह्द स्तर पर प्रसारित
और सदाचारी लोगों द्वारा इनका पालन किया गया/
कौन यह यकीन करेगा कि
यह सुझाव सेटन ने दिया था
एडम को
न ही ईव समझ पायी कि
इस स्वप्न का वास्तविक तात्प्र्य क्या था।
ईशु भी असफल रहे
उन प्रावधानों के बारे में जानने में
जिनके द्वारा उनकी ओर की दीवार में छिद्र हो गया
और पाप को क़ानूनी स्वीकृति मिल गयी /
पाप स्वीकरोक्ति करो और दोषमुक्त हो जाओ
ताकि तुम कर सको
वही बड़ी भूल बारम्बार /
भूल करना मानवीय स्वभाव है
और भूल करने के लिए शर्मसार क्यों होना ?
और यह समाज माफी देता रहता है
और इतने विशाल ह्रदय से समायोजित कर लेता है
व्याभिचारी लोगों को भी
जोकि अंत में कलयुग पर शासन करते हैं /
क्या यह धर्म की लड़ाई बोध के विरुद्ध है
वे वस्तुएँ जो उलझाती हैं
अन्ततः उन्ही की जीत होती है/
स्वीकरोक्ति एक विलक्षणता है
और क्षमादान, एक पाप/
सेटन से प्रेरित हो कर
और उसके आदेश की अनुपालना में
आप हर उस काम को बर्बाद कर रहे हो
जोकि भगवान् करना चाहते हैं/
सेटन एक महान नायक था
जिसने हर युग के लोगों पर राज किया /
और तुम, जोकि सच्चे देशभक्त हो,
तुमने शुरू किया है
इन धर्मनिन्दकों के विरुद्ध, एक धर्मयुद्ध /
अमाजिनिआ :
लस्टस, क्या यह दयनीय नहीं है
वे लोग, जो हमारे आदेश की अनुपालना में
पाप करते हैं और स्वीकारते हैं
वे खुद पूर्णयतः नास्तिक कहलाते हैं /
और यह उत्कृष्ट कहलाये जाने वाले लोग
सफ़ेद झूठ बोलने वाले लोग षड्यंत्र रचते हुए कहते हैं कि
आर्कएंजेल (सेटन ) के यह अनुयायी
नर्क की आग में झुलसेंगे/
लस्टस :
अमाजिनिआ,
हमने मिल्टन को बंदी बना लिया है
जिसने इतना आतंक फैला रखा है
इतनी सदियों से
मानव की कल्पना शक्ति उसकी जकड़ में है /
मिल्टन कभी यातनागृह में तो गया ही नहीं /
वह अर्द्ध -सत्य ही फैलाता रहा /
उसे दफ़न कर दिया गया है, मर चुका है वह/
यहाँ हम न्यायोचित ठहराते हैं
मनुष्य के प्रभु के प्रति कार्य
यह जवाबी विस्फोट है
उस ज्ञान का जौ
मिल्टन और उसकी किस्म के लोगों ने दिया /
दैवीय वाणी :
लस्ट्स में दानवों को
निश्चितता दिखती है
कि सम्पूर्ण ईसाई जगत
भयानक ख़तरे में है/
*केओस और *पान्डेमोनियम
अराजकता के प्रेमियों को आमंत्रित करते हैं
ईश्वर और उसके देवदूतों को
किसी अज्ञात कोने में धकेलने के लिए /
जिस समय, दानवों के ओहदों में
परिवर्तन किये जा रहे हैं
थरथराहट महसूस की जा रही है
स्वर्ग के साम्राज्य में /
देवता, जो अमृत रसपान से मदहोश है .
अकर्मण्यता की दुनिया में निवृत हो गए है
इस सब से बेख़बर हो कर/
*केओस : दानवों का सम्मलेन कक्ष
*पान्डेमोनियम : दानवों का संसद भवन
सर्ग ४ भव्य कार्य योजना
ओरैकल : जुनून के पार्क में (पार्क ऑफ़ पैशन्स में)
मुझे दिखाई दे रहा है जूनून का एक विशाल जुलूस पवित्र मंदिर की ओर चलते हुए जहाँ पर शैतान एकत्रित हुए हैं लस्टस का अभिषेक करने के लिए, जश्न मनाने और भोज करने के लिए।
यह जूनून का पार्क है दानव की भूमि पर बना एक रेस्टोरेंट जिसके आकर्षण से आत्माओं पर जादुई असर होता है यहाँ तक कि उन पर जो लावारिस भूमि से हों/
आर्कएंजेल का पसंदीदा बसेरा यह पार्क एक स्थान के रूप में प्रयुक्त किय जाता है जोकि, आने वाली पीढ़ियों को तैय्यार करती हैं मुक्ति और अनुग्रह के विरुद्ध /
लस्टस झुक कर अभिवादन करता है ग्रेडा माँ का लोलुपता की देवी जोकि इस महा दानव को आशीर्वाद देती है अदम्य विश्वास के साथ एक अथक भाग्य के लिए/
सेटन :
अगर तुम चाहते हो कि तुम सेटन से भी आगे बढ़ जाओ
अरे, लस्टस !
ग्रेडा से आशीर्वाद प्राप्त करो (चंचल माँ)
बहुमुखी राक्षस देवी
जोकि बुराई की प्रदायक है
अपने बहुत से शानदार प्रतिरूपों के साथ
ग्रेडा(चंचल माँ) के मंदिर में
स्वर :
जय हो ! ग्रेडा (चंचल माँ ) बहुमुखी राक्षस देवी की जय हो ! लालसा की जय हो! छल कपट की जय हो! दोगलेपन की जय हो! आकाँक्षा की जय हो! प्रतिशोध की जय हो! ज्वाला की
ग्रेडा (चंचल माँ ) प्रकट होती है अपने सात चेहरों के साथ और लस्ट्स को सम्बोधित करती है/
ग्रेडा (चंचल माँ )तुमने मुझे ख़ुश किया है/
जब कभी भी तुम्हें आवश्यकता पड़े यह रहा तंत्र (उसकी दायीं भुजा पर एक टोने का धागा बांध देती है)और मंत्र उच्चारण करना:अपकर्ष ,अपकर्ष, अपकर्ष और मैं पहुँच जाऊंगी/
लूसिफ़र :
अरे, इस शापित धरती के निवासी अरे! लौकिक प्राणियों अरे! ऊँचे पहाड़ों विशाल महासागर
सुनो!
जैसे जैसे आयु बढ़ती है हर कोई क़ब्र में लुढ़क जाता है सेटन भी गुजरते वक़्त के साथ उद्वेग रहित हो गया है और उसकी बुद्धि लय और छंद को भ्रमित करती है/
उसका शक्तिवान चचेरा भाई लस्टस सत्ता में आ गया है/शक्तिवान होने के साथ ही साथ, उसे ग्रेडा (चंचल माँ) का आशीर्वाद प्राप्त है कि वह क्रांति ला सके और बुराई को पूरी तरह निगमित कर सके/
पुराना समय भिन्न था
सेटन के आदमी व्यक्तियों को लालायित करते थे और उन्हें आसक्ति के लिए बहलाते फुसलाते थे
परन्तु गुप्त रूप से /
महान सेटन बाग़ में प्रविष्ट हो गया छिपे तौर पर सरीसृप मार्ग अपना कर
ताकि सेंध लगा सके ईव के सपने में निषिद्ध फल की इच्छा के साथ
यह सब एक गुप्त मामला था और सेटन. यद्यपि एक शक्तिशाली देवदूत था उस ने कभी भी बुराई में गर्व करने का भाव नहीं दिखाया, जो भाव लस्ट्स में बसता है जोकि जब चलता है तो, आग की तरह जलता है अंधेरी इच्छाओं के जंगल में /
आज के बाद, अरे! अन्धकार के राजकुमार के प्रेमियों बिलकुल वैसे ही, जैसे पाश्चात्य देशो के लोगों ने साम्राज्य जमा लिया था संसार के विभिन्न देशों पर लोगों को घूँस दी थी उन्हें अपनी संस्कृति सिखाई और शिक्षित किया और अंत में उन पर शासन किया और छीन ली उनसे उनकी दौलत, उनकी पहचान ,इसी तरह, हम भी एक नयी निगम संस्कृति निर्मित कर रहे हैं ताकि हम मानवता को देवत्व से दूर कर सकें /
(घोषणा)
आओ! इस अन्धकार के साम्राज्य के महान देवदूतोकेओस के और आगे बढ़ो/ जहाँ पर कि नया राजकुमार जिसने कि अभी अभी शपथ ग्रहण की है, जनसाधारण को सम्बोधित करेगा /
लस्टस :
फ़ॉस्टस :
संकल्प
लस्टस :
किल्लर इंस्टिक्ट (एक नया चैनल)
लस्टस :
किल्लर इंस्टिक्ट:
लस्टस :
आवाज़ें:
दैवीय वाणी:
सर्ग 5
साक्षात्कारकर्त्ता :
साक्षात्कारकर्त्ता :
साक्षात्कारदाता :
लस्टस :
भय :
टेंसोनिआ :
लस्ट्स :
सैमुएल :
यह एक नुक्कड़ नाटक है, राजकुमार/
(कुछ लोग जिनकी पीठ नहीं है,
गली में इधर उधर चल रहे हैं
और वे रो रहे हैं /
जैसे कि कोई बहुत भारी बोझ उठाने के कारण टूटी हो/)
लस्टस :
यह मैं क्या देख रहा हूँ? इनकी पीठ कहाँ हैं?
सैमुएल :
राजा साहिब, उनकी पीठ टूट चुकी है
करों के भार और ज़बर्दस्ती वसूली के कारण
लस्टस:
यह बढ़िया है/ इन में से किसी को भी
सीधी गर्दन के साथ मत छोड़ो /
इनके चेहरे क्यों नहीं दिखाई दे रहे ?
क्या इस पर कोई पाबंदी है?
सैमुएल :
प्रभु ! बीते समय में इनके चेहरे थे
परन्तु अब ,
आपके शासनाधीन होने के बाद
लोग व्यक्तिगत तीखे नैन नक्श पसंद नहीं करते/
वे अपने चेहरे को कपड़े से ढके रखना पसंद करते हैं/
उनका चेहरे से किसी आदमी या औरत की
हलकी सी साम्यता झलकती है/
और इसके अलावा कुछ नहीं /
यह चेहरे जो आपको दिखाई दे रहे हैं, राजकुमार
यह मुखौटे हैं/
वे बेवजह मुस्कुराते रहते है/
और इन मुखौटों के पीछे, निष्ठाहीनता छुपी है/
लस्टस :
यह दो व्यक्ति कौन हैं
इन में से एक ने आदमी की पोशाक पहनी है
और दूसरा औरत जैसा लग रहा है/
सैमुएल :
यह दोनों इस नाटक का हिस्सा हैं /
राजा साहिब, यह समलैंगिक हैं/
लेसबिआ , लेसबिआ, वह पुकारता है
एक युवती सामने आती है/
लेसबिआ, झुक कर राजकुमार का अभिवादन करो/
(वह झुक कर अभिवादन करती है/)
लस्टस:
इस में क्या विशेषता है सिवाय इसके कि सुंदर दिखती है/
सैमुएल :
लेस्बिआ और उसकी मित्र अमारा आज शादी कर रहे हैं/
लस्टस:
दो लड़कियां आपस में शादी रच रही हैं/
क्या आदमियों का अकाल पड़ गया है?
लेस्बिआ:
क्योंकि हम एक दूसरे को प्रेम करते हैं और गृहस्थी बनाना चाहते हैं/
लस्टस:
जो स्वतंत्रता हमने तुम्हें दी है, उसका आनंद उठाओ /
यह एक नया राज्य है,
जहाँ नए विचारों का निषेध नहीं किया जाता /
जो तुम्हारे मन में आए , तुम सोचो/
और हमारे पास अमीर निजी निवेशक भी हैं/
यह कौन हैं जो दिखने में विकृत पुरुष जैसे लगते हैं?
सैमुएल:
राजा साहब , आप उन्हें 'महंत' कहिये (किन्नर )
यह वह लोग हैं जो
सब से पहले नवजात शिशु की ख़ुशख़बर देते हैं/
लस्टस:
वे किसी श्राप के शिकार हैं ,
या कुछ पापों के परिणाम भुगत रहे हैं
हम यहाँ उन सब को ताज पहनाये रखते हैं
क्योंकि उन्हे घातक दंड दिए गए हैं/
कभी कभी देवताओं से भी ग़लती हो जाती है
और यह उनकी गल्तियो का परिणाम है/
विनिर्माण दोष के साथ उत्पन्न हुए ,
उन्हें संसार द्वारा अस्वीकरण का दुःख भोगना पड़ता है/
लस्टस :
सैमुएल , इन महान प्राणियों को देखना अच्छा लगा/
अब मुझे कुछ रैप सुनाओ /
रैप संगीत बजाया जाता है/
(लस्टस को अपने मोबाइल पर कॉल आती है/ वह नाटक को अधूरा ही छोड़ कर चल देता है/)
दैवीय वाणी :
लस्टस जैसे लोग
गलतफहमियों पर ही केंद्रित रहतें है/
और उसी मनोस्थिति से चलते हुए
साधारण सी बात को भी उलझा देते हैं/
देवताओं का मानवता से कोई मतभेद नहीं
यद्यपि 'मात लोक' में कुछ भी सही नहीं है/
दानव अपनी साजिशों के तहत
बढ़ती हुई हलचल देख रहे हैं /
विवेक और अविवेक की सीमा रेखाओं पर,
मानवता वहशीपन की बाँहों में है/
लस्टस और उसके चालित अपवित्र प्रशासन के कारण,
नैतिक शुष्कता के भंवर में दम तोड़ रही है/
दैवीय इच्छा से परे कुछ भी नहीं है /
जो मारे गए और जिन्होंने ने मारा
लस्टस की रचना किसने की ?
और अफवाहों की चक्की कौन चलाता है ?
सर्ग 6
राक्षसीय राजनीति की तैयारियां
ब्रासिल :
अमाजीनिआ की ताज़पोशी हुुई है सौंदर्य साम्राज्ञी के रूप में /
उसने संसार के विभिन्न भागों से आयी 70 सुंदर प्रतिद्वंदी युवतियों के साथ मुक़ाबला किया था./
कैओस में कार्यक्रम चल रहा है
जहाँ लस्टस भी उपस्थित है/
समूहगान :
अमाजीनिआ जिसका वास्तविक नाम तमर था
वे लिलिथ की बेटी थी
जोकि एक मादा-राक्षस थी
अत्यंत सुन्दर और विचारहीन आकर्षण युक्त
और उसे क्रोध आया जब सेटन ने
ईव का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की /
उसने देखा था उसे उस महिला पर अति अनुरक्त होते हुए,
परन्तु जब सेटन ने उसे इसका प्रयोजन बताया
उसे यकीन हो गया और उसने पहली बातें अनदेखी कर दीं /
और सेटन को पहले से भी अधिक प्यार करने लगी/
अमाजीनिआ उसकी बेटी है/
वह सुंदर देश यू. एस. का भ्रमण कर आयी है/
वह कनाडा भी घूम कर आयी है/
उसने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से अध्ययन किया था/
उसके पास भौतिक केमिस्ट्री में डॉक्ट्रेट की डिग्री है/
ज्ञान के बिंना मुक्ति नहीं है /
यदि इसे घातक खुराक में ले लिया जाये
यह मानसिक भय का कारक बन जाता है
और मानवीय अनुभूति को नष्ट कर देता है/
लस्टस को प्रबुद्ध विकृति की लपटों से पकाया गया था/
वह शारीरिक रूप से भी उतना ही सशक्त है,
जितना कि वह बौद्धिक रूप से जीवंत है/
लस्टस की आयु अधिक नहीं है, पर अधिक समृद्ध है
बुराइयों के साम्राज्य के मार्गदर्शन हेतु,
अपनी खतरनाक योजना के विस्तार के लिए
मनुष्यों से जानवरों, पक्षियों और पौधों तक /
ग्रेडा लस्टस पर विशेष मेहरबान है
और उसने उसे अतिरिक्त शक्तियां प्रदान की हैं/
मानव में स्वाद सम्बंधित विकार पैदा करने की
और उन सभी को हानि पहुँचाने की
जो शांति, करुणा और क्षमा में विश्वास रखते हैं
बिल्कुल बेकार की बातें /
लस्टस:
अमाज़ीनिआ, पाताल लोक को तुम पर गर्व है
देवता रोते रहे, ईव लालायित हो गयी
परन्तु वे हमारी तैयारियों का आंकलन नहीं कर पाए/
तुमने तो सभी अवरोधों को दूर फ़ेंक दिया/
और अब एक नये संसार का प्रतिनिधित्व कर रही हो
जोकि सुंदरता में यकीन रखता है
और अपनी बुद्धि के सहारे चलता है,
ईमानदारी और पवित्रता का लिहाज न करते हुए/
अमाज़ीनिआ:
मैं आपकी आभारी हूँ
कि मैं इस अन्धकार के साम्राज्य का प्रतिनिधित्व कर रही हूँ/
हम चाहते हैं कि और महिलाऐं सामने आएं/
यह कोई पुराना संसार नहीं है, जहां औरतें
केवल गृहस्थी सँभालने के लिए ही होती थी/
अब गावों का परित्याग कर
औरतों को शहर जाना ही चाहिए/
अपनी आजीविका को आगे बढ़ाते हुए, अपनी मर्ज़ी करनी चाहिए/
अब से, कुछ सदियों तक,
पति घर में बच्चे संभालेंगे और रसोई में आराम से काम करेंगे/
यह एक नई दुनिया है/
यहाँ बुद्धिमानी का कोई मूल्य नहीं
समानता ही आपकी सम्पति है/
आप अपना मूल्य स्वंय निर्धारित कीजिये/
आप मुझ से किस काम की उम्मीद रखते हैं,लस्टस ?
लस्टस :
आप वापिस जायें और साथ में अपने मित्रों को भी लेती जाएँ
अन -सिविल इंजीनियरिंग में
एक छः महीने का डिप्लोमा करने के लिए/
अमाज़ीनिआ:
यह अन -सिविल इंजीनियरिंग क्या है?
लस्टस :
यह दानवों की एक सूक्ष्म स्तर की राजनीति है/
पुरातन समय में, हमारे लोग धरती पर जाते थे ,
डकैतों का वेश धारण कर के ,
छल पूर्वक कार्य करते थे
परन्तु सभ्य होने का दिखावा करते थे /
पुराने षड्यंत्रों की ओर देखो /
राजा के दरबार के षड़यंत्रकारी
दिखने में बहुत सभ्य दरबारी प्रतीत होते थे
जो गुप्त रूप से कार्य करने के लिए
बहुत प्रयत्न करते थे/
और राजा अथवा उनके राजकुमारों की
सुरक्षा की जड़ें खोख़ली करने में लगे रहते थे /
अब, हालात बदल गए हैं /
बुराई, जिस का ज़िक्र करना भी वर्जित था
अब सिखाई जाती है और उसका अभ्यास करवाया जाता हे
इन विश्वविद्यालयों में भारी मात्रा में /
अमाज़ीनिआ:
मैं हैरान हूँ/ ऐसा कैसे ?
लस्टस :
वह समय पवन वेग से बीत गया
जब लोगों के दिमाग में कुछ शब्द तैरते रहते थे /
भलाई, ईमानदारी, यथार्तता और चरित्र ,
प्रामाणिकता, पारदर्शिता , धर्मशीलता
देवभक्ति और पवित्रता /
मैं खुश हूँ कि हमने रिकॉर्ड कायम किया है
और आभारी हूँ यह स्वीकारते हुए
हमारी पूर्व-व्यव्सथा ने
इस महान कार्य को सम्पन्न किया है/
अमाज़ीनिआ, वह विष जिसने सुकरात की जान ली थी
उसका प्राधान्य अभी भी है
तुम्हें हर घर में 'क्रॉस' दिखाई देगा/
जो एक प्रेत अस्तित्व में सिमट गया है/
ज्ञान की अत्याधिक ख़ुराक से बिगड़ गया है
ईश्वर का क्षेत्र /
लोग अब उस से आगे सोचने लगे हैं
उन वस्तुओं के बारे में
जिनका अभी तक कोई अस्तित्व ही नहीं ,
वे वस्तुए, जिन्हे वे खुद रच रहे हैं /
भविष्य क्या है ?
यह भगवान नहीं जो हर प्राणी का भविष्य लिखता है
यह लिखा जाता है मनुष्य के अपने कर्म, अपने वचनों ,
अपने विचारो के द्वारा /
और प्रिय अमाज़ीनिआ,
इन विचारों को हम नियंत्रित करते है,
यद्यपि बीता हुआ कल, हो सकता है
ईश्वर के नाम लिखा गया हो, पर भविष्य तो लस्टस का है/
अमाजीनिआ :
पर कैसे, लस्ट्स ,
सभी लोग अपनी धार्मिक मान्यताओं के साथ जीते हैं/
उनके अपने धार्मिक ग्रन्थ होते हैं/
गीता है, बाइबल है/
क़ुरान है, तल्मूड है/
आप ऐसा सोच भी कैसे सकते हैं
कि सुदृढ़ धार्मिक परिशोधन वाले यह लोग
अपनी राह से हटाए जा सकते हैं
और आपका अनुकरण करने के लिए बाध्य किये जा सकते हैं?
लस्टस :
बेचारी लड़की / तुम मुझे बताओ
क्या धार्मिक प्रतिष्ठान में सब कुछ सही चल रहा है/
क्या वहां वासना नहीं/ घोटाले नहीं ?
कोई अपराध नहीं? कोई पाप नहीं?
वास्तविक प्रश्न तो यह है :
कि कैसे इन स्थलों की पवित्रता को और अधिक नष्ट किया जाए
ताकि वे लोग जो इन धार्मिक रीति -रिवाज़ों में यकीन रखते हैं
उन्हें आंतरिक रूप से कोई समर्थन न मिले/
हमें, यह सुनिश्चित करना होगा
कि उनके दिल ओ -दिमाग इतना अधिक औपचारिकताओं से भर दिए जाएँ
कि वे हमारे संधि योजन को समझ ही न पाएं/
मैं तुमसे सहमत हूँ, अमाजीनिआ , ईश्वर ने ईसा की उत्पति की
और उसका सन्देश प्रकाश की एक प्रखर तरंग की तरह है/
पर एक अँधेरे ज्ञानक्षेत्र के आगे
एक मोमबत्ती कहाँ टिक पाएगी/
एक टिमटिमाती रौशनी
कितनी देर तक तेज़ हवाओं का दबाव झेल पाएगी?
पंजाब में भी कुछ गुरु थे
जिन्होंने सारे माहौल को आलोकित कर दिया /
इसी भाँति , प्रभु कृष्ण, प्रभु राम
महान ईश्वरीय सृष्टि
जिन्होंने हमारे कई महान लोगों की जान ली.
परन्तु वास्तविकता यह है, प्रिय
कि वे सब आये और चले गए ,
परन्तु अँधेरा हर चमकते सितारे पर हावी रहता है/
हम कुछ और नाम भी जानते है ,
ओशो, रामतीर्थ, विवेकानंद, दयानन्द
और ईसाई समुदाय के कई महान संत
जैसे कि सेंट ज़ेवियर
जिन्होंने हमारी शक्ति से उलझने की कोशिश की/
अंधकार सब प्रकार के प्रकाश की माँ है /
इसी प्रकाश में वे हमारे चेहरे देखते हैं
और ख़ुद के भी/
और जब प्रकाश गायब हो जाता है
वे भी अन्धकार की आग़ोश में चले जाते हैं/
ज़िंदगी भी तो एक टिमटिमाती लौ है/
रात के गर्भ से उत्पन्न
रात में ही निवृत हो जाती है/
जैसे जैसे समय इस आग को बुझाता है/
इसलिए , प्रिय अमाजिनिआ/
हम सभी इस अधर्मी विस्तार के सहभागी हैं/
मृत्य एक भय की तलवार है
जिसे ईश्वर ने मनुष्य के सिर पर लटकाया हुआ है
ताकि वे अपने अनिश्चित भाग्य से भयभीत रहें/
और ऐसी भीड़ हमारे स्टालों पर एकत्रित हो रही है
कि सारी गणनाएं गलत हो गयी/
एक के बाद एक, एक पंक्ति के बाद दूसरी
मृतक नर्क की ओर रवाना हो रहे है/
नर्क की ओर दस हज़ार
और शाश्वतता की ओर एक/
यह हमारे लिए गर्व का विषय है
कि हमें आशातीत लोकप्रियता मिली है
हालाँकि यह संतुष्टि का विषय है
कि वे सारी प्रणालियाँ
जिन्होंने मनुष्यो को दैवीय गुण सिखाये
इस समय अस्त -व्यस्त हो चुकी हैं/
अगर आप मंदिरों की बात करें,
वे अब केवल संगमरमर की प्रतिमाएं हैं/
और पुजारी केवल भौतिक स्तर पर व्यस्त हैं/
अधिकतर संतों ने एक सीधा लिंक बना लिया है
नर्क के सर्वर्स के साथ
और हमारे आइवरी टावर से
उन्हें रिमोट कण्ट्रोल किया जाता है /
संसार के कैदखानों में संतो की संख्या देखो /
सुधारगृह तो नाममात्र के हैं
यह सभी हमारे सर्रोगेट नर्क हैं/
जहाँ पर हमारे एजेंट्स हमारे उत्पाद बेचते हैं
और परिपूर्ण व प्रचुर मात्रा में राक्षसी वृति पैदा करते हैं/
अमाजिनिआ :
आप किस तरह के संसार की परिकल्पना कर रहे है, लस्टस ?
किस चीज़ की कमी है?
जहाँ तक मुझे समझ आता है ,
संसार में सभी कुछ गलत ही तो है/
अब आप और किस तबाही की योजना बना रहे हैं/
लस्ट्स :
ईव के साथ मुख्य मुद्दा था, वर्जित फल।
इसे हमने पीछे छोड़ दिया है /
सभ्यता की रगों में ,
ज्ञान विष की तरह प्रवाहित हो रहा है/
सेटन ने इस मासूम वरदान को भृष्ट कर दिया,
और मानवता में दखल करते हुए
इसे विकृत भाईचारे में बदल डाला/
निःसंदेह ,वे ईश्वर की संतति है
उसके बेहद प्रिय
पर अब मुझे उसका चेहरा सदैव मायूस दिखता है/
विचारों में खोया,
उसके माथे पर चिंता की लकीरें दिखती है/
वह किसी सर्वनाश की प्रतीक्षा करता है/
सब कुछ अब उसके नियंत्रण से परे है/
मनुष्य जिन्होंने ने ज्ञान प्राप्त किया था
उन्होंने भी अपनी राह स्व-नियंत्रित करने के
ढंग खोज लिए हैं/
जिन लोगों को वह अपना संमझता था, नकली हैं /
केवल उन पर उसके ब्रांड का लेबल लगा हुआ है/
आंतरिक रूप से, वे दैवीय गुण खो चुके हैं/
हर धर्म अब संगमरमर की मूर्तियों का व्यापार करता है/
जबकि देवताओं की मूर्तियां अपने मोबाइल फोन पर व्यस्त हैं/
अब और क्या जानना बाकी है?
फेफड़ों को कितनी वायु की आवश्यकता होती है /
तुम कितना खा सकते हो?
तुम कितना ऊँचा सुन सकते हो?
हर वस्तु की एक सीमा होती है/
यहाँ तक की बुद्धिमता की भी सीमा होती है/
परन्तु , मूर्खता ,,,,,,
अमाजिनिआ
मूर्खता सीमाहीन है/
और सेटन ने अत्याधिक ज्ञान फ़ैला दिया
रोशनी के तीव्र प्रकाश सरीख़ा, जो आँखों को अँधा कर देता है/
अगर आपको किसी व्यक्ति की पाचन शक्ति बिगाड़नी है
मिठास भरे व्यंजन बनाओं
और उसे भरपेट खिलाओ /
ज्ञान जो जानकारी का जन्मदाता है
इतना लालायित करने वाला व्यंजन था
इस से मनुष्य के मुँह में पानी आ जाता था/
और देखो उसे
वह बिना भूख़ के खा रहा है,
और बिना कोई हास्य चैनल देखे, उसे हँसी ही नहीं आती /
ज्ञान के फल का अत्याहार करने से
मनुष्य को इसका नशा महसूस होता है,
इसका जादुई असर होता है/
और वह सीधे नर्क की राह पकड़ लेता है/
दैवीय वाणी :
सभी मृतकों को निर्देशित किया जाता है स्टालों की ओर
जोकि नर्क के द्वार पर सहायता की पेशकश कर रहे हैं /
एक सप्ताह या लगभग इतने ही समय में ,
मात्र एक या दो आत्माएं ही ऐसी दिखाई देती हैं
जिन्हे स्वर्ग की राह पर भेजा जाता है/
अगर हम भीड़ के हिसाब से देखें,
ऐसा प्रतीत होता है कि दानवो ने देवदूतों से बाज़ी मार ली है/
देवता संकट ग्रस्त प्रतीत होते हैं/
क्या उन्होंने इस ओर ध्यान दिया ?
याकि, वे केवलअपने सुखद निवास में नृत्य देखने में व्यस्त हैं?
या फ़िर, वे पृथ्वी के प्राणियों को कोसने में लगे हैं,
उनके दोषों के लिए जिस वजह से असमंजस फ़ैला
संसार में/
जबकि दानव तो परवाह ही नहीं करते उनकी धृष्टताओं की/
नरकद्वार पर बढ़ती हुए भीड़ ने
लस्टस को और शक्ति दी है
जिसका घमंड तो अपरिमित हो गया है/
यह प्रसन्नचित लोग उसका नया खोजा गया खज़ाना हैं/
लस्टस :
सर्ग 7 : दस आज्ञा-पत्र
लस्टस :
लस्टस : सर्ग 8
जवाबी विस्फ़ोट
आपकी धरती को तो गंभीर खतरा है/
चित्रगुप्त:
किलर इंस्टिंक्ट :
चित्रगुप्त :
किलर इंस्टिंक्ट :
चित्रगुप्त :
दैवीय वाणी :
लस्टस : सर्ग 9
निकट भविष्य में युद्ध
एक घोषणा :
एक घंटे के बाद पेंडीमोनियम में सत्र शुरू हो जाएगा/
दानवों की संसद, पेंडीमोनियम, एक गोल हॉल जैसी लगती है, जिसमें उच्च गुणवत्ता वाली कुर्सियां,, ए. सी. , वाई फाई और एक बड़ा स्क्रीन लगे हैं/
एक आवाज़ :
तबाही के अधिपति , महान लस्टस पधारने वाले हैं/सब खड़े हो जाते हैं और लस्टस केन्द्रीय मेज़ की ओर जाता है और अपना आसान ग्रहण करता है/ उसके दोनों और उसके राज्य के सचिव बैठे हैं /
हाल में लाखों पंखधारी जीव बैठे थे ,
जोकि इतना बड़ा था जितना कि भारत और अफ़ग़ान के बीच की दूरी जितना क्षेत्र /
क्वारंटाइन : ( महाराधिराज का विशेष सचिव)
मित्रों, साथियों और महान ज्वलंत आत्माओ,आज हमें ख़बर मिली है कि
देवगण बहुत निराश हैं/
और उन्होंने इस सारे मुद्दे पर
बहुत गंभीरता से सोचा है/
और वे योजना बना रहे हैं कि
किसी महान आत्मा को धरती पर भेजें /
और आप अच्छी तरह से जानते हैं, क्यों.
इस से पता चलता है कि वे कितने मायूस हैं/
वे कितना घिरा हुआ महसूस कर रहें हैं/
सर्वप्रथम, मुझे आपको बधाई देने दो /
आपने नदियों का रुख़ बदल दिया है
मानवता दिशाहीन हो चुकी है/
कवि , गायक और दार्शनिक
महसूस करते हैं जैसे कि वे अप्रासंगिक हैं/
ऐसा युद्ध पहले न कभी लड़ा गया था, न जीता गया था,
जिसमें शरीर आत्मा को भीतर से नष्ट कर देता है/
अब मैं, आदरपूर्वक,
महान लस्टस को आमंत्रित करता हूँ , आपको संबोधित करने के लिए/
लस्टस :
शैतानो , सेनापतियो, उच्च अधिकारियो, बदला लेने वालो, रक्षको , दावेदारो, छापा मारनेवालो औरछद्मवेशियो राजनीतिज्ञो, अध्यापको, वकीलों षडयंत्रकारियो , मिलावटखोरो, कॉरपोरेट मित्रो साथियो और अन्धकार प्रेमियो
क्वारंटाइन ने सही कहा है
ईश्वर इस समय गहन चिकित्सा इकाई में है
और उसका संसार लगभग मर चुका है/
तुमने उस प्रकाश पर अन्धकार के परदे डाल दिए हैं
जो स्वर्ग से उत्पन्न होता है/
मनुष्य अब मुसीबत के समय,
ईश्वर को या उसके ऊतकों को याद नहीं करते
पर हमें पुकारते हैं उनकी समस्याएं हल करने के लिए/
मैं एक बात पर आपका ध्यान पुनः केंद्रित करना चाहता हूँ
तुम्ही सब से मूल धारक हो
इस संसार के सभी अधिकारों के
सब से पहले, एक शून्य के अलावा कुछ भी नहीं था/
अन्धकार के अलावा कुछ भी नहीं था/
और यही अँधेरा प्रकाश का उत्पति स्त्रोत है/
केवल हम में ही अन्धकार देखने की शक्ति है
जबकि देवगण और उनके मनुष्य,
प्रकाश की उपस्थिति में भी कुछ नहीं देख पाते/
ईसा ने उन्हें कहा कि मदद मांगो,
पर उसने उन्हें यह नहीं बताया कि जब वे,
ऊपर की ओर देखते हुए चलेंगे,
सम्भवतः वे बुराई से टकरा कर अपना संतुलन खो देंगे,
जो लोगों की नज़र से बच कर रहती है
परन्तु एक साँप की तरह कुन्डली मारे रहती है
और मनुष्य के दिमाग को वास्तव में अव्यवस्थित कर देती है/
वह प्रकाश -पुँज जो देवदूतों के पास है
और जिसे वे लोगो में बिखेरते हैं,
जिनके दिमाग तो टिमटिमाते ही रहते हैं
मृत्यु के क्षण तक भयग्रस्त और प्रार्थनारत रहते हैं/
वे हमारी इस शक्ति से अनभिज्ञ हैं
कि हम तो एक ही फूँक से इसे बुझा सकते हैं/
दुनिया में जितनी भी शमाएँ हैं, जितने भी लैम्प हैं
उन सब में एक अंतर्निर्मित अदृढ़ता है;
वे लड़खड़ा जाते हैं,
जब उनका सामना गहरे रहस्यों से होता है/
आप जागते हैं
और दोबारा सो जाते हैं
लहरों की और कोई मंज़िल नहीं होती
सागर के अलावा/
कौन हमेशा के लिए चमकता रह सकता है?
कौन इतना शूरवीर है?
जीवन, प्रकाश की तरह ही, वापिस धकेल दिया जाता है
कब्र के अँधेरे की ओर /
इसलिए, आप जो इस महान साम्रज्य के गौरान्वित उत्तराधिकारी हैं
जिनका सूर्य कभी अस्त नहीं होता
याद रखना, ईसा आएँगे और जाएंगे,
परन्तु तुम अपनी चमक को बनाये रखोगे/
वे सोचते हैं
कि ईसा बहुत निर्बल थे
हमारी गर्म सांसों को झेलने के लिए/
इसलिए, प्रभु योजना बना रहे हैं कि
धरती को सुरक्षित रखने के लिए
भगवान कृष्ण या उनके जैसा ही कोई भेजें/
तुम्हे, चिंतित होने की आवश्यकता नहीं ,
डरने जैसी कोई बात नहीं /
दुर्योधन ! कहाँ हो तुम ?
अपनी उपस्थिति बताओ और अपने निन्यानवे भाइयों की भी/
तुम सोचते हो कि तुम महाभारत में पराजित हुए/
भगवान कृष्ण के कारण।
बिलकुल नहीं /
तुम इसलिए हारे क्योंकि कर्ण पांडवों का जवाबी विस्फोट नहीं था/
तुम्हे अपने दिमाग से काम लेना चाहिए था
जिसे कि तुमने अपने मामा शकुनि को रहन रख दिया था/
जिसके निजी स्वार्थ थे
और उसने अपनी लड़ाई तुम्हारे कन्धों पर लाद दी , छिपे तौर पर/
कृष्ण का सामना करने के लिए/
इस बार अच्छे से तैय्यारी करना/
यहाँ, हमारे पास अधिक अनुभवी योद्धा हैं/
मुझे संदेह है कि देवता कृष्ण को दोबारा चुनेंगे/
क्योंकि कृष्ण ने बहुत हत्याएं की,
फिर भी दानव तो अभी भी फलफूल रहें हैं/
हमारे अस्तित्व को कोई ख़तरा नहीं है/
क्योंकि हम अदृश्य हैं/
हम अमूर्त हैं/
हम आभासी वास्तविकता हैं/
हम लोगों के दिलों में बसते हैं /
हम उनके विश्वास में जीते हैं/
हम अमर हैं/
निडर /
और उतने ही शाश्वत
और चिरस्थायी जितना कि भगवान/
(लस्टस मंच से नीचे आ जाता है/)
दैवीय वाणी :
भगवान उनके गर्व के अभिकथन सुन रहे हैं/और उनके स्वयं -निर्मित संसार में
उन्हें इस विश्वास की घुड़सवारी करने दे रहें है/
कौन जानता है
कि आज का सूर्य किस प्रतिशोध के साथ उदित होगा/
वही सूर्य जो कल कोमलता से अस्त हो गया था/
लस्टस : सर्ग १०
ब्रम्हांड में भूकम्प
ब्रह्मा इंद्र और विष्णु से विचार विमर्श कर रहे हैं/
ब्रह्मा :
संसार में एक विचित्र स्थिति उत्पन्न हो रही है/
हमें ऐसी प्रतिध्वनियो की अनुभूति हो रही है
जैसे कि युद्ध की पूर्व सूचना हो/
दानव दोबारा अपना सिर उठा रहे हैं,
और एक के बाद एक चुनौतियां दिए जा रहे हैं/
लस्टस सिँहासनासीन हो चुका है /
और उसने दृढ़तापूर्वक दावा किया है
कि सम्पूर्ण धरती उसके क़ानूनी अधिकार- क्षेत्र में है/
विष्णु, जाइये और तथ्यों की पुष्टि कीजिये/
और वापिस आकर स्थिति से अवगत करवाएं /
यह एक खतरनाक विस्तार है/
विष्णु :
क्या मैं इंद्र को साथ ले जा सकता हूँ ?
ब्रह्मा :
इंद्र ,आप विष्णु के साथ जाईये/
मुझे स्थिति का सही जायज़ा मिलना चाहिए/
(रास्ते में उन्हें नारद मिलते हैं/)
नारद:
तो, आप धरती की ओर बढ़ रहे हैं/
आपको पासपोर्ट लेना पड़ेगा /
विष्णु :
पासपोर्ट? हमारी जाँच कौन करेगा?
नारद :
यह देखिये/ मैं पासपोर्ट-धारी हूँ.
आपको प्रवेश द्वार पर ही रोक दिया जायेगा/
अब संसार की घेराबंदी हो चुकी है/
विष्णु :
नारद, अगर ऐसा बदलाव आ चुका है
आपने मुझे अभी तक सूचित क्यों नहीं किया?
क्या दानव इतने अभिमानी,
इतने गर्वीले और इतने मूर्ख हो सकते हैं
कि देवदूतों की शक्ति को ललकारें/
क्या वे दुर्गा को भूल चुके हैं ?
क्या वे भूल चुके हैं *शुंम्भ और *निशुम्भ को
कहाँ पहुंचा दिया गया था/
नारद :
आपको ज्ञात है बुराई में
जीवित रहने की प्रबल भावना होती है/
यह कभी मरती नहीं/
यह केवल अपने रूप बदलती रहती है/
मैंने वहां दुर्योधन को देखा है/
मैंने *शुंम्भ और *निशुम्भ को भी देखा है
पेंडीमोनियम में गरजते हुए /
देवराज इंद्र , क्या आप यकीन करेंगे
*महिषासुर लौट आया है आप से लड़ने के लिए/
* रक्तबीज भी वहीँ पर है/
* शुंम्भ, निशुम्भ, महिषासुर और रक्तबीज पौराणिक कथाओं में दानव
आपके पास कोई भी नहीं है, इन राक्षसों का सामना करने के लिए/
यह बेहतर विकल्प होगा यदि आप दुर्गा को ही भेजें
एक बार फिर से /
वे धरती की बाहरी सीमा पहुँच जाते हैं/और देखते हैं कि सीमा रेखा पर अंधकार के साम्राज्य के रक्षक योद्धा तैनात है/ उन्हें पता चलता हैं कि यहाँ तक हवाई-मार्ग अवरुद्ध हैं/
अब वे केवल दूर से ही संसार की झलक देख सकते थे. यह रात में जगमगा रहा था /
विष्णु :
(इंद्र, मुझे अपनी दूरबीन दो/)
confirm
विष्णु:
मुझे एक जुलूस दिखाई दे रहा है /
लोगों ने गणेश की मूर्ति उठायी हुई है /
वे उसे नदी तक ले कर जाते है
और जल में विसर्जित कर देते है/
और उसके तुरन्त बाद ,
कुछ लोग धड़ पर झपटते है
इसे तोड़ देते है और मोती ले कर चल् देते हैं/
बहुत से ऐसे धार्मिक जुलूस होते हैं
जिन में विभिन्न नारे लगाए जाते है/
और लोग एक दुसरे से धक्का-मुक्की करते हैं
लड़ाई करते हैं/
हत्याएं, दंगे, रक्तस्नान
धर्म के नाम पर/
इंद्र:
देखो तो, यह क्या है वहां?
विष्णु:
वहां बहुत से झंडे हैं
और एक नेता
और बहुत से लोग उसका भाषण सुनने आये हैं/
इंद्र :
नेता! क्या वहां कोई चुनाव है?
विष्णु :
यह विचित्र लग रहा है/
उनकी कल्पना शीलता पर
लस्टस कैसे अपनी शक्ति का प्रयोग कर रहा है?
जस्टिस की जगह वे *लस्टिस की बातें कर रहे हैं/
जस्टिफिकेशन की बजाय, वे लस्टिफिकेशन की बात कर रहे हैं
और वे *लस्टिट्यूशन के प्रति अपनी निष्ठा दर्शा रहे हैं/
(भौंचकित हो कर, वे ब्रह्मा के पास लौट आते हैं)
विष्णु:
स्थिति वास्तव में बुरी है, देवराज ब्रह्मा
हमारे पास 'टेली शॉटस' (वीडियो) हैं
कि दानव धरती पर किस तरह काम कर रहे हैं
जहाँ हमारे प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया था /
यह रही एक 'पेन ड्राइव '
आप इसे फुर्सत से देखिये/
पर जितने जल्दी सम्भव हो, देख लीजिये/
ऐसा प्रतीत होता है, स्थिति हाथ से निकली जा रही है/
(अगले दिन)
ब्रह्मा: (विष्णु से)
विष्णु, मैंने 'पेन ड्राइव' देख ली है/
इंद्र को भी बुलाइये ,
धरती पर जो पूरी स्थिति चल रही है
हमें उसका पूरा लेखा जोखा रखना होगा/
एक निर्णायक युद्ध का वक़्त आ गया लगता है/
(इंद्र भी उनके साथ शामिल हो जाता है/)
आओ सब प्रभु के पास चले और जा कर सारी ख़बर दें/
यह एक बहुत गंभीर मुद्दा है/
(वे प्रभु के समक्ष उपस्थित होते हैं.)
प्रभु:
क्या आप फिर से दानवों को ठिकाने लगाने में असमर्थ रहे हैं
ब्रह्मा?
मैं गुरु नानक और नौ गुरुओं को भेजा
जिन की गुरबाणी अभी तक गूँज रही है
पूरे ब्रह्माण्ड में /
अनगिनत लोग उनका पाठ करते हैं/
और धन्य महसूस करते हैं/
मैंने ओशो को भेजा, मैंने बुद्ध को भेजा /
मैंने महावीर को भेजा, मैंने विवेकानंद को भेजा/
ऐसा नहीं कि हमने प्रयास नहीं किये/
वो आग जो दानवों ने भड़कायी है
दफ़न होने से इंकार कर रही है/
मैं लस्टस की प्रेस कांफ्रेंस देख रहा था/
वह तो हर हद से गुज़र रहा है/
बुराई तो अच्छाई का ज़ोरदार खंडन है/
दोनों खतरनाक संतुलन के कग़ार पर हैं/
इसके बावजूद , यदि बुराई मैदान पर कब्ज़ा करने की कोशिश करती है
जोकि अच्छाई की धरोहर है,
असंतुलन हो कर ही रहेगा,
और सारी धरती हिल सकती है/
और नीचे भी भूकंप आ सकते
और यहाँ ब्रह्माण्ड में भी।
लस्टस को एक चुनौती भेजो कि
वह अपने तौर तरीके सुधार ले/
यदि वह ऐसा नहीं करता, तब
वह विनाश को आमंत्रित कर रहा है /
(प्रभु आराम करने चले जाते हैं)
लस्टस को प्रभु की चेतावनी मिल जाती है/
(धरती के किसी भाग में
एक गायक काले कपड़ों में प्रकट होता है/
वह विलियम वर्ड्सवर्थ से मिलता है/
विलियम वर्ड्सवर्थ शोकाकुल है)
गायक :
आप रो क्यों रहे हैं विलियम वर्ड्सवर्थ?
विलियम वर्ड्सवर्थ :
लूसी ग्रे की मृत्यु हो चुकी है/
गायक:
उसकी मृत्यु तो आपके जीवन काल में ही हो गयी थी/
आपने लिखा था कि
वह धरती के दैनिक चक्र का भाग बन चुकी है
अब क्या मसला है?
विलियम वर्ड्सवर्थ :
उसका उत्तर भारत में पुनर्जन्म हुआ था
चरवाहों के एक परिवार में
मेरी लूसी ग्रे ,
उसका अपहरण किया गया और
सामूहिक बलात्कार किया गया/
और उसके बाद, उसे मार दिया गया/
और उसने एक समाचारपत्र की कटिंग दिखाई
जिसमें लिखा था कि उच्च -वर्गीय लोगों ने
उस नन्ही मासूम का अपहरण किया
सामूहिक बलात्कार किया और उसके बाद
उसका क़त्ल कर दिया/
(गायक को सांस लेना दूभर हो जाता है/
वह बेहोश हो कर वर्ड्सवर्थ की बाँहों में गिर जाता है/)
दैवीय वाणी :
देवदूतों आओ! अब समय आ गया है
चिंतित होने का/
प्रतीत होता है कि तुम्हारे लोग
पथभृष्ट हो चुके है और बहुत निराश हैं/
कहाँ गयी आपकी शक्ति ?
कहाँ गया आपका ख़ौफ़ ?
अब राजा की सुनता ही कौन है ?
क्या आप अभी भी इसे साम्राज्य कहते हैं?
लस्टस : सर्ग 11
महायुद्ध
किल्लर इंस्टिंक्ट :
आकाशवाणी :
किल्लर इंस्टिंक्ट:
ईश्वर :
चित्रगुप्त :
राँझा
ब्रह्मा:
विष्णु :
1990 में संसार बदल गया
इंद्र:
आवाज़ें :
आवाज़ें :
लस्ट्स :
आवाज़ें :
आवाज़ें :
लस्टस :
ईश्वर :
इसलिए, ये यहाँ आपके साथ रह कर यातनाएं झेल रहे हैं/
आप क्या सोचते हैं कि आपको बक़्श दिया जाएगा/
और यह सारे लोग यहाँ से सही सलामत और जीवित वापिस जा पाएंगे/?
जो कोई भी युद्ध-भूमि में गया , जीवित नहीं छोड़ा गया/
कुरुक्षेत्र में , कौरवों की तरफ
महान भीष्म, द्रोण, कर्ण
और वह सिरफिरा दुर्योधन था/
क्या वे सब केवल पांच पांडवों का सामना कर पाये ?
हम यह देख कर उदास हैं
कितने ही लोग, जिन्हें हमने शान्ति और खुशी की पेशकश की थी
उन्होंने आप की ओर रहने का विलल्प चुना /
इसबात से बेपरवाह कि उनके इस कदम का क्या मतलब निकलेगा/
यह अध्यापक, यह डॉक्टर,
यह धर्म के ठेकेदार
हमने कभी नहीं सोचा था कि यह हमें धोखा देंगे/
यह दयनीय बात है कि आपके शूरवीरों की सेना को विश्वास है
कि वे हमारे संभावनाओं को ग्रहण लगा देंगे/
मैं हमेशा से एक स्नेही पिता रहा हूँ,
पर क्या वे मुझे इस तरह से धोखा देंगे,
और बेईमानी करेंगे?
यह उनके स्वभाव के विरुद्ध है
और मेरे स्वाभाव् से भी मेल नहीं खाता
कि मैं उन्हें माफ़ कर दूँ/
तुम्हारी खातिर, अरे ओ मानव की विशेष प्रजाति
अध्यापक, यूनिवर्सिटी प्रोफेसर और डॉक्टर,
जिन्हे विशेष शक्तियां और प्रतिष्ठा दी गयी थी
मानवता की सहायता करने के लिए
मुझे उन सब पर तरस आ रहा है
जिन्हे अच्छी नौकरियां औरअच्छी तनख्वाह नहीं मिली
यद्यपि वे जो उद्यमी बन गए
और उन्होंने बहुत से कॉलेज शुरू कर दिए/
और मेडिकल संसथान
वे माफ़ी के लायक नहीं है/
क्या आप सोचते हैं कि सभी कुछ बिकाऊ है?
आपको कभी भी माफ़ नहीं किया जायेगा/
मैं विशेष निर्देश दूंगा कि
इस पवित्र युद्ध में आपकी जान न ली जाये
आप जीवित बचेंगे और आपको त्याग दिया जायेगा/
आपको कभी भी क्षमा नहीं मिलेगी/
और राजनीतिज्ञों के लिए भी कोई क्षमादान नहीं है
वे तो इस पूरी खेप में सब से गंदे हैं/
हम घोषित करते हैं कि आपका अपराध अक्षम्य है/
और आपको दानवों के सुपुर्द करते हैं/
(जब यह महान व्यक्ति युद्ध सम्मेलन में हैं, स्वर्ग के अर्ध -भूमि क्षेत्र में युद्ध ज़ोर शोर से लड़ा जा रहा है/
ईश्वर चिंतित मुद्रा में प्रकट होते हैं/)
ईश्वर :
ब्रह्मा! मैं बहुत खून खराबा देख रहा हूँ/
हमने अपने बहुत से महान योद्धा गवाँ दिए हैं/
और मुझे क्षोभ है कि ये सारी सेनाएं
दानवों की ओर हो गयी हैं/
लस्टस हम पर बहुत भारी पड़ रहा है /
अच्छा रहेगा यदि हम कुछ समय के लिए कदम पीछे हटा लें /
युद्ध विराम संधि की बात करो
और वार्ताकारों को भेजो इस युद्ध का अंत करने के लिए/
ब्रह्मा :
पिताश्री , केवल इतना ही नहीं
यदि परिचालन को विराम दिया जाता है
हम अपनी सेनाएं पुनः संयोजित कर पाएंगे/
और इसी दौरान
हम देखेंगे कि कैसे इस असुंतलन को
ठीक किया जा सके,
पिताश्री, हमें समय चाहिए/
(एक युद्ध परिषद् को बुलाया जाता है)
चित्रगुप्त एक प्रस्ताव रखते हैं, जिसका अनुमोदन सभी के द्वारा किया जाता है/ परन्तु दुर्गा इसे मानने से इंकार कर देती है/)
दुर्गा:
मैं उनके खून की नदियाँ बहा दूंगी/
देख ती हूँ, वे कैसे मुड़ कर आ सकते हैं?
"केवल एक बार मुझे उन्हें रोकने का प्रयास करने दीजिये/"
" दुर्गा आ रही है, इंद्र, जाओ और उन्हें बताओ/''
सब ख़ामोश हो जाते हैं/
ईश्वर दुर्गा के इस अंतिम प्रहार की प्रतीक्षा करते हैं/)
किल्लर इंस्टिक्ट :
दुर्गा दानवों पर प्रहार करती है
जो मिसाइलों से सुसज्जित थे और जिनके पास
सशस्त्र प्रणालियाँ, टैंक्स और रॉकेट् थे/
विस्फ़ोटक सामग्री का खुल कर उपयोग हो रहा था
जिस से वे स्वर्ग के स्टेशनों को आग लगा रहे थे /
इस से दुर्गा क्रोधित हो गयी/
और दानव् समूह पर टूट पड़ी
अपने शस्त्र और अस्त्र के साथ
जिसके परिणाम स्वरूप
मामोँन , एसमॉडस , लेविथान और बेलफिगोर
की मृत्यु हो गयी/
( लस्टस युद्ध परिषद् बुलवाता है)
किल्लर इंस्टिंक्ट :
दुर्गा के इस क्रुद्ध प्रहार ने दानवों के होश उड़ा दिए हैं/
लस्ट्स ने युद्ध परिषद को बुलाया है/
मध्यस्थ लोग युद्ध विराम संधि की कोशिश कर रहें हैं/
जबकि आग लगने वाली स्थिति ज़ारी है/
मृत्यु -दर बढ़ रही है
और दोनों ओर के लोगों ने लाखों जानें ली हैं/
इतना लहू बहा दिया गया है
कि आँखों के आगे भीष्ण महाभारत का
भयानक दृश्य उभरने लगा है/
अप्पोलीअन मुख्यालय से आ रही
नवीनतम खबर बता रही है कि
युद्ध विराम संधि हो गयी है/
युद्ध रुक गया है /
और युद्धविराम की यह शर्ते हैं/
ब्रह्मा और सेटन द्वारा हस्ताक्षरित युद्ध-विराम संधि :
युद्ध की गतिविधियाँ तुरंत प्रभाव से रोक दी जाएँ/
इस युद्ध में न तो कोई विजेता है
और न ही कोई पराजित हुआ है/
लस्टस स्वर्ग की सीमाओं से पीछे हट जायेगा
और दैवीय सेनाएं भी वापिसी का रुख़ लेंगी/
उन क्षेत्रों से जो पहले लूसिफर के अधिकार क्षेत्र में थी/
अब से, दोनों दल अपने अपने कार्यक्षेत्र में कार्यरत होंगे/
लस्टस दैवीय शक्तियों का अधिकार प्राप्त करके,
मासूम मानवता को पथ भ्रमित करना बंद करेगा/
अपने प्रचुर आशीर्वाद के साथ/
देवता वादा करते हैं कि वे पीछे हट जायेंगे
और वापिस चिंतन मनन में लग जाएंगे/
लस्टस धार्मिक पूजा स्थलों से दूर रहेगा/
लस्ट :
यह बहुत रोचक बात लग रही है कि
देवताओं ने राजनेताओं को भी वर्जित लोगों की सूची में डाला है/
पर लस्ट्स इस मांग पर अड़ गया
कि यह अधिकार क्षेत्र उसका ही रहे/
शिक्षा को समवर्ती सूची में रखा गया/
और लस्टस ने वादा किया कि वह
धरती और आकाश में जितने भी देवीय सैन्य शिविर निगरानी हेतु हैं
उन्के काम में कभी भी बाधा नहीं डालेगा/
टाइम :
सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में एक असहज सी शांति व्याप्त है/
वृक्ष , पक्षी , नदियाँ ,पहाड़
एक सधी हुई ख़ामोशी ओढ़े हुए हैं/\
कोई भी खुलकर बात नहीं कर रहा
न तो किसी के समर्थन में, न किसी के विरोध में
न लस्ट्स के और न देवताओं के/
हवाएं वापिस अपना संतुलन प्राप्त कर रही हैं/
धरती फिर से सामान्य हो रही है/
दोनों ओर के इतने वज्रपातों से हिलने के बाद भी/
लस्टस का अभिमान खंडित हो गया है
और पूरे ब्रह्माण्ड पर साम्राज्य स्थापित करने की
जो उसकी भव्य योजना थी,वह भी धराशायी हो गई /
उस के पर क़तर दिए गए हैं
और वह ईर्ष्यालु झील में डूब रहा है
वे देवता जो दुर्गा द्वारा, विनाश से बचा लिए गए
उन्हें पछतावा हो रहा हैं
और वे अनुभव क र रहे हैं कि उन्होंने धरती के प्राणियों की अवहेलना की
और इस तरह दानवों को जगह दे दी
अपने पंख पसारने के लिए/
लोग अपने काम पर पहले जैसे सामान्य रूप से जा रहे हैं
वे अभी भी घातक पाप के बीज अपने कन्धों पर लादे हुए हैं/
ऐसा लगता है जैसे कुछ भी घटित नहीं हुआ था/
ऐसी है हमारी मानव प्रजाति /
उदासीन, संवेदनहीन /
अपनी ही होनी के प्रति उदासीन /
हमेशा की तरह, भावनाओं में बह कर
अनैतिक तत्वों के हाथों में खेली जाने वाली
और पूर्ण अनभिज्ञता के कारण
दानव और उसके अभिकर्ताओं के आगे अपनी आत्मा गवाँ देने वाली /
फ़ॉस्टस बिलजेबब से
कुछ भी नहीं गवायाँ हम ने, अगर हम अभी भी जीवित हैं /
भूल जाओ, उस संघर्ष को
उम्मीद पर ही तो दुनिया क़ायम है/
बिलजेबब:
फ़ॉस्टस, तुमसे बेहतर कौन जानता है
स्वर्ग खोने का मतलब
और आशा भी/
लस्टस :
आदरणीय भाई,सेटन
देवता हमारे लिए यातनाएँ और क्षति लाये /
शायद हमने अधिक ऊंची उड़ान ले ली थी ,
और बहुत ऊँचे सपने देखने लगे थे /
हमारे पंख पिघल गए
और हम समुद्र में गिर गए/
क्या हम अपना मिशन त्याग दें ?
देवदूतों से डरने लग जाएँ और विषाद ग्रस्त हो जाएँ/
क्या हम इस महान आक्रमण से मिले फायदे
यूं ही व्यर्थ जाने दें ?
क्या हुआ ,अगर हम ये युद्ध हार गए तो/
हमने धरती और आकाश को हिला के रख दिया/
हमारा सम्मान, हमारी शक्ति
सब कुछ तो दाँव पर लगा था /
मैंने उस महान कौतुक को देखा है/
हमारे भृत्य इतने शौर्य से लड़े /
हमारे सेनापति, हमारे योद्धाओं ने
स्वर्गदूतों को युद्ध में व्यस्त दिया/
भय :
तुम सभी साझेदारों,
अध्यापकों, अभियंताओं
वास्तुकारों, व्यापारियों को नोटिस भेजो
जिन्होंमे अथक मेहनत की युवा वर्ग से
काम, काम और काम करवाने के लिए
जब तक के वे स्वचालित नहीं हो गए ,
अपना चमकता अस्तित्व खो कर ,
लस्टस के आधिपत्य में सुरक्षित रहने करने के लिए /
हम दोबारा आक्रमण करेंगे/
केवल एक हिस्सा ही दो,
जब पूरा खोने का खतरा हो /
हम ने सब कुछ नहीं गंवाया, अगर हम अब भी नियन्त्रण में रहें /
(प्रस्थान)
लस्टस
हमारा ब्रह्माण्ड तो एक विभाजित घर है,
बुराई की उपस्थिति से अच्छाई पूर्णतः संतुलित है/
दानव नमक की तरह हैं जो कि
सभी स्वर्गदूतों के, सभी शक्कर युक्त खाद्य पदार्थों को
ख़लाओं के लिए सुपाच्य बनाते हैं/
अतीत में कौन से युग ,
सतयुग, त्रेता, द्वापर बुराइयों से मुक्त थे ?
कलयुग में जो एक मात्र भिन्नता हम देखते हैं, वह यह है
कि बुराई का मानवीकरण किसी एक व्यक्ति के रूप में नहीं किया गया
जैसे कि पहले रावण या कंस अथवा दुर्योधन के रूप में किया गया था /
कलयुग एक् टाइम कैप्सूल है, जिस में
ज्ञान ने अपनी बुरी शक्तियां दिखाई हैं
लोग ईश्वर के प्रति आस्था-हीन हो जाते हैं/
हठधर्मी हो जाते हैं
और अपने वैकल्पिक देवता बना लेते हैं/
लस्टस सेटन का एक काल्पनिक पुनः रूप है/
अधिक ख़ौफ़नाक क्योंकि वह प्रयत्न करता है
देवताओं और बुराईयों के संगठनों में
युद्ध छिड़ जाता है
युद्ध के वीभत्स हादसे बाध्य करते हैं दोनों पक्षों को
एक युद्ध -संधि विराम के लिए ताकि
अंतिम आक्रमण से पूर्व थोड़ा समय जुटाया जा सके/
लस्टस अभी भी अपने ओहदे पर क़ायम है/
अग्नि के सबसे महत्वपूर्व प्रारूप सम
यहाँ-वहाँ यदि कुछ उलट-फेर करने पड़ें
इसे केवल कुछ क्षति ही आंका जाएगा, व्यवसाय के साम्राज्य में /
अब समय आ गया है कि देवता पुनर्विचार करें
किस तरह से वे पुनः प्राप्त सकते हैं
मानव हृदय पर अपनी खोयी हुई पकड़ /
उन्हें दूसरों को अधिक भावनात्मक समर्थन देना होगा
और कम लापरवाह और कम निर्दयी बनना पड़ेगा/
क्या वे सूचना मिलते ही तुरंत ध्यान देंगे
यदि कहीं कोई मानवीय क्षति हुई हो/
दानवों जैसे, जो हमेशा मनुष्यों के आदेश मानते हैं
और उनके लिए तत्परता से कार्यशील रहते हैं?
दानव उनके मन की बात समझते हैं
उनके लिए मल्हम जुटाते हैं/
और उन्हें ऐसे स्थानों में जाने के लिए लालायित करते हैं
जहाँ पर अंत में उनकी शांति नष्ट हो जाती है/
सृजना और कुशलक्षेम के देवताओ
लस्टस और उसके दानवों ने
मानवता का संतुलन बिगाड़ दिया है /
लोग विक्षिप्त हो गए हैं/
पुनर्विचार कीजिये उन्हें इस उत्तेजना के संसार से
वास्तिविकता और स्थिरबुद्धिता के संसार में
कैसे वापिस लाया जाये /
*******************************************************************************
मूल लेखक : डॉ. जे. एस। आनन्द
अनुवादिका : रजनी छाबड़ा
*लस्टिस : लस्टस के द्वारा बनाई गयी न्याय-प्रणाली
*लस्टीटूटूशन : लस्टस द्वारा बनाया गया संविधान
(भौंचकित हो कर , वे ब्रह्मा के पास लौट आते हैं)
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें