लस्टस full file

  

  लस्टस 

सेटन का उत्तराधिकारी 

अन्धकार के साम्राज्य का अधिपति 


मानसिक विद्रूपता का भयानक आईना दिखाता नाटकीय एकालाप ' लस्टस '

मूल रचना इंग्लिश : डॉ.जे. एस. आनंद 

हिंदी अनुवाद :  रजनी छाबड़ा 



लस्टस 

 पात्र परिचय 
लस्टोनिआ : लस्टस का राज्य, ईडन का  एक  विकल्प शहर / लस्टोनिआ में संविधान को लुस्टिटूयशन कहा जाता है/ लोग जो भी करते हैं , उसको लसटिफाई करते हैं/और जस्टिस को लस्टिस कहते हैं/ प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्मों के लसटिफिकेशन में आस्था रखता है, अन्यथा उसे भटका हुआ कहा जाता है/


लस्टस  : महान दैत्य राजकुमार, जिसे सेटन का अंधकार का राज्य विरासत में मिला है /

प्रभु : महान सर्जक , जिसे सेटन के बाद लस्टस  चुनौती देता है/

दुर्गा, ब्रह्मा,विष्णु, इन्द्र : हिन्दू पौराणिकी में देवी देवता 

ग्रेडा (चंचल माँ ): धन लोलुपता की देवी (नव पौराणिक कथा में )

अमाज़ीनिआ : सेटन के पुत्री जिसने ऑक्सफ़ोर्ड विश्व विद्यालय से भौतिक शास्त्र में पी. एच.डी. की                            उपाधि प्राप्त की है 
सेटन :             महादानव जो अब वृद्धावस्था में है और अपना राज्य सँभालने में खुद को असमर्थ                               पाता है 
बिल्जेबब, लूसिफ़र फियर, कॉन्सिपिरेसी और तेंसोनिया :
दानव के कर्मचारी  जो अपने प्रशासनिक ब्लॉक सँभालते हैं 
काल, नारद और कुरु : भारतीय पौराणिकी के पात्र 
सैमुएल , लेसबिआ :  नाटक के पात्र 
टाइम 
कोरस 
कॉस्मिक वॉइस , ओरेकल , सिंगर 
विलियम वर्ड्सवर्थ 
सेंटेज , डेन्ज़ी , गरीला , विचिस 
  




लस्टस


आह्वान

हे ! सरस्वती, मैं एक बार पुनः आपके पवित्र मंदिर में आया हूं /

मेरी लेखनी को नई ऊर्जा  दो 

मानव के पतन के कारण खोजने के लिए 

और लस्टस  के उत्थान के 

बाध्य कर दिया जिसने प्रभु और उसके शक्तिवान फ़रिश्तों को 

आत्म -विश्लेषण के लिए , क्यों परास्त होना पड़ा मानव को दानव से 

और किसने विमुख  किया मानव को 

दैवीय शक्तियों से और बाध्य किया 

लस्ट्स के  दिन प्रतिदिन बढ़ते आधिपत्य और शक्ति की 

शरण में जाने के लिए। 


लस्टस  जो इच्छुक था मानव के रवैये को देव के समक्ष उचित ठहराने का 

खिलवाढ़ कर  रहा था मानवीय मन की दुर्बलता के साथ 

सम्मान, स्वतंत्रता और इच्छा शक्ति की आड़ में 

और उसकी उच्च श्रेणी की  बौद्धिक वाकपटुता ने  

कैद कर  दी उनकी कल्पना शक्ति 

ताकि शीघ्र ही उन्हें यह आभास होने लगा 

यदि वे चाहते हैं कि मन-वांछित ही घटे 

केवल लस्टस और उसका राज्य ही है 

जो उन्हें बेलग़ाम आज़ादी दे सकते हैं/


प्रभु और उसकी दिनों-दिन क्षीण होती जा रही सेना

अपने बलपूर्वक रवैये के साथ जारी रखे हुए थी 

मृतकों की उपासना

और उनके अनुयायियों के लिए निर्धारित करती 

आचरण की एक सारणी 

जिससे आमआदमी साधारण खुशियों से भी वंचित हो जाता 


इस तरह, उन्होंने मुख मोड़ लिए मंदिरों से 

और भीड़ बढ़ ने लगी मदिरालयों, सिनेमाघरों 

रेस्त्रां और क्लबों में 

लोग,जो मुक्ति चाहते थे 

कमरतोड़ काम के बोझ से 

एकत्रित होते खेल खेलने,  महिलाओं से मिलने के लिए 

और मदिरा पान व् मौज़ मस्ती  के लिए 

परन्तु, जैसे जैसे सामूहिक अर्थव्यवस्था की पकड़ 

बढ़ने लगी, राष्ट्र की आर्थिक व्यवस्था पर 

अधिकाधिक युवा धकेल दिए गए नौकरियों की ओर 

जहाँ न तो उन्हें खुशी मिलती, न आशा की कोई किरण 

केवल आकांक्षा परोसी जाते उन्हें 

मात्र स्व -केंद्रित अतिरंजित जुनून 

रुग्ण मानसिकता और निरंतर दर्द से युक्त /

इन सशक्त लोगों की सेना 

जो दानव के नाम पर जी रहे थे 

दिखने में धार्मिक लगते थे 

और प्रभु के प्रति पूर्णतः समर्पित 

मंदिरों में अर्चना करते 

धार्मिक स्थलों पे सजदे में सिर झुकाते 

स्पष्ट रूप से अपनी  दमित भावनाओं से मुक्ति पाने के लिए 

फिर भी, उनकी निष्ठा तो शैतान के प्रति ही थी 

मानवीय इच्छाओं की पूर्ण स्वतंत्रता में यकीन के साथ /


हे, सरस्वती! मुझे सामर्थ्य दो वर्णन करने की 

कैसे घटित होता है यह देवत्व को लूटने का काम 

कैसे  यह दुष्ट लोग इस संसार को बदल देते हैं 

आध्पित्य हो जाता हैं अन्धकार के साम्राज्य  का, 


और कैसे दैवीय साम्राज्य के दुर्ग एक के बाद  एक 

लस्टस  के कोप के आगे  धराशायी होने लगते है, 

और किस तरह अंततः प्रभु प्रयास करता है 

अपने खोये स्वर्ग को पुनः प्राप्त करने के लिए। 


मुझे शक्तिदान दो इस अधार्मिक युद्ध के 

अनपेक्षित विवरण करने हेतु 

जोकि लस्टस  और उसके समूह ने 

प्रभु पर थोपा 

जिसमें कितने ही फ़रिश्ते घातक रूप से घायल हुए 

और, अंत में दुर्गा का आह्वान किया गया 

दानवों  के नरसंहार के लिए 

अराजकता के अंत के लिए 

और ईश्वरीय व्यवस्था के पुनर्स्थापन के लिए 



मूल रचना: डॉ. जे. एस. आनंद  

अनुवाद : रजनी छाबड़ा 



 सर्ग  १  
ज्ञान:   खतरे का कार्यक्षेत्र 

(रामायण से एक दृश्य , वन के परिवेश में)

सीता : प्रभु, देखिये न, कितना सुन्दर प्राणी है यह ?
            
           यह सुनहरी मृग/

           मेरा मन आकुल  है इस सुन्दर जीव को पाने के लिए /
           
          प्रभु , क्या आप इसे मेरे लिए ला देंगे?


राम :   मुझे तो यह मायावी प्रतीत हो  रहा है / भूल जाओ इसे /

सीता : यह मुझे बहुत आकर्षित कर रहा है, प्रभु/
क्या इस दुनिया  में ऐसा कुछ है जो आपके लिए असम्भव हो?

 राम :  अगर तुम्हारी यही ज़िद है, मैं जाऊँगा इस जानवर को पकड़ने के लिए/
 (राम प्रस्थान करते हैं , लक्ष्मण को सुरक्षा का ख़्याल रखने के लिए कहते हुए)

एक आवाज़ , एक चीख़ ,सीता के आतुर कानों तक पहुँचती है/

सीता:  इतना समय बीत गया/  मेरे प्रभु जी वापिस नहीं आये/
लक्ष्मण, यह विचित्र चीख क्या है?
क्या तुम जा  कर अपने भ्राता को खोजोगे ?


लक्ष्मण :   मुझे तो यहीं रह कर, आपकी देखभाल करने के निर्देश दिए गए हैं, माता /

सीता :   परन्तु , मैं  चिंतित हूँ / जाओ और मेरे प्रभु की सुरक्षा सुनिश्चित करो/

लक्ष्मण:  पर माते, मैं वचनबद्ध हूँ/ 
                 
              मैं नहीं जा सकता /
                          



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सीता:   मैं तुम्हे आदेश देती हूँ, लक्ष्मण /

( इस से वह विवश हो जाता है )

लक्ष्मण:  अगर आपका यही आदेश है , मैं प्रस्थान करता हूँ/

             मैं इस कुटिया के गिर्द एक रेखा खींच रहा हूँ/ 
              इस दायरे से बहार आने का प्रयास मत कीजियेगा /

( लक्ष्मण प्रस्थान करते हैं/ और एक साधु  का आगमन होता है/

साधु :  भीक्ष्मदेह! (माते मुझे भिक्षा दें)

सीता : (उसे देख कर अचंभित होते हुए)

बाबा, आईये और भिक्षा ग्रहण कीजिये/

साधु:   मैं यहाँ बैठ रहा हूँ/ आप यहाँ आईये  और मुझे भिक्षा दीजिये/

सीता:  परन्तु, बाबा, मैं वहाँ नहीं आ सकती/

साधु अग्नि रेखा को पार करने की कोशिश करता है / पर आग की एक लपट उसे रोक देती है/ तब वह उस दायरे से कुछ दूरी पर जा कर  बैठ जाता है/

साधु:  आपको ही बाहर  आना पड़ेगा , माते/
अन्यथा,मैं आपको श्राप दे दूंगा/

भयभीत, सीता अब बाध्य हो गयी उस आग के दायरे से बाहर कदम  बढ़ाने को /
और उसका अपहरण कर  लिया गया, लंका अधिपति रावण के द्वारा, महादानव , जिसका ज्ञान दस मस्तिष्कों के बराबर था,  सर्वाधिक बलशाली लंकापति/

सहगान :


सर्वाधिक बुद्धिमान , सर्वाधिक ज्ञानी 
मनुष्य इस ब्रह्माण्ड का 
कर  रहा है अपवित्रीकरण 
किया सीता का अपहरण 
और अपने ही विनाश को दिया निमंत्रण 
क्या ज्ञान की अति 
अंततः मनुष्य से ऐसे अपराध करवाएगी 
और अंत में अपने ही पतन की अदालत में खड़ा कर देगी ?

रावण इसी कलयुग की ही तो उत्पति है 
अपने समय से कहीं आगे उत्पन्न हुआ 
सम्पूर्ण रूप से उतर आधुनिक मनुष्य  
जिसके प्रभुत्व में ज्ञान की परम शक्तियां होती हैं/
और उसकी लंका एक प्राचीन प्रारूप थी 
न्यूयोर्क और रोम जैसे  हमारे आधुनिक शहरों की 
बदलते वक़्त  के साथ साथ 
उसे हम से जोड़ता है 
उसका ज्ञान के प्रति घमंड 
सत्ता के लिए उसकी लालसा 
औरतों के प्रति उसकी  वासना 
और प्रभुत्व की असाधारण लोलुपता 
उसका अंत क्या होता है ?
और क्या बदा होगा भाग्य में 
इस प्राणी  के, जिसने कि 
लस्ट्स के हाथों में ही सौंप दिया हो 
अपना सम्पूर्ण विश्वास ?


आदम :

उसने भव्य प्रबंध मेरे लिए  किया था 

मेरे स्वागत और देखभाल के लिए 

जब मैं ठहरा उसके फार्म -हाउस पर (ईडन )

और यह सर्वथा निःशुल्क था, या पहले से ही भुगतान किया जा चुका था /

मुझे बिल्कुल भी आभास न था, कौन मेरे प्रति इतना दयालु था/

सब कुछ निःशुल्क था /

शीतल पेय और सुबह की चाय/

दोपहर के भोजन में ३६ व्यंजन और रात्रि-भोज में ? इतने ही /

    

दिन में, मुझे प्रसन्न रखने के लिए , 
हज़ारों  विकर्षण या यूं कहें, आकर्षण 
यहाँ सी. सी. टी. वी. कैमरे थे और भारी भरकम गार्ड्स
जो इर्द गिर्द ही खड़े रहते और करते सलाम 
यह हरित सम्पदा का वैभव, 
शीतल जल की झीलें और सुन्दर चेहरों के झुंड 
व्यायामशाला, क्रीड़ा स्थल, गोल्फ रेंज और घुड़दौड़/  



मैं स्वयं को पूर्णयतः सम्पन्न महसूस कर रहा था/
और जितना भी समय मैंने वहां बिताया 
मुझे महसूस हो रहा था  मेरा भरपूर ख्याल रखा जा रहा है/ 
मैं अत्यधिक आभारी था और 
चाहता था उसे मिलना, उसका धन्यवाद करना/
परन्तु यह कभी संभव न हो पाया /
फिर भी, हर सुबह, जब मंद बयार मेरा स्वागत करती 
मुझे सद्भावना भरा सन्देश मिलता / 
मैं सारा दिन स्वतंत्र हूँ अपनी मनमानी करने के लिए/ 


मैं उपभोग कर सकता था उसके जंगलों का, उसकी नदियों का, उसके सागर का,
उसकी हवाओं का, उसके पहाड़ों का, उसके वृक्षों का और उन पर शोध कर सकता था 
और नए नए अनुसन्धान कर सकता था /

परन्तु, कुछ सीमायें थी जिनके पार जाने की 
मुझे अनुमति न थी/ 
उसके कुत्ते  मुझ पर झपटने लगते/ 
उसके पहरेदार बहुत सख़्त थे /
मैं अक्सर उसका धन्यवाद करना भूल जाता 
उन सुविधाओं के लिए जो उसने मुझे निशुल्कः दी थी /
मुझे उस से कोई शिक़वा न था ,
मैं इतना अधिक ख़ुश था उस फार्महाउस पर 



परन्तु मुझे याद है कुत्ते मुझ पर झपट पड़ते 
जब कभी भी मैं ग़लत व्यवहार करता 
और मैं इतना अधिक उलझ गया था 
अपने अनुसंधानों और परम्पराओं में कि 
एक दिन ऐसा आया कि मैं स्मरणशून्य हो गया 
और भूल गया कि यह फार्महाउस उसका है /

मैंने  सोचा यह सब तो मेरा है, मैंने ही सब कुछ किया है /
आभार की भावना तो उड़नछू हो गयी 
मैंने सोचा कि मैं यहाँ का स्थाई निवासी हूँ 
और मनमर्ज़ी से जी सकता हूँ/



उनमुक्त इच्छा, उन्मुक्त आचरण 
मैंने उसके कुत्तों को विष दे दिया/
उसके पहरेदारों की जान ले ली 
और उन क्षेत्रों से भी परे देखने लगा 
जिन पर 'वर्जित' चिन्हित था /


कौन था मैं? कैसे हुई मेरी उत्पति? 
किसने मेरा यहाँ ठहराव सुनिश्चित किया?
किसने मुझे यह चेहरा, मेरा मस्तिष्क, मेरा रूपरंग दिया?
मेरे माता-पिता? मेरी संतति ?
मेरी पसंद और मेरी नापसंद ?
क्या मेरा चेहरा जिसे मैं अपना कहता था, मेरा है ?


अब तक, यह प्रश्न 

मुझे क्रोधित करते हैं /

और अब मैं  बिसरा चुका हूँ उस याद को 

कि कभी मेरा कोई धनवान मित्र था 

जिसने मुझे आमंत्रित किया था और 

एक लम्बे अर्से तक आवाभगत की  थी 

और निशुल्कः /


(अपने उतर-आधुनिक अस्तित्व पर विचार करते हुए )

क्या मैं  इस धरती पर भेजा गया था 

मात्र समय मापने के लिए 

वृद्ध होने के लिए 

और अंततः एक दिन सभी को अलविदा कहने के लिए /


क्या वे लाखों लोग 
बड़े किये गए थे, ग़ुलाम बनाने के लिए 
कारख़ानों और निर्माण-स्थलों पर ,
केवल बोझ ढोने वाले जानवरों की  तरह जीने के लिए/


यहां तक कि वो जो हाँकते  हैं इन मज़दूरों को 
जोकि दिन रात एक कर देते है, मेहनत करते हुए \
अपनी दौलत मापने में लगे रहते हैं 
और गहरे घूंट भरते हैं 
लाखों की मेहनत और विश्वास के दम पर 
क्या वे किसी भी तरह उनसे बेहतर हैं ?

हो सकता है वे सोचते है कि 
सारी प्रजाति में, वे सर्वोत्तम हैं ,
उन्हें वरद हस्त प्राप्त है 
देवों का , जो उनसे कोई प्र्शन नहीं करते /
जो मनचाही कर सकते हैं 
किसी के भी प्राण ले सकते हैं /
जिनके लिए कोई भी क़ानून नहीं है 
और जिनके मुंह ख़ून का स्वाद लग चुका है 
वे उतने ही है असम्बद्ध, जितने की वे 
जो अभावों  की पीड़ा को झेलते हैं 
यह कोई दैवीय व्यवस्था नहीं थी 
कि मनुष्य असमान और अन्यायी हों 
और इस दुनिया में 
केवल विजेता हों और शिकार हों /



यदि मैं इस संघर्ष के एक अंश के रूप में पैदा हुआ हूँ 
और भरपेट भोजन जुटाने में असमर्थ रहता हूँ 
यदि मेरे पास पर्याप्त धन है 
और फ़िर भी धनोपार्जन 
हावी रहता है मेरे दिल-ओ -दिमाग पर ?
यदि  केवल जीवित रहना ही मेरा परम लक्ष्य है 
मैं खुद हैरान हूँ कि मैं  प्रासंगिक हूँ  या अप्रासंगिक ?


क्या प्रभु ऐसी गलतियाँ कर सकते हैं 
कि मानव मात्र दुःख भोगने के लिए ही पैदा हुआ है 
या फिर केवल दूसरों को दुःख देने के लिए ही पैदा हुआ है 
क्या हमें इतनी बेशक़ीमती ज़िन्दगी 
केवल अपना पेट भरने के लिए मिली है और, कुछ भी नहीं 
सिवाय इसके की एक दिन हम यूं ही मर जाएँ निरर्थक ?


दैवीय वाणी :


नदियों और पहाड़ों से पूछो 

कैसे कायम रखते हैं वे 

अपनी मर्यादा और उत्तेजनाहीनता 

वे शान्तिप्रद जीवन में यकीन रखते हैं /

मानवता की सहस्त्रों वस्तुएँ प्रदान करते हैं 

और कोई भेद-भाव नहीं करते/


पक्षियों की प्रजाति में अनुपात का तीव्र बोध होता है 

आवश्यकता से अधिक एक भी दाना नहीं खाते ,

भविष्य के लिए एक भी दाना संग्रहित नहीं करते /

वे प्रकृति का ही एक अंश है, ख़ुश और आनंदित 

और सदैव उचित संतुलन में रहते है/


मानव प्रजाति की शांति भंग होती है

क्योंकि वे इस प्रवाह को भंग करते हैं 

और शाश्वत संतुलन को बिगाड़ते हैं /

केवल मनुष्य ही ऐसा प्राणी है 

जो शांत-प्रिय लोगों की दयालुता पूर्ण जाति से विदा हो जाता है 

और इस ग्रह के संतुलन को नष्ट  करने में लिप्त है/

सूर्य के प्रकाश को दबोचना चाहता है, पानी का स्वामीतित्त्व चाहता है/

हवा को झपटना चाहता है और सारी खुशियां क़ैद करना चाहता है /


वह सनकी इंसान !

हवा पर हुकूमत जताना चाहता है 

घोटाले करता है 

और भगवान का प्रचार करता है /



 गायक :

हे देवों, अरे दानवों 

मेरा तुम से कोई सम्बद्ध नहीं 

मैं दीवाना हूँ ,

क्या मैं लीयर  हूँ?

अरे नहीं. मैं मेकबेथ हूँ। 

नहीं, नहीं, नहीं, मैं फ़ॉस्टस हूँ/

फ़ॉस्टस,जो दानवों के पास गया 

क्या मैं एक दानव हूँ ?

सेटन ! तुम कहाँ हो?


मुझे कुछ धुंधला धुंधला याद है 

मैंने विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की थी 

कोई नौकरी नहीं 

कोई ज्ञान नहीं 

कोई प्यार नहीं 

केवल अधिक से अधिक पाने की ललक,

किस लिए? किसके लिए? 


क्या मैं इस दुनिया में  केवल आजीविका कमाने के लिए आया हूँ 

और उधार की किश्तें चुकाते चुकाते मरने के लिए आया हूँ 

अपने बच्चों का भरण -पोषण करने के अलावा क्या और कुछ भी नहीं ?


अरे .... मंदिर, मस्ज़िद , गिरिजाघरो

जहां वे चर्चा करते हैं राजनीति पर 

हे,... देवगण  

क्या आप भी शैतान में यकीन रखते हैं? 


यह जन्म, यह संसार, यह शिक्षा , 

यह प्यार,  यह करुणा ,

यह धनवान संसार और बेचारा मैं 

क्या यह सब अप्रासंगिक हैं /

क्या मुझ में विषमता है ?

एक मूर्खता है ?


हे बैकेट !

मुझे समझने में मदद करो 

गोडोट कौन था और वह आया या नहीं?


मैं जा रहा हूँ 

अरे गायको , अरे कवियो, अरे दार्शनिक लोगो

सुनो !

तुम्हारा आदमी अप्रासंगिक है /


वह मरने के लिए ही पैदा हुआ है/

केवल मरने के लिए /

कुछ भी नहीं करने के लिए/

हा हा हा हा हा हा 


दानवों ! तुम्हे सलाम 

 तुम्हे सलाम , हे,सेटन!

और तुम्हारे सगे सम्बन्धियों को, हे लस्टस !


मेरे पास करने लायक कुछ नहीं, 

विचारने लायक कुछ नहीं,

करने लायक कुछ नहीं ,

मुझे तो बस नष्ट ही होना है /

 हा हा हा हा हा हा 






सर्ग -2 आसन्न पतन के संकेत 

स्थान: नर्क का प्रवेश द्वार )
सेंटेज: ( एक संत जो भूतिया घर में पहुंचता है )

हैरानी की बात है, इससे पहले इतनी ठिठुरन कभी महसूस नहीं हुई /

डेंजी : (एक साध्वी) वे हमें यहाँ छोड़ कर चले गए हैं/ क्या हम स्वर्ग में हैं या नर्क में ?

सेंटेज : हम दोनों को ज़हर दे कर मार दिया गया है, क्योंकि हमारे स्वामी ने हमें आलिंगनबद्ध देख लिया था/ यह  एक पाप था/ फिर हम स्वर्ग में कैसे हो सकते हैं ?

(उन्हें कुछ विशालकाय दानव जैसी आकृतियां इधर उधर चहलक़दमी करते दिखती हैं/)

 बिल्जेबबआईये, आईये, यहाँ आपका स्वागत है/ ( वह उन्हें माला पहनाता है/)
(दोनों सहमे हुए थे, पर अचम्भित भी हुए इस पुष्पों द्वारा स्वागत से)

सेंटेज : इतनी ख़ामोशी क्यों है? क्या नर्क इतना पवित्र स्थल है?

बिल्जेबब:  खामोश रहिये/ स्वामी अस्वस्थ है/

सेंटेज :  स्वामी ?

बिल्जेबब : सेटन,  अंधकार का राजा/

सेंटेज : वह अस्वस्थ है? क्या मैं उसके लिए बाइबिल से कुछ पद पढ़ूं ?

बिल्जेबबक्या तुम तुरंत मृत्यु की इच्छा रखते हो? और यातना भोगना चाहते हो यातना गृह में?

(एक दानवीय आकृति की ओर इंगित करते हुए)
गरिल्ला , इस आदमी को ले जाओ और आग की झील में डुबकी लगवाओ/



उसे अपनी बाइबिल का यहीं परित्याग करने के लिए कहो/
डेन्ज़ी ,क्या तुमने अपने धार्मिक ग्रन्थ यहीं पीछे छोड़ दिए हैं या फिर तुम भी अग्नि-स्नान करना चाहती हो ?
(सभी प्रस्थान करते हैं/)

स्थल: सेटन का शयनकक्ष/ अमाजीनिया और सेटन, जोकि बिस्तर में लेटा है/ अमाजीनिया उसके नज़दीक बैठी है और उस का नर्म  हाथ सेटन के माथे पर है, जो ज्वर से तप रहा है/

अमाजीनिया:
पिता जी, मैं बहुत उदास हूँ आपको इस तरह शिथिल देख कर 
उम्र में ऐसा भी क्या है कि 
मनुष्य को एक खाली बोरे में तबदील कर देती है ?

मैं आपकी शक्तियां क्षीण होते हुए देख रही हूँ/
सशक्त पँख जिन्होंने टावरों को तबाह कर दिया था 
वह जूनून ख़तम हो गया  जिसने ईडन को आग लगा दी थी, 
और आदम के साम्राज्य को धूल में मिला दिया था/


सेटन :

मैं अब भी भरपूर जीवन चाहता हूँ, तूफ़ान लाना चाहता हूँ 
और सागर में क्रोध का उफ़ान लाना चाहता हूँ 
ओह, यह जर्ज़र होते अंग, यह धुंधलाता दिमाग 
मैं देख रहा हूँ लाखों मीनारें  
ज़मीन पर उभरती हुई 
मेरे सीने को चीरती हुई 
मेरे  शिख़र को चुनौती देती हुई /


पैग़म्बर आये और उन्होंने मेरी शक्ति को ललकारा 
कैसे मैं उस अपमान का बदला लूँ ?
मैं महसूस कर  रहा हूँ अपनी  दुष्ट शक्तियों का ह्रास
प्रकाश के इस उत्कृष्ट सागर में/


फ़ॉस्टस को यहाँ लाओ! अरे फ़ास्टस 
मेरी महानतम ख़ोज 
मुझे बताओ की क्या कोई ज्ञान पिपासु 


अभी भी बचा है 
मैंने उन्हें प्रचंड रूचि से झकझोरा है/ 
कौन अब आराम कर  सकता है ?
कौन अब सो सकता है ?
लस्टस को बुलाओ, मुझे इस बारे में उस से बात करने दो 
इस से पहले कि शमा बुझ जाये /


लस्ट्स प्रवेश करता है 

अपने अग्रज चचेरे भाई का झुक कर अभिवादन करता है 


सेटन :

दीर्घायु रहो, लस्ट्स 
यद्यपि अमाजीनिआ को विरासत में मिल सकता था 
अँधेरे का यह साम्राज्य 
परन्तु यह पुरुष प्रधान संसार है 
और अभी भी सही समय नहीं आया कि 
एक लड़की छल -कपट में पुरूष  की बराबरी  करे /

इसलिए मेरे बाद तुम यह दायित्व संभालोगे 
और अमाजिनिआ तुम्हें  सहारा देगी /
अँधेरे के इस साम्राज्य पर अब तुम राज करो/


लस्ट्स 

महान सेटन,
मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि 
मेरा पूरा जीवन, मेरा परिवार,
और मेरी पूर्ण निष्ठा 
आपके प्रति सदैव रहेगी /
मैं आपका आशीर्वाद चाहता हूँ कि 
अपने सारे दायित्व निष्ठापूर्वक निभा सकूं/
अब से आगे 
मेरे सब आनंद और मेेरी सारी खुशियाँ  
आपके अधीनस्थ होंगी, महामहिम /

( प्रस्थान करता है )

स्थान: धरती : तीन लोग प्रकट होते हैं/
काल, नारद और कुरु 



काल :

विचित्र समय आ गया है, नारद /

कुछ वस्तुएं नहीं हैं, फिर भी उनकी उपस्थिति का आभास होता है/

मनुष्यों के चेहरे में चिंता की लकीरें दिखती हैं /

किसी भी कार्य में जुनून नहीं है/ 

मैंने लोगों को बहुत जल्दबाजी में देखा है 

क्या हम किसी लौकिक दुर्भाग्य से घिर गए हैं ?


नारद :

हाँ , विचित्र समय आ गया है /

ऐसा प्रतीत आता है जैसे कि 

देवताओं और दानवों के बीच के  

इस प्रतिरोध रहित शीत युद्ध  में                

दानवों की ही सब ओर विजय हो रही है/


कुरु :

नारद, में भी यह विचित्र समय देख कर सदमे में हूँ /

हवाएँ गरजना बंद नहीं कर रहीं /

और कितनी ही बार, सूर्य भी गायब हो जाता है/

ऐसा मौसम तो हम ने पहले कभी नहीं देखा था /

यह रातें कितनी भयावह हैं 

बुराई का पूर्वाभास कराती हुई सी /


मुझे एक अजीबोग़रीब सपना आया, नारद/

मैंने  किताबों से भरा एक पुस्तकालय देखा/ 

लिखित पाठ्य-सामग्री 

और लाखों विद्वान 

फिर भी, उन किताबों में केवल भस्मवर्णी सामग्री थी 

और सीखने लायक कुछ नहीं 

विद्यार्थी जिन्होंने बरसों तक इनका अध्ययन किया 

और परीक्षा दी 

उन्हें उच्च स्तरीय उपाधियाँ मिली,

पर इन डिग्रियों में ज्ञान-विहीनता थी 

और यह केवल उनकी फाइलों की शोभा बढ़ा रही थी/

डॉक्ट्रेट की डिग्री के बावजूद, उनका बर्ताव तो मति -मंद था/



नारद :

यह चौंकाने वाला है और पूर्वाभास देता है कि  

कुछ बुरा घटित होने वाला है /

एक पुस्तकालय, लाखों पुस्तकें/

हज़ारों की संख्या में विद्वान ,

फिर भी नहीं कोई ज्ञान ?

हे, प्रभु! कौन कह सकता था कि 

हमें यह दिन भी देखने पड़ेंगे ?

( काल ने जो कि वक़्ता की जानकारी के बिना सुन रहा था,  हस्तक्षेप किया )                , 


काल :

कुरु, मैंने भी कल एक सपना देखा /

मैंने भैसें देखीं जिनके थन दूध से भरपूर थे ,

दूध से लबालब भरी बाल्टियां देखीं ,

फिट भी, जब उनमें लोटा डाला गया, उस में  कोई दूध नहीं था /


सब ओर हरी घास थी , दूर दूर तक हरी घास, 

पर उन में  उत्कृष्टता की कमी थी/ 

वृक्ष केवल आकार में ही वृक्ष लग रहे थे, 

और घास केवल रंग से ही घास लग रही थी /


सपने में,  मैंने  कुछ लोगों से बातचीत की, 

वे केवल दिखने में आदमी लग रहे थे, 

वे  परछाईयां थे/

मैं सहमा हुआ हूँ, नारद /

मैंने फैंटम  को देखा मनुष्य का मुखौटा धारण किये हुए /


नारद :

पृथ्वीवासी नहीं जानते 

प्रभु की क्रोध से भस्म करने वाली आग के बारे में 

और ब्रह्मांड से जुड़ी जानकारी /

निश्चित रूप से आसमान में खतरे के बादल तैर रहे हैं 

मैंने  प्रभु की आँखों में खून उतरते देखा है 

और उसकी भौहों पर चिंता के चिन्ह 

(प्रस्थान )


समूहगान :

जब  सेटन ने अनुभव किया कि  वह वृद्ध हो रहा है 

और संगठनात्मक परिवेश के कार्यों की 

क्षति हो रही है,

तब  लस्टस ही  था 

अन्धकार का उज्जवल राजकुमार 

और सेटन का एक युवा चचेरा भाई,

इस अन्धकार की आकाशगंगा में 

एकमात्र वही उजले सितारे सा चमकता/

उसे आमंत्रित किया गया सिंहासन पर आसीन होने के लिए /


लोगों  में और सत्ता के गलियारों में 

यह  बातें प्रचलित हो रही थी

कि सेटन के कार्य काल में 

कुछ खामियाँ थी 

जिनसे अन्धकार के साम्राज्य पर दुष्प्रभाव पड़ रहा था /

बुराई करने वाले लोग भ्रान्ति में थे 

और अक्सर प्रभु से प्रार्थना करते दिखाई देते थे 

पूर्णतः असमंजस के समय में/

   


सेटन, एक महानायक 

जिसने सफलतापूर्वक नेतृत्व किया था 

बुराई की सेनाओं का , प्रभु के विरुद्ध 

उसे श्रेय  मिला 

एक अन्धकार के वंश को स्थापित करने का 

और लोगो को प्रतिकार के डर से दूर करने  का 

नर्क में और शोधन गृह में  /


फलतः, अत्याधिक विस्तार होने लगा 

अंधकार के राज्य का /

यह महसूस किया जा रहा था कि 

प्रभु का प्रकाश टिमटिमाने लगा था /



और बस एक और ज़ोरदार फूँक 

 पवित्र आग को बुझाने के लिए काफ़ी थी /

और समूची ज़िन्दगियां एक गहरे गर्त में गिर जाएंगी 

जहाँ का पूर्ण नियंत्रण दानवों के हाथ में होगा 

ऊपर, नीचे सब ओर/ 

सेटन अनुभव कर रहा था कि 

उसके हाथ से सब फ़िसलता जा रहा है 

और उसने लस्ट्स को आमंत्रित किया 

जिसने हमेशा उस का साथ निभाया था 

और एक कुशल वक्ता और राजनैतिक दावपेंचों 

की ढाल से सुसज्जित 

अत्याधिक साहसी दानव था /

आमंत्रित  किया उसे राज्य की नई चुनौतियों का सामना करने के लिए 

जो कि अतुलनीय रूप से बढ़ गयी थी /


दैवीय स्वर :

गिलास आधा भरा हुआ था 

सब ओर प्रभु का आशीर्वाद और वरदान था 

तब साँप ने अपनी दृष्टि पुनः केंद्रित की 

आधे खाली गिलास पर /


और लोगों ने शोध शुरू किया 

कि लापता वरदान कहाँ था 

उन्होंने भगवान के स्वर्ग को तलाशा 

और इसे गायब पाया /


अचानक उन्हें एक कारखाना मिला 

जहाँ बहुतायत से परम आनंद बनाये जाते थे 

उस में प्रवेश करने से पहले, उन्हें बुद्धि को 

लॉकर -रूम  में रखना पड़ता था 


यह आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस के बल पर चलता था 

ऑक्सीजन और सूर्य के प्रकाश का भी विकल्प दे सकता था 

इसने अपना खुद का ख़ुदा बना लिया था 

यह लस्टस था जो सिंहासन पर आसीन हुआ/


 सर्ग -3  लस्ट्स का अभिवादन 

अभिषेक समारोह 

सेटन, लस्टस , अमाजीनिआ  एवं अन्य दानवों का प्रवेश 


सेटन 

साथियों

लस्टस  के अभिषेक समारोह में 

आप सब का स्वागत है 

मैं महान लस्टस को 

अंधकार का राजकुमार

पदांकित करता हूँ/


अब हम यहाँ जश्न मनाएंगे 

सत्ता के परिवर्तन  का 

सर्वाधिक शक्तिशाली से 

सर्वाधिक शक्तिशाली को /


वह सब से ऊंचाई पर है

उन चंद लोगों से अलग,

जो कि ब्रह्मांडीय विस्तार में  विचर सकता है 

और असीमित आकाश को अस्त व्यस्त कर सकता है/


लस्टस अपनी शक्तियों से ब्रह्माण्डीय विस्तार, 

धरती और अनंत आकाश तक पहुँच रखता है/

 अपरिमित हवाओं को सी सकता है 

और एक ही झटके में , अनंत समुंद्रों को सोख सकता है/


ईश्वर नहीं, यह लस्टस  ही है 

जो कि गगनचुम्बी बुलंदी के साथ 

मानवता का प्रतिनिधित्व कर रहा है 

अपने सम्पूर्ण बहुरंगी गुणों के सामुच्य के साथ/

(अभिषेक समारोह) 



सेटन :

सब से पहले मुझे उपस्थिति लेनें दीजिये 
हमारे महान योद्धाओं की 
जिन्होंने इस धरती पर 
निरंतर युद्ध की स्थिति बना दी है 
और आदमी को आदमी का दुश्मन बना दिया 
और सब को ईश्वर का विरोधी /


स्वागत है आपका डॉ. वैनआल , डॉ. फायरआल 


 बिल्जेबब   ! वृद्ध फाइटआल , डॉ. डैडमैन

और उस अंतर्भासी धर्मांतरित डॉ. फ़ॉस्टस को यहाँ लाओ/

मैं  कुछ विशिष्ट अतिथियों की 

विशेष उपस्थिति के लिए कृतज्ञ हूँ/

हिटलर और मुसोलिनी को बुलाओ 

और उन सब ईदी अमीनों  को भी 

जिन्होंने मनुष्यों में मतभेद पैदा कर  दिए 

ईश्वर की सत्ता और उसकी दयालुता पर 

प्रश्न -चिन्ह लगा दिए/

और हमें एक ऐसा गुनाह दिया जिस से 

हम  ईश्वर की न्याय प्रणाली को 

अप्रत्याशित रूप से रोक पाए/


हम *रेटालिया के किंग कॉसमॉस का भी स्वागत करते हैं 

जिस ने कि अपने स्वामी को ही देश निकाला दे दिया 

जिससे उसकी प्रजा ने विद्रोह कर दिया 

और इस तरह अपनी  तबाही  मोल ली/


आओ मैकबेथ , आपकी उपस्थिति का स्वागत है 

ताकि लस्ट्स को स्नान करवाया जा सके/

*(नोट:  डॉ. आनंद के महाकाव्य 'मास्टर '  के प्रकरण  में से उद्धृत:  राजा कॉसमॉस एक अत्याचारी  है जो पैग़म्बर को देश निकला दे देता है और एक आन्दोलन की यातना झेलता है/)



जुनून और आकांक्षा के तामसिक रक्त से 

और लेपित हो  

निर्दयतापूर्ण बेपरवाही  की मोटी परत से /


ताकि वह कभी भी न बेध पाए 

कभी भी न पार कर  पाये 

घृणा की उस घातक दीवार को, 

जोकि दानवों की अमूल्य निधि है 

और प्यार, मानवता की नाउम्मीद /


फ़ॉस्टस!

मेरे दिल में हमेशा तुम्हारा बसेरा रहेगा 

नर्क में तुम्हारी यातनाओं  का कोई अंत नहीं ,

शैतान के प्रति तुम्हारे प्रेम के लिए हम तुम्हारा सम्मान करते हैं 

और तुम्हारी स्वामिभक्ति  की प्रशंसा करते हैं /


विचिस , आओ और पवित्र मंत्रों का उच्चारण करो 

दावों की पवित्र पुस्तक 'डेलिस्या 'से '


विचिस मंत्रोचारण करती हैं : 

श्रम और मुसीबत को दोगुना और दोगुना करते जाओ 

आग जलने दो और कड़ाही में बुलबुले उठने दो /


जय हो महान राजा की!

जय हो लूसिफ़ेर की! 

जय हो लस्टस  की, सदैव के लिए राजकुमार !


लस्टस के राज्याभिषेक के बाद उसे सिंहासन के पास लाया जाता है /

सेटन सब औपचारिकताएं पूरी करता है/

तदुपरांत, अंधकार के नए राजकुमार का झुक कर अभिवादन करता है /


सेटन :

इस क्षत विक्षत गद्दी  के आगे 

मैं समर्पित करता हूँ  अपना  सर्वस्व 

जुनून, आकांक्षा और शक्ति 


युद्ध करने  के लिए और कभी भी पराजय न स्वीकार करने के लिए 

मुझे खुशी है की जिस क्षण से मेरी उत्पति हुए  

तब से अब जब कि मैं सब गतिविधियां समाप्त करने वाला हूँ 

मैंने कभी एक पल भी देवताओं को चैन से नहीं जीने दिया/



लस्टस , यह मेरी लिए बहुत तसल्लीबक्श है  

कि मैं तुम्हे एक ऐसा राज्य  सौँप कर जा रहा हूँ 

जिसकी प्रभुत्व  छोटे से छोटे देश  से लेकर,  बड़े से बड़े देश तक है/

तुम्हारा जहाँ मन करे तुम जाओ/

हे, अंधकार के राज्य के राजकुमार!

तुम्हे शाही स्वागत मिलेगा। 

और तुम्हे साथ देने के लिए 

और नीति निर्धारण के मामलों में सलाह देने के लिए 

तुम्हारा साथ देंगे डॉ. डैडमेन 

और मेकबेथ और फ़ास्टस के सारे झुंड,

जिनके आक्रोशित दिमाग ने कभी भी 

संयम और सब्र का ख़्याल निकट नहीं आने दिया 

और उनका जिक्र ऐसे पिशाचों के रूप में किया जाता है 

जिन्होंने  मानवीय सहनशीलता को 

घिसट घिसट कर चलने की हद तक ला दिया/


अमाजीनिआ, 
आगे आओ और लस्टस का साथ दो 
वह सदैव तुम्हारे साथ  रहेगी 
युवा राजकुमार, 
तुम्हारी सगी बहन 
जिसमें जुनून  और विश्वास 
प्रचुर मात्रा में है /


लस्टस :

सुयोग्य सेटन, आप मेरी लिए बेशक़ीमती बुजुर्ग़ हैं 

 मैं आपका ऋणी हूँ आपकी पैनी दृष्टि के लिए  

आपने मेरा चुनाव किया 

मुझ में आपने यह योग्यता देखी 



वह विशिष्ट गंध जो 

मानवता की  तरकारी  को ख़टास दे देती है /

मुझे याद है कैसे हमारे महान राजा को 

ईडन के लिए युद्ध लड़ना पड़ा था 

और उसे कितना बेइज़्ज़त करके वहां से धकेला गया था 

मात्र इसलिए कि उसने  ईव को एक सेब पेश किया था 

हालाँकि उसकी ईव को प्रभावित करने की या खुश करने की कोई मंशा नहीं थी /


यह कोई कामुक मामला नहीं था 

फिर भी देवताओं ने इसे अपराध मानते हुए ,

उसके विरुद्ध ईश्वर से शिकायत की/

जिन्होंने बिना उस से कोई स्पष्टीकरण माँगे 

बस फरमान ज़ारी कर  दिया 

आग के दरिया में धकेल  दिया,  प्रधान देवदूत को / 


उन दिनों मैं अल्पायु था 

परन्तु मैंने अपने महान बुजुर्ग की यातना देखी,

निर्वासन और निराशा के उन वर्षों में 

कैसे उस महान बैचैन आत्मा ने 

सर्वाधिक शोभनीय काम किया 

और देवताओं के विरुद्ध एक लाख वर्ष के लिए 

युद्ध का एलान कर दिया/


अगर ईश्वर हमें नष्ट करने की कोशिश करता ,

बदले में, हम उसके प्राणियों की ओर 

हमारे विष को निर्देशित कर देते/

और उनमें निराशा का संचार कर देते/

जिसके परिणामस्वरूप, वे तर्क के लाभ से वंचित हो जाते

 जिस तर्क का प्रचार वे साल के चारों मौसमों में करते रहे थे /


विनाश के मित्रो, साथियो और प्रेमियो

जब उचित को अनुचित और अनुचित को उचित 

ठहराया जाने लगे 

तब निराश होने लायक़ कुछ भी नहीं रहता/

किसी के लिए कोई आशा नहीं बचती 

सिवाय इसके कि  आज 

हम और दृढ़तापूर्वक कदम रखेंगे 

पतन के रास्ते पर/



अगर तुम अधिक से अधिक पाने में यकीन नहीं रखते 

तब तुम्हारा मेरे साथ सम्बन्ध न के बराबर है 

क्योंकि मेरे मंत्रिमंडल में वही सदस्य रह पाएंगे 

जिनके मन घातक क्षय में धँस चुके हों 

हमें तो यह सुनिश्चित करना है कि 

लोगों में संतुलन की भावना  ही समाप्त हो जाये 

जिसकी  वजह से जानवर तो शांत प्रकृति से रहें 

और दुनिया के लोग, अशांत स्वभाव युक्त 

हवाओं पर मंत्र फूंको कि 

वे मुफ़्त में गुनगुनाना बंद के दें/

नदियों को मना करो निष्फल प्रवाह के लिए 

पक्षियों को पशुविहार में डाल दो 

और सुयोग्य मनुष्यों का संगरोध कर दो /

प्यार नाम के वायरस को हमारे पवित्र मंदिर में तबाही का  कारण न बनने दो/


शास्त्रवेता!

ईश ने मासूमयित को बढ़ावा दिया 

उस ने कहा , अज्ञानता परमानंद है/

उसके पुत्र को सूली पर लटका दिया गया/

उन्ही लोगों के द्वारा जिनके लिया उसने अपना खून बहाया था/


वह पाप स्वीकरण में 

और माफ़ी देने में यकीन रखता था 

यह ईसाई धर्म के सद्गुण हैं 

वृह्द स्तर पर प्रसारित 

और सदाचारी लोगों द्वारा इनका पालन किया गया/


कौन यह यकीन करेगा कि 

यह सुझाव सेटन ने दिया था 

एडम  को 

न ही ईव  समझ  पायी कि 

इस स्वप्न का वास्तविक तात्प्र्य क्या था। 


ईशु भी असफल रहे 

उन  प्रावधानों के बारे में जानने में 

जिनके द्वारा उनकी ओर की दीवार में छिद्र हो गया 

और पाप को क़ानूनी स्वीकृति मिल गयी /


पाप स्वीकरोक्ति करो और दोषमुक्त हो जाओ 

ताकि तुम कर सको 

वही बड़ी भूल बारम्बार /

भूल करना मानवीय स्वभाव है 

और भूल करने के लिए शर्मसार क्यों होना ?


और यह समाज माफी देता रहता है 

और इतने विशाल ह्रदय से समायोजित कर लेता है 

व्याभिचारी लोगों को  भी 

जोकि अंत में कलयुग पर शासन करते हैं /


क्या यह धर्म की लड़ाई बोध के विरुद्ध है 

वे वस्तुएँ जो उलझाती हैं 

अन्ततः उन्ही की जीत होती है/

स्वीकरोक्ति एक विलक्षणता है 

और क्षमादान, एक पाप/



सेटन से प्रेरित हो कर 

और उसके आदेश की अनुपालना में 

आप हर उस काम को बर्बाद कर रहे हो 

जोकि भगवान्  करना चाहते हैं/


सेटन एक महान नायक था 

जिसने हर युग के लोगों पर राज किया /


और तुम,  जोकि सच्चे देशभक्त हो, 

तुमने शुरू किया है 

इन धर्मनिन्दकों के विरुद्ध, एक धर्मयुद्ध /


अमाजिनिआ :

लस्टस, क्या यह दयनीय नहीं है 

वे लोग, जो हमारे आदेश की अनुपालना में 

पाप करते हैं और स्वीकारते हैं 

वे खुद पूर्णयतः नास्तिक कहलाते हैं /


और यह उत्कृष्ट कहलाये जाने वाले लोग 

सफ़ेद झूठ बोलने वाले लोग षड्यंत्र रचते हुए कहते हैं कि 

आर्कएंजेल (सेटन ) के यह अनुयायी 

नर्क की आग में झुलसेंगे/


लस्टस :

अमाजिनिआ,

हमने मिल्टन को बंदी बना लिया है 

 जिसने इतना आतंक फैला रखा है 

इतनी सदियों से 

मानव की कल्पना शक्ति उसकी जकड़ में है /


मिल्टन कभी यातनागृह में तो गया ही नहीं /

वह अर्द्ध -सत्य ही फैलाता रहा /

उसे  दफ़न कर  दिया गया है, मर चुका है वह/


यहाँ हम न्यायोचित ठहराते हैं 

मनुष्य के प्रभु के प्रति कार्य 

यह जवाबी विस्फोट है 

उस ज्ञान का जौ 

मिल्टन और उसकी किस्म के लोगों ने दिया /


दैवीय वाणी :

लस्ट्स में दानवों को 

निश्चितता  दिखती है 

कि सम्पूर्ण ईसाई जगत 

 भयानक ख़तरे में है/



 *केओस और *पान्डेमोनियम 

अराजकता के प्रेमियों को आमंत्रित करते हैं 

ईश्वर और उसके देवदूतों को 

किसी अज्ञात कोने में धकेलने के लिए /


जिस समय, दानवों के ओहदों में 

परिवर्तन किये जा रहे हैं 

थरथराहट महसूस की जा रही है 

स्वर्ग  के साम्राज्य में /


देवता, जो अमृत  रसपान से मदहोश है .

अकर्मण्यता की दुनिया में निवृत हो गए है 

पतन के गर्त में गए साम्राज्य में क्या हो रहा है 
इस सब से बेख़बर हो कर/


 *केओस : दानवों का सम्मलेन कक्ष 

 *पान्डेमोनियम :  दानवों का संसद भवन 



सर्ग ४  भव्य कार्य योजना 


ओरैकल :   जुनून के पार्क में  (पार्क ऑफ़ पैशन्स में)

मुझे दिखाई दे रहा है जूनून का एक विशाल जुलूस 
पवित्र मंदिर की ओर चलते हुए 
जहाँ पर शैतान  एकत्रित हुए हैं 
लस्टस का अभिषेक करने के लिए, जश्न मनाने और भोज करने के लिए। 


यह जूनून का पार्क है 
दानव की भूमि पर बना एक रेस्टोरेंट 
जिसके आकर्षण से आत्माओं पर जादुई असर होता है 
यहाँ तक कि उन पर जो लावारिस भूमि से हों/


आर्कएंजेल का पसंदीदा बसेरा 
यह पार्क एक स्थान के रूप में प्रयुक्त किय जाता है 
जोकि, आने वाली पीढ़ियों को तैय्यार करती हैं 
मुक्ति और अनुग्रह के विरुद्ध /


लस्टस झुक कर अभिवादन करता है ग्रेडा माँ का 
लोलुपता की देवी 
जोकि इस महा दानव को आशीर्वाद देती है 
अदम्य विश्वास के साथ एक अथक भाग्य के लिए/


सेटन :


अगर तुम चाहते हो कि तुम सेटन से भी आगे बढ़ जाओ 

अरे, लस्टस !

ग्रेडा से आशीर्वाद प्राप्त करो (चंचल माँ)

बहुमुखी राक्षस देवी

जोकि बुराई की  प्रदायक है 

अपने बहुत से शानदार प्रतिरूपों  के साथ 

ग्रेडा(चंचल माँ)  के मंदिर में 

  

स्वर :


जय हो ! ग्रेडा (चंचल माँ ) बहुमुखी राक्षस देवी की 
जय हो ! लालसा की 
जय हो! छल कपट की 
जय हो! दोगलेपन की 
जय हो! आकाँक्षा की 
जय हो! प्रतिशोध की 
जय हो! ज्वाला की 


ग्रेडा (चंचल माँ ) प्रकट होती है अपने सात चेहरों के साथ और लस्ट्स को सम्बोधित करती है/

ग्रेडा (चंचल माँ )
तुमने मुझे ख़ुश किया है/

जब कभी भी तुम्हें  आवश्यकता पड़े 
यह रहा तंत्र 
(उसकी दायीं भुजा पर एक टोने का धागा बांध देती है)
और मंत्र उच्चारण करना:
अपकर्ष ,अपकर्ष, अपकर्ष 
और मैं पहुँच जाऊंगी/


लूसिफ़र :

अरे, इस  शापित धरती के निवासी 
अरे!  लौकिक प्राणियों 
अरे! ऊँचे पहाड़ों 
विशाल महासागर 


 सुनो!

जैसे जैसे आयु बढ़ती है 
हर कोई क़ब्र में लुढ़क जाता है 
सेटन भी गुजरते वक़्त के साथ उद्वेग रहित हो गया है 
और उसकी बुद्धि लय और छंद को भ्रमित करती है/ 



उसका शक्तिवान चचेरा भाई लस्टस 
सत्ता में आ गया है/
शक्तिवान होने के साथ ही साथ, उसे ग्रेडा (चंचल माँ) का 
आशीर्वाद प्राप्त है कि 
वह क्रांति ला सके और बुराई को पूरी  तरह  निगमित कर सके/



पुराना समय भिन्न था 

सेटन के आदमी व्यक्तियों को लालायित करते थे 
 
और उन्हें आसक्ति के लिए बहलाते फुसलाते थे 

परन्तु गुप्त रूप से /


महान सेटन 
बाग़ में प्रविष्ट हो गया छिपे तौर पर 
सरीसृप मार्ग अपना कर  

ताकि सेंध लगा सके ईव के  सपने में 
निषिद्ध फल की इच्छा के साथ 


यह सब एक गुप्त मामला था 
और सेटन. यद्यपि एक शक्तिशाली देवदूत था 
 उस ने कभी भी 
बुराई में गर्व करने का भाव 
नहीं दिखाया, 
जो भाव लस्ट्स में बसता है 
जोकि जब चलता है तो, आग की तरह जलता है 
अंधेरी इच्छाओं के जंगल में /


आज के बाद, अरे! अन्धकार के राजकुमार के प्रेमियों 
बिलकुल वैसे ही, जैसे पाश्चात्य देशो के लोगों ने साम्राज्य  जमा लिया था 
संसार के विभिन्न देशों पर 
लोगों को घूँस दी थी 
उन्हें अपनी संस्कृति सिखाई और शिक्षित किया 
और अंत में उन पर शासन किया और छीन ली 
उनसे  उनकी दौलत, उनकी पहचान ,
इसी तरह, हम भी एक नयी निगम संस्कृति निर्मित कर  रहे हैं 
ताकि हम मानवता को देवत्व से दूर कर सकें / 


(घोषणा)



आओ! इस अन्धकार के साम्राज्य के  
महान देवदूतो
केओस के और आगे बढ़ो/ 
जहाँ पर कि  नया राजकुमार 
जिसने कि अभी अभी शपथ ग्रहण की है, 
जनसाधारण को सम्बोधित करेगा /



केऑस (ईमारत जिसमें  संसद भवन( पेंडेमोनियम)  है ) में लस्टस को आमंत्रित किया जाता हैं सम्बोधन के लिए। 


लस्टस :

(सम्पूर्ण दुनिया के नेताओं के साथ ऑन -लाइन कनेक्शन जोड़ दिया गया है/)
क्या आप मुझे सुन पा रहे हैं ? (लस्टस अपना माइक सेट करता है, मीडिया चैनलों को सम्बोधित करते हुए )

लस्टस सेटन से बिल्कुल अलग है 
जिसने देवताओं से बग़ावत तो की थी 
फ़िर भी, मन ही मन , देवताओं और देवियों से डरता था 
और उसे अनुभूति होती थी एक अतिक्रमणकारी होने की /


सेटन अपने नियोग को खुद संचालित करता था 
गुप्त रूप से और  उसे विश्वास था कि 
अनंतकाल के क्रम को उलटने के लिए 
सभी दानवों को गुप्त  रूप से कार्य करना चाहिए/


मैं एक नियो कॉरपोरेट हूँ ,
इस शिथिल राज्य की पुनर्संरचना के लिए कार्यरत 
और मुझे यह सुनिश्चित  करना है कि यह सारी व्यवस्था बदल जाए 
ब्रह्माण्ड के अंतिम छोर तक /


अब हमारे  निशाने पर केवल 
यह  संसार ही नहीं 
हमारा असली प्रहार तो आभासी मन पर होना है 
पवन, आत्मा और मानवता की चेतना पर /


तदुपरांत , इस दुनिया के 
कोने -कोने में 
विस्तृत ब्रह्माण्ड के प्रत्येक भाग में 
एक निगमित इकाई बनने और अन्ततः साम्राज्य स्थापना के लिए /


जानवरों के राज्य को वश में करने के लिए 
और उनकी आत्म चेतना और दैवीत्व  
को समाप्त  करने के लिए ,
हम योजना बना रहे हैं 
गर्व  के एक नए रूपांतर की , जिसे हम 'सेल्फिया ' कहते है/


उनकी रगो में उन्हें अनुभव होने दो 
कमी और अपर्याप्ता 
और एक असाधारण लालसा 
आज़ादी , शक्ति और ऐश्वर्य के लिए/



एक बार यदि ऐसा घटित होता है 
वे मनुष्यों की तरह व्यवहार करने लगेंगे /
क्रोध, प्रतिरोध, और अधिक पाने के लिए प्रतिस्पर्धा,
खोंस लेने के और संग्रहित करने की प्रवृत्ति,
शत्रुतापूर्ण भावों वाली मानवता के सभी अवयव 
उनमें आ जायेंगे, एक बार अगर वे प्राप्त कर लेते हैं 
मानवों के अधिकार क्षेत्र का  
सब से भयावह आयाम/


यही चेतना हाँक दी जाएगी 
पौधों की मानसिक प्रक्रिया में 
ताकि वे भी विद्रोह में खड़े हो जाएँ 
मनुष्यों की सेवा करने से इंकार कर दें 
और अपनी कीमत मांगे/


जब मिलावटीकरण की भावना 
हमारे सर्वोत्तम पुरुषों  में आ जाएगी 
उसके बाद उन्हें, चाहे कहीं से भी शिक्षा दे दो 
गीता से या रामायण से 
अंत तो सब का एक ही होना है : पतन 


मनुष्यों के संसार में, आप पाओगे 
दो तरह के हत्यारे, एक ही तरह के कृत्य में 
राज्य की पुलिस और डकैत 
जिनके लिए हत्या करना पुण्यमय है /


दोनों ही हिंसा बल प्रयोग करते हैं 
यदि मनुष्य कुछ बुरा करे, उसको सुधारना ज़रूरी है 
कुकर्मी भी प्रभु के दूत हैं/
कार्यरत रहते हैं, आपराधिक न्याय के लिए /



यदि कोई जज किसी हत्यारे को मृत्यु दंड सुनाता है 
यह समाज को विचलित नहीं करता 
क्योंकि यह आपराधिक न्याय का कार्य है 
हत्या के कृत्य के बदले में /


जज हमारे लिए देवदूत समान है/
और पुलिस भी, ऐसे ही जल्लाद भी 
इसी खेल का एक हिस्सा 
किसी भी तरह के दोष से मुक्त /


कानून उन्हें विमुक्त करता है इस 'अशिष्ट ' कार्य से 
जो कि उन्होंने न्याय के नाम पर किया 
पर,पुलिस द्वारा यातना दिया जाना 
या किसी डकैत द्वारा हत्या किया जाना 
इन्हे अलग दृषिटकोण से परखा जाता है /


एक डकैत की किस्मत में तो हत्या और यातना लिखे रहते हैं ,
जो कि 'मेमन' (कुबेर) का त्वरित पीछा करते हैं
भूल जाते हैं कि लोभ एक महापाप है 
जो अंत में उन्हें कहीं का नहीं छोड़ता/



हमें ईश्वर से कोई लेना देना नहीं है/
हम कोई उसकी पुलिस नहीं जो सुधारात्मक मिशन पर लगी हो /
हमारा कार्य तो यह है कि हम 
मनुष्यों को नैतिक और मार्गदर्शक मदद दे 
उन्हें पाप के बोध से मुक्त करें /


हम उन्हें सब कुछ मुहैया कराते हैं 
उनके नलों में पानी है,
उनके फेफड़ों के लिए वायु है, 
उनके पास मोटर गाड़ियां, रेलगाड़ियां हैं,
फिर भी यह लोग हमारे साथ गंभीर छल करते हैं 
विपदा की घड़ी में 
हमें नहीं, ईश्वर को पुकारते हैं/


उनका निर्माण किया जाता हैं हमारे विनिर्माण द्वारा 
जहाँ पर सभी पुरुष और स्त्रियाँ 
नींद में भी लक्ष्यों का सपना देखते हैं 
निरंतर परिश्रम के बावजूद 
दो जून की रोटी जुटाने में असमर्थ रहते हैं /


क्या कोई भी ऐसा युवक है जिसे कुछ आराम के क्षण नसीब हों 
अपनी ज़िंदगी में एक घंटा भी खाली मिले 
जिस में वह किसी मनोरंजन पार्क में 
अपने बच्चों और बीवी के साथ कुछ समय बिता पाये?


क्या हमने उसे मोबाइल फ़ोन उपलब्ध नहीं करवाया ?
क्या हमने 'एप्पल' को नया स्वरुप नहीं दिया,
जोकि सारी  जानकारी  का स्त्रोत है 
और जिसने सारी दुनिया को उसकी मुट्ठी में दे दिया है ?


सज्जनों! हम ने अपना बदला ले लिया है /
आपको यकीन नहीं होगा 
देवगण पूर्णयतः आतंकित होकर पूछते है 
क्या यह  हमारा ही  एडम  है? क्या यह हमारी ही ईव  है ?


जब हमारा महान पुरखा (सेटन)
उन्हें ईडन के बगीचे में  मिला 
उसने पाया कि वह युगल पूर्ण सामंजस्य में है, 
वह ईर्ष्या से जल उठा/


एक साधारण से सपने ने 
नारी संरचना को बदल कर रख  दिया/
और बाकी के इतिहास को भी/


हमारा महान नायक सफल रहा 
ईव के दिमाग़ में एक सकरात्मक सपना भरने में, 
मैं आपको यकीन दिलाता 
मैं उसकी कोख़ में छेद कर  दूंगा 
और उसके साथ  इस तरह से हस्तक्षेप करूंगा कि 
वह बदतर के लिए बदल जाये 
ताकि आइन्दा दुनिया में जो बच्चे पैदा हों 
अविश्वास, घृणा 
और ईर्ष्या से लबालब भरे हुए हों 
और इसी प्रयोजन से,
हमने ईव को आत्म-निर्भर बना दिया है 
और अब, उसे न तो एडम की आवश्यकता है 
और न ही उसके ईडन की/


वास्तव में, कोई भी  नहीं  जान पाया 
कि  ईव पर आक्रमण क्यों किया गया था/
क्यों उसके मस्तिष्क को विकृतियों से भर दिया गया था 
उसे ही क्यों चुना गया था /
सेटन ईर्ष्या से अँधा हो गया था, 
फिर भी उसमें दूरदर्शिता की शक्ति थी /

अगर वह एडम को संक्रमित करता है, 
यह संक्रमण ईव तक ही सीमित रह जायेगा 
परन्तु, यदि वह ईव को संक्रमित कर पाने में सफल हो जाये 
यह बुराई पूरी क़ायनात में फ़ैल जाएगी/
वह भावी  पीढ़ियों को प्रभावित करने की 
उसकी छुपी हुए शक्तियों से परिचित था 
क्योंकि औरत सबसे अधिक सशक्त होती है 
सभी प्रजातियों में, 
और यदि एक बार वह 
उसकी संचेतना संक्षारित कर दे 
वह किसी को भी सुरक्षित नहीं रहने देगी /


आदमी भटकते रहेंगे 
प्यार से वंचित 
एक ऐसे संसार में जहाँ नेकी और सुंदरता समाप्त हो चुके हैं/ 
हमने जैक और जिल को प्रतिरोधी के रूप में ढाल दिया है /
भलाई और सद्भावना की परम्परा का 
अंत कर दिया है/

विवाह  प्यार का स्थान ले लेता है 
और साज़िश विश्वास का /
हम ने हर उस भावना को क़ानूनी स्वीकृति दे दी है 
जो प्रेम के पक्ष में है 
वैध चादरों को कमीनों (बास्टर्ड) को जन्म देने दो 
जो हम में यकीन करते है और त्रुटि का आनंद लेते हैं /

हा  हा हा हा  हा हा हा हा 


फ़ॉस्टस :

अँधेरे के साम्रज्य के देवदूतों,
अब मैं आपका परिचय करवाता हूँ 'हुमोविड टीकाकरण' से 
जिसे कि हम 'सेल्फी ' कहते हैं 
जोकि लगाया जायेगा 
जानवरों, पौधों और पक्षियों को 
ताकि वे अपने आचरण में थोड़े मानवीय बनें /


यहाँ, हम आपके सामने एक पी पी टी प्रस्तुत कर रहे हैं 
जिसे एक परीक्षण के रूप में तैय्यार किया गया है 
जोकि उनके मस्तिष्क पर हमारी दवा का असर दिखायेगा /


हम देखते है कि एक भैंस दूध देने से इन्कार कर देती है 
वह चाहती है कि उसे खूंटे से आज़ाद किया जाए और मांग करती है 
उसके भोजन में अधिक पोषक सामग्री शामिल करने की /


वह कोशिश करती है  
कि अपने चारे का कुछ हिस्सा बोरी में छुपा कर 
अपने चोकर के ढेर रख ले/


वह जिद करती है कि सारा दूध नहीं दुहने देगी 
अपेक्षाकृत कुछ बचा के रखेगी 
वह अपनी विनम्रता खो देती है 
और आक्रमक रवैया अपना लेती है 
जब खेत पर काम करने वाली औरत उसे दुहने आती है/


एक पौधा देवताओं से  फ़रमाइश करता है 
कि उसे चलने के लिए पैर दें  
और बोलने के लिए जुबान 
एक पेट दे, जिस में वह संग्रहित कर सके 
धूप, पानी और प्रचुर हवाएं /


इन पक्षियों को भी देखो 
जो नारेबाजी पर उतर आये हैं 
धरती पर पक्के घरों की मांग करते हुए 
भूमि का एक टुकड़ा, जिसकी रजिस्ट्री उनके नाम पर हो/

 
चारे की नियमित आपूर्ति 
और मुक़दमा दायर किया जाये 
अगर कोई खेल के लिए उनका शिकार करता है/


जो वरदान उन्होंने मांगे, उन्हें दे दिए गए/
भैंस को अब कुछ मानसिक रोगों ने घेर लिया है 
और न्यूरोसर्जरी के लिए जाया करती है 
एक पशु पालन केंद्र में/


पौधों में अत्याधिक संग्रहित धूप 
जल और पवन के कारण 
उन में  कैंसर  के चिन्ह उभरने लगे हैं/


ब्लड प्रेशर और शुगर ने क्लेशित कर  दिया है 
कुछ पक्षियों को 
क्योंकि वे अत्यधिक चिंताग्रस्त हैं 
अपने भविष्य व् अपने बच्चों के प्रति 
और कहीं कहीं तो 
कुछ ऍफ़ आई आर दर्ज़  की गयी है 
भूमि अतिक्रमण की लड़ाईयों को ले कर /


इस सभी रुग्ण प्रजातियों का इलाज़ किया जा रहा है 
उन्नत प्रौद्योगिकी के 'फॉक्स इंस्टिट्यूट ' में 
वे अपने स्वाभाविक गुण खो चुके हैं 
और अपना दोषरहित सुःख चैन /


इस टीकाकरण से उन्हें मदद मिली 
अपनी संतुलन की भावना पर काबू पाने में 
और बहुत से मनोवैज्ञानिक विकार आकर्षित करने में 
जोकि मानवीय इतिहास में बहुत सामान्य हैं/


इसलिए, अगर उनकी अच्छाई में नहीं,
पौधों और जानवरों को 
मानवीय प्रजाति में शामिल होने दो 
अपनी मौलिक शालीनता से विहीन होने के कारण/


मानव जाति अचंभित  है 
और इस नए प्रारूप को समझने में असमर्थ 
झुण्ड बना बना कर  जा रहे हैं 
देवताओं से शिकायत करने के लिए 
और मंत्रों और जादू से उनका इलाज़ करने की कोशिश कर  रहे हैं/

पी पी टी समाप्त 


  संकल्प 

स्थल : लिबर्टी हॉल 

जानवर, पशु और पौधे एकत्रित हुए हैं 
लस्टोनिया के लिबर्टी हॉल में 
और उन्होंने एक प्रस्ताव  पारित किया 
होमोविड  वैक्सीन के लिए लस्टस को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए 
 जिसने उनमें स्व -उत्थान की उत्कृष्ट भावना प्रदान की थी 
और अब उन्होंने मनुष्यत्व का आधा रास्ता तय कर लिया था/

 दानवों, जानवरों, पाखियों और पौधों  की एक सामूहिक अधिवेशन को लस्ट्स सम्बोधित कर रहा है/

लस्टस :

अन्धकार के साम्राज्य में आप सब का स्वागत है/
हम आपके प्रति आभारी हैं कि आपने 
हमारा साथ देने का निश्चय किया 
ज्ञानोदय के आलोक से,
आपने प्रतिबद्ध रहना सुनिश्चित किया 
जीवित प्राणियों की तरह, अपने अधिकार प्राप्ति के लिए 
जोकि आपको युगों से नकारे गए थे /



किल्लर इंस्टिक्ट  (एक नया चैनल)


लस्टस,
जानवर और पक्षी 
मानवता के विरुद्ध आपके ज़िहाद में 
कैसे शामिल हो सकते हैं ?
और पौधे भी जो कि चल भी नहीं सकते ?
बात तक नहीं कर सकते ?
नारे नहीं लगा सकते ?


लस्टस :

हम चाहते हैं कि वे अपने  निष्क्रिय प्रतिरोध पर रोक लगाएं 
और दुनियावी लोगों को 
आसानी से उपलब्ध होने पर भी, 
केवल  प्रदर्शन वस्तु  बनने के लिए 
उनके गंदे आंगनों में 
या जंगली पशुओं के पिंजड़े में,
यहाँ तक कि उनकी खुशी के लिए शिकार बनने पर /


हे जानवरो, हे पक्षियो, हे पौधो  
मनुष्य का  आपके प्रति व्यवहार 
बस घृणित है/
वह तो हर सेवा मुफ्त में प्राप्त करना चाहता है/
मुझे ईमानदारी से बताओ, 
कि क्या मानव प्रजाति में से कभी किसी एक ने भी 
कुछ सिरफरे कवियों केअलावा, 
प्रथम साम्राज्य के लिए कभी आभार का एक भी शब्द कहा?
सब से पहले तुम्हीं उत्पन्न हुए थे और सब से बुजुर्ग हो 
और उनसे अधिक सम्मान और आभार के हकदार हो/


किल्लर इंस्टिक्ट:


विचित्र !
तो आप यह चाहते हैं कि वे मानवता का प्रतिरोध करें ?
क्या ईश्वर ने अपनी रचनात्मक योजना में 
उन्हें एक हिस्सा नहीं माना  था  
मनुष्य को सहारा देने के लिए ?


लस्टस :


हम इसी बात का तो विरोध कर रहे हैं 
ईश्वर तो हमारा प्रतिपक्षी है/
और मनुष्य उसका सब से विश्वसनीय कारिंदा/ 
हम ने मनुष्य को भ्र्ष्टाचारी बना दिया है,
और अब हम उसकी आधार प्रणाली को नष्ट कर देंगे/
इसलिए, प्रथम साम्राज्य के महान सदस्यो
होमोविड टीकाकरण करवाएं 
निष्क्रिय प्रतिरोध के विरुद्ध 
अधिकाधिक सँख्या में/

मैं आपकी रगों में विटामिन 'के' का टीका लगाऊंगा 
फिलहाल, आपके पास ज्ञान तो है,
परन्तु केवल इतना ही कि आप अनुसेवी बने रह सकें 
ईश्वर की योजना के,  जो उसने मानवता की  सेवा करने के लिए बनायी /


हम आपको प्रदान करना चाहते हैं 
एक अतिचेतना 
ताकि आप  समझ पाएं 
ईश्वर आपके साथ क्या चालबाजियां कर  रहा है/

एक बार जब आप अपनी  योग्यता का आंकलन कर लेंगे
और अनुभव करेंगे कि आपको यह दासता कैसे काट रही है
आप पूरे मन से इस युद्ध में कूद पड़ेंगे
मानवीय आधिपत्य से मुक्ति पाने के लिए/


युद्ध के लिए कमर कस लीजिये 
और अपने अधिकार के लिए खड़े हो जाईये/

आज  के बाद से मनुष्य मात्र को यह समझने दीजिये 
कि  अब तक जो वस्तुएं वे शोषण से प्राप्त कर रहे थे
उन्हें उनका मूल्य चुकाना होगा/


आवाज़ें:

जय हो, लस्टस की/
अस्तित्वगत स्वतंत्रता का रक्षक 
समानता का महान समर्थक /


 दैवीय वाणी:


आकाश तुम्हारी गड़गड़ाती हंसी सुन रहा है /
लस्टस ,
और खामोशी से मुस्कुरा रहा है 
तुम्हारे तेज़ आक्रोश से, गंदे थूथनों से फूटती आवाज़ों से 
ज़िंदगी की आरा पहेली को निरर्थक बनाती हुए/


तुम्हारी सारी  शक्ति घमंड से उपजी है/
और तुम्हारी सर्वोचता की भावना से 
तुम इस बात पर नियंत्रण नहीं कर सकते  
कि सूर्य क्यों और कैसे अस्त होता है
और हवाएं कैसे चलती हैं/

केवल मूर्ख ही ज़ोर शोर से अपनी मूर्खता का ढोल पीटते हैं,
बुद्धिमान या तो मुस्कुराते हैं या चुप रहते हैं/



 सर्ग  5 

दानव का प्रशासनिक कार्यालय/ सम्पूर्ण शांति 

षड़यंत्रिका और भय कार्यालय में बैठ कम्प्यूटर पर  काम  कर रहें हैं/



षड़यंतत्रिका  :

हमारा महान राजकुमार एक सशक्त वक्ता  है 
और निश्चित रूप से, हमें ऐसा ही नेता चाहिए 
जो सभी प्रकार से गुण सम्पन्न हो 
और  विशेषकर राजाधिराज सम्बन्धी/ 


भय :
प्रतीत होता है कि हमें सही साथ मिला है 
लस्टस के तो नाम के ज़िक्र से ही 
भय उत्पन्न हो जाता है /
भय  से ही सभी काम होते हैं/
और जो डगमगा जाते हैं 
उन्हें भारी मूल्य चुकाना पड़ता है/


अरे! यह क्या है?   
मुख्यालय से एक परिपत्र /


वह राजकीय गृह मंत्रालय के सचिव द्वारा भेजा गया परिपत्र पढ़ता है /


सभी विभागाध्यक्षों द्वारा कल जो मीटिंग की गयी 

उसमें, तुरंत प्रभाव से यह निर्णय लिए गए :

अन्धकार के राज्य में 

निम्नलिखित प्रकार के नवआगुंतकों को 

विशेष प्राथमिकता दी जाएगी/


वह जिसने दस वृक्षों पर कुल्हाड़ी चलाई हो 
जिसने एक कोख की अजन्मी कन्या की हत्या की हो 
वह जो किसी ऐसे कारखाने का मालिक हो जिस से जल प्रदूषित होता हो 
वह जो किसी शहरी क्षेत्र से हो 
वह जो जानवरों से घृणा करता हो 
जिसके मन ने कभी प्रेम और रोमांस जैसी अवधारणों के गिर्द चक्कर न लगाए हों /



उदहारण के लिये यह रहा एक साक्षत्कार 

साक्षात्कारकर्त्ता : आपका यहां आने का  प्रयोजन क्या है ?

साक्षात्कारदाता  : लस्टस के प्रति मेरा प्रेम /

साक्षात्कारकर्त्ता :  क्यों ?

साक्षात्कारदाता : लस्टस आगामी पीढ़ियों की आशा है/

साक्षात्कारकर्त्ता : क्या  तुम्हे ईश्वर और नर्क से भय नहीं लगता?

साक्षात्कारदाता : बिजली और ए.  सी. के बिना रहना नारकीय है/

साक्षात्कारकर्त्ता : ईश्वर के बारे में तुम्हारी क्या अवधारणा है ?

साक्षात्कारदाता : कुछ भी नहीं/


साक्षात्कारकर्त्ता : 


 क्या तुम जानते हो , जैक !
यह अन्धकार का साम्रज्य है/
एक बार तुमने इस राह पर कदम बढ़ाये 
वापिस जाने का कोई अवसर नहीं रहेगा?


साक्षात्कारदाता :
वापिस बुद्धिमता में जाने का लाभ ही क्या है?
बुद्धि को तो मैंने पीछे छोड़ दिया है/
धर्म की मृत्यु हो चुकी है/ ईश्वर भी मर चुका है/
युवा पीढ़ी  रोमांच में यकीन रखती है/
नए साहसिक कार्य, वयस्कों की वेब सीरीज़ में /
अब नहीं रहे वे देशभक्त /
जोकि सेना में लड़ते थे तंग घाटियों में 
अब कोई भी आश्रम में रहना पसंद नहीं करता ,
और मंदिरों में क्रियाशून्य जीवन बिताना पसंद नहीं करता /


साक्षात्कारकर्त्ता : 

आप क्या सोचते है 
और क्या नया किया जाना चाहिए 
ताकि जनसाधरण को उच्चतम स्तर के *'जॉम्बीज़'
बनाया  जा सके /

साक्षात्कारदाता :


हमें मनुष्य की निज पहचान नष्ट करनी ज़रुरी है/
उसके सभी विशिष्ट गुण धुंधले पड़ जाने चाहिए /
वह एक परछाई जैसा प्रतीत होना चाहिए/
कूची का एक व्यापक स्पर्श 
दूसरे शब्दों में, वह एक जनसाधारण लगना चाहिए /



पाठशालाओं में और विश्वविद्यालयों में 
केंद्रबिंदु होना चाहिए 
मस्तिष्क पर नहीं, जैसा कि भूतकाळ में था 
पर शरीर और जीविका उपार्जन पर /



(साक्षात्कारदाता का चयन हो गया 

उसके विचारों की मौलिकता के आधार पर )



अंधरे के साम्राज्य के सभी नायकों को 
निर्देशित किया जाता है कि
वे आस पास पवन वेग सा बिखर जाएँ 
और ऐसे योग्य लोगों को तलाशें 
जो नवाचार की सोच के साथ आगे आएं 
लस्टस और उसकी धार्मिक योजनाओं को सशक्त करने के लिए /


राज्य सचिव द्वारा हस्ताक्षरित
 
परिपत्र पूर्ण हुआ/  भय अपनी वीडियो शुरू करता है/
मालिक वीडियो चैट पर है:


*  जोम्बीस :  विवेकहीन व्यक्ति 


लस्टस :


भय,
तुम हमारा सब से सशक्त्त हथियार होगे /
अपने पंख पसारो और 
मानवता के रक्तरस में आंतक स्थापित कर दो/ 

अपने साथbil   को ले जाओ/
और उनके दिमाग पर काबू पाओ /
सब से भयावह प्रकार के 
सभी दानवों को साथ ले लो /
और मनुष्यों का रक्त उनकी धमनियों में भावहीन होने दो/


भय :


स्वर्ग को खो देने  का कोई भय नहीं है/
वास्तविक भय तो यह है कि 
हम दुनिया को खो देंगे/
अपने रिश्तेदारों को खो देंगे/
समाज में अपना स्तर खो देंगे/


समाज ही तो स्थायी प्रहरी हैं परिवर्तन के विरुद्ध 
यथापूर्व स्थिति हमारा प्रमुख प्रावधान है /
जो हमारी निर्धारित प्राथमिकताएँ हैं 
किसी को भी उन्हें बदलने के बारे में मत सोचने दो /
अभिव्यक्ति की आज़ादी के सभी समर्थकों को गोली मार दो 
और उन सब को भी जो निंदा करते हैं 
हमारे दिग्गजों की जो कि इस विस्तृत संसार की 
पतवार संभाले हुए हैं/



टेंसोनिआ :


(एक और कर्मचारी जोकि भय के साथ लिव-इन-सम्बन्ध में है )

यह आनंद का विषय है कि हम ईश्वर की सर्वोत्तम रचना को 
यातना दे रहे है ऐसे बेरोक साधनों के द्वारा /
यह एक विचित्र प्रक्रिया है 
कि उन्हें सहजगामी जीवन पसंद ही नहीं/
जो उन्हें कोई तनाव न दे/
कौन ऐसा चलचित्र देखेगा 
जिसमें लड़ाई, रहस्य या विवाद न हो?


आनंद, शांति, प्रसन्नता, प्रेम और एक सहजगामी जीवन 
ईश्वर  की वसीयत के सबसे करीब समझे जाते हैं/
इन सब में, द्रुत गति से बढ़ने वाली पीढ़ी को 
कोई रूचि नहीं रही/


निरंतर काम करना, निरंतर चिंता करना 
निरंतर गतिमान रहना, घोषणा करते हैं  
एक के बाद एक खौफनाक ख़्वाब की/


यहां तक कि जब वे देवालयों में जाते हैं 
वे हज़ारों वरदान मांगते हैं जिन को सुन कर 
देवताओं के भी पसीने छूट जाते हैं /
अपनी जादुई शक्तियों के बावजूद भी, 
 उन्हें एहसास होता है कि मनुष्य केवल तनाव में यकीन करता है/
वे तनावयुक्त आते हैं और देवताओं को भी तनावयुक्त कर देते हैं /
और, उसके बाद, तनावग्रस्त ही, वहां से वापिस चले जाते हैं/


शायद, वे नहीं जानते कि 
घटनाएं तो ख़ुद -बख़ुद घटित होती हैं 
यदि आप दस लोगों को सलाह देते हैं नींबू पानी पीने की 
उन में से दो या तीन का उपचार तो हो जाएगा 
और चार या पांच, बिना इसके उपभोग के भी ठीक हो जायेंगे/
पर यह आपको नीम-हक़ीम बना देता है /



(लस्टस शहीद-चौक पर पहुंचता है , दरबारियों के साथ शामिल होकर /

एक लघु नाटिका का मंचन चालू है/)


लस्ट्स :


यह क्या तमाशा चल रहा है ?

     

सैमुएल :

यह एक नुक्कड़ नाटक है, राजकुमार/ 

(कुछ लोग जिनकी पीठ नहीं है, 

गली में इधर उधर चल रहे हैं 

और वे रो रहे हैं /

जैसे कि कोई बहुत भारी बोझ उठाने के कारण टूटी हो/)


लस्टस :

यह मैं क्या देख रहा हूँ? इनकी पीठ कहाँ हैं?


सैमुएल :

राजा साहिब, उनकी पीठ टूट चुकी है 

करों के भार और ज़बर्दस्ती वसूली के कारण 


लस्टस:

यह बढ़िया है/ इन में से किसी को भी 

सीधी गर्दन के साथ मत छोड़ो /

इनके चेहरे क्यों नहीं दिखाई दे रहे ?

क्या इस पर कोई पाबंदी है?


सैमुएल :

प्रभु ! बीते समय में इनके चेहरे थे 

परन्तु अब ,

आपके शासनाधीन होने के बाद 

लोग व्यक्तिगत तीखे नैन नक्श पसंद नहीं करते/

वे अपने चेहरे को कपड़े से ढके रखना पसंद करते हैं/

उनका चेहरे से किसी आदमी या औरत की 

हलकी सी साम्यता झलकती है/

और इसके अलावा कुछ नहीं /

यह चेहरे जो आपको दिखाई दे रहे हैं, राजकुमार 

यह मुखौटे हैं/


वे बेवजह मुस्कुराते रहते है/

और इन मुखौटों के पीछे, निष्ठाहीनता छुपी है/


लस्टस :

यह दो व्यक्ति कौन हैं 

इन में से एक ने आदमी की पोशाक पहनी है

और दूसरा औरत जैसा लग रहा है/


सैमुएल :

यह दोनों इस नाटक का हिस्सा हैं /

राजा साहिब, यह समलैंगिक हैं/

लेसबिआ , लेसबिआ, वह पुकारता है

एक युवती सामने आती है/

लेसबिआ, झुक कर राजकुमार का अभिवादन करो/

(वह झुक कर अभिवादन करती है/)


लस्टस:

इस में क्या विशेषता है सिवाय इसके कि सुंदर दिखती है/


सैमुएल :

लेस्बिआ  और उसकी मित्र अमारा आज शादी कर रहे हैं/


लस्टस:

दो लड़कियां आपस में शादी रच रही हैं/

क्या आदमियों का अकाल पड़ गया है?


लेस्बिआ:

क्योंकि हम एक दूसरे को प्रेम करते हैं और गृहस्थी बनाना चाहते हैं/


 लस्टस:

जो स्वतंत्रता हमने तुम्हें  दी है, उसका आनंद उठाओ /

यह एक नया राज्य है,

जहाँ नए विचारों का निषेध नहीं किया जाता /

जो तुम्हारे मन में आए , तुम सोचो/

 

और हमारे पास अमीर निजी निवेशक भी हैं/

यह कौन हैं जो  दिखने में विकृत पुरुष जैसे लगते हैं?


सैमुएल:

राजा साहब , आप उन्हें 'महंत' कहिये (किन्नर )

यह वह लोग हैं जो 

सब से पहले नवजात शिशु की ख़ुशख़बर देते हैं/


लस्टस:

वे किसी श्राप के शिकार हैं ,

या कुछ पापों के परिणाम भुगत रहे हैं 

हम यहाँ उन सब को ताज पहनाये रखते हैं 

क्योंकि उन्हे घातक दंड दिए गए हैं/


कभी कभी देवताओं से भी ग़लती हो जाती है 

और यह उनकी गल्तियो का परिणाम है/

 विनिर्माण दोष के साथ उत्पन्न हुए ,

उन्हें संसार द्वारा अस्वीकरण का दुःख भोगना पड़ता है/


लस्टस :

सैमुएल , इन महान प्राणियों को देखना अच्छा लगा/

अब मुझे कुछ रैप सुनाओ /

रैप संगीत बजाया जाता है/


(लस्टस को अपने मोबाइल पर कॉल आती है/ वह नाटक को अधूरा ही छोड़ कर  चल देता है/)


दैवीय वाणी :

लस्टस जैसे लोग 

गलतफहमियों पर ही केंद्रित रहतें  है/

और उसी मनोस्थिति से चलते हुए 

साधारण सी बात को भी उलझा देते हैं/



देवताओं का  मानवता से कोई मतभेद नहीं 

यद्यपि 'मात लोक' में कुछ भी सही नहीं है/

दानव अपनी साजिशों के तहत 

बढ़ती हुई हलचल देख रहे हैं /

विवेक और अविवेक की सीमा रेखाओं पर,

मानवता वहशीपन की बाँहों में है/

लस्टस और उसके चालित अपवित्र प्रशासन के कारण,

नैतिक शुष्कता के भंवर में दम  तोड़ रही है/


दैवीय इच्छा से परे कुछ भी नहीं है /

जो मारे गए और जिन्होंने ने मारा 

लस्टस की रचना किसने की ?

और अफवाहों की चक्की कौन चलाता है ?



 सर्ग  6 

राक्षसीय राजनीति की तैयारियां 

ब्रासिल : 

अमाजीनिआ की ताज़पोशी हुुई है सौंदर्य साम्राज्ञी के रूप में /

उसने संसार के विभिन्न भागों से आयी 70 सुंदर प्रतिद्वंदी  युवतियों के साथ मुक़ाबला किया था./

कैओस में कार्यक्रम चल रहा है

जहाँ लस्टस भी उपस्थित है/


समूहगान :

अमाजीनिआ जिसका वास्तविक नाम तमर  था 

वे लिलिथ की बेटी थी 

जोकि एक मादा-राक्षस  थी 

अत्यंत सुन्दर और विचारहीन आकर्षण युक्त 

और उसे क्रोध आया जब सेटन ने 

ईव का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की /

उसने देखा था उसे उस महिला पर अति अनुरक्त होते हुए,

परन्तु जब सेटन ने उसे इसका प्रयोजन बताया 

उसे यकीन हो गया और उसने पहली बातें अनदेखी कर दीं /

और सेटन को पहले से भी अधिक प्यार करने लगी/


अमाजीनिआ उसकी बेटी है/

वह सुंदर देश यू. एस. का भ्रमण कर आयी है/ 

वह कनाडा भी घूम कर आयी है/

उसने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से अध्ययन किया था/

उसके पास भौतिक केमिस्ट्री में डॉक्ट्रेट की डिग्री है/


ज्ञान के बिंना मुक्ति नहीं है /

यदि इसे घातक खुराक में ले लिया जाये 

यह मानसिक भय का कारक बन जाता है 

और मानवीय अनुभूति को नष्ट कर देता है/

लस्टस को प्रबुद्ध विकृति की लपटों से पकाया गया था/



वह  शारीरिक रूप से भी उतना ही सशक्त है,

 जितना कि  वह बौद्धिक रूप से जीवंत है/

लस्टस की आयु अधिक नहीं है, पर अधिक समृद्ध है 

बुराइयों के साम्राज्य के मार्गदर्शन  हेतु,

अपनी खतरनाक योजना के विस्तार के लिए 

मनुष्यों से जानवरों, पक्षियों और पौधों तक /


ग्रेडा लस्टस पर विशेष मेहरबान है

और उसने उसे अतिरिक्त शक्तियां प्रदान की हैं/

मानव में स्वाद सम्बंधित विकार पैदा करने की 

और उन सभी को हानि पहुँचाने की 

जो शांति,  करुणा और क्षमा में विश्वास रखते हैं 

बिल्कुल बेकार की बातें /


लस्टस:

अमाज़ीनिआ, पाताल लोक को  तुम पर गर्व है 

देवता रोते रहे, ईव लालायित  हो गयी 

परन्तु वे हमारी तैयारियों का आंकलन नहीं कर पाए/

तुमने तो सभी अवरोधों को दूर फ़ेंक दिया/

और अब एक नये संसार का प्रतिनिधित्व कर रही हो 

जोकि सुंदरता में यकीन रखता है 

और अपनी बुद्धि के सहारे चलता है, 

ईमानदारी और पवित्रता का लिहाज न करते हुए/


अमाज़ीनिआ: 

मैं आपकी आभारी हूँ 

कि मैं इस अन्धकार के साम्राज्य का प्रतिनिधित्व कर रही हूँ/

हम चाहते हैं कि और महिलाऐं सामने आएं/

यह कोई पुराना संसार नहीं है, जहां औरतें 

केवल गृहस्थी सँभालने के लिए ही होती थी/

अब गावों का परित्याग कर 

औरतों को शहर जाना ही चाहिए/

अपनी आजीविका को आगे बढ़ाते हुए, अपनी मर्ज़ी करनी चाहिए/


अब से, कुछ सदियों तक,

पति घर में बच्चे संभालेंगे और रसोई में आराम से काम करेंगे/

यह एक नई दुनिया है/

यहाँ बुद्धिमानी का कोई मूल्य नहीं 

समानता ही आपकी सम्पति है/

आप अपना मूल्य स्वंय निर्धारित कीजिये/

आप मुझ से किस काम की उम्मीद रखते हैं,लस्टस ?


लस्टस :


 आप वापिस जायें और साथ में अपने मित्रों को भी लेती  जाएँ 

अन -सिविल इंजीनियरिंग में 

एक छः महीने का डिप्लोमा करने के लिए/


अमाज़ीनिआ: 

यह अन -सिविल इंजीनियरिंग क्या है?


लस्टस :

यह दानवों की एक सूक्ष्म स्तर की राजनीति है/

पुरातन समय में, हमारे लोग धरती पर जाते थे ,

डकैतों का वेश धारण कर के ,

 छल पूर्वक कार्य करते थे 

परन्तु सभ्य होने का दिखावा करते थे /


पुराने षड्यंत्रों की ओर देखो /

राजा के दरबार के षड़यंत्रकारी 

दिखने में बहुत सभ्य दरबारी प्रतीत होते थे 

जो गुप्त  रूप से कार्य करने के लिए 

बहुत प्रयत्न  करते थे/

और राजा अथवा उनके राजकुमारों की 

सुरक्षा की जड़ें खोख़ली करने में लगे रहते थे /

अब, हालात बदल गए हैं /

बुराई, जिस का ज़िक्र करना भी वर्जित था 

अब सिखाई जाती है और उसका अभ्यास करवाया जाता हे 

इन विश्वविद्यालयों में भारी मात्रा में /


अमाज़ीनिआ: 

मैं हैरान हूँ/ ऐसा कैसे ?


 लस्टस :

वह समय पवन वेग से बीत गया 

जब लोगों के दिमाग में कुछ शब्द तैरते रहते थे /

भलाई, ईमानदारी, यथार्तता और चरित्र ,

प्रामाणिकता, पारदर्शिता , धर्मशीलता 

देवभक्ति और पवित्रता /


मैं खुश हूँ कि हमने रिकॉर्ड कायम किया है 

और आभारी हूँ यह स्वीकारते हुए 

हमारी पूर्व-व्यव्सथा ने 

इस महान कार्य को सम्पन्न किया है/


अमाज़ीनिआ, वह विष जिसने सुकरात की जान ली थी 

उसका प्राधान्य अभी भी है 

तुम्हें हर घर में 'क्रॉस' दिखाई देगा/

जो एक प्रेत अस्तित्व में सिमट गया है/


ज्ञान की अत्याधिक ख़ुराक से बिगड़ गया है 

ईश्वर का क्षेत्र /

लोग अब उस से आगे सोचने लगे हैं 

उन वस्तुओं के बारे में 

 जिनका अभी तक कोई अस्तित्व ही नहीं ,

वे वस्तुए, जिन्हे वे खुद रच रहे हैं /


भविष्य क्या है ?

यह भगवान नहीं जो हर प्राणी का भविष्य लिखता है 

यह लिखा जाता है मनुष्य के अपने कर्म, अपने वचनों ,

अपने विचारो के द्वारा /

और  प्रिय अमाज़ीनिआ,

इन विचारों को हम नियंत्रित करते है,


यद्यपि बीता हुआ कल, हो सकता है 

ईश्वर के नाम लिखा गया हो, पर भविष्य तो लस्टस का है/


अमाजीनिआ :

पर कैसे, लस्ट्स ,

सभी लोग अपनी धार्मिक मान्यताओं के साथ जीते हैं/

उनके अपने धार्मिक ग्रन्थ होते हैं/

गीता है, बाइबल है/

क़ुरान  है, तल्मूड है/

आप ऐसा सोच भी कैसे सकते हैं  

कि सुदृढ़ धार्मिक परिशोधन वाले यह लोग 

अपनी  राह से हटाए जा सकते हैं 

और आपका अनुकरण करने के  लिए बाध्य किये जा सकते हैं?


लस्टस :

बेचारी लड़की / तुम मुझे बताओ 

क्या धार्मिक प्रतिष्ठान में सब कुछ सही चल रहा है/

क्या वहां वासना नहीं/ घोटाले नहीं ?

कोई अपराध नहीं? कोई पाप नहीं?

वास्तविक प्रश्न तो यह है :

कि कैसे इन स्थलों की पवित्रता को और अधिक नष्ट  किया जाए 

ताकि वे लोग जो इन धार्मिक रीति -रिवाज़ों में यकीन रखते हैं 

उन्हें आंतरिक रूप से कोई समर्थन न मिले/

हमें, यह सुनिश्चित करना होगा  

कि उनके दिल ओ -दिमाग इतना अधिक औपचारिकताओं से भर दिए जाएँ

कि वे हमारे संधि योजन को समझ ही न पाएं/


 मैं तुमसे सहमत हूँ, अमाजीनिआ , ईश्वर ने  ईसा की उत्पति की 

और उसका सन्देश प्रकाश की एक प्रखर तरंग की तरह है/

पर एक अँधेरे ज्ञानक्षेत्र के आगे  

एक मोमबत्ती कहाँ टिक पाएगी/

एक टिमटिमाती रौशनी 

कितनी देर तक तेज़ हवाओं का दबाव झेल पाएगी?  


पंजाब में भी कुछ गुरु थे 

जिन्होंने सारे माहौल को आलोकित कर  दिया /

इसी भाँति , प्रभु कृष्ण, प्रभु राम 

महान  ईश्वरीय सृष्टि 

जिन्होंने हमारे कई महान लोगों की जान ली.

परन्तु वास्तविकता यह है, प्रिय 

कि वे सब आये और चले गए ,

परन्तु अँधेरा हर चमकते  सितारे पर हावी रहता है/

हम कुछ और नाम भी जानते है ,

ओशो, रामतीर्थ, विवेकानंद, दयानन्द 

और ईसाई समुदाय के कई महान संत 

जैसे कि सेंट ज़ेवियर 

जिन्होंने हमारी  शक्ति से उलझने की कोशिश की/

अंधकार सब प्रकार के प्रकाश की माँ है /

इसी प्रकाश में वे हमारे चेहरे देखते हैं 

और ख़ुद के भी/

और जब प्रकाश गायब हो जाता है 

वे भी अन्धकार की आग़ोश में चले जाते हैं/


ज़िंदगी भी तो एक टिमटिमाती लौ है/

रात के गर्भ से उत्पन्न  

रात में ही निवृत हो जाती है/

जैसे जैसे समय इस आग को बुझाता है/

इसलिए , प्रिय अमाजिनिआ/

हम सभी इस अधर्मी विस्तार के सहभागी हैं/

मृत्य एक भय की तलवार है 

जिसे ईश्वर ने मनुष्य के सिर पर लटकाया हुआ है 

ताकि वे अपने अनिश्चित भाग्य से भयभीत रहें/

और ऐसी भीड़ हमारे स्टालों पर एकत्रित हो रही है


कि सारी गणनाएं गलत हो गयी/ 

एक के बाद एक, एक पंक्ति के बाद दूसरी 

मृतक नर्क की ओर रवाना हो रहे है/

नर्क की ओर दस हज़ार 

और शाश्वतता की ओर एक/

यह हमारे लिए गर्व का विषय है 

कि हमें आशातीत लोकप्रियता मिली है 


हालाँकि यह संतुष्टि का विषय है 

कि वे सारी प्रणालियाँ 

जिन्होंने मनुष्यो को दैवीय गुण सिखाये 

इस समय अस्त -व्यस्त हो चुकी हैं/

अगर आप मंदिरों की बात करें,

वे अब केवल संगमरमर की प्रतिमाएं हैं/

और पुजारी केवल भौतिक स्तर पर व्यस्त हैं/


अधिकतर संतों ने एक सीधा लिंक  बना लिया है

नर्क के सर्वर्स के साथ 

और हमारे आइवरी टावर से 

उन्हें रिमोट कण्ट्रोल किया जाता है /

संसार के कैदखानों में संतो की संख्या देखो /

सुधारगृह तो नाममात्र के हैं 

यह सभी हमारे सर्रोगेट नर्क हैं/

जहाँ पर हमारे एजेंट्स हमारे उत्पाद बेचते हैं 

और परिपूर्ण व  प्रचुर मात्रा में राक्षसी वृति पैदा करते हैं/


अमाजिनिआ :

आप किस तरह के संसार की  परिकल्पना कर  रहे है, लस्टस ?

किस चीज़ की कमी है?

जहाँ तक मुझे समझ आता है , 

संसार में सभी कुछ गलत ही तो है/

अब आप और किस तबाही की योजना बना रहे हैं/



लस्ट्स : 

ईव  के साथ मुख्य मुद्दा था, वर्जित फल। 

इसे हमने पीछे छोड़ दिया है /

सभ्यता की रगों में ,

ज्ञान विष की तरह प्रवाहित हो रहा है/

सेटन ने इस मासूम वरदान को भृष्ट कर दिया,

और मानवता में दखल करते हुए 

इसे विकृत भाईचारे में बदल डाला/

निःसंदेह ,वे ईश्वर की संतति है 

उसके बेहद प्रिय 

पर अब मुझे उसका चेहरा सदैव मायूस दिखता है/

विचारों में खोया,

उसके  माथे पर चिंता की लकीरें दिखती है/

वह किसी सर्वनाश की प्रतीक्षा करता है/

सब कुछ अब उसके नियंत्रण से परे है/

मनुष्य जिन्होंने ने ज्ञान प्राप्त किया था 

उन्होंने भी अपनी राह स्व-नियंत्रित करने के 

ढंग खोज लिए हैं/

जिन लोगों को वह अपना संमझता था, नकली हैं /

केवल उन पर उसके ब्रांड का लेबल लगा हुआ है/

आंतरिक रूप से, वे दैवीय गुण खो चुके हैं/

हर धर्म अब संगमरमर की मूर्तियों का व्यापार करता है/

जबकि देवताओं की मूर्तियां अपने मोबाइल फोन पर व्यस्त हैं/


अब और क्या जानना बाकी  है?

फेफड़ों को कितनी वायु की आवश्यकता होती है /

तुम कितना खा सकते हो?

तुम कितना ऊँचा सुन सकते हो?

हर वस्तु की एक सीमा  होती है/

यहाँ तक की बुद्धिमता की भी सीमा  होती है/

परन्तु , मूर्खता ,,,,,,

अमाजिनिआ 

मूर्खता सीमाहीन है/


और सेटन ने अत्याधिक ज्ञान फ़ैला दिया 

रोशनी के तीव्र प्रकाश सरीख़ा, जो आँखों को अँधा कर देता  है/

अगर आपको किसी व्यक्ति की पाचन शक्ति बिगाड़नी है 

मिठास भरे व्यंजन बनाओं 

और उसे भरपेट खिलाओ /


ज्ञान जो जानकारी का जन्मदाता है 

इतना लालायित करने वाला व्यंजन था 

इस से मनुष्य के मुँह में पानी आ जाता था/

और देखो उसे 

वह बिना भूख़ के खा रहा है,

और बिना कोई हास्य चैनल देखे, उसे हँसी ही नहीं आती /

ज्ञान के फल का अत्याहार करने से 

मनुष्य को  इसका नशा महसूस होता है,

 इसका जादुई असर होता है/

और वह सीधे नर्क की राह पकड़ लेता है/



दैवीय वाणी :

सभी मृतकों को निर्देशित किया जाता है स्टालों की ओर 

जोकि नर्क के द्वार पर सहायता की पेशकश कर रहे हैं /

एक सप्ताह या लगभग इतने ही समय में , 

मात्र एक या दो आत्माएं ही ऐसी दिखाई देती हैं 

जिन्हे स्वर्ग की राह पर भेजा जाता है/


अगर हम भीड़ के हिसाब से देखें,

ऐसा प्रतीत होता है कि दानवो ने देवदूतों से बाज़ी मार ली है/

देवता संकट ग्रस्त प्रतीत होते हैं/

क्या उन्होंने इस ओर ध्यान दिया ?

याकि, वे केवलअपने सुखद निवास में नृत्य देखने में व्यस्त हैं?


या फ़िर, वे पृथ्वी के प्राणियों को कोसने में लगे हैं,

उनके दोषों के लिए जिस वजह से असमंजस  फ़ैला 

संसार में/

जबकि दानव तो परवाह ही नहीं करते उनकी धृष्टताओं की/


नरकद्वार पर बढ़ती हुए भीड़ ने  

लस्टस  को और शक्ति दी है 

जिसका घमंड तो अपरिमित हो गया है/

यह प्रसन्नचित लोग उसका नया खोजा गया खज़ाना हैं/



लस्टस :

सर्ग  7 : दस आज्ञा-पत्र 


लस्टस :

जानवरों का  साम्राज्य निषेध मुक्त है,
जिस से उन्हें अपना संतुलन और शांति 
बनाये रखने में मदद मिलती है,
कुछ ऐसा ही पक्षियों के साथ हैं/
एक भी पक्षी कभी भी  सैक्स से वंचित नहीं रहता /
आप देखिये, वे सब कितने शांत रहते हैं!

 परन्तु मानव में इस से बड़ी कोई क्षुद्धा ही नहीं कि 
उनकी सौंदर्य और शरीर के प्रति प्यास 
कभी तृप्त ही नहीं होती/
और देवत्व की राह तलाशने की बजाय, 
और यहाँ तक कि संसार को बेहतर बनाने के 
तौर- तरीके खोजने की बजाय 
मानव प्रजाति अपना यौवन और वृद्धावस्था 
को व्यर्थ गवांने में लगी है/
सांझेदारों के पीछे लालायित रहना ,
विवाह के बारे में और गृहस्थी बसाने के बारे में सोचते रहने में/


इस समय यह लोग व्यस्त रहेंगे 
सुयोग्य मिलान ढूंढने और विवाह रचाने में 
और उसके बाद कचहरियों के चक्कर लगाने में 
दानव व्यस्त रहेंगे, अपने किलों को सुदृढ़ बनाने में /



किलर इंस्टिंक्ट:

यह एक बहुत पेचीदा षड़यंत्र प्रतीत होता है,

विनाश के स्वामी 

इस सब से आपको अंत में क्या प्राप्त होगा?


लस्टस :

किशोरावस्था से लेकर , वयस्कता तक 

आदमी और औरतें विपरीत सैक्स के ही सपने लेते रहते हैं/

उनके दिमाग पर शादी का ही भूत चढ़ा रहता है/

अधिकतर, बेमेल विवाह हो जाते हैं/

पेज 69 

और यौन कुंठा 
इस संसार का एक बड़ा मुद्दा बन चुका है/
एक व्यक्ति जिसका सारा अस्तित्व ही सैक्स पर केंद्रित हो, 
वह ईश्वर के बारे में कैसे सोच सकता है?
वह मोक्ष के बारे में कैसे सोच सकता है?
और हम इसका सम्मिश्रण बना देंगे,  इसे धर्म के साथ मिश्रित करते हुए/
 
वे जो यह अनुभव करते हैं के वे पथ भृष्ट हो गए हैं/
वे धार्मिक संघ में शामिल हो जाते हैं कुंवारे के रूप में। 
कुंवारेपन से बड़ा असत्य तो  कुछ हो ही नहीं सकता /
और शुचिता  के विचार से बड़ा और खरनाक 
कोई भी क्रूर कानून नहीं हो सकता/


अगर प्रकृति ने तुम्हे एक काया दी है,
इस में देखने के लिए आँखे हैं,
इस में हाथ है जिनसे आप भोजन कर सकें,
जिसमें टाँगे है जिनसे आप दूर दूर तक चल सकें/
और मानव के जननिक किस लिए है?
केवल भूखे मरने के लिए ?


एक पवित्र व्यक्ति तो वह है जो,
मन और शरीर दोनों ही से पूर्ण  महसूस करता है/
हमारे खास व्यवहार की ओर जीवों का स्वाभाविक झुकाव पवित्र है/
और यह उतना ही आग्रहपूर्ण है जितना कि मूत्र करने की प्रबल इच्छा/
जिसे अगर रोका जाये, तो दिमाग़ को दूषित कर  देती है/
और व्यक्ति तब तक शांत नहीं रह पाता
जब तक उसकी यह स्वाभाविक वृतियां मुक्ति नहीं पाती/



किलर इंस्टिंक्ट :

आप कहते है, महादूत, कि विश्वविद्यालयों के 
शीर्ष पद उन लोगों को दिए जाने चाहिए,
जो सब से निम्न पद के योग्य हैं/
आप शिक्षा प्रणाली का करना क्या चाहते हैं?
आपके मन में क्या चल रहा है ?

पृष्ट 70 

लस्टस :

ज्ञान ही तो मूल पाप है/
मेरी नज़र में यही सबसे बड़ा पाप है/
सर्वप्रथम, हम यह सुनिश्चित करेंगे कि आदर्शों पर रोक लगा दी जाएँ/
और केवल सौदेबाजी ही रहें/
अल्प  ज्ञान बहुत खतरनाक होता है 
आप सब यह जानते हो 
और ज्ञान जितना अधिक होगा, खतरा भी उतना ही अधिक होगा/


हम सुनिश्चित करेंगे कि सभी असाधारण दिमाग वाले लोग 
जोकि विज्ञान और तकनिकीकरण में 
सभी मानवीय सीमायें पार कर
देवताओं के राज्य में भटकते रहें,
ताकि, वे ईश्वर को चुनौती दें 
और, क्रोधित होकर,
ईश्वर उन्हें हमारी गोद में फ़ेंक दे/


हमारे विश्वविद्यालाय ज्ञान के दाहगृह होंगे/
हम सुनिश्चित करेंगे कि शीर्ष पर वे लोग रहें 
 जिनकी बुद्धि में कोई हिस्सेदारी नहीं है/
जो प्रकाश से वंचित हैं 
जो अंधकार फ़ैलाने में यकीन रखते हैं 
अन्धकार का मतलब रात नहीं 
न देखने की क्षमता अन्धकार है/
 और हम सुनिश्चित करेंगे कि 
यह संसार अपने सभी दैवीय प्रावधानों से वंचित हो जाये /



लस्टस  :

सेटन की क्या उपलब्धियां  रही/
और उसके क्या  ध्येय अधूरे रह गए,
जिनको पूरा करने का दायित्व आपने लिया है?

पृष्ट 71 

तुम्हे मेरे कार्य की पूर्व योजना की जानकारी चाहिए/
सेटन का युग अच्छा युग था ,
संसार पर धर्म का राज्य था/
धार्मिक लोगों को आमंत्रित किया जाता था 

राजाओं की गतिविधियों का अधीक्षण करने के लिए ,
और अधिकांश समय 
शासक उनकी बुद्धिमता की बातें मानते थे/

यह वह समय था जब संसार अधिकतर 
देवीय गुणों से निर्मित था ,
लोग प्रकृति प्रेमी थे 
ईश्वर में यकीन रखते थे, उस से डरते थे 
अपनी मिथ्या प्रवृतियों को सम्मोहित रखते थे 
और देवालयों में जाते थे उपासना के लिए /


पर हमारा समय उलटा है,
जबकि लोगों को ईश्वर में कोई आस्था ही नहीं। 
जिसका अप्रत्यक्ष अभिप्राय यह है कि वे हमारे जाल में उलझ गए हैं/
वे देवालयों में तो जाते है, परन्तु मात्र दिखावे के लिए/
वे विश्वविद्यालयों में जाते हैं, केवल नकली ज्ञान के लिए/
वे भले हैं, पर नाम मात्र के लिए /
उन्हें ईसा मसीह में कोई आस्था नहीं,
क्षमादान, दान- पुण्य , पाप स्वीकरोक्ति ,
यह सब फैशन में परिवर्तित हो गए हैं/


यह एक क्रूर संसार है, अथक महत्वाकांक्षा का/
धर्म को तो नकेल डाल दी गयी है 
चतुर राजनेताओं द्वारा/
नेकी, सुविचार, आदर्श /
अब इन सब की तो कोई प्रासंगिकता ही नहीं रही /
यह तो सभी को मुफ़्त में मिलते हैं/
एक बार विप्लव का सामना करना पड़ा था /


पृष्ठ ७२


मिल्टन के 'पैराडाइस लॉस्ट ' में 
अब यही विप्लव संसार की संसद में आकर बस गया है/
जहाँ लोग मतदान तो करते हैं, पर कोई उच्च विचार नहीं दे सकते/
प्रचार करता 

हमने पूरे संसार में अपने साम्राज्य फैला दिया है/
अब हम 
आगे बढ़ रहे हैं प्रकृति को आध्यमिकता -विहीन करने के लिए/
और जानवरों  के संसार के ओर /


(प्रेस कांफ्रेंस समाप्ति )


किलर इंस्टिंक्ट का एक संवाददाता, जिसे की राजकीय कोष से मानदेय मिलता है और वह दानव की योजनाओं का प्रचार करता है , दुनिया  को जानकारी दे रहा है, इन योजनाओं के बारे में :

महामान्य , नरकवास के स्वामी 
महान लस्टस /
चाहते हैं प्राथमिकता के आधार पर नर्क को पुनर्जीवित करना /
संसार से सारी अच्छाइयाँ ख़त्म कर दी जाएंगी,
और मानव बुराई को ही एकमात्र उपलब्ध अच्छाई के रूप में जानेगा/
यह ईश्वर के लिए एक कठिन परिदृश्य होगा/
हमारे अनुमान के अनुसार, ईश्वर अत्यंत कमज़ोर विकेट पर है 
शीघ्र ही हम जवाबी हमले का आयोजन करेंगे/
और ईश्वर के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन करेंगे/


दैवीय वाणी :

क्या देवगण बिल्कुल अनभिज्ञ थे 
कि दानवों के राज्य में क्या गतिविधियाँ चल रही थी?
क्या उन्होंने स्वंय ही निरीह लोगों को 
बाध्य नहीं किया था 
दानव की गोद में जाने के लिए/
क्या यह देवताओं की ही एक अभूतपूर्व योजना नहीं थी ?
सेटन और उसके रिश्तेदार लस्टस को 
पूरी ढील देने की 

 

और अंत में जल्लाद का फंदा खींचने की?
और उस सब को अक्षम करने की 
और इस तरह से उनके पतन के योजना बनाने की/
पर, यह सच भी ही तो , कोई इस पर यकीन नहीं करेगा/
जो कुछ भी दिखाई दे रहा था. 
यह चिंताजनक और निराशाजनक था/





 

 लस्टस : सर्ग 8 

जवाबी विस्फ़ोट 

स्थान: स्वर्ग 
ईश्वर अपने सिंहासन पर विराजमान है/


किलर  इंस्टिंक्ट: 

महास्वामी ,आपको पता ही है कि 
नर्क में क्या घटित हो रहा है/
कैसे लस्टस ने सत्ता संभल ली है 
और किस तरह से पूर्ण रूप से तैयारी कर ली गयी है
दानवो की सैन्य शक्ति के द्वारा 
आप क्या कहना चाहेंगे?
आप धरती पर अपने दुर्गों की रक्षा  कैसे करेंगे?
आपकी धरती को तो  गंभीर खतरा है/
ऐसा ही आपके वायु-मंडल को /
आपका आकाश भी अब पहले जैसा पवित्र नहीं है 
उन्हें पूछो की क्या कल बारिश  होगी। 
तुरंत उत्तर मिलता है,नहीं, हिमपात होगा/


विज्ञान ने उन सब रहस्यों का पर्दाफाश कर  दिया है 
जोकि धर्मात्मा दिग्गज़ अपने दिल में छुपाये रखते थे/

रामायण और भगवान कृष्ण के समय में 
ऐसा माना जाता है कि भगवान अपने योद्धाओं को 
आशीर्वाद स्वरूप, कुछ वरदान देते थे ,
कभी यह वरदान सूर्य देवता द्वारा दिए जाते थे 
कभी गंगा माँ के द्वारा,
ऐसी थी उनकी शक्ति और ऐसा था इनका आतंक,
जिसके फस्वरूप, भीष्म जैसा योद्धा तब तक जी पाया
जब तक उसने प्राण त्यागने की इच्छा प्रकट नहीं की/

 
अब साधारण इंसान के साथ भी ऐसी घटनाएं हो रही हैं ,
शरीर के अंगों का प्रत्यारोपण हो रहा है,
और, मनुष्य न भी रहें,
उनके मस्तिष्क हमेशा के लिए रह सकते हैं/
महास्वामी ,यह आपके लिए बहुत बड़ी चुनौती है/
ऐसा प्रतीत होता है कि आज जिसने 
'पैराडाइस लॉस्ट' लिखा है, वह मिल्टन यदि 
उसी महाकाव्य का दोबारा नामकरण 'सेटन' कर दे/
हमने देखा है कि दानव की नागरिक सेना ने 
अपनने  धार्मिक ग्रन्थ 'डेलिसिआ 'का प्रमोचन किया है/
आप इस बारे में क्या कहना चाहेंगे?


ईश्वर बोलने की चेष्टा करते हैं , परन्तु चित्रगुप्त माइक पकड़ लेते हैं/


चित्रगुप्त:


मैं ईश्वर के जन- संपर्क विभाग का प्रमुख हूँ/
कृपया आप अपने सभी प्रश्न मुझे सम्बोधित करें/


किलर  इंस्टिंक्ट :

ठीक है, उत्तर देने के लिए आपका स्वागत है/


चित्रगुप्त :


मैंने लस्टस की प्रेस कांफ्रेंस सुनी है,
और अति-आत्म विश्वास में वह जो कुछ कह रहा है, वह भी सुना है/
सेटन को ज्ञान था उन वज्रपातों के बारे में, जो ईश्वर के पास थे 
और कैसे उसे आग की झील में फ़ेंक दिया गया था 
विद्रोही स्वर्गदूतों के समूह के साथ/


आग तो एक छोटी चिंगारी सरीखी होती है 
जोकि मौन वनों के हृदय में निवास करती है/
दैवीय वृति भी एक अलौकिक चिंगारी सम होती है
जोकि हर प्राणी के केंद्र में निहित है/


 
यहाँ तक कि यह लस्टस के ह्रदय में भी बसती है,
और उन सबके भी, जो उसके संग हैं/ 
सम्पूर्ण धरती के आर- पार, अरबों की  संख्या में लोग,
जिन के बारे में उस का दावा है कि वे उसके साथ  गए हैं 
उनमें  पहले भी यह आग थी और अब भी वही दैवीय चिंगारी है/
और यह मोटी त्वचा की बहुत सी परतों के कारण है,
जिन्हे उन्होंने उस चिंगारी के ऊपर लपेट रखा है 
ताकि यह नीचे दबी रहे 
और दानवों में इतनी गहरी गाड़ दी गयी  है 
कि उसके लपट के रूप में उठने की कोई आशा नहीं 
और जो इसके ऊपर ढेर लगा दिए गए हैं/
 उस मलबे से बाहर निकलने की भी नहीं /


हमें चिंता सत्ता रही कि अधिकाधिक लोग
गंदगी के ढेर में बदलते जा रहें है,
फिर भी हमें विश्वास है कि 
दैवीय चिंगारी अभी भी उनमें निहित है 
और वह दिन दूर नहीं जब 
यह गन्दा पैक, पूरी तरह से विघटित हो जायेगा/
और उन आत्माओं की झिलमिलाती आवाज़ फिर से  गुँजायमान होगी/


हम जैकबूटों की कदमताल की गर्जना भरी आवाज़ें सुन रहे हैं 
पूर्व और पश्चिम सब ओर से 
और धार्मिक क्रोधी व्यक्तियों की आवाज़ें 
जो दैवीय शब्दावली का प्रयोग करते हुए
बेचारी जनता को गुमराह कर रहे हैं/
हम देख रहे हैं कि धार्मिक स्थल 
राजनीति और यौन दुराचार केअड्डे बन गए हैं/ 
हम जानते हैं कि हमारे योग्यतम व्यक्ति
 विश्वविद्यालयों से सेवामुक्त हो चुके हैं/
और पाठशालाओं का संचालन
 राजनेताओं और उद्योपतियों द्वारा किया जाता है 
हम जानते हैं कि बहुत अधिक दूषित पानी 
पवित्र गंगा नदी में बह गया है/
और यहाँ तक कि , संत भी दानवों की तरह 
आग उगलना बंद नहीं कर रहे/


हम जानते हैं कि सेटन को हमारी शक्तियों के बारे में पता था,
जोकि लस्टस की जानकारी में नहीं हैं 
और उसने ईश्वरीय लोगों को एक कठिन परिस्थिति में डाल दिया है/ 
इस कारण, हमें बहुत सोच समझ कर निर्णय लेना पड़ेगा 
और लस्टस  को समूल नष्ट करने के लिए युद्ध की घोषणा करनी पड़ेगी, 
जोकि सब से ज़्यादा अपवित्र कीट है/


किलर  इंस्टिंक्ट :


क्या आप सोचते हैं कि आप 
दानवों के इस धावे के विरुद्ध युद्ध कर पायेंगे/
हो सकता हैं आपको  भगवान कृष्ण को दोबारा भेजना पड़े 
दानवों को युद्ध में परास्त करने के लिए/
या कि  फिर मान लें कि यह दुनिया तो आपके हाथ से गयी /
आप मानव प्रजाति को कैसे बचा पाएंगे?


यह  ईसा मसीह के बाद का युग है/
बाइबल के होते हुए भी ,
यह इसके दूसरे भाग ' नवविधान ' की ओर मुड़ गया है/
और अब शेष कुछ भी नहीं रहा 
सिवाय पवित्र शब्दों के /

सब से नेक मनुष्यों के आचरण पर भी प्रश्न उठाये जा रहे हैं/
जो सब से उत्तम बिंदुओं 
राजनीति, धर्म और शिक्षा पर नियंत्रण रखते हैं/
अब लोग किस के प्रति अपनी आस्था रखें /
नशीले पदार्थों में ? जिसके अँधेरे में तो वे पहले ही रास्ता टटोल रहे हैं/



 चित्रगुप्त :


सारा परिदृश्य बदतर के लिए बदल गया है/
दानवों की  शक्ति में वृद्धि हो रही है,
और वे सारे संसार को बंदी बना रहे हैं/
उन्होंने सब ओर घेराबंदी कर  दी है/
प्रत्येक संस्था पर लस्टस का जादू चल गया है/
लोग चिल्लाते है, धर्म, धर्म 
मन से, धर्म जा चुका है/
एक नकली रोना, वो भी बढ़ा चढ़ा कर/
चाहे कितना भी गर्म माहौल हो, 
प्रकाश की सेनायें हार नहीं मानने वाली /

एक क्रांति आ कर ही रहेगी/
कोई और महापुरुष प्रकट होगा 
ईसा बहुत नम्र और विनम्र थे,
उनके बलिदान का असर पड़ा /

परन्तु लस्टस के उत्थान के बाद 
सारी बातें गायब हो गयी 
सात पापों के और नर्क के बारे में 

परन्तु अब हमें भगवान कृष्ण सरीखे 
 किसी अवतरण की आवश्यकता महसूस हो रही है 
जोकि इनका सांस लेना दूभर कर दे 
और इन दानवों के प्राण हर ले/
आज कल में ही ,आप देखेंगे 
कि लस्टस का यही अंत होगा/


(प्रेस कॉन्फ्रेंस समाप्ति )

दैवीय वाणी :

पैग़म्बर आते है, पैग़म्बर जाते हैं 
अपने पीछे अँधेरे की चादर को और सघन छोड़ जाते हैं/





 लस्टस : सर्ग  9 

निकट भविष्य में युद्ध 


एक घोषणा :

अरे! सभी गणतंत्रवादी  केओस पहुंच जाओ/
एक घंटे  के बाद पेंडीमोनियम में सत्र शुरू हो जाएगा/
दानवों की संसद, पेंडीमोनियम, एक गोल हॉल जैसी लगती है, जिसमें उच्च गुणवत्ता वाली कुर्सियां,, ए. सी. , वाई फाई और एक बड़ा स्क्रीन लगे हैं/

एक आवाज़ :

तबाही के अधिपति , महान लस्टस पधारने वाले हैं/
सब खड़े हो जाते हैं और लस्टस केन्द्रीय मेज़  की ओर जाता है और अपना आसान ग्रहण करता है/ उसके दोनों और उसके राज्य के सचिव बैठे हैं /
हाल में लाखों पंखधारी जीव बैठे थे ,
जोकि इतना बड़ा था जितना कि भारत और अफ़ग़ान के बीच की दूरी जितना क्षेत्र /


 क्वारंटाइन :  ( महाराधिराज का विशेष सचिव)

मित्रों, साथियों और महान ज्वलंत आत्माओ,
आज हमें ख़बर मिली है कि  
देवगण बहुत निराश हैं/
और उन्होंने इस सारे मुद्दे पर 
बहुत गंभीरता से सोचा है/
और वे योजना बना रहे हैं कि 
किसी महान आत्मा को धरती पर भेजें /

और आप अच्छी तरह से जानते हैं, क्यों. 
इस से पता चलता है कि वे कितने मायूस हैं/
वे कितना घिरा हुआ महसूस कर रहें हैं/
सर्वप्रथम, मुझे आपको बधाई देने दो /
आपने नदियों का रुख़ बदल दिया है 
मानवता दिशाहीन हो चुकी है/
कवि , गायक और दार्शनिक 
महसूस करते हैं जैसे कि वे अप्रासंगिक हैं/ 
ऐसा युद्ध पहले न कभी लड़ा गया था, न जीता गया था,
जिसमें शरीर आत्मा को भीतर से नष्ट कर  देता है/
अब मैं, आदरपूर्वक,
महान लस्टस को आमंत्रित करता हूँ , आपको संबोधित करने के लिए/


लस्टस :

शैतानो , सेनापतियो, उच्च अधिकारियो,  बदला लेने वालो, रक्षको , दावेदारो, छापा मारनेवालो और 
छद्मवेशियो राजनीतिज्ञो, अध्यापको, वकीलों षडयंत्रकारियो , मिलावटखोरो,  कॉरपोरेट मित्रो साथियो और अन्धकार प्रेमियो 
क्वारंटाइन ने सही कहा है 
ईश्वर इस समय गहन चिकित्सा इकाई में है 
और उसका संसार लगभग मर चुका है/
तुमने उस प्रकाश  पर अन्धकार के परदे  डाल दिए हैं 
जो स्वर्ग से उत्पन्न होता है/
मनुष्य अब मुसीबत के समय,
ईश्वर को या उसके ऊतकों को याद नहीं करते 
पर हमें पुकारते हैं उनकी समस्याएं हल करने के लिए/
मैं एक बात पर आपका ध्यान पुनः केंद्रित करना चाहता हूँ
तुम्ही सब से मूल धारक हो 
इस संसार के सभी अधिकारों के 
सब से पहले, एक शून्य के अलावा कुछ भी नहीं था/
अन्धकार के अलावा कुछ भी नहीं था/
और यही अँधेरा प्रकाश का उत्पति स्त्रोत है/

केवल हम में ही अन्धकार देखने की शक्ति है 
जबकि देवगण और उनके मनुष्य,
प्रकाश की उपस्थिति में भी कुछ नहीं देख पाते/
ईसा ने उन्हें कहा कि मदद मांगो,
पर उसने उन्हें यह नहीं बताया कि जब वे,
ऊपर की ओर देखते हुए चलेंगे,
सम्भवतः वे बुराई से टकरा कर अपना संतुलन खो देंगे,
जो लोगों की नज़र से बच कर  रहती है 
परन्तु एक साँप की तरह कुन्डली मारे रहती है 
और मनुष्य के दिमाग को वास्तव में अव्यवस्थित कर देती है/


वह प्रकाश -पुँज जो देवदूतों के पास है 
और जिसे वे लोगो में बिखेरते हैं,
जिनके दिमाग तो टिमटिमाते ही रहते हैं 
मृत्यु के क्षण तक भयग्रस्त और प्रार्थनारत रहते हैं/
वे हमारी इस शक्ति से अनभिज्ञ हैं  
कि हम तो एक ही फूँक से इसे बुझा सकते हैं/

दुनिया में जितनी भी शमाएँ हैं, जितने भी लैम्प हैं 
उन सब में एक अंतर्निर्मित अदृढ़ता है;
वे लड़खड़ा जाते हैं,
जब उनका सामना गहरे रहस्यों से होता है/

आप जागते हैं 
और दोबारा सो जाते हैं
लहरों की और कोई मंज़िल नहीं होती 
सागर के अलावा/

कौन हमेशा के लिए चमकता रह सकता है?
कौन इतना शूरवीर है?
जीवन, प्रकाश की तरह ही, वापिस धकेल दिया जाता है    
कब्र के अँधेरे की ओर /

इसलिए, आप जो इस महान साम्रज्य के गौरान्वित उत्तराधिकारी हैं 
जिनका सूर्य कभी अस्त नहीं होता 
याद रखना, ईसा आएँगे और जाएंगे,
परन्तु तुम अपनी चमक को बनाये रखोगे/


वे सोचते हैं 
कि ईसा बहुत निर्बल थे 
हमारी गर्म सांसों को झेलने के लिए/
इसलिए, प्रभु योजना बना रहे हैं कि 
धरती को सुरक्षित रखने के लिए 
भगवान कृष्ण या उनके जैसा ही कोई भेजें/

तुम्हे, चिंतित होने की आवश्यकता नहीं ,
डरने जैसी कोई बात नहीं /
दुर्योधन ! कहाँ हो तुम ?
अपनी उपस्थिति बताओ और अपने निन्यानवे भाइयों की भी/
तुम सोचते हो कि तुम महाभारत में पराजित हुए/
भगवान कृष्ण के कारण। 
बिलकुल नहीं /

तुम इसलिए हारे क्योंकि कर्ण पांडवों का जवाबी विस्फोट नहीं था/
तुम्हे अपने दिमाग से काम लेना चाहिए था 
जिसे कि तुमने अपने मामा शकुनि को रहन रख  दिया था/
जिसके निजी स्वार्थ थे 
और उसने अपनी लड़ाई तुम्हारे कन्धों पर लाद दी , छिपे तौर पर/

फिर भी, तुम्हें एक अवसर और मिल सकता है 
कृष्ण का  सामना  करने के लिए/
इस बार अच्छे से तैय्यारी करना/
यहाँ, हमारे पास अधिक अनुभवी योद्धा हैं/
मुझे संदेह है कि देवता कृष्ण को दोबारा चुनेंगे/
क्योंकि कृष्ण ने बहुत हत्याएं की,
फिर भी दानव  तो अभी भी फलफूल रहें हैं/
हमारे अस्तित्व को कोई ख़तरा नहीं है/
क्योंकि हम अदृश्य हैं/
हम अमूर्त हैं/
हम आभासी वास्तविकता हैं/
हम लोगों के दिलों में बसते हैं /
हम उनके विश्वास में जीते हैं/
हम अमर हैं/  
निडर /
और उतने ही शाश्वत 
और चिरस्थायी  जितना कि भगवान/

(लस्टस मंच से नीचे आ जाता है/)


दैवीय वाणी :

भगवान उनके गर्व के अभिकथन सुन रहे हैं/
और उनके स्वयं -निर्मित संसार में
उन्हें  इस विश्वास की घुड़सवारी करने दे रहें है/
कौन जानता  है 
कि आज का सूर्य किस प्रतिशोध के साथ उदित होगा/
वही सूर्य जो कल कोमलता से अस्त हो गया था/
 


 लस्टस :   सर्ग १० 

ब्रम्हांड में भूकम्प 

ब्रह्मा इंद्र और विष्णु से विचार विमर्श कर रहे हैं/


ब्रह्मा :

संसार में एक विचित्र स्थिति उत्पन्न हो रही है/

हमें ऐसी प्रतिध्वनियो की अनुभूति हो रही है 

जैसे कि युद्ध की पूर्व सूचना हो/

दानव दोबारा अपना सिर उठा रहे हैं,

और एक के बाद एक चुनौतियां दिए जा रहे हैं/

लस्टस सिँहासनासीन हो चुका है /

और उसने  दृढ़तापूर्वक दावा किया है

कि सम्पूर्ण धरती उसके क़ानूनी अधिकार- क्षेत्र में है/


विष्णु, जाइये और तथ्यों की पुष्टि कीजिये/

और वापिस आकर स्थिति से अवगत करवाएं /

यह एक खतरनाक विस्तार है/ 


विष्णु :

क्या मैं इंद्र को साथ ले जा सकता हूँ ?


ब्रह्मा :

इंद्र ,आप विष्णु के साथ जाईये/

मुझे स्थिति का सही जायज़ा मिलना चाहिए/


(रास्ते में उन्हें नारद मिलते हैं/) 


नारद:

तो, आप धरती की ओर बढ़ रहे हैं/ 

आपको पासपोर्ट लेना पड़ेगा /


विष्णु :

पासपोर्ट? हमारी जाँच कौन करेगा?


नारद :

यह देखिये/ मैं पासपोर्ट-धारी हूँ. 

आपको प्रवेश द्वार पर ही रोक दिया जायेगा/

अब संसार की घेराबंदी हो चुकी है/


विष्णु :

नारद, अगर ऐसा बदलाव आ चुका है 

आपने मुझे अभी तक सूचित क्यों नहीं किया?

क्या दानव इतने अभिमानी, 

इतने गर्वीले और इतने मूर्ख  हो सकते हैं  

कि देवदूतों की शक्ति को ललकारें/

क्या वे दुर्गा को भूल चुके हैं ?

क्या वे भूल चुके हैं *शुंम्भ  और *निशुम्भ को 

कहाँ पहुंचा दिया गया था/


नारद :

आपको ज्ञात है बुराई में 

जीवित रहने की प्रबल  भावना होती है/

यह कभी मरती नहीं/

यह केवल अपने रूप बदलती रहती है/

मैंने  वहां दुर्योधन को देखा है/

मैंने *शुंम्भ और *निशुम्भ को भी देखा है 

पेंडीमोनियम में गरजते हुए /


देवराज इंद्र , क्या आप यकीन करेंगे 

*महिषासुर लौट आया है आप से लड़ने के लिए/

* रक्तबीज भी वहीँ पर है/



* शुंम्भ, निशुम्भ, महिषासुर और रक्तबीज पौराणिक कथाओं में दानव 


आपके पास कोई भी नहीं है, इन राक्षसों का सामना करने के लिए/

यह बेहतर विकल्प होगा यदि आप दुर्गा को ही भेजें 

एक बार फिर से  /


वे धरती की बाहरी सीमा  पहुँच जाते हैं/और देखते हैं कि सीमा रेखा पर अंधकार  के साम्राज्य के रक्षक योद्धा  तैनात है/ उन्हें पता चलता हैं कि यहाँ तक हवाई-मार्ग अवरुद्ध हैं/ 

अब वे केवल दूर से ही संसार की झलक देख सकते थे. यह रात में जगमगा रहा था /


विष्णु :

(इंद्र, मुझे अपनी दूरबीन दो/)

confirm 

विष्णु:

मुझे एक जुलूस दिखाई दे रहा है /

लोगों ने गणेश की मूर्ति उठायी हुई  है /

वे उसे नदी तक ले कर जाते है 

और जल में विसर्जित कर देते है/

और उसके तुरन्त  बाद ,

कुछ लोग धड़ पर झपटते है 

इसे तोड़ देते है और मोती ले कर चल् देते हैं/


बहुत से ऐसे धार्मिक जुलूस होते हैं

जिन में विभिन्न नारे लगाए जाते है/

और लोग एक दुसरे से धक्का-मुक्की करते हैं 

लड़ाई करते हैं/

हत्याएं, दंगे,  रक्तस्नान 

धर्म के नाम पर/


इंद्र:

देखो तो,  यह क्या है वहां?


विष्णु:  

वहां बहुत से झंडे हैं 

और एक नेता 



और बहुत से लोग उसका भाषण सुनने आये हैं/


इंद्र :

नेता! क्या वहां कोई चुनाव है?


विष्णु :

यह विचित्र लग रहा है/

उनकी कल्पना शीलता पर 

लस्टस कैसे अपनी शक्ति का प्रयोग कर  रहा है?

जस्टिस की जगह वे *लस्टिस की बातें कर रहे हैं/

जस्टिफिकेशन की बजाय, वे लस्टिफिकेशन की बात कर  रहे हैं 

और वे *लस्टिट्यूशन के प्रति अपनी निष्ठा दर्शा रहे हैं/   


(भौंचकित हो कर, वे ब्रह्मा के पास लौट आते हैं)


विष्णु: 

स्थिति वास्तव में बुरी है, देवराज ब्रह्मा 

हमारे पास 'टेली शॉटस' (वीडियो) हैं  

कि दानव धरती पर किस तरह काम कर रहे हैं 

जहाँ हमारे प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया था /

यह रही  एक 'पेन ड्राइव '

आप  इसे फुर्सत से देखिये/

पर जितने जल्दी सम्भव हो, देख लीजिये/

ऐसा प्रतीत होता है, स्थिति हाथ से निकली जा रही है/


(अगले दिन)

  ब्रह्मा(विष्णु से)

विष्णु, मैंने 'पेन ड्राइव' देख ली है/

इंद्र को भी बुलाइये ,

धरती पर जो पूरी स्थिति चल रही है 

हमें उसका पूरा लेखा जोखा रखना होगा/

एक निर्णायक युद्ध का वक़्त आ गया लगता है/


(इंद्र भी उनके साथ शामिल हो जाता है/)


आओ सब प्रभु के पास चले और जा कर सारी  ख़बर दें/

यह एक बहुत गंभीर मुद्दा है/


(वे प्रभु  के समक्ष उपस्थित होते हैं.)


प्रभु:  

क्या आप फिर से दानवों को ठिकाने लगाने में असमर्थ रहे हैं 

ब्रह्मा?

मैं गुरु नानक और नौ गुरुओं को भेजा 

जिन की गुरबाणी अभी तक गूँज रही है 

पूरे ब्रह्माण्ड में / 

अनगिनत लोग उनका पाठ करते हैं/

और धन्य महसूस करते हैं/


मैंने ओशो को भेजा,  मैंने बुद्ध को भेजा /

मैंने महावीर को भेजा, मैंने विवेकानंद को भेजा/

ऐसा नहीं कि हमने प्रयास नहीं किये/

वो आग जो दानवों ने भड़कायी  है 

दफ़न होने से  इंकार कर रही  है/


मैं लस्टस  की प्रेस कांफ्रेंस  देख रहा था/

वह तो हर हद से गुज़र रहा है/

बुराई तो अच्छाई का ज़ोरदार खंडन है/ 

दोनों खतरनाक संतुलन के कग़ार पर हैं/

इसके बावजूद , यदि बुराई  मैदान पर कब्ज़ा करने की कोशिश करती  है

जोकि अच्छाई की धरोहर है,

असंतुलन हो कर ही रहेगा,

और सारी धरती हिल सकती है/

और नीचे भी भूकंप आ सकते 

और यहाँ ब्रह्माण्ड में भी। 



लस्टस को एक चुनौती भेजो कि 

वह अपने तौर तरीके सुधार ले/

यदि वह ऐसा नहीं  करता, तब 

वह  विनाश  को आमंत्रित कर  रहा है /



(प्रभु आराम करने चले जाते हैं)

लस्टस को प्रभु की चेतावनी मिल जाती है/


(धरती के किसी भाग में

एक गायक काले कपड़ों  में प्रकट होता है/

वह विलियम वर्ड्सवर्थ से  मिलता है/

विलियम वर्ड्सवर्थ शोकाकुल है)


गायक :

आप रो क्यों रहे हैं विलियम वर्ड्सवर्थ? 


विलियम वर्ड्सवर्थ :

लूसी ग्रे की मृत्यु हो चुकी है/
गायक:

उसकी मृत्यु तो आपके जीवन काल में ही हो गयी थी/

आपने लिखा था कि 

वह धरती के दैनिक चक्र का भाग बन चुकी है 

अब क्या मसला है?


विलियम वर्ड्सवर्थ :

उसका उत्तर भारत में पुनर्जन्म हुआ था 

चरवाहों के एक परिवार में 

मेरी लूसी ग्रे ,

उसका अपहरण किया गया और 

सामूहिक बलात्कार किया गया/

और उसके बाद, उसे मार दिया गया/


और उसने एक समाचारपत्र की कटिंग दिखाई

जिसमें  लिखा था कि उच्च -वर्गीय  लोगों ने 

उस नन्ही मासूम का अपहरण किया 

सामूहिक बलात्कार किया और उसके बाद 

उसका क़त्ल कर  दिया/


(गायक को  सांस लेना दूभर हो जाता है/

वह बेहोश हो  कर वर्ड्सवर्थ की बाँहों में  गिर जाता है/)


दैवीय  वाणी :

देवदूतों आओ! अब समय आ गया है  

चिंतित होने का/

प्रतीत होता है कि तुम्हारे लोग 

पथभृष्ट हो चुके है और बहुत निराश हैं/


कहाँ गयी आपकी शक्ति ?  

कहाँ  गया आपका ख़ौफ़ ?

अब  राजा की सुनता ही कौन है ?

क्या आप अभी भी इसे साम्राज्य कहते हैं?


 



लस्टस :  सर्ग  11 

महायुद्ध 

(लस्टस युद्ध कक्ष में )

किल्लर इंस्टिंक्ट : 

युद्ध छिड़ चुका है/
प्रभु ने धरती और आकाश को हिला कर रख दिया है 
भूकम्प और वज्रपात के द्वारा /
देवता अपने रथों पर सवार हो कर 
धरती और आकाश में  विचर रहें है/

और अपने पवित्र शस्त्रों के द्वारा 
दानव के किलों को विंध्वस करने की कोशिश कर रहे हैं/
नदियों को निर्देश दे दिए गए हैं कि 
वे अपनी सीमायें लांघ कर तटों से बाहर बहें 
और शहर की गलियों में बाढ़ ले आएं,
जहाँ दानवों का नृत्य पूरे जोर- शोर से चल रहा है ,
वेश्यालयों में और डांस बार में,
और अपराध सरगना महानगरीय क्षेत्रों में /


आकाशवाणी :  

(एक रेडियो चैनल )

वृहद स्तर पर सैन्य आंदोलन चल रहा है 
एक महायुद्ध लड़ा जा रहा है/
प्रभु ने सभी देवदूतों को निर्देश दिए हैं कि 
वे अच्छाई की सेनाओं का नेतृत्व करें 
और राजनीतिज्ञों पर हमले करें 
उनके फार्म हाउस पर जा कर  
और अध्यापकों पर उनके विश्वविद्यालयों में जा कर 
और पूरी दुनिया में जितने भी धर्म गुरु हैं
जो दानवों के आक्रोश की अगुवाई रहे हैं 
देवताओ के विरुद्ध , उन पर भी हमले करें/



किल्लर इंस्टिंक्ट:



देवता अपनी अलौकिक शक्तियों का प्रयोग कर रहे हैं/
उनके जितने भी ब्रह्मास्त्र हैं, उन से दानवों की अग्नि-शक्ति का 
सामना करने में कठिनाई आ रही है ,
क्योंकि दानवों के पास ब्रह्मा-विरोधी मिसाइल्स हैं/
उन्होंने हर व्यक्तिगत देवता पर निशाना साधा है 
और सैकड़ों की  संख्या में उन्हें पराजित किया है/

ईश्वरीय श्रेणियों में भयंकर उथल पुथल मची है/
दानवों ने बहुत से देवदूतों का अपहरण कर  लिया है 
जो कि ईश्वर की ओर से लड़ रहे थे 
और दोनों ओर के लोग असामान्य रूप से स्पष्ट दावे कर रहे हैं/


ईश्वर :

जब हम शान्ति से सो रहे थे 
ये लोग अग्नि शक्ति जुटाने में लगे थे 
हमारे आदमी तो बहुत नेक और विनम्र हैं/
और इन दानवों से युद्ध नहीं कर सकते /
हम तो अनुनय में यकीन रखते हैं,
हम प्यार और करुणा ,
क्षमादान और दान पुण्य में यकीन रखते हैं/
परन्तु , वे तो हमारे इन दयालुता पूर्ण तरीकों से अलग हैं 
कितनी  निंदनीय बात है! वे बाइबिल का अपमान करते हैं /
उन्होंने तो ईसा के सुविचारों  का मज़ाक बना कर  रख दिया है/
इतने में भी, उनकी अधर्मता का अंत नहीं होता/
इन मूर्खों ने हमारे संतों को आक्रमण का निशाना बना दिया है/
यह असहनीय है /
उन्हों सपूर्ण दैवीय मसलों से हाथ झाड़ लिए है/
और इन में से अधिकांश तो अपराधों  के कारण जेल जा चुके हैं/
मैं इतना विवरण नहीं  दे सकता/
उन्होंने सामान्य लोगों की कल्पना शक्ति को दबोच लिया है 
यह इतनी बड़ी बात नहीं,
पर संतों के विघटन के लिए जो उनका सूक्ष्म कार्य है,           
वास्तव में, बहुत भयानक  प्रतीत होता है 
हमारे साम्रज्य के लिए /


सब कुछ समाप्त हो गया है,
केवल सफ़ेद परिधान और धार्मिक प्रतीक बचे हैं/
अरे पक्षियो, अरे जानवरो, अरे हवाओ,अरे जल,
सब सतर्क रहो !
लस्टस तुम सब को तुम्हारी दैवीय धरा से हटाना चाहता है/
तुम्हारी दिव्यता, तुम्हारी शांति, तुम्हारी ख़ुशी 
तुम्हारी संपदा 
सभी दाव  पर लगे हैं/


उसकी वहशी शेखियाँ मत सुनो ,
ज्ञान तो तुम्हारा पक्का दुश्मन है 
मेरे प्यारो, खुश रहो !
मैं मनुष्यों को सेटन की राह पर जाने से नहीं रोक पाया /
अब लस्टस आ चुका है बुराई के निगमित के रूप में /
उसने अपने आदमियों को कॉलेज और विश्वविद्यालयों ,
कार्यालयों और सैनिक पदों पर लगा दिया है/
हमारे आदमी जिन पर हम यकीन करते थे,
दल बदल चुके हैं और दुश्मन के साथ शामिल हो गए हैं/



परन्तु, हमें लड़ना तो होगा ही/
कृष्ण ने उन लाखो लोगों को मौत के घाट उतार दिया 
जो कौरवों की ग़लत नीतियों का समर्थन करते थे /
अपनी इस  प्यारी धरती की छाती पर 
मैं  खून की नदियाँ देख कर दुखी हूँ!!!




चित्रगुप्त :

पिताश्री , हम इस युद्ध में पराजित हो जायेंगे 
यदि हम ऐसी नकरात्मक सोच रखेंगे/
लस्ट्स तो सेटन से भी दुगुना घातक प्राणी है/
उसने पूरे संसार की मानव सम्पदा पर 
कब्ज़ा कर  लिया है/
उसकी युद्ध की लाइनों की सारणी तो देखो 
 

राजनीतिज्ञ, शिक्षक, प्रचारक, विद्यार्थी 
सभी तो हमारा सामना करने के लिए खड़े हैं 


घरों में , भी 
कोई भी अब हमारा नाम नहीं लेता /

कोई भी सात्विक गुण विकसित करना नहीं चाहता/
हमारे संत, जिनके बारे में हम सोचते हैं कि 
उन्होंने मानवता को मोक्ष की राह दिखाई 
अब वे, किसी के भी नायक नहीं है/
लोग केवल ईसा की प्रतिमा के आगे नतमस्तक होते हैं /
यह पादरियों के लिए एक व्यवसाय है,
और रविवार को चर्च में आराधना 
अब एक धार्मिक रिवाज़ के अलावा कुछ नहीं /


बाकी  के दिनों में तो सब  हमेशा जैसे व्यस्त रहते हैं//
किसी को भी ईसा मसीह, 
दान-पुण्य, क्षमादान और आप की भी परवाह नहीं /
हम सोचते थे कि यह सारी सैन्य -शक्ति  हमारी है 
यह दल बदल गए हैं  और 
दानवों से जा मिले हैं/
वे उन्हें पेश करते है रोमांच, ख़ुशी, धन और कामुक आनंद,
हम उन्हें इन सब से वंचित रखते है /
सूखी अच्छाई का कोई ख़रीददार नहीं /


राँझा 


अरे हीर! किसने तुम्हे मार डाला ?
क्या अब मैं जीवित बचूंगा?


तुम्हारा निर्जीव शरीर 
मेरी आँखों के सामने है 
क्या तुम्हारे भाग्य में यहीं बदा था 
कि प्यार का ज़ायका लेने के लिए 
और यह दुल्हन का रूप पाने के लिए 
अपनी जान देनी पड़े ?
हे, देवो! 


क्या तुम्हारे सम्बन्धियों का दानवों से कोई नाता है ?
क्या माता-पिता को कुछ भी नज़र नहीं आता है /?
जब कन्याओं का विवाह होता है।
वे चिल्लाती है और रो रो कर आसमान  सिर पर उठा लेती हैं/


यह मूर्ख  माता पिता सोचते है 
उनकी बेटियां इस लिए रो रही हैं कि वे विदा हो रही हैं
अपने पैतृक घर को छोड़ के जा रही हैं/ 
हीर, यह दहेज़ तो एक घूंस है 
तुम्हारे आँसुओं को शांत करने के लिए ,

ताकि तुम्हारे जैसी लाखों 
जिनका विवाह जबरन कर  दिया जाता है 
इन टुकड़ो पर पलती रहें/
प्यार की  एक तुच्छ भरपाई 
जिस से कि उन्हें वंचित किया जा रहा है 
और उनकी ज़िंदगी से जिसे घटा दिया गया है/


वे रोती - सुबकती हैं 
क्योंकि, अरे माता पिता, उनके जीवन संगी तुम चुनते हो/
तुम निर्णय लेते हो, किसके पास अधिक ज़मीन जायदाद है 
अधिक धन है 
और जहाँ तुम्हारी बेटी को पूरी ज़िंदगी 
भरपेट खाने को मिलता रहे/
आह! तुम सोचते हो कि 
भरपूर खाना मिलना ही ज़िंदगी का एकमात्र काम है?


मुझे समझाओ, हे मेरे रब!
तुम्हारे बेटे ने प्यार का प्रचार किया/
तुम्हारे राजदूत प्यार का प्रचार करते है/
परिवार में प्यार कहाँ है/
इस श्रापित देश के किसी भी घर में झाँक के देखो 
एक भी औरत अपने आदमी को प्यार नहीं करती/
उनका गठ- बंधन तो जबरन कर  दिया गया है,
परम्पराओं के आधार पर 


और इस बंधन  को अटूट बनाने के लिए.
वे अग्नि देवता का आह्वान करते हैं. 
और एक बार जब वे सात  फेरे ले लेते हैं 
वे हमेशा के लिय बंध जाते हैं/
   

और इन अप्रस्सनता से युक्त शादियों से 
हीर, मुझे बताओ 
यदि एक पत्नी अपने पति से प्रेम नहीं करती 
और न ही पति अपनी पत्नी से प्रेम करता है 
इस तरह के उदासीन संबंधों से कैसी संतान उत्पन्न होगी ?



यह तो हरामियों की दुनिया है/
दानव  चाहते थे कि सारी दुनिया 
विवाह में लिप्त हो जाये 
प्यार की बजाय 
और दोयम दर्ज़े के नागरिक पैदा हों 
जिनका रुझान प्यार से अधिक धन में हो/



हीर, हमारा मिलन न हो सका 
फिर भी, हमने इस ज़िंदगी की पर्याप्त खुशियां प्राप्त की /
तुम्हारी अंतिम विदाई ने मुझे असम्बद्ध कर दिया है/
मैं यहाँ हाज़िर हूँ. 
हे देवताओ, किसी महान गीतकार को भेजो 
कवितायेँ  लिखने के लिए 
ताकि भविष्य में लोग 
कुछ सीख सकें,
कि यह दुनिया इतनी बुरी क्यों है 
लोग इतने बुरे क्यों है/ 
माता पिता इतने असंवेदनशील क्यों हैं 
और औरतों को,अगर जान से मार नहीं दिया जाता,
सारी उम्र मानसिक यातनाएं , क्यों दी जाती है/




(राँझा और हीर भूतपूर्व पंजाब, भारत के प्रेमी -युगल है, जो विभिन्न सामाजिक अवरोधों के कारण विवाह नहीं कर 
सके/ वारिस साहब ने 'हीर वारिस' प्रेम -ग्रन्थ लिखा इस दुखांत प्रेम कहानी पर)


दैवीय वाणी : 

हे प्रभु, मैं जो देख रहा हूँ अविश्वसनीय है 
यह जो इस व्यक्ति रांझा ने कहा है 
एक ऐसा व्यक्तव्य है जो 
सोने से भी ख़रा है और चट्टान से भी दृढ /

आप एक ऐसे संसार पर राज्य कर रहे हैं 
जहाँ मासूमियत, प्यार और करुणा खो चुके हैं/
जहाँ के मनुष्य घूस पर पलते हैं 
और बेईमानी और नकली रिवाज़ों का आनंद लेते हैं/


यह बेचारी जनता आपको सम्मान देती है 
अग्नि प्रज्जल्वित करती है और अपनी अन्धता में
प्रचारकों का अनुकरण करती है 
जोकि आपके नाम पर अज्ञानी जनता को लूट रहे हैं/


पर आपने तो पलायनवादी रवैया अपनाया हुआ है
खुशी मनाते  हैं 
और नृत्य का आनंद उठाते हैं 
स्वर्ग के हवादार क्षेत्र में 
जबकि जनश्रुति के पूर्ण निराशा-युक्त कथन यह हैं कि 
*''हम तो देवताओं के लिए ऐसे हैं जैसे उच्श्रृंखल लड़कों के लिए मक्खियाँ 
वे अपने  खेल के लिए हमारे प्राण हर लेते हैं "/


आपके इसी रवैये ने 
प्रबुद्ध जन समुदाय को आपसे अलग -थलग कर दिया है 

और लस्ट्स  ने अपनी पकड़ और  मज़बूत कर ली है
उनकी कल्पना पर 
मात्र अपने तर्क की शक्ति से /

(* शेक्सपियर  द्वारा रचित 'किंग लीयर ' में से )




वह अपने ज्ञान की जादुई छड़ी हिलाता है 
और सारा संसार झुक जाता है 
उसके उपहास पर/       
जबकि आप तीखी नज़रों से देख रहे होते हैं 
अपने पवित्र सिंहासन पर बैठे 
आपका क़बीला जो सीमित होता जा रहा है, उस से बेखबर।



(देवदूतों और महादूतों , देवता और देवियों में बहुत हलचल मची है/) 

ब्रह्मा: 


इस रहस्य्मयी आवाज़ ने जो कहा 
स्पष्ट करती हैं व्यापक उलट-फेर को 
दानवों से  निपटने में हमें बहुत परेशानी हुई  है/
हमें तो अज्ञानता के आनंद में यकीन है 
जो जनमानस को आंदोलित करने में असफल रहा/

अत्याधिक् संख्या में लोग जब देवालयों में जाते है 
उन्हें देख कर एक राहत भरी भ्रान्ति होती है /
परन्तु वास्तिविक तथ्य तो चौंकाने वाले हैं/
क्या यह वास्तविकता है या मात्र विस्मरण ?


क्योंकि हमने अपनी  रण नीतियों की समीक्षा ऐसे नहीं की 
जैसे कि दानवों ने की 
सेटन के बाद की अवधि प्रबोधन की अवधि है/
ज्ञान ने सब मकड़ी के जाले हटा दिए हैं 
आध्यतमिकता की ओर झुके हुए लोगों 
के दिमाग  से 
और प्राचीन अतीत की मृत शाखाओं को फ़ेंक दिया है 
हम अपनी शक्तियों का राग अलापते रहते हैं 
जिनका प्रयोग हमने उस समय किया था 
जब सेटन ने विद्रोह किया था /
हमारी सफलता के बाद 
हम केवल आराम फरमाते रहे हैं /
हम बहुत लापरवाही से उनके विश्वास के साथ खेलते रहें है/
और अब परिणाम सामने हैं 


दुश्मन ने तो अपनी शक्ति समेकित कर ली है 
और हमारे सैनिकों को अपनी ओर परिवर्तित कर लिया है/
हमें भौचंक्का करते हुए 
जिस समय हम अतीत की अपनी जीतों का 
जश्न मनाने में व्यस्त थे 
जिनकी आज के युग में प्रांसगिकता पर सवाल उठाये जा रहें हैं /
पुराना संसार हमारा था 
पर इस संसार ने एक निर्णयात्मक मोड़ लिया है 
परम्परा से हट के 
पुराने फ्रेम से यह एक बहुत बड़ा बदलाव था 
जब नियंत्रण हमारे हाथों से फिसल गया 
और दानवों ने लगाम अपने हाथों में ले ली/


विष्णु :


1990 में संसार बदल गया 

जब कम्प्यूटरों  का प्रयोग किया जाने लगा 
ज्ञान को संसाधित करने के लिए/
और ज्ञान का कृत्रिम प्रकाश इतनी तीव्र गति से फैला 
कि इसने प्रकाश के प्राकृतिक स्त्रोतों को सुखा दिया/
संसार ने अलविदा कह दी, बुद्विमता को 
धार्मिक ग्रंथों को और यहाँ तक की देवताओं को भी 
और दैवीय सजा के भय  से भी मुक्त हो गए /

अब कोई पाप के बारे में परेशान नहीं होता 
किसी को भी स्वीकारोक्ति की परवाह नहीं/
किसी को भी क्षमादान में यकीन नहीं/
दान अभी भी दिया जाता है, पर राजनेताओं  द्वारा 
ऐयाशी में इस्तेमाल हो जाता है/

हमारे मंदिरों को क्या हुआ है 
हमारे धर्मात्माओं को क्या हुआ है?
क्या हमने कभी चाहा था कि 
सब जगह संगमरमर लगा दें 
और प्रधान ही वास्तविक राजनीति करें?
ईसा के सुविचारों की किसने गलत व्याख्या की ?
ज़रा, गौर फरमाईये, आज कल किस तरह के लोग 
हमारे मंदिरों में जाते हैं /


क्या  उनमें से कोई एक भी वहाँ 
शांति और मोक्ष की तलाश में आया है?
क्या कितनी अप्रीतिकर स्थिति है !
हमारी  परस्पर चिंताएं और उम्मीदें 
सभी  ग़लत साबित हुए हैं/


दानव जोश के गहरे नशे में धुत हैं,
इस कारण वे पूरी तरह से होश ,
सारे अनुपात, सारे संतुलन खो चुके हैं/
उनके आचरण में कोई शालीनता नहीं रही/
उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की है /
उच्च डिग्रियां धारक हैं /
फिर भी उनका आचरण तो देखो!
क्या वे केवल मुँह हैं? केवल पेट हैं/
केवल बाँहें है? केवल सिर है?
 पूर्ण मनुष्य नहीं?



इंद्र:

हम वंश-वृद्धि में  यकीन रखते हैं/
और हमने मनुष्यों को प्रजनन अंग प्रदान किये/
फिर भी, मानवता का इस से बढ़ कर भी कोई उद्देश्य था/
सेक्स जीवन का मात्र एक हिस्सा है/
फिर भी बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा/ 
और इन लोगों ने, आह!
इस आवेग को वर्जित किया/
और दानवों ने इस तंत्र का उपयोग किया/
अपनी अशिष्ट अभियांत्रिकी के लिए/
अब हर कोई काम-लोलुप है/
आदमी और औरत एक दूसरे को यूं निहारते हैं 
जैसे कि वे यौन संतुष्टि की वस्तु हों/
और क्योंकि यह वर्जित है 
एक गंभीर क्षति पहुंचाता है
मानवता के भावनात्मक और हार्मोनल संतुलन को /


और यह रहा परिणाम 
वे मनुष्य, जिनका संतुलन बिगड़ गया है/
वे सेक्स के लिए जुनूनी हो गए हैं, मनोरोगी ,
असामाजिक प्रवृति वाले व् बलात्कारी बन गए हैं/
हमारे छद्म संतों के बावजूद 
जो  दिखावटी नैतिकता का उपदेश देते हैं/


दानवों ने यह सुनिश्चित कर लिया है कि 
युवक व्यस्त रहें, अपने लिए अनुकूल दुल्हन ढूंढ़ने के लिए 
और लड़कियां सुयोग्य वर तलाशने में व्यस्त है,
और यह  मोहक और उत्तेजक नृत्य  जारी है/ 
 यदि कोई पति या पत्नी का गलत चुनाव कर लेता है 
 वह जीवन की सारी खुशियों से वंचित हो जाता है/


ऐसे लोगों से हम क्या उम्मीद रख सकते हैं?
भले आप उन्हें एक  ही सांस में सारे धार्मिक ग्रन्थ सुना दें,
चाहे कितनी ही बार गीता सुना दें ,
अगर उनमें शरीर की भूख बाकी  है, 
वे आत्माहीन हैं/


और इसी बिंदु पर दानवों ने हम पर प्रहार किया है/
पूरी जनसंख्या विक्षप्त हो गयी है/

रसोई से मुक्ति,
घर के बंधन से मुक्ति ,
बच्चे पैदा करने और उनको पालने से मुक्ति,
मुक्ति तो एक महान नाम है,
जिसे कि दानवों ने शर्मसारकर दिया है /



लस्टस : (ईश्वर से)
 
महान रचेयता,
आपने एक बड़ी भूल कर दी /
आदम को वर्जित फ़ल खाने की छूट दे कर  
यही तो वह ज्ञान है 



जिसे हमने अपने लाभ के लिए प्रयोग में लिया है/
क्या आप नहीं जानते थे 
आज्ञाकारिता और अज्ञानता 
हाथों में हाथ मिला कर चलते हैं ?
अब, देखिये, वे सब लोग जिनका टीकाकरण किया गया था 

थोड़ी सी, बिल्कुल थोड़ी सी या नाम मात्र की जानकारी के साथ 
आपके विरोध में सिर उठाये खड़े हैं/


हमारी सेनाओं की यह लम्बी कतारें देखिये/
हमारे दानव उनके पीछे खड़े हैं ,
परन्तु यहाँ पर लम्बी पंक्तियाँ हैं, अधिकारियों,
उद्योगपतियों, बेंकर्स, विक्रेता, 
सरकारी अफ़सर , कचहरी में काम करने वालों ,
भविष्यवाणी करने वालों, पैग़मबरों,  गुरुओं और संतों  की/


इन्हे पूछिए की वे हमारी तरफ क्यों हो गए हैं?
हमने उन्हें  केवल आज़ादी की पेशकश की 
और उन्होंने आपका साथ छोड़ दिया /
आपके आदर्शों को , आपकी नेकी 
और आपकी भव्यता को मँझदार में छोड़ दिया/


इन ग़रीब औरतों से पूछो,
जिन्हे भरपेट भोजन नसीब नहीं होता,
कि उन्हें क्या चाहिए?
क्या उनमें से कोई भी मोक्ष चाहता है/ याकि, यहाँ तक कि भगवान ? 


आवाज़ें :


नहीं, नहीं, नहीं 
हमें भोजन चाहिए/ हमें फ़्रिज चाहिए/ हमें कारें चाहिए/
हम विदेश देखना चाहते हैं/ 

युवकों से पूछिए/ वे क्या चाहते है?

पृष्ठ 103 

आवाज़ें :

आज़ादी, प्यार, सैक्स , मौज-मस्ती, मदिरा, नशीली औषधियाँ 

लस्ट्स :

क्या तुम्हे भगवान् नहीं चाहिए ? क्या तुम्हे स्वर्ग चाहिए?


आवाज़ें :

हम जीना चाहते हैं, हम मरना नहीं चाहते/
भूख़ और ज़रूरत यही सच्चाई है/
भगवान तो मात्र कपोल कल्पना है /
ज़िंदगी कल्पना नहीं/


हे, साधुओ ! यहाँ आओ और बताओ 
आपकी समस्या क्या है/
आपने भगवान से मुँह क्यों मोड़ लिया/


आवाज़ें :


हमें शक्ति चाहिए और शक्ति आती है
बंदूक की दुनाली से 
और केवल राजनेता के पास ही बंदूक होती है/


लस्टस :


भगवान, अब मुझे दिखाईये , कितने लोग 
आपकी ओर से लड़ने वाले हैं?

ईश्वर :


लस्टस , यह कौरवों की सेना है 
लाखों की तादाद में, जो भूसे में यकीन रखते थे,
ख़ुद भूसा  बन गए/
और राख़ का ढेर हो गए/
वे हमें हमारी नेकी के रास्ते से 
पथभृष्ट नहीं कर सकते/
हमने केवल जानकारी नहीं दी, 
परन्तु बुद्धिमता भी दी 
जिसे इन लोगों ने नहीं खरीदा/

इसलिए, ये यहाँ आपके साथ रह कर  यातनाएं झेल रहे हैं/

आप क्या सोचते हैं कि आपको बक़्श दिया जाएगा/

और यह सारे लोग यहाँ से सही सलामत और जीवित वापिस जा पाएंगे/?


जो कोई भी युद्ध-भूमि में गया , जीवित नहीं छोड़ा गया/

कुरुक्षेत्र में , कौरवों  की तरफ 

महान भीष्म, द्रोण,  कर्ण 

और वह सिरफिरा दुर्योधन था/

क्या वे सब केवल पांच पांडवों का सामना कर पाये ?


हम यह देख कर उदास हैं  

कितने ही लोग, जिन्हें  हमने शान्ति और खुशी की पेशकश की थी 

उन्होंने आप की ओर रहने का विलल्प चुना /

इसबात  से बेपरवाह कि उनके इस कदम का क्या मतलब निकलेगा/ 

यह अध्यापक, यह डॉक्टर, 

यह धर्म के ठेकेदार 

हमने कभी नहीं सोचा था कि यह हमें धोखा देंगे/


यह दयनीय बात है कि आपके शूरवीरों की सेना को विश्वास है  

कि वे हमारे संभावनाओं को ग्रहण लगा देंगे/

मैं हमेशा से एक स्नेही पिता रहा हूँ,

पर क्या वे मुझे इस तरह से धोखा देंगे, 

और बेईमानी करेंगे?

यह उनके स्वभाव के विरुद्ध है 

और मेरे स्वाभाव् से भी मेल नहीं खाता 

कि मैं उन्हें माफ़ कर  दूँ/


तुम्हारी खातिर, अरे ओ मानव की विशेष प्रजाति 

अध्यापक, यूनिवर्सिटी प्रोफेसर और डॉक्टर, 

जिन्हे विशेष शक्तियां और प्रतिष्ठा दी गयी थी 

मानवता की सहायता करने के लिए 

मुझे उन सब पर तरस आ रहा है

 जिन्हे अच्छी नौकरियां औरअच्छी  तनख्वाह नहीं  मिली 

यद्यपि वे जो उद्यमी बन गए 

और उन्होंने बहुत से कॉलेज शुरू कर  दिए/


और मेडिकल संसथान 

वे माफ़ी के लायक नहीं है/

क्या आप सोचते हैं कि सभी कुछ बिकाऊ है?


आपको कभी भी माफ़ नहीं किया जायेगा/

मैं विशेष निर्देश दूंगा कि 

इस पवित्र युद्ध में आपकी जान न ली जाये 

आप जीवित बचेंगे और आपको त्याग दिया जायेगा/

आपको कभी भी क्षमा नहीं मिलेगी/

और राजनीतिज्ञों के लिए भी कोई क्षमादान नहीं  है 

वे तो इस पूरी खेप में सब से गंदे हैं/

हम घोषित करते हैं कि आपका अपराध अक्षम्य है/

और आपको दानवों के सुपुर्द करते हैं/


(जब यह महान व्यक्ति युद्ध सम्मेलन में हैं, स्वर्ग के अर्ध -भूमि क्षेत्र में युद्ध ज़ोर शोर से लड़ा  जा रहा है/

 ईश्वर चिंतित मुद्रा में प्रकट होते हैं/)


ईश्वर :

ब्रह्मा! मैं बहुत खून खराबा देख रहा हूँ/

हमने अपने बहुत से महान योद्धा गवाँ दिए हैं/

और मुझे क्षोभ है  कि ये सारी सेनाएं 

दानवों की ओर हो  गयी हैं/

लस्टस हम पर बहुत भारी पड़ रहा है /

अच्छा रहेगा यदि हम कुछ समय के लिए कदम पीछे हटा लें /

युद्ध विराम संधि की बात करो 

और वार्ताकारों को भेजो इस युद्ध का अंत करने के लिए/ 


ब्रह्मा :  

पिताश्री , केवल इतना ही नहीं 

यदि  परिचालन को विराम दिया जाता है 

हम अपनी सेनाएं पुनः संयोजित कर पाएंगे/ 


और इसी दौरान 

हम देखेंगे कि कैसे इस असुंतलन को 

ठीक किया जा सके, 

पिताश्री, हमें समय चाहिए/

(एक युद्ध परिषद् को बुलाया जाता है)

चित्रगुप्त एक प्रस्ताव रखते हैं, जिसका अनुमोदन सभी के द्वारा किया जाता है/  परन्तु दुर्गा इसे मानने से इंकार कर  देती है/)


दुर्गा:

मैं  उनके खून की नदियाँ बहा दूंगी/

देख ती हूँ, वे कैसे मुड़ कर आ सकते हैं?

"केवल एक बार मुझे उन्हें रोकने का प्रयास करने दीजिये/"

" दुर्गा आ रही है, इंद्र, जाओ और उन्हें  बताओ/''

सब ख़ामोश हो जाते हैं/

ईश्वर  दुर्गा के इस अंतिम प्रहार की प्रतीक्षा करते हैं/)


किल्लर इंस्टिक्ट :

दुर्गा दानवों पर प्रहार करती है 

जो मिसाइलों से सुसज्जित थे और जिनके पास 

सशस्त्र प्रणालियाँ, टैंक्स और रॉकेट् थे/


विस्फ़ोटक सामग्री का खुल कर उपयोग हो रहा था 

जिस से वे स्वर्ग के स्टेशनों को  आग लगा रहे थे /

इस से दुर्गा क्रोधित हो गयी/

और दानव् समूह  पर टूट पड़ी 

अपने शस्त्र और अस्त्र के साथ 

जिसके परिणाम स्वरूप 

मामोँन , एसमॉडस , लेविथान और बेलफिगोर 

की मृत्यु हो गयी/


( लस्टस  युद्ध परिषद् बुलवाता है)

 बिल्जेबब, लूसिफ़र और सेटन इसमें शामिल होते  हैं/)


किल्लर इंस्टिंक्ट :

दुर्गा के इस  क्रुद्ध प्रहार ने दानवों के होश उड़ा  दिए हैं/ 

 लस्ट्स ने युद्ध परिषद को बुलाया है/

मध्यस्थ लोग युद्ध विराम संधि  की कोशिश कर रहें  हैं/

जबकि आग लगने वाली स्थिति ज़ारी है/

मृत्यु -दर बढ़ रही है 

और दोनों ओर के लोगों ने लाखों जानें ली हैं/

इतना लहू बहा दिया गया है 

कि आँखों के आगे भीष्ण  महाभारत का 

भयानक दृश्य उभरने लगा है/


अप्पोलीअन  मुख्यालय से आ रही 

नवीनतम खबर बता रही है कि 

युद्ध विराम संधि हो गयी है/

युद्ध रुक गया है /

और  युद्धविराम  की यह शर्ते हैं/


ब्रह्मा और सेटन द्वारा हस्ताक्षरित युद्ध-विराम संधि :

युद्ध की गतिविधियाँ तुरंत प्रभाव से  रोक दी जाएँ/

इस युद्ध में न तो कोई विजेता है 

और न ही कोई पराजित हुआ है/

लस्टस स्वर्ग की सीमाओं से पीछे हट जायेगा

 और दैवीय  सेनाएं भी वापिसी का रुख़ लेंगी/

उन क्षेत्रों से जो पहले लूसिफर के अधिकार क्षेत्र में थी/

अब से, दोनों दल अपने अपने कार्यक्षेत्र में  कार्यरत होंगे/



लस्टस दैवीय  शक्तियों का अधिकार प्राप्त करके,

 मासूम मानवता को पथ भ्रमित करना बंद करेगा/

अपने प्रचुर आशीर्वाद के साथ/

देवता वादा करते हैं कि वे पीछे हट जायेंगे 

और वापिस चिंतन मनन में लग जाएंगे/

लस्टस धार्मिक पूजा स्थलों से दूर रहेगा/


लस्ट :

यह बहुत रोचक बात लग रही है कि  

देवताओं ने राजनेताओं को भी वर्जित लोगों की सूची में डाला है/

पर लस्ट्स  इस  मांग पर अड़ गया  

कि यह अधिकार क्षेत्र उसका ही रहे/

शिक्षा को समवर्ती सूची में रखा गया/

और लस्टस ने वादा किया कि  वह 

 धरती और आकाश में जितने भी देवीय सैन्य शिविर निगरानी हेतु हैं 

उन्के काम में  कभी भी बाधा नहीं डालेगा/ 


टाइम :

सम्पूर्ण  ब्रह्माण्ड में एक असहज सी शांति व्याप्त है/

वृक्ष , पक्षी , नदियाँ ,पहाड़ 

एक सधी हुई ख़ामोशी ओढ़े हुए हैं/\

कोई भी खुलकर बात नहीं कर रहा 

 न तो किसी के समर्थन में,  न किसी के विरोध में 

न लस्ट्स  के  और न  देवताओं के/

हवाएं वापिस अपना संतुलन प्राप्त कर रही हैं/

धरती फिर से  सामान्य  हो रही है/

दोनों ओर के इतने वज्रपातों  से हिलने के बाद भी/


लस्टस का अभिमान खंडित हो गया है 

और पूरे ब्रह्माण्ड पर साम्राज्य स्थापित करने की  

जो उसकी भव्य योजना थी,वह भी धराशायी हो गई /

उस के पर क़तर दिए गए हैं 

और वह ईर्ष्यालु  झील में डूब रहा है 

वे देवता जो दुर्गा द्वारा,  विनाश से बचा लिए गए 

उन्हें पछतावा हो रहा हैं 


और वे अनुभव क र रहे हैं कि उन्होंने धरती के प्राणियों की अवहेलना की 

और इस तरह दानवों को जगह दे दी 

अपने पंख पसारने  के लिए/


लोग अपने काम पर पहले जैसे सामान्य रूप से जा रहे हैं 

वे अभी भी घातक पाप के बीज अपने कन्धों पर लादे हुए हैं/

ऐसा लगता है जैसे कुछ भी घटित नहीं हुआ था/

ऐसी है हमारी मानव प्रजाति /

उदासीन, संवेदनहीन /

अपनी ही होनी  के प्रति उदासीन /

हमेशा की तरह, भावनाओं में बह कर 

अनैतिक तत्वों के हाथों में  खेली जाने वाली 

और पूर्ण अनभिज्ञता के कारण

 दानव और उसके अभिकर्ताओं के आगे अपनी आत्मा गवाँ देने वाली /


फ़ॉस्टस बिलजेबब से 

कुछ भी नहीं गवायाँ  हम ने, अगर हम  अभी भी जीवित हैं /

भूल जाओ, उस संघर्ष को 

उम्मीद पर ही तो दुनिया क़ायम है/


बिलजेबब: 

फ़ॉस्टस, तुमसे बेहतर कौन जानता है 

स्वर्ग खोने का मतलब 

और आशा भी/


लस्टस :

आदरणीय भाई,सेटन 

देवता हमारे लिए यातनाएँ और क्षति लाये /

शायद हमने अधिक ऊंची उड़ान ले ली थी ,

और बहुत  ऊँचे सपने देखने लगे थे /

हमारे पंख पिघल गए

और हम समुद्र में गिर गए/


क्या हम अपना मिशन त्याग दें ?

देवदूतों से डरने लग जाएँ और विषाद ग्रस्त हो जाएँ/



क्या हम इस महान आक्रमण से मिले फायदे 

 यूं ही व्यर्थ जाने दें ?


क्या हुआ ,अगर हम ये युद्ध हार गए तो/

हमने धरती और आकाश को  हिला के रख दिया/

हमारा सम्मान, हमारी शक्ति 

सब कुछ तो दाँव पर लगा था /


मैंने उस महान कौतुक को देखा है/

हमारे भृत्य इतने शौर्य से लड़े /

हमारे सेनापति, हमारे योद्धाओं ने 

स्वर्गदूतों को  युद्ध में व्यस्त  दिया/


भय :

तुम सभी साझेदारों, 

अध्यापकों, अभियंताओं 

वास्तुकारों, व्यापारियों को नोटिस भेजो 

जिन्होंमे अथक मेहनत की युवा वर्ग से  

काम, काम और काम करवाने के  लिए 

जब तक के वे स्वचालित नहीं हो गए ,

अपना चमकता अस्तित्व खो कर ,


लस्टस  के आधिपत्य में सुरक्षित रहने करने के लिए /

हम दोबारा आक्रमण करेंगे/

केवल एक हिस्सा ही दो,

जब पूरा खोने का खतरा हो /

हम ने सब कुछ नहीं गंवाया, अगर हम अब भी नियन्त्रण में रहें /


(प्रस्थान) 


 लस्टस 

उपसंहार 

हमारा ब्रह्माण्ड तो एक विभाजित घर है,

बुराई की उपस्थिति से अच्छाई पूर्णतः संतुलित है/

दानव नमक की तरह हैं जो कि 

 सभी स्वर्गदूतों के, सभी शक्कर युक्त खाद्य पदार्थों को 

ख़लाओं  के लिए  सुपाच्य बनाते हैं/



अतीत में कौन से युग ,

सतयुग, त्रेता, द्वापर बुराइयों से मुक्त थे ?

कलयुग में जो एक मात्र भिन्नता हम देखते हैं, वह यह है  

कि बुराई का मानवीकरण किसी एक व्यक्ति के रूप में नहीं किया गया 

जैसे कि पहले रावण या कंस अथवा दुर्योधन के रूप में किया गया था /


कलयुग एक् टाइम कैप्सूल  है, जिस में 

ज्ञान ने अपनी बुरी शक्तियां दिखाई हैं 

लोग ईश्वर के प्रति आस्था-हीन हो जाते हैं/

हठधर्मी हो जाते हैं 

और अपने वैकल्पिक देवता बना लेते हैं/


लस्टस सेटन का एक काल्पनिक पुनः  रूप है/    

अधिक ख़ौफ़नाक  क्योंकि वह प्रयत्न करता है 

पौधों,  पक्षियों और जानवरों के साम्राज्य में   
उच्च -स्तरीय आत्म ज्ञान देने की/


 देवताओं और बुराईयों के संगठनों में 

युद्ध छिड़ जाता है 

युद्ध के वीभत्स हादसे बाध्य करते हैं दोनों पक्षों को 

एक युद्ध -संधि विराम के लिए ताकि 

अंतिम आक्रमण से पूर्व थोड़ा समय जुटाया जा सके/


लस्टस अभी भी अपने ओहदे पर क़ायम है/

अग्नि  के सबसे महत्वपूर्व प्रारूप सम 

यहाँ-वहाँ यदि कुछ उलट-फेर करने पड़ें  

इसे केवल कुछ क्षति ही आंका  जाएगा, व्यवसाय के साम्राज्य में /


अब समय आ गया है कि देवता पुनर्विचार करें 

किस तरह से वे पुनः प्राप्त  सकते हैं 

मानव हृदय पर अपनी खोयी हुई पकड़ /

उन्हें दूसरों को अधिक भावनात्मक समर्थन देना होगा  

और कम  लापरवाह और कम निर्दयी बनना पड़ेगा/


क्या वे सूचना मिलते ही तुरंत ध्यान देंगे 

यदि कहीं कोई मानवीय क्षति हुई हो/

दानवों जैसे, जो हमेशा मनुष्यों के आदेश मानते हैं 

और उनके लिए  तत्परता से कार्यशील रहते हैं?


दानव उनके मन की बात समझते हैं 

उनके  लिए मल्हम जुटाते हैं/

और उन्हें ऐसे स्थानों में जाने के लिए लालायित करते हैं 

जहाँ पर अंत में उनकी शांति नष्ट हो जाती है/


सृजना और कुशलक्षेम के देवताओ 

लस्टस और उसके  दानवों ने 

मानवता का संतुलन बिगाड़ दिया है /

लोग विक्षिप्त हो गए हैं/

पुनर्विचार कीजिये उन्हें इस उत्तेजना के संसार  से 

वास्तिविकता और स्थिरबुद्धिता के  संसार में 

कैसे वापिस लाया जाये /

*******************************************************************************


मूल लेखक :  डॉ. जे. एस।   आनन्द 

अनुवादिका :   रजनी छाबड़ा 















































*लस्टिस :  लस्टस के द्वारा बनाई गयी न्याय-प्रणाली 

*लस्टीटूटूशन : लस्टस द्वारा बनाया गया संविधान 


(भौंचकित हो कर , वे ब्रह्मा के पास लौट आते हैं)





















 


 

  लस्टस 

सेटन का उत्तराधिकारी 

अन्धकार के साम्राज्य का अधिपति 


मानसिक विद्रूपता का भयानक आईना दिखाता नाटकीय एकालाप ' लस्टस '

मूल रचना इंग्लिश : डॉ.जे. एस. आनंद 

हिंदी अनुवाद :  रजनी छाबड़ा 



लस्टस 

 पात्र परिचय 
लस्टोनिआ : लस्टस का राज्य, ईडन का  एक  विकल्प शहर / लस्टोनिआ में संविधान को लुस्टिटूयशन कहा जाता है/ लोग जो भी करते हैं , उसको लसटिफाई करते हैं/और जस्टिस को लस्टिस कहते हैं/ प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्मों के लसटिफिकेशन में आस्था रखता है, अन्यथा उसे भटका हुआ कहा जाता है/


लस्टस  : महान दैत्य राजकुमार, जिसे सेटन का अंधकार का राज्य विरासत में मिला है /

प्रभु : महान सर्जक , जिसे सेटन के बाद लस्टस  चुनौती देता है/

दुर्गा, ब्रह्मा,विष्णु, इन्द्र : हिन्दू पौराणिकी में देवी देवता 

ग्रेडा (चंचल माँ ): धन लोलुपता की देवी (नव पौराणिक कथा में )

अमाज़ीनिआ : सेटन के पुत्री जिसने ऑक्सफ़ोर्ड विश्व विद्यालय से भौतिक शास्त्र में पी. एच.डी. की                            उपाधि प्राप्त की है 
सेटन :             महादानव जो अब वृद्धावस्था में है और अपना राज्य सँभालने में खुद को असमर्थ                               पाता है 
बिल्जेबब, लूसिफ़र फियर, कॉन्सिपिरेसी और तेंसोनिया :
दानव के कर्मचारी  जो अपने प्रशासनिक ब्लॉक सँभालते हैं 
काल, नारद और कुरु : भारतीय पौराणिकी के पात्र 
सैमुएल , लेसबिआ :  नाटक के पात्र 
टाइम 
कोरस 
कॉस्मिक वॉइस , ओरेकल , सिंगर 
विलियम वर्ड्सवर्थ 
सेंटेज , डेन्ज़ी , गरीला , विचिस 
  





लस्टस


आह्वान

हे ! सरस्वती, मैं एक बार पुनः आपके पवित्र मंदिर में आया हूं /

मेरी लेखनी को नई ऊर्जा  दो 

मानव के पतन के कारण खोजने के लिए 

और लस्टस  के उत्थान के 

बाध्य कर दिया जिसने प्रभु और उसके शक्तिवान फ़रिश्तों को 

आत्म -विश्लेषण के लिए , क्यों परास्त होना पड़ा मानव को दानव से 

और किसने विमुख  किया मानव को 

दैवीय शक्तियों से और बाध्य किया 

लस्ट्स के  दिन प्रतिदिन बढ़ते आधिपत्य और शक्ति की 

शरण में जाने के लिए। 


लस्टस  जो इच्छुक था मानव के रवैये को देव के समक्ष उचित ठहराने का 

खिलवाढ़ कर  रहा था मानवीय मन की दुर्बलता के साथ 

सम्मान, स्वतंत्रता और इच्छा शक्ति की आड़ में 

और उसकी उच्च श्रेणी की  बौद्धिक वाकपटुता ने  

कैद कर  दी उनकी कल्पना शक्ति 

ताकि शीघ्र ही उन्हें यह आभास होने लगा 

यदि वे चाहते हैं कि मन-वांछित ही घटे 

केवल लस्टस और उसका राज्य ही है 

जो उन्हें बेलग़ाम आज़ादी दे सकते हैं/


प्रभु और उसकी दिनों-दिन क्षीण होती जा रही सेना

अपने बलपूर्वक रवैये के साथ जारी रखे हुए थी 

मृतकों की उपासना

और उनके अनुयायियों के लिए निर्धारित करती 

आचरण की एक सारणी 

जिससे आमआदमी साधारण खुशियों से भी वंचित हो जाता 


इस तरह, उन्होंने मुख मोड़ लिए मंदिरों से 

और भीड़ बढ़ ने लगी मदिरालयों, सिनेमाघरों 

रेस्त्रां और क्लबों में 

लोग,जो मुक्ति चाहते थे 

कमरतोड़ काम के बोझ से 

एकत्रित होते खेल खेलने,  महिलाओं से मिलने के लिए 

और मदिरा पान व् मौज़ मस्ती  के लिए 

परन्तु, जैसे जैसे सामूहिक अर्थव्यवस्था की पकड़ 

बढ़ने लगी, राष्ट्र की आर्थिक व्यवस्था पर 

अधिकाधिक युवा धकेल दिए गए नौकरियों की ओर 

जहाँ न तो उन्हें खुशी मिलती, न आशा की कोई किरण 

केवल आकांक्षा परोसी जाते उन्हें 

मात्र स्व -केंद्रित अतिरंजित जुनून 

रुग्ण मानसिकता और निरंतर दर्द से युक्त /

इन सशक्त लोगों की सेना 

जो दानव के नाम पर जी रहे थे 

दिखने में धार्मिक लगते थे 

और प्रभु के प्रति पूर्णतः समर्पित 

मंदिरों में अर्चना करते 

धार्मिक स्थलों पे सजदे में सिर झुकाते 

स्पष्ट रूप से अपनी  दमित भावनाओं से मुक्ति पाने के लिए 

फिर भी, उनकी निष्ठा तो शैतान के प्रति ही थी 

मानवीय इच्छाओं की पूर्ण स्वतंत्रता में यकीन के साथ /


हे, सरस्वती! मुझे सामर्थ्य दो वर्णन करने की 

कैसे घटित होता है यह देवत्व को लूटने का काम 

कैसे  यह दुष्ट लोग इस संसार को बदल देते हैं 

आध्पित्य हो जाता हैं अन्धकार के साम्राज्य  का, 


और कैसे दैवीय साम्राज्य के दुर्ग एक के बाद  एक 

लस्टस  के कोप के आगे  धराशायी होने लगते है, 

और किस तरह अंततः प्रभु प्रयास करता है 

अपने खोये स्वर्ग को पुनः प्राप्त करने के लिए। 


मुझे शक्तिदान दो इस अधार्मिक युद्ध के 

अनपेक्षित विवरण करने हेतु 

जोकि लस्टस  और उसके समूह ने 

प्रभु पर थोपा 

जिसमें कितने ही फ़रिश्ते घातक रूप से घायल हुए 

और, अंत में दुर्गा का आह्वान किया गया 

दानवों  के नरसंहार के लिए 

अराजकता के अंत के लिए 

और ईश्वरीय व्यवस्था के पुनर्स्थापन के लिए 



मूल रचना: डॉ. जे. एस. आनंद  

अनुवाद : रजनी छाबड़ा 



 सर्ग  १  
ज्ञान:   खतरे का कार्यक्षेत्र 

(रामायण से एक दृश्य , वन के परिवेश में)

सीता : प्रभु, देखिये न, कितना सुन्दर प्राणी है यह ?
            
           यह सुनहरी मृग/

           मेरा मन आकुल  है इस सुन्दर जीव को पाने के लिए /
           
          प्रभु , क्या आप इसे मेरे लिए ला देंगे?


राम :   मुझे तो यह मायावी प्रतीत हो  रहा है / भूल जाओ इसे /

सीता : यह मुझे बहुत आकर्षित कर रहा है, प्रभु/
क्या इस दुनिया  में ऐसा कुछ है जो आपके लिए असम्भव हो?

 राम :  अगर तुम्हारी यही ज़िद है, मैं जाऊँगा इस जानवर को पकड़ने के लिए/
 (राम प्रस्थान करते हैं , लक्ष्मण को सुरक्षा का ख़्याल रखने के लिए कहते हुए)

एक आवाज़ , एक चीख़ ,सीता के आतुर कानों तक पहुँचती है/

सीता:  इतना समय बीत गया/  मेरे प्रभु जी वापिस नहीं आये/
लक्ष्मण, यह विचित्र चीख क्या है?
क्या तुम जा  कर अपने भ्राता को खोजोगे ?


लक्ष्मण :   मुझे तो यहीं रह कर, आपकी देखभाल करने के निर्देश दिए गए हैं, माता /

सीता :   परन्तु , मैं  चिंतित हूँ / जाओ और मेरे प्रभु की सुरक्षा सुनिश्चित करो/

लक्ष्मण:  पर माते, मैं वचनबद्ध हूँ/ 
                 
              मैं नहीं जा सकता /
                          



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सीता:   मैं तुम्हे आदेश देती हूँ, लक्ष्मण /

( इस से वह विवश हो जाता है )

लक्ष्मण:  अगर आपका यही आदेश है , मैं प्रस्थान करता हूँ/

             मैं इस कुटिया के गिर्द एक रेखा खींच रहा हूँ/ 
              इस दायरे से बहार आने का प्रयास मत कीजियेगा /

( लक्ष्मण प्रस्थान करते हैं/ और एक साधु  का आगमन होता है/

साधु :  भीक्ष्मदेह! (माते मुझे भिक्षा दें)

सीता : (उसे देख कर अचंभित होते हुए)

बाबा, आईये और भिक्षा ग्रहण कीजिये/

साधु:   मैं यहाँ बैठ रहा हूँ/ आप यहाँ आईये  और मुझे भिक्षा दीजिये/

सीता:  परन्तु, बाबा, मैं वहाँ नहीं आ सकती/

साधु अग्नि रेखा को पार करने की कोशिश करता है / पर आग की एक लपट उसे रोक देती है/ तब वह उस दायरे से कुछ दूरी पर जा कर  बैठ जाता है/

साधु:  आपको ही बाहर  आना पड़ेगा , माते/
अन्यथा,मैं आपको श्राप दे दूंगा/

भयभीत, सीता अब बाध्य हो गयी उस आग के दायरे से बाहर कदम  बढ़ाने को /
और उसका अपहरण कर  लिया गया, लंका अधिपति रावण के द्वारा, महादानव , जिसका ज्ञान दस मस्तिष्कों के बराबर था,  सर्वाधिक बलशाली लंकापति/

सहगान :


सर्वाधिक बुद्धिमान , सर्वाधिक ज्ञानी 
मनुष्य इस ब्रह्माण्ड का 
कर  रहा है अपवित्रीकरण 
किया सीता का अपहरण 
और अपने ही विनाश को दिया निमंत्रण 
क्या ज्ञान की अति 
अंततः मनुष्य से ऐसे अपराध करवाएगी 
और अंत में अपने ही पतन की अदालत में खड़ा कर देगी ?

रावण इसी कलयुग की ही तो उत्पति है 
अपने समय से कहीं आगे उत्पन्न हुआ 
सम्पूर्ण रूप से उतर आधुनिक मनुष्य  
जिसके प्रभुत्व में ज्ञान की परम शक्तियां होती हैं/
और उसकी लंका एक प्राचीन प्रारूप थी 
न्यूयोर्क और रोम जैसे  हमारे आधुनिक शहरों की 
बदलते वक़्त  के साथ साथ 
उसे हम से जोड़ता है 
उसका ज्ञान के प्रति घमंड 
सत्ता के लिए उसकी लालसा 
औरतों के प्रति उसकी  वासना 
और प्रभुत्व की असाधारण लोलुपता 
उसका अंत क्या होता है ?
और क्या बदा होगा भाग्य में 
इस प्राणी  के, जिसने कि 
लस्ट्स के हाथों में ही सौंप दिया हो 
अपना सम्पूर्ण विश्वास ?


आदम :

उसने भव्य प्रबंध मेरे लिए  किया था 

मेरे स्वागत और देखभाल के लिए 

जब मैं ठहरा उसके फार्म -हाउस पर (ईडन )

और यह सर्वथा निःशुल्क था, या पहले से ही भुगतान किया जा चुका था /

मुझे बिल्कुल भी आभास न था, कौन मेरे प्रति इतना दयालु था/

सब कुछ निःशुल्क था /

शीतल पेय और सुबह की चाय/

दोपहर के भोजन में ३६ व्यंजन और रात्रि-भोज में ? इतने ही /

    

दिन में, मुझे प्रसन्न रखने के लिए , 
हज़ारों  विकर्षण या यूं कहें, आकर्षण 
यहाँ सी. सी. टी. वी. कैमरे थे और भारी भरकम गार्ड्स
जो इर्द गिर्द ही खड़े रहते और करते सलाम 
यह हरित सम्पदा का वैभव, 
शीतल जल की झीलें और सुन्दर चेहरों के झुंड 
व्यायामशाला, क्रीड़ा स्थल, गोल्फ रेंज और घुड़दौड़/  



मैं स्वयं को पूर्णयतः सम्पन्न महसूस कर रहा था/
और जितना भी समय मैंने वहां बिताया 
मुझे महसूस हो रहा था  मेरा भरपूर ख्याल रखा जा रहा है/ 
मैं अत्यधिक आभारी था और 
चाहता था उसे मिलना, उसका धन्यवाद करना/
परन्तु यह कभी संभव न हो पाया /
फिर भी, हर सुबह, जब मंद बयार मेरा स्वागत करती 
मुझे सद्भावना भरा सन्देश मिलता / 
मैं सारा दिन स्वतंत्र हूँ अपनी मनमानी करने के लिए/ 


मैं उपभोग कर सकता था उसके जंगलों का, उसकी नदियों का, उसके सागर का,
उसकी हवाओं का, उसके पहाड़ों का, उसके वृक्षों का और उन पर शोध कर सकता था 
और नए नए अनुसन्धान कर सकता था /

परन्तु, कुछ सीमायें थी जिनके पार जाने की 
मुझे अनुमति न थी/ 
उसके कुत्ते  मुझ पर झपटने लगते/ 
उसके पहरेदार बहुत सख़्त थे /
मैं अक्सर उसका धन्यवाद करना भूल जाता 
उन सुविधाओं के लिए जो उसने मुझे निशुल्कः दी थी /
मुझे उस से कोई शिक़वा न था ,
मैं इतना अधिक ख़ुश था उस फार्महाउस पर 



परन्तु मुझे याद है कुत्ते मुझ पर झपट पड़ते 
जब कभी भी मैं ग़लत व्यवहार करता 
और मैं इतना अधिक उलझ गया था 
अपने अनुसंधानों और परम्पराओं में कि 
एक दिन ऐसा आया कि मैं स्मरणशून्य हो गया 
और भूल गया कि यह फार्महाउस उसका है /

मैंने  सोचा यह सब तो मेरा है, मैंने ही सब कुछ किया है /
आभार की भावना तो उड़नछू हो गयी 
मैंने सोचा कि मैं यहाँ का स्थाई निवासी हूँ 
और मनमर्ज़ी से जी सकता हूँ/



उनमुक्त इच्छा, उन्मुक्त आचरण 
मैंने उसके कुत्तों को विष दे दिया/
उसके पहरेदारों की जान ले ली 
और उन क्षेत्रों से भी परे देखने लगा 
जिन पर 'वर्जित' चिन्हित था /


कौन था मैं? कैसे हुई मेरी उत्पति? 
किसने मेरा यहाँ ठहराव सुनिश्चित किया?
किसने मुझे यह चेहरा, मेरा मस्तिष्क, मेरा रूपरंग दिया?
मेरे माता-पिता? मेरी संतति ?
मेरी पसंद और मेरी नापसंद ?
क्या मेरा चेहरा जिसे मैं अपना कहता था, मेरा है ?


अब तक, यह प्रश्न 

मुझे क्रोधित करते हैं /

और अब मैं  बिसरा चुका हूँ उस याद को 

कि कभी मेरा कोई धनवान मित्र था 

जिसने मुझे आमंत्रित किया था और 

एक लम्बे अर्से तक आवाभगत की  थी 

और निशुल्कः /


(अपने उतर-आधुनिक अस्तित्व पर विचार करते हुए )

क्या मैं  इस धरती पर भेजा गया था 

मात्र समय मापने के लिए 

वृद्ध होने के लिए 

और अंततः एक दिन सभी को अलविदा कहने के लिए /


क्या वे लाखों लोग 
बड़े किये गए थे, ग़ुलाम बनाने के लिए 
कारख़ानों और निर्माण-स्थलों पर ,
केवल बोझ ढोने वाले जानवरों की  तरह जीने के लिए/


यहां तक कि वो जो हाँकते  हैं इन मज़दूरों को 
जोकि दिन रात एक कर देते है, मेहनत करते हुए \
अपनी दौलत मापने में लगे रहते हैं 
और गहरे घूंट भरते हैं 
लाखों की मेहनत और विश्वास के दम पर 
क्या वे किसी भी तरह उनसे बेहतर हैं ?

हो सकता है वे सोचते है कि 
सारी प्रजाति में, वे सर्वोत्तम हैं ,
उन्हें वरद हस्त प्राप्त है 
देवों का , जो उनसे कोई प्र्शन नहीं करते /
जो मनचाही कर सकते हैं 
किसी के भी प्राण ले सकते हैं /
जिनके लिए कोई भी क़ानून नहीं है 
और जिनके मुंह ख़ून का स्वाद लग चुका है 
वे उतने ही है असम्बद्ध, जितने की वे 
जो अभावों  की पीड़ा को झेलते हैं 
यह कोई दैवीय व्यवस्था नहीं थी 
कि मनुष्य असमान और अन्यायी हों 
और इस दुनिया में 
केवल विजेता हों और शिकार हों /



यदि मैं इस संघर्ष के एक अंश के रूप में पैदा हुआ हूँ 
और भरपेट भोजन जुटाने में असमर्थ रहता हूँ 
यदि मेरे पास पर्याप्त धन है 
और फ़िर भी धनोपार्जन 
हावी रहता है मेरे दिल-ओ -दिमाग पर ?
यदि  केवल जीवित रहना ही मेरा परम लक्ष्य है 
मैं खुद हैरान हूँ कि मैं  प्रासंगिक हूँ  या अप्रासंगिक ?


क्या प्रभु ऐसी गलतियाँ कर सकते हैं 
कि मानव मात्र दुःख भोगने के लिए ही पैदा हुआ है 
या फिर केवल दूसरों को दुःख देने के लिए ही पैदा हुआ है 
क्या हमें इतनी बेशक़ीमती ज़िन्दगी 
केवल अपना पेट भरने के लिए मिली है और, कुछ भी नहीं 
सिवाय इसके की एक दिन हम यूं ही मर जाएँ निरर्थक ?


दैवीय वाणी :


नदियों और पहाड़ों से पूछो 

कैसे कायम रखते हैं वे 

अपनी मर्यादा और उत्तेजनाहीनता 

वे शान्तिप्रद जीवन में यकीन रखते हैं /

मानवता की सहस्त्रों वस्तुएँ प्रदान करते हैं 

और कोई भेद-भाव नहीं करते/


पक्षियों की प्रजाति में अनुपात का तीव्र बोध होता है 

आवश्यकता से अधिक एक भी दाना नहीं खाते ,

भविष्य के लिए एक भी दाना संग्रहित नहीं करते /

वे प्रकृति का ही एक अंश है, ख़ुश और आनंदित 

और सदैव उचित संतुलन में रहते है/


मानव प्रजाति की शांति भंग होती है

क्योंकि वे इस प्रवाह को भंग करते हैं 

और शाश्वत संतुलन को बिगाड़ते हैं /

केवल मनुष्य ही ऐसा प्राणी है 

जो शांत-प्रिय लोगों की दयालुता पूर्ण जाति से विदा हो जाता है 

और इस ग्रह के संतुलन को नष्ट  करने में लिप्त है/

सूर्य के प्रकाश को दबोचना चाहता है, पानी का स्वामीतित्त्व चाहता है/

हवा को झपटना चाहता है और सारी खुशियां क़ैद करना चाहता है /


वह सनकी इंसान !

हवा पर हुकूमत जताना चाहता है 

घोटाले करता है 

और भगवान का प्रचार करता है /



 गायक :

हे देवों, अरे दानवों 

मेरा तुम से कोई सम्बद्ध नहीं 

मैं दीवाना हूँ ,

क्या मैं लीयर  हूँ?

अरे नहीं. मैं मेकबेथ हूँ। 

नहीं, नहीं, नहीं, मैं फ़ॉस्टस हूँ/

फ़ॉस्टस,जो दानवों के पास गया 

क्या मैं एक दानव हूँ ?

सेटन ! तुम कहाँ हो?


मुझे कुछ धुंधला धुंधला याद है 

मैंने विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की थी 

कोई नौकरी नहीं 

कोई ज्ञान नहीं 

कोई प्यार नहीं 

केवल अधिक से अधिक पाने की ललक,

किस लिए? किसके लिए? 


क्या मैं इस दुनिया में  केवल आजीविका कमाने के लिए आया हूँ 

और उधार की किश्तें चुकाते चुकाते मरने के लिए आया हूँ 

अपने बच्चों का भरण -पोषण करने के अलावा क्या और कुछ भी नहीं ?


अरे .... मंदिर, मस्ज़िद , गिरिजाघरो

जहां वे चर्चा करते हैं राजनीति पर 

हे,... देवगण  

क्या आप भी शैतान में यकीन रखते हैं? 


यह जन्म, यह संसार, यह शिक्षा , 

यह प्यार,  यह करुणा ,

यह धनवान संसार और बेचारा मैं 

क्या यह सब अप्रासंगिक हैं /

क्या मुझ में विषमता है ?

एक मूर्खता है ?


हे बैकेट !

मुझे समझने में मदद करो 

गोडोट कौन था और वह आया या नहीं?


मैं जा रहा हूँ 

अरे गायको , अरे कवियो, अरे दार्शनिक लोगो

सुनो !

तुम्हारा आदमी अप्रासंगिक है /


वह मरने के लिए ही पैदा हुआ है/

केवल मरने के लिए /

कुछ भी नहीं करने के लिए/

हा हा हा हा हा हा 


दानवों ! तुम्हे सलाम 

 तुम्हे सलाम , हे,सेटन!

और तुम्हारे सगे सम्बन्धियों को, हे लस्टस !


मेरे पास करने लायक कुछ नहीं, 

विचारने लायक कुछ नहीं,

करने लायक कुछ नहीं ,

मुझे तो बस नष्ट ही होना है /

 हा हा हा हा हा हा 






सर्ग -2 आसन्न पतन के संकेत 

स्थान: नर्क का प्रवेश द्वार )
सेंटेज: ( एक संत जो भूतिया घर में पहुंचता है )

हैरानी की बात है, इससे पहले इतनी ठिठुरन कभी महसूस नहीं हुई /

डेंजी : (एक साध्वी) वे हमें यहाँ छोड़ कर चले गए हैं/ क्या हम स्वर्ग में हैं या नर्क में ?

सेंटेज : हम दोनों को ज़हर दे कर मार दिया गया है, क्योंकि हमारे स्वामी ने हमें आलिंगनबद्ध देख लिया था/ यह  एक पाप था/ फिर हम स्वर्ग में कैसे हो सकते हैं ?

(उन्हें कुछ विशालकाय दानव जैसी आकृतियां इधर उधर चहलक़दमी करते दिखती हैं/)

 बिल्जेबबआईये, आईये, यहाँ आपका स्वागत है/ ( वह उन्हें माला पहनाता है/)
(दोनों सहमे हुए थे, पर अचम्भित भी हुए इस पुष्पों द्वारा स्वागत से)

सेंटेज : इतनी ख़ामोशी क्यों है? क्या नर्क इतना पवित्र स्थल है?

बिल्जेबब:  खामोश रहिये/ स्वामी अस्वस्थ है/

सेंटेज :  स्वामी ?

बिल्जेबब : सेटन,  अंधकार का राजा/

सेंटेज : वह अस्वस्थ है? क्या मैं उसके लिए बाइबिल से कुछ पद पढ़ूं ?

बिल्जेबबक्या तुम तुरंत मृत्यु की इच्छा रखते हो? और यातना भोगना चाहते हो यातना गृह में?

(एक दानवीय आकृति की ओर इंगित करते हुए)
गरिल्ला , इस आदमी को ले जाओ और आग की झील में डुबकी लगवाओ/



उसे अपनी बाइबिल का यहीं परित्याग करने के लिए कहो/
डेन्ज़ी ,क्या तुमने अपने धार्मिक ग्रन्थ यहीं पीछे छोड़ दिए हैं या फिर तुम भी अग्नि-स्नान करना चाहती हो ?
(सभी प्रस्थान करते हैं/)

स्थल: सेटन का शयनकक्ष/ अमाजीनिया और सेटन, जोकि बिस्तर में लेटा है/ अमाजीनिया उसके नज़दीक बैठी है और उस का नर्म  हाथ सेटन के माथे पर है, जो ज्वर से तप रहा है/

अमाजीनिया:
पिता जी, मैं बहुत उदास हूँ आपको इस तरह शिथिल देख कर 
उम्र में ऐसा भी क्या है कि 
मनुष्य को एक खाली बोरे में तबदील कर देती है ?

मैं आपकी शक्तियां क्षीण होते हुए देख रही हूँ/
सशक्त पँख जिन्होंने टावरों को तबाह कर दिया था 
वह जूनून ख़तम हो गया  जिसने ईडन को आग लगा दी थी, 
और आदम के साम्राज्य को धूल में मिला दिया था/


सेटन :

मैं अब भी भरपूर जीवन चाहता हूँ, तूफ़ान लाना चाहता हूँ 
और सागर में क्रोध का उफ़ान लाना चाहता हूँ 
ओह, यह जर्ज़र होते अंग, यह धुंधलाता दिमाग 
मैं देख रहा हूँ लाखों मीनारें  
ज़मीन पर उभरती हुई 
मेरे सीने को चीरती हुई 
मेरे  शिख़र को चुनौती देती हुई /


पैग़म्बर आये और उन्होंने मेरी शक्ति को ललकारा 
कैसे मैं उस अपमान का बदला लूँ ?
मैं महसूस कर  रहा हूँ अपनी  दुष्ट शक्तियों का ह्रास
प्रकाश के इस उत्कृष्ट सागर में/


फ़ॉस्टस को यहाँ लाओ! अरे फ़ास्टस 
मेरी महानतम ख़ोज 
मुझे बताओ की क्या कोई ज्ञान पिपासु 


अभी भी बचा है 
मैंने उन्हें प्रचंड रूचि से झकझोरा है/ 
कौन अब आराम कर  सकता है ?
कौन अब सो सकता है ?
लस्टस को बुलाओ, मुझे इस बारे में उस से बात करने दो 
इस से पहले कि शमा बुझ जाये /


लस्ट्स प्रवेश करता है 

अपने अग्रज चचेरे भाई का झुक कर अभिवादन करता है 


सेटन :

दीर्घायु रहो, लस्ट्स 
यद्यपि अमाजीनिआ को विरासत में मिल सकता था 
अँधेरे का यह साम्राज्य 
परन्तु यह पुरुष प्रधान संसार है 
और अभी भी सही समय नहीं आया कि 
एक लड़की छल -कपट में पुरूष  की बराबरी  करे /

इसलिए मेरे बाद तुम यह दायित्व संभालोगे 
और अमाजिनिआ तुम्हें  सहारा देगी /
अँधेरे के इस साम्राज्य पर अब तुम राज करो/


लस्ट्स 

महान सेटन,
मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि 
मेरा पूरा जीवन, मेरा परिवार,
और मेरी पूर्ण निष्ठा 
आपके प्रति सदैव रहेगी /
मैं आपका आशीर्वाद चाहता हूँ कि 
अपने सारे दायित्व निष्ठापूर्वक निभा सकूं/
अब से आगे 
मेरे सब आनंद और मेेरी सारी खुशियाँ  
आपके अधीनस्थ होंगी, महामहिम /

( प्रस्थान करता है )

स्थान: धरती : तीन लोग प्रकट होते हैं/
काल, नारद और कुरु 



काल :

विचित्र समय आ गया है, नारद /

कुछ वस्तुएं नहीं हैं, फिर भी उनकी उपस्थिति का आभास होता है/

मनुष्यों के चेहरे में चिंता की लकीरें दिखती हैं /

किसी भी कार्य में जुनून नहीं है/ 

मैंने लोगों को बहुत जल्दबाजी में देखा है 

क्या हम किसी लौकिक दुर्भाग्य से घिर गए हैं ?


नारद :

हाँ , विचित्र समय आ गया है /

ऐसा प्रतीत आता है जैसे कि 

देवताओं और दानवों के बीच के  

इस प्रतिरोध रहित शीत युद्ध  में                

दानवों की ही सब ओर विजय हो रही है/


कुरु :

नारद, में भी यह विचित्र समय देख कर सदमे में हूँ /

हवाएँ गरजना बंद नहीं कर रहीं /

और कितनी ही बार, सूर्य भी गायब हो जाता है/

ऐसा मौसम तो हम ने पहले कभी नहीं देखा था /

यह रातें कितनी भयावह हैं 

बुराई का पूर्वाभास कराती हुई सी /


मुझे एक अजीबोग़रीब सपना आया, नारद/

मैंने  किताबों से भरा एक पुस्तकालय देखा/ 

लिखित पाठ्य-सामग्री 

और लाखों विद्वान 

फिर भी, उन किताबों में केवल भस्मवर्णी सामग्री थी 

और सीखने लायक कुछ नहीं 

विद्यार्थी जिन्होंने बरसों तक इनका अध्ययन किया 

और परीक्षा दी 

उन्हें उच्च स्तरीय उपाधियाँ मिली,

पर इन डिग्रियों में ज्ञान-विहीनता थी 

और यह केवल उनकी फाइलों की शोभा बढ़ा रही थी/

डॉक्ट्रेट की डिग्री के बावजूद, उनका बर्ताव तो मति -मंद था/



नारद :

यह चौंकाने वाला है और पूर्वाभास देता है कि  

कुछ बुरा घटित होने वाला है /

एक पुस्तकालय, लाखों पुस्तकें/

हज़ारों की संख्या में विद्वान ,

फिर भी नहीं कोई ज्ञान ?

हे, प्रभु! कौन कह सकता था कि 

हमें यह दिन भी देखने पड़ेंगे ?

( काल ने जो कि वक़्ता की जानकारी के बिना सुन रहा था,  हस्तक्षेप किया )                , 


काल :

कुरु, मैंने भी कल एक सपना देखा /

मैंने भैसें देखीं जिनके थन दूध से भरपूर थे ,

दूध से लबालब भरी बाल्टियां देखीं ,

फिट भी, जब उनमें लोटा डाला गया, उस में  कोई दूध नहीं था /


सब ओर हरी घास थी , दूर दूर तक हरी घास, 

पर उन में  उत्कृष्टता की कमी थी/ 

वृक्ष केवल आकार में ही वृक्ष लग रहे थे, 

और घास केवल रंग से ही घास लग रही थी /


सपने में,  मैंने  कुछ लोगों से बातचीत की, 

वे केवल दिखने में आदमी लग रहे थे, 

वे  परछाईयां थे/

मैं सहमा हुआ हूँ, नारद /

मैंने फैंटम  को देखा मनुष्य का मुखौटा धारण किये हुए /


नारद :

पृथ्वीवासी नहीं जानते 

प्रभु की क्रोध से भस्म करने वाली आग के बारे में 

और ब्रह्मांड से जुड़ी जानकारी /

निश्चित रूप से आसमान में खतरे के बादल तैर रहे हैं 

मैंने  प्रभु की आँखों में खून उतरते देखा है 

और उसकी भौहों पर चिंता के चिन्ह 

(प्रस्थान )


समूहगान :

जब  सेटन ने अनुभव किया कि  वह वृद्ध हो रहा है 

और संगठनात्मक परिवेश के कार्यों की 

क्षति हो रही है,

तब  लस्टस ही  था 

अन्धकार का उज्जवल राजकुमार 

और सेटन का एक युवा चचेरा भाई,

इस अन्धकार की आकाशगंगा में 

एकमात्र वही उजले सितारे सा चमकता/

उसे आमंत्रित किया गया सिंहासन पर आसीन होने के लिए /


लोगों  में और सत्ता के गलियारों में 

यह  बातें प्रचलित हो रही थी

कि सेटन के कार्य काल में 

कुछ खामियाँ थी 

जिनसे अन्धकार के साम्राज्य पर दुष्प्रभाव पड़ रहा था /

बुराई करने वाले लोग भ्रान्ति में थे 

और अक्सर प्रभु से प्रार्थना करते दिखाई देते थे 

पूर्णतः असमंजस के समय में/

   


सेटन, एक महानायक 

जिसने सफलतापूर्वक नेतृत्व किया था 

बुराई की सेनाओं का , प्रभु के विरुद्ध 

उसे श्रेय  मिला 

एक अन्धकार के वंश को स्थापित करने का 

और लोगो को प्रतिकार के डर से दूर करने  का 

नर्क में और शोधन गृह में  /


फलतः, अत्याधिक विस्तार होने लगा 

अंधकार के राज्य का /

यह महसूस किया जा रहा था कि 

प्रभु का प्रकाश टिमटिमाने लगा था /



और बस एक और ज़ोरदार फूँक 

 पवित्र आग को बुझाने के लिए काफ़ी थी /

और समूची ज़िन्दगियां एक गहरे गर्त में गिर जाएंगी 

जहाँ का पूर्ण नियंत्रण दानवों के हाथ में होगा 

ऊपर, नीचे सब ओर/ 

सेटन अनुभव कर रहा था कि 

उसके हाथ से सब फ़िसलता जा रहा है 

और उसने लस्ट्स को आमंत्रित किया 

जिसने हमेशा उस का साथ निभाया था 

और एक कुशल वक्ता और राजनैतिक दावपेंचों 

की ढाल से सुसज्जित 

अत्याधिक साहसी दानव था /

आमंत्रित  किया उसे राज्य की नई चुनौतियों का सामना करने के लिए 

जो कि अतुलनीय रूप से बढ़ गयी थी /


दैवीय स्वर :

गिलास आधा भरा हुआ था 

सब ओर प्रभु का आशीर्वाद और वरदान था 

तब साँप ने अपनी दृष्टि पुनः केंद्रित की 

आधे खाली गिलास पर /


और लोगों ने शोध शुरू किया 

कि लापता वरदान कहाँ था 

उन्होंने भगवान के स्वर्ग को तलाशा 

और इसे गायब पाया /


अचानक उन्हें एक कारखाना मिला 

जहाँ बहुतायत से परम आनंद बनाये जाते थे 

उस में प्रवेश करने से पहले, उन्हें बुद्धि को 

लॉकर -रूम  में रखना पड़ता था 


यह आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस के बल पर चलता था 

ऑक्सीजन और सूर्य के प्रकाश का भी विकल्प दे सकता था 

इसने अपना खुद का ख़ुदा बना लिया था 

यह लस्टस था जो सिंहासन पर आसीन हुआ/


 सर्ग -3  लस्ट्स का अभिवादन 

अभिषेक समारोह 

सेटन, लस्टस , अमाजीनिआ  एवं अन्य दानवों का प्रवेश 


सेटन 

साथियों

लस्टस  के अभिषेक समारोह में 

आप सब का स्वागत है 

मैं महान लस्टस को 

अंधकार का राजकुमार

पदांकित करता हूँ/


अब हम यहाँ जश्न मनाएंगे 

सत्ता के परिवर्तन  का 

सर्वाधिक शक्तिशाली से 

सर्वाधिक शक्तिशाली को /


वह सब से ऊंचाई पर है

उन चंद लोगों से अलग,

जो कि ब्रह्मांडीय विस्तार में  विचर सकता है 

और असीमित आकाश को अस्त व्यस्त कर सकता है/


लस्टस अपनी शक्तियों से ब्रह्माण्डीय विस्तार, 

धरती और अनंत आकाश तक पहुँच रखता है/

 अपरिमित हवाओं को सी सकता है 

और एक ही झटके में , अनंत समुंद्रों को सोख सकता है/


ईश्वर नहीं, यह लस्टस  ही है 

जो कि गगनचुम्बी बुलंदी के साथ 

मानवता का प्रतिनिधित्व कर रहा है 

अपने सम्पूर्ण बहुरंगी गुणों के सामुच्य के साथ/

(अभिषेक समारोह) 



सेटन :

सब से पहले मुझे उपस्थिति लेनें दीजिये 
हमारे महान योद्धाओं की 
जिन्होंने इस धरती पर 
निरंतर युद्ध की स्थिति बना दी है 
और आदमी को आदमी का दुश्मन बना दिया 
और सब को ईश्वर का विरोधी /


स्वागत है आपका डॉ. वैनआल , डॉ. फायरआल 


 बिल्जेबब   ! वृद्ध फाइटआल , डॉ. डैडमैन

और उस अंतर्भासी धर्मांतरित डॉ. फ़ॉस्टस को यहाँ लाओ/

मैं  कुछ विशिष्ट अतिथियों की 

विशेष उपस्थिति के लिए कृतज्ञ हूँ/

हिटलर और मुसोलिनी को बुलाओ 

और उन सब ईदी अमीनों  को भी 

जिन्होंने मनुष्यों में मतभेद पैदा कर  दिए 

ईश्वर की सत्ता और उसकी दयालुता पर 

प्रश्न -चिन्ह लगा दिए/

और हमें एक ऐसा गुनाह दिया जिस से 

हम  ईश्वर की न्याय प्रणाली को 

अप्रत्याशित रूप से रोक पाए/


हम *रेटालिया के किंग कॉसमॉस का भी स्वागत करते हैं 

जिस ने कि अपने स्वामी को ही देश निकाला दे दिया 

जिससे उसकी प्रजा ने विद्रोह कर दिया 

और इस तरह अपनी  तबाही  मोल ली/


आओ मैकबेथ , आपकी उपस्थिति का स्वागत है 

ताकि लस्ट्स को स्नान करवाया जा सके/

*(नोट:  डॉ. आनंद के महाकाव्य 'मास्टर '  के प्रकरण  में से उद्धृत:  राजा कॉसमॉस एक अत्याचारी  है जो पैग़म्बर को देश निकला दे देता है और एक आन्दोलन की यातना झेलता है/)



जुनून और आकांक्षा के तामसिक रक्त से 

और लेपित हो  

निर्दयतापूर्ण बेपरवाही  की मोटी परत से /


ताकि वह कभी भी न बेध पाए 

कभी भी न पार कर  पाये 

घृणा की उस घातक दीवार को, 

जोकि दानवों की अमूल्य निधि है 

और प्यार, मानवता की नाउम्मीद /


फ़ॉस्टस!

मेरे दिल में हमेशा तुम्हारा बसेरा रहेगा 

नर्क में तुम्हारी यातनाओं  का कोई अंत नहीं ,

शैतान के प्रति तुम्हारे प्रेम के लिए हम तुम्हारा सम्मान करते हैं 

और तुम्हारी स्वामिभक्ति  की प्रशंसा करते हैं /


विचिस , आओ और पवित्र मंत्रों का उच्चारण करो 

दावों की पवित्र पुस्तक 'डेलिस्या 'से '


विचिस मंत्रोचारण करती हैं : 

श्रम और मुसीबत को दोगुना और दोगुना करते जाओ 

आग जलने दो और कड़ाही में बुलबुले उठने दो /


जय हो महान राजा की!

जय हो लूसिफ़ेर की! 

जय हो लस्टस  की, सदैव के लिए राजकुमार !


लस्टस के राज्याभिषेक के बाद उसे सिंहासन के पास लाया जाता है /

सेटन सब औपचारिकताएं पूरी करता है/

तदुपरांत, अंधकार के नए राजकुमार का झुक कर अभिवादन करता है /


सेटन :

इस क्षत विक्षत गद्दी  के आगे 

मैं समर्पित करता हूँ  अपना  सर्वस्व 

जुनून, आकांक्षा और शक्ति 


युद्ध करने  के लिए और कभी भी पराजय न स्वीकार करने के लिए 

मुझे खुशी है की जिस क्षण से मेरी उत्पति हुए  

तब से अब जब कि मैं सब गतिविधियां समाप्त करने वाला हूँ 

मैंने कभी एक पल भी देवताओं को चैन से नहीं जीने दिया/



लस्टस , यह मेरी लिए बहुत तसल्लीबक्श है  

कि मैं तुम्हे एक ऐसा राज्य  सौँप कर जा रहा हूँ 

जिसकी प्रभुत्व  छोटे से छोटे देश  से लेकर,  बड़े से बड़े देश तक है/

तुम्हारा जहाँ मन करे तुम जाओ/

हे, अंधकार के राज्य के राजकुमार!

तुम्हे शाही स्वागत मिलेगा। 

और तुम्हे साथ देने के लिए 

और नीति निर्धारण के मामलों में सलाह देने के लिए 

तुम्हारा साथ देंगे डॉ. डैडमेन 

और मेकबेथ और फ़ास्टस के सारे झुंड,

जिनके आक्रोशित दिमाग ने कभी भी 

संयम और सब्र का ख़्याल निकट नहीं आने दिया 

और उनका जिक्र ऐसे पिशाचों के रूप में किया जाता है 

जिन्होंने  मानवीय सहनशीलता को 

घिसट घिसट कर चलने की हद तक ला दिया/


अमाजीनिआ, 
आगे आओ और लस्टस का साथ दो 
वह सदैव तुम्हारे साथ  रहेगी 
युवा राजकुमार, 
तुम्हारी सगी बहन 
जिसमें जुनून  और विश्वास 
प्रचुर मात्रा में है /


लस्टस :

सुयोग्य सेटन, आप मेरी लिए बेशक़ीमती बुजुर्ग़ हैं 

 मैं आपका ऋणी हूँ आपकी पैनी दृष्टि के लिए  

आपने मेरा चुनाव किया 

मुझ में आपने यह योग्यता देखी 



वह विशिष्ट गंध जो 

मानवता की  तरकारी  को ख़टास दे देती है /

मुझे याद है कैसे हमारे महान राजा को 

ईडन के लिए युद्ध लड़ना पड़ा था 

और उसे कितना बेइज़्ज़त करके वहां से धकेला गया था 

मात्र इसलिए कि उसने  ईव को एक सेब पेश किया था 

हालाँकि उसकी ईव को प्रभावित करने की या खुश करने की कोई मंशा नहीं थी /


यह कोई कामुक मामला नहीं था 

फिर भी देवताओं ने इसे अपराध मानते हुए ,

उसके विरुद्ध ईश्वर से शिकायत की/

जिन्होंने बिना उस से कोई स्पष्टीकरण माँगे 

बस फरमान ज़ारी कर  दिया 

आग के दरिया में धकेल  दिया,  प्रधान देवदूत को / 


उन दिनों मैं अल्पायु था 

परन्तु मैंने अपने महान बुजुर्ग की यातना देखी,

निर्वासन और निराशा के उन वर्षों में 

कैसे उस महान बैचैन आत्मा ने 

सर्वाधिक शोभनीय काम किया 

और देवताओं के विरुद्ध एक लाख वर्ष के लिए 

युद्ध का एलान कर दिया/


अगर ईश्वर हमें नष्ट करने की कोशिश करता ,

बदले में, हम उसके प्राणियों की ओर 

हमारे विष को निर्देशित कर देते/

और उनमें निराशा का संचार कर देते/

जिसके परिणामस्वरूप, वे तर्क के लाभ से वंचित हो जाते

 जिस तर्क का प्रचार वे साल के चारों मौसमों में करते रहे थे /


विनाश के मित्रो, साथियो और प्रेमियो

जब उचित को अनुचित और अनुचित को उचित 

ठहराया जाने लगे 

तब निराश होने लायक़ कुछ भी नहीं रहता/

किसी के लिए कोई आशा नहीं बचती 

सिवाय इसके कि  आज 

हम और दृढ़तापूर्वक कदम रखेंगे 

पतन के रास्ते पर/



अगर तुम अधिक से अधिक पाने में यकीन नहीं रखते 

तब तुम्हारा मेरे साथ सम्बन्ध न के बराबर है 

क्योंकि मेरे मंत्रिमंडल में वही सदस्य रह पाएंगे 

जिनके मन घातक क्षय में धँस चुके हों 

हमें तो यह सुनिश्चित करना है कि 

लोगों में संतुलन की भावना  ही समाप्त हो जाये 

जिसकी  वजह से जानवर तो शांत प्रकृति से रहें 

और दुनिया के लोग, अशांत स्वभाव युक्त 

हवाओं पर मंत्र फूंको कि 

वे मुफ़्त में गुनगुनाना बंद के दें/

नदियों को मना करो निष्फल प्रवाह के लिए 

पक्षियों को पशुविहार में डाल दो 

और सुयोग्य मनुष्यों का संगरोध कर दो /

प्यार नाम के वायरस को हमारे पवित्र मंदिर में तबाही का  कारण न बनने दो/


शास्त्रवेता!

ईश ने मासूमयित को बढ़ावा दिया 

उस ने कहा , अज्ञानता परमानंद है/

उसके पुत्र को सूली पर लटका दिया गया/

उन्ही लोगों के द्वारा जिनके लिया उसने अपना खून बहाया था/


वह पाप स्वीकरण में 

और माफ़ी देने में यकीन रखता था 

यह ईसाई धर्म के सद्गुण हैं 

वृह्द स्तर पर प्रसारित 

और सदाचारी लोगों द्वारा इनका पालन किया गया/


कौन यह यकीन करेगा कि 

यह सुझाव सेटन ने दिया था 

एडम  को 

न ही ईव  समझ  पायी कि 

इस स्वप्न का वास्तविक तात्प्र्य क्या था। 


ईशु भी असफल रहे 

उन  प्रावधानों के बारे में जानने में 

जिनके द्वारा उनकी ओर की दीवार में छिद्र हो गया 

और पाप को क़ानूनी स्वीकृति मिल गयी /


पाप स्वीकरोक्ति करो और दोषमुक्त हो जाओ 

ताकि तुम कर सको 

वही बड़ी भूल बारम्बार /

भूल करना मानवीय स्वभाव है 

और भूल करने के लिए शर्मसार क्यों होना ?


और यह समाज माफी देता रहता है 

और इतने विशाल ह्रदय से समायोजित कर लेता है 

व्याभिचारी लोगों को  भी 

जोकि अंत में कलयुग पर शासन करते हैं /


क्या यह धर्म की लड़ाई बोध के विरुद्ध है 

वे वस्तुएँ जो उलझाती हैं 

अन्ततः उन्ही की जीत होती है/

स्वीकरोक्ति एक विलक्षणता है 

और क्षमादान, एक पाप/



सेटन से प्रेरित हो कर 

और उसके आदेश की अनुपालना में 

आप हर उस काम को बर्बाद कर रहे हो 

जोकि भगवान्  करना चाहते हैं/


सेटन एक महान नायक था 

जिसने हर युग के लोगों पर राज किया /


और तुम,  जोकि सच्चे देशभक्त हो, 

तुमने शुरू किया है 

इन धर्मनिन्दकों के विरुद्ध, एक धर्मयुद्ध /


अमाजिनिआ :

लस्टस, क्या यह दयनीय नहीं है 

वे लोग, जो हमारे आदेश की अनुपालना में 

पाप करते हैं और स्वीकारते हैं 

वे खुद पूर्णयतः नास्तिक कहलाते हैं /


और यह उत्कृष्ट कहलाये जाने वाले लोग 

सफ़ेद झूठ बोलने वाले लोग षड्यंत्र रचते हुए कहते हैं कि 

आर्कएंजेल (सेटन ) के यह अनुयायी 

नर्क की आग में झुलसेंगे/


लस्टस :

अमाजिनिआ,

हमने मिल्टन को बंदी बना लिया है 

 जिसने इतना आतंक फैला रखा है 

इतनी सदियों से 

मानव की कल्पना शक्ति उसकी जकड़ में है /


मिल्टन कभी यातनागृह में तो गया ही नहीं /

वह अर्द्ध -सत्य ही फैलाता रहा /

उसे  दफ़न कर  दिया गया है, मर चुका है वह/


यहाँ हम न्यायोचित ठहराते हैं 

मनुष्य के प्रभु के प्रति कार्य 

यह जवाबी विस्फोट है 

उस ज्ञान का जौ 

मिल्टन और उसकी किस्म के लोगों ने दिया /


दैवीय वाणी :

लस्ट्स में दानवों को 

निश्चितता  दिखती है 

कि सम्पूर्ण ईसाई जगत 

 भयानक ख़तरे में है/



 *केओस और *पान्डेमोनियम 

अराजकता के प्रेमियों को आमंत्रित करते हैं 

ईश्वर और उसके देवदूतों को 

किसी अज्ञात कोने में धकेलने के लिए /


जिस समय, दानवों के ओहदों में 

परिवर्तन किये जा रहे हैं 

थरथराहट महसूस की जा रही है 

स्वर्ग  के साम्राज्य में /


देवता, जो अमृत  रसपान से मदहोश है .

अकर्मण्यता की दुनिया में निवृत हो गए है 

पतन के गर्त में गए साम्राज्य में क्या हो रहा है 
इस सब से बेख़बर हो कर/


 *केओस : दानवों का सम्मलेन कक्ष 

 *पान्डेमोनियम :  दानवों का संसद भवन 



सर्ग ४  भव्य कार्य योजना 


ओरैकल :   जुनून के पार्क में  (पार्क ऑफ़ पैशन्स में)

मुझे दिखाई दे रहा है जूनून का एक विशाल जुलूस 
पवित्र मंदिर की ओर चलते हुए 
जहाँ पर शैतान  एकत्रित हुए हैं 
लस्टस का अभिषेक करने के लिए, जश्न मनाने और भोज करने के लिए। 


यह जूनून का पार्क है 
दानव की भूमि पर बना एक रेस्टोरेंट 
जिसके आकर्षण से आत्माओं पर जादुई असर होता है 
यहाँ तक कि उन पर जो लावारिस भूमि से हों/


आर्कएंजेल का पसंदीदा बसेरा 
यह पार्क एक स्थान के रूप में प्रयुक्त किय जाता है 
जोकि, आने वाली पीढ़ियों को तैय्यार करती हैं 
मुक्ति और अनुग्रह के विरुद्ध /


लस्टस झुक कर अभिवादन करता है ग्रेडा माँ का 
लोलुपता की देवी 
जोकि इस महा दानव को आशीर्वाद देती है 
अदम्य विश्वास के साथ एक अथक भाग्य के लिए/


सेटन :


अगर तुम चाहते हो कि तुम सेटन से भी आगे बढ़ जाओ 

अरे, लस्टस !

ग्रेडा से आशीर्वाद प्राप्त करो (चंचल माँ)

बहुमुखी राक्षस देवी

जोकि बुराई की  प्रदायक है 

अपने बहुत से शानदार प्रतिरूपों  के साथ 

ग्रेडा(चंचल माँ)  के मंदिर में 

  

स्वर :


जय हो ! ग्रेडा (चंचल माँ ) बहुमुखी राक्षस देवी की 
जय हो ! लालसा की 
जय हो! छल कपट की 
जय हो! दोगलेपन की 
जय हो! आकाँक्षा की 
जय हो! प्रतिशोध की 
जय हो! ज्वाला की 


ग्रेडा (चंचल माँ ) प्रकट होती है अपने सात चेहरों के साथ और लस्ट्स को सम्बोधित करती है/

ग्रेडा (चंचल माँ )
तुमने मुझे ख़ुश किया है/

जब कभी भी तुम्हें  आवश्यकता पड़े 
यह रहा तंत्र 
(उसकी दायीं भुजा पर एक टोने का धागा बांध देती है)
और मंत्र उच्चारण करना:
अपकर्ष ,अपकर्ष, अपकर्ष 
और मैं पहुँच जाऊंगी/


लूसिफ़र :

अरे, इस  शापित धरती के निवासी 
अरे!  लौकिक प्राणियों 
अरे! ऊँचे पहाड़ों 
विशाल महासागर 


 सुनो!

जैसे जैसे आयु बढ़ती है 
हर कोई क़ब्र में लुढ़क जाता है 
सेटन भी गुजरते वक़्त के साथ उद्वेग रहित हो गया है 
और उसकी बुद्धि लय और छंद को भ्रमित करती है/ 



उसका शक्तिवान चचेरा भाई लस्टस 
सत्ता में आ गया है/
शक्तिवान होने के साथ ही साथ, उसे ग्रेडा (चंचल माँ) का 
आशीर्वाद प्राप्त है कि 
वह क्रांति ला सके और बुराई को पूरी  तरह  निगमित कर सके/



पुराना समय भिन्न था 

सेटन के आदमी व्यक्तियों को लालायित करते थे 
 
और उन्हें आसक्ति के लिए बहलाते फुसलाते थे 

परन्तु गुप्त रूप से /


महान सेटन 
बाग़ में प्रविष्ट हो गया छिपे तौर पर 
सरीसृप मार्ग अपना कर  

ताकि सेंध लगा सके ईव के  सपने में 
निषिद्ध फल की इच्छा के साथ 


यह सब एक गुप्त मामला था 
और सेटन. यद्यपि एक शक्तिशाली देवदूत था 
 उस ने कभी भी 
बुराई में गर्व करने का भाव 
नहीं दिखाया, 
जो भाव लस्ट्स में बसता है 
जोकि जब चलता है तो, आग की तरह जलता है 
अंधेरी इच्छाओं के जंगल में /


आज के बाद, अरे! अन्धकार के राजकुमार के प्रेमियों 
बिलकुल वैसे ही, जैसे पाश्चात्य देशो के लोगों ने साम्राज्य  जमा लिया था 
संसार के विभिन्न देशों पर 
लोगों को घूँस दी थी 
उन्हें अपनी संस्कृति सिखाई और शिक्षित किया 
और अंत में उन पर शासन किया और छीन ली 
उनसे  उनकी दौलत, उनकी पहचान ,
इसी तरह, हम भी एक नयी निगम संस्कृति निर्मित कर  रहे हैं 
ताकि हम मानवता को देवत्व से दूर कर सकें / 


(घोषणा)



आओ! इस अन्धकार के साम्राज्य के  
महान देवदूतो
केओस के और आगे बढ़ो/ 
जहाँ पर कि  नया राजकुमार 
जिसने कि अभी अभी शपथ ग्रहण की है, 
जनसाधारण को सम्बोधित करेगा /



केऑस (ईमारत जिसमें  संसद भवन( पेंडेमोनियम)  है ) में लस्टस को आमंत्रित किया जाता हैं सम्बोधन के लिए। 


लस्टस :

(सम्पूर्ण दुनिया के नेताओं के साथ ऑन -लाइन कनेक्शन जोड़ दिया गया है/)
क्या आप मुझे सुन पा रहे हैं ? (लस्टस अपना माइक सेट करता है, मीडिया चैनलों को सम्बोधित करते हुए )

लस्टस सेटन से बिल्कुल अलग है 
जिसने देवताओं से बग़ावत तो की थी 
फ़िर भी, मन ही मन , देवताओं और देवियों से डरता था 
और उसे अनुभूति होती थी एक अतिक्रमणकारी होने की /


सेटन अपने नियोग को खुद संचालित करता था 
गुप्त रूप से और  उसे विश्वास था कि 
अनंतकाल के क्रम को उलटने के लिए 
सभी दानवों को गुप्त  रूप से कार्य करना चाहिए/


मैं एक नियो कॉरपोरेट हूँ ,
इस शिथिल राज्य की पुनर्संरचना के लिए कार्यरत 
और मुझे यह सुनिश्चित  करना है कि यह सारी व्यवस्था बदल जाए 
ब्रह्माण्ड के अंतिम छोर तक /


अब हमारे  निशाने पर केवल 
यह  संसार ही नहीं 
हमारा असली प्रहार तो आभासी मन पर होना है 
पवन, आत्मा और मानवता की चेतना पर /


तदुपरांत , इस दुनिया के 
कोने -कोने में 
विस्तृत ब्रह्माण्ड के प्रत्येक भाग में 
एक निगमित इकाई बनने और अन्ततः साम्राज्य स्थापना के लिए /


जानवरों के राज्य को वश में करने के लिए 
और उनकी आत्म चेतना और दैवीत्व  
को समाप्त  करने के लिए ,
हम योजना बना रहे हैं 
गर्व  के एक नए रूपांतर की , जिसे हम 'सेल्फिया ' कहते है/


उनकी रगो में उन्हें अनुभव होने दो 
कमी और अपर्याप्ता 
और एक असाधारण लालसा 
आज़ादी , शक्ति और ऐश्वर्य के लिए/



एक बार यदि ऐसा घटित होता है 
वे मनुष्यों की तरह व्यवहार करने लगेंगे /
क्रोध, प्रतिरोध, और अधिक पाने के लिए प्रतिस्पर्धा,
खोंस लेने के और संग्रहित करने की प्रवृत्ति,
शत्रुतापूर्ण भावों वाली मानवता के सभी अवयव 
उनमें आ जायेंगे, एक बार अगर वे प्राप्त कर लेते हैं 
मानवों के अधिकार क्षेत्र का  
सब से भयावह आयाम/


यही चेतना हाँक दी जाएगी 
पौधों की मानसिक प्रक्रिया में 
ताकि वे भी विद्रोह में खड़े हो जाएँ 
मनुष्यों की सेवा करने से इंकार कर दें 
और अपनी कीमत मांगे/


जब मिलावटीकरण की भावना 
हमारे सर्वोत्तम पुरुषों  में आ जाएगी 
उसके बाद उन्हें, चाहे कहीं से भी शिक्षा दे दो 
गीता से या रामायण से 
अंत तो सब का एक ही होना है : पतन 


मनुष्यों के संसार में, आप पाओगे 
दो तरह के हत्यारे, एक ही तरह के कृत्य में 
राज्य की पुलिस और डकैत 
जिनके लिए हत्या करना पुण्यमय है /


दोनों ही हिंसा बल प्रयोग करते हैं 
यदि मनुष्य कुछ बुरा करे, उसको सुधारना ज़रूरी है 
कुकर्मी भी प्रभु के दूत हैं/
कार्यरत रहते हैं, आपराधिक न्याय के लिए /



यदि कोई जज किसी हत्यारे को मृत्यु दंड सुनाता है 
यह समाज को विचलित नहीं करता 
क्योंकि यह आपराधिक न्याय का कार्य है 
हत्या के कृत्य के बदले में /


जज हमारे लिए देवदूत समान है/
और पुलिस भी, ऐसे ही जल्लाद भी 
इसी खेल का एक हिस्सा 
किसी भी तरह के दोष से मुक्त /


कानून उन्हें विमुक्त करता है इस 'अशिष्ट ' कार्य से 
जो कि उन्होंने न्याय के नाम पर किया 
पर,पुलिस द्वारा यातना दिया जाना 
या किसी डकैत द्वारा हत्या किया जाना 
इन्हे अलग दृषिटकोण से परखा जाता है /


एक डकैत की किस्मत में तो हत्या और यातना लिखे रहते हैं ,
जो कि 'मेमन' (कुबेर) का त्वरित पीछा करते हैं
भूल जाते हैं कि लोभ एक महापाप है 
जो अंत में उन्हें कहीं का नहीं छोड़ता/



हमें ईश्वर से कोई लेना देना नहीं है/
हम कोई उसकी पुलिस नहीं जो सुधारात्मक मिशन पर लगी हो /
हमारा कार्य तो यह है कि हम 
मनुष्यों को नैतिक और मार्गदर्शक मदद दे 
उन्हें पाप के बोध से मुक्त करें /


हम उन्हें सब कुछ मुहैया कराते हैं 
उनके नलों में पानी है,
उनके फेफड़ों के लिए वायु है, 
उनके पास मोटर गाड़ियां, रेलगाड़ियां हैं,
फिर भी यह लोग हमारे साथ गंभीर छल करते हैं 
विपदा की घड़ी में 
हमें नहीं, ईश्वर को पुकारते हैं/


उनका निर्माण किया जाता हैं हमारे विनिर्माण द्वारा 
जहाँ पर सभी पुरुष और स्त्रियाँ 
नींद में भी लक्ष्यों का सपना देखते हैं 
निरंतर परिश्रम के बावजूद 
दो जून की रोटी जुटाने में असमर्थ रहते हैं /


क्या कोई भी ऐसा युवक है जिसे कुछ आराम के क्षण नसीब हों 
अपनी ज़िंदगी में एक घंटा भी खाली मिले 
जिस में वह किसी मनोरंजन पार्क में 
अपने बच्चों और बीवी के साथ कुछ समय बिता पाये?


क्या हमने उसे मोबाइल फ़ोन उपलब्ध नहीं करवाया ?
क्या हमने 'एप्पल' को नया स्वरुप नहीं दिया,
जोकि सारी  जानकारी  का स्त्रोत है 
और जिसने सारी दुनिया को उसकी मुट्ठी में दे दिया है ?


सज्जनों! हम ने अपना बदला ले लिया है /
आपको यकीन नहीं होगा 
देवगण पूर्णयतः आतंकित होकर पूछते है 
क्या यह  हमारा ही  एडम  है? क्या यह हमारी ही ईव  है ?


जब हमारा महान पुरखा (सेटन)
उन्हें ईडन के बगीचे में  मिला 
उसने पाया कि वह युगल पूर्ण सामंजस्य में है, 
वह ईर्ष्या से जल उठा/


एक साधारण से सपने ने 
नारी संरचना को बदल कर रख  दिया/
और बाकी के इतिहास को भी/


हमारा महान नायक सफल रहा 
ईव के दिमाग़ में एक सकरात्मक सपना भरने में, 
मैं आपको यकीन दिलाता 
मैं उसकी कोख़ में छेद कर  दूंगा 
और उसके साथ  इस तरह से हस्तक्षेप करूंगा कि 
वह बदतर के लिए बदल जाये 
ताकि आइन्दा दुनिया में जो बच्चे पैदा हों 
अविश्वास, घृणा 
और ईर्ष्या से लबालब भरे हुए हों 
और इसी प्रयोजन से,
हमने ईव को आत्म-निर्भर बना दिया है 
और अब, उसे न तो एडम की आवश्यकता है 
और न ही उसके ईडन की/


वास्तव में, कोई भी  नहीं  जान पाया 
कि  ईव पर आक्रमण क्यों किया गया था/
क्यों उसके मस्तिष्क को विकृतियों से भर दिया गया था 
उसे ही क्यों चुना गया था /
सेटन ईर्ष्या से अँधा हो गया था, 
फिर भी उसमें दूरदर्शिता की शक्ति थी /

अगर वह एडम को संक्रमित करता है, 
यह संक्रमण ईव तक ही सीमित रह जायेगा 
परन्तु, यदि वह ईव को संक्रमित कर पाने में सफल हो जाये 
यह बुराई पूरी क़ायनात में फ़ैल जाएगी/
वह भावी  पीढ़ियों को प्रभावित करने की 
उसकी छुपी हुए शक्तियों से परिचित था 
क्योंकि औरत सबसे अधिक सशक्त होती है 
सभी प्रजातियों में, 
और यदि एक बार वह 
उसकी संचेतना संक्षारित कर दे 
वह किसी को भी सुरक्षित नहीं रहने देगी /


आदमी भटकते रहेंगे 
प्यार से वंचित 
एक ऐसे संसार में जहाँ नेकी और सुंदरता समाप्त हो चुके हैं/ 
हमने जैक और जिल को प्रतिरोधी के रूप में ढाल दिया है /
भलाई और सद्भावना की परम्परा का 
अंत कर दिया है/

विवाह  प्यार का स्थान ले लेता है 
और साज़िश विश्वास का /
हम ने हर उस भावना को क़ानूनी स्वीकृति दे दी है 
जो प्रेम के पक्ष में है 
वैध चादरों को कमीनों (बास्टर्ड) को जन्म देने दो 
जो हम में यकीन करते है और त्रुटि का आनंद लेते हैं /

हा  हा हा हा  हा हा हा हा 


फ़ॉस्टस :

अँधेरे के साम्रज्य के देवदूतों,
अब मैं आपका परिचय करवाता हूँ 'हुमोविड टीकाकरण' से 
जिसे कि हम 'सेल्फी ' कहते हैं 
जोकि लगाया जायेगा 
जानवरों, पौधों और पक्षियों को 
ताकि वे अपने आचरण में थोड़े मानवीय बनें /


यहाँ, हम आपके सामने एक पी पी टी प्रस्तुत कर रहे हैं 
जिसे एक परीक्षण के रूप में तैय्यार किया गया है 
जोकि उनके मस्तिष्क पर हमारी दवा का असर दिखायेगा /


हम देखते है कि एक भैंस दूध देने से इन्कार कर देती है 
वह चाहती है कि उसे खूंटे से आज़ाद किया जाए और मांग करती है 
उसके भोजन में अधिक पोषक सामग्री शामिल करने की /


वह कोशिश करती है  
कि अपने चारे का कुछ हिस्सा बोरी में छुपा कर 
अपने चोकर के ढेर रख ले/


वह जिद करती है कि सारा दूध नहीं दुहने देगी 
अपेक्षाकृत कुछ बचा के रखेगी 
वह अपनी विनम्रता खो देती है 
और आक्रमक रवैया अपना लेती है 
जब खेत पर काम करने वाली औरत उसे दुहने आती है/


एक पौधा देवताओं से  फ़रमाइश करता है 
कि उसे चलने के लिए पैर दें  
और बोलने के लिए जुबान 
एक पेट दे, जिस में वह संग्रहित कर सके 
धूप, पानी और प्रचुर हवाएं /


इन पक्षियों को भी देखो 
जो नारेबाजी पर उतर आये हैं 
धरती पर पक्के घरों की मांग करते हुए 
भूमि का एक टुकड़ा, जिसकी रजिस्ट्री उनके नाम पर हो/

 
चारे की नियमित आपूर्ति 
और मुक़दमा दायर किया जाये 
अगर कोई खेल के लिए उनका शिकार करता है/


जो वरदान उन्होंने मांगे, उन्हें दे दिए गए/
भैंस को अब कुछ मानसिक रोगों ने घेर लिया है 
और न्यूरोसर्जरी के लिए जाया करती है 
एक पशु पालन केंद्र में/


पौधों में अत्याधिक संग्रहित धूप 
जल और पवन के कारण 
उन में  कैंसर  के चिन्ह उभरने लगे हैं/


ब्लड प्रेशर और शुगर ने क्लेशित कर  दिया है 
कुछ पक्षियों को 
क्योंकि वे अत्यधिक चिंताग्रस्त हैं 
अपने भविष्य व् अपने बच्चों के प्रति 
और कहीं कहीं तो 
कुछ ऍफ़ आई आर दर्ज़  की गयी है 
भूमि अतिक्रमण की लड़ाईयों को ले कर /


इस सभी रुग्ण प्रजातियों का इलाज़ किया जा रहा है 
उन्नत प्रौद्योगिकी के 'फॉक्स इंस्टिट्यूट ' में 
वे अपने स्वाभाविक गुण खो चुके हैं 
और अपना दोषरहित सुःख चैन /


इस टीकाकरण से उन्हें मदद मिली 
अपनी संतुलन की भावना पर काबू पाने में 
और बहुत से मनोवैज्ञानिक विकार आकर्षित करने में 
जोकि मानवीय इतिहास में बहुत सामान्य हैं/


इसलिए, अगर उनकी अच्छाई में नहीं,
पौधों और जानवरों को 
मानवीय प्रजाति में शामिल होने दो 
अपनी मौलिक शालीनता से विहीन होने के कारण/


मानव जाति अचंभित  है 
और इस नए प्रारूप को समझने में असमर्थ 
झुण्ड बना बना कर  जा रहे हैं 
देवताओं से शिकायत करने के लिए 
और मंत्रों और जादू से उनका इलाज़ करने की कोशिश कर  रहे हैं/

पी पी टी समाप्त 


  संकल्प 

स्थल : लिबर्टी हॉल 

जानवर, पशु और पौधे एकत्रित हुए हैं 
लस्टोनिया के लिबर्टी हॉल में 
और उन्होंने एक प्रस्ताव  पारित किया 
होमोविड  वैक्सीन के लिए लस्टस को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए 
 जिसने उनमें स्व -उत्थान की उत्कृष्ट भावना प्रदान की थी 
और अब उन्होंने मनुष्यत्व का आधा रास्ता तय कर लिया था/

 दानवों, जानवरों, पाखियों और पौधों  की एक सामूहिक अधिवेशन को लस्ट्स सम्बोधित कर रहा है/

लस्टस :

अन्धकार के साम्राज्य में आप सब का स्वागत है/
हम आपके प्रति आभारी हैं कि आपने 
हमारा साथ देने का निश्चय किया 
ज्ञानोदय के आलोक से,
आपने प्रतिबद्ध रहना सुनिश्चित किया 
जीवित प्राणियों की तरह, अपने अधिकार प्राप्ति के लिए 
जोकि आपको युगों से नकारे गए थे /



किल्लर इंस्टिक्ट  (एक नया चैनल)


लस्टस,
जानवर और पक्षी 
मानवता के विरुद्ध आपके ज़िहाद में 
कैसे शामिल हो सकते हैं ?
और पौधे भी जो कि चल भी नहीं सकते ?
बात तक नहीं कर सकते ?
नारे नहीं लगा सकते ?


लस्टस :

हम चाहते हैं कि वे अपने  निष्क्रिय प्रतिरोध पर रोक लगाएं 
और दुनियावी लोगों को 
आसानी से उपलब्ध होने पर भी, 
केवल  प्रदर्शन वस्तु  बनने के लिए 
उनके गंदे आंगनों में 
या जंगली पशुओं के पिंजड़े में,
यहाँ तक कि उनकी खुशी के लिए शिकार बनने पर /


हे जानवरो, हे पक्षियो, हे पौधो  
मनुष्य का  आपके प्रति व्यवहार 
बस घृणित है/
वह तो हर सेवा मुफ्त में प्राप्त करना चाहता है/
मुझे ईमानदारी से बताओ, 
कि क्या मानव प्रजाति में से कभी किसी एक ने भी 
कुछ सिरफरे कवियों केअलावा, 
प्रथम साम्राज्य के लिए कभी आभार का एक भी शब्द कहा?
सब से पहले तुम्हीं उत्पन्न हुए थे और सब से बुजुर्ग हो 
और उनसे अधिक सम्मान और आभार के हकदार हो/


किल्लर इंस्टिक्ट:


विचित्र !
तो आप यह चाहते हैं कि वे मानवता का प्रतिरोध करें ?
क्या ईश्वर ने अपनी रचनात्मक योजना में 
उन्हें एक हिस्सा नहीं माना  था  
मनुष्य को सहारा देने के लिए ?


लस्टस :


हम इसी बात का तो विरोध कर रहे हैं 
ईश्वर तो हमारा प्रतिपक्षी है/
और मनुष्य उसका सब से विश्वसनीय कारिंदा/ 
हम ने मनुष्य को भ्र्ष्टाचारी बना दिया है,
और अब हम उसकी आधार प्रणाली को नष्ट कर देंगे/
इसलिए, प्रथम साम्राज्य के महान सदस्यो
होमोविड टीकाकरण करवाएं 
निष्क्रिय प्रतिरोध के विरुद्ध 
अधिकाधिक सँख्या में/

मैं आपकी रगों में विटामिन 'के' का टीका लगाऊंगा 
फिलहाल, आपके पास ज्ञान तो है,
परन्तु केवल इतना ही कि आप अनुसेवी बने रह सकें 
ईश्वर की योजना के,  जो उसने मानवता की  सेवा करने के लिए बनायी /


हम आपको प्रदान करना चाहते हैं 
एक अतिचेतना 
ताकि आप  समझ पाएं 
ईश्वर आपके साथ क्या चालबाजियां कर  रहा है/

एक बार जब आप अपनी  योग्यता का आंकलन कर लेंगे
और अनुभव करेंगे कि आपको यह दासता कैसे काट रही है
आप पूरे मन से इस युद्ध में कूद पड़ेंगे
मानवीय आधिपत्य से मुक्ति पाने के लिए/


युद्ध के लिए कमर कस लीजिये 
और अपने अधिकार के लिए खड़े हो जाईये/

आज  के बाद से मनुष्य मात्र को यह समझने दीजिये 
कि  अब तक जो वस्तुएं वे शोषण से प्राप्त कर रहे थे
उन्हें उनका मूल्य चुकाना होगा/


आवाज़ें:

जय हो, लस्टस की/
अस्तित्वगत स्वतंत्रता का रक्षक 
समानता का महान समर्थक /


 दैवीय वाणी:


आकाश तुम्हारी गड़गड़ाती हंसी सुन रहा है /
लस्टस ,
और खामोशी से मुस्कुरा रहा है 
तुम्हारे तेज़ आक्रोश से, गंदे थूथनों से फूटती आवाज़ों से 
ज़िंदगी की आरा पहेली को निरर्थक बनाती हुए/


तुम्हारी सारी  शक्ति घमंड से उपजी है/
और तुम्हारी सर्वोचता की भावना से 
तुम इस बात पर नियंत्रण नहीं कर सकते  
कि सूर्य क्यों और कैसे अस्त होता है
और हवाएं कैसे चलती हैं/

केवल मूर्ख ही ज़ोर शोर से अपनी मूर्खता का ढोल पीटते हैं,
बुद्धिमान या तो मुस्कुराते हैं या चुप रहते हैं/



 सर्ग  5 

दानव का प्रशासनिक कार्यालय/ सम्पूर्ण शांति 

षड़यंत्रिका और भय कार्यालय में बैठ कम्प्यूटर पर  काम  कर रहें हैं/



षड़यंतत्रिका  :

हमारा महान राजकुमार एक सशक्त वक्ता  है 
और निश्चित रूप से, हमें ऐसा ही नेता चाहिए 
जो सभी प्रकार से गुण सम्पन्न हो 
और  विशेषकर राजाधिराज सम्बन्धी/ 


भय :
प्रतीत होता है कि हमें सही साथ मिला है 
लस्टस के तो नाम के ज़िक्र से ही 
भय उत्पन्न हो जाता है /
भय  से ही सभी काम होते हैं/
और जो डगमगा जाते हैं 
उन्हें भारी मूल्य चुकाना पड़ता है/


अरे! यह क्या है?   
मुख्यालय से एक परिपत्र /


वह राजकीय गृह मंत्रालय के सचिव द्वारा भेजा गया परिपत्र पढ़ता है /


सभी विभागाध्यक्षों द्वारा कल जो मीटिंग की गयी 

उसमें, तुरंत प्रभाव से यह निर्णय लिए गए :

अन्धकार के राज्य में 

निम्नलिखित प्रकार के नवआगुंतकों को 

विशेष प्राथमिकता दी जाएगी/


वह जिसने दस वृक्षों पर कुल्हाड़ी चलाई हो 
जिसने एक कोख की अजन्मी कन्या की हत्या की हो 
वह जो किसी ऐसे कारखाने का मालिक हो जिस से जल प्रदूषित होता हो 
वह जो किसी शहरी क्षेत्र से हो 
वह जो जानवरों से घृणा करता हो 
जिसके मन ने कभी प्रेम और रोमांस जैसी अवधारणों के गिर्द चक्कर न लगाए हों /



उदहारण के लिये यह रहा एक साक्षत्कार 

साक्षात्कारकर्त्ता : आपका यहां आने का  प्रयोजन क्या है ?

साक्षात्कारदाता  : लस्टस के प्रति मेरा प्रेम /

साक्षात्कारकर्त्ता :  क्यों ?

साक्षात्कारदाता : लस्टस आगामी पीढ़ियों की आशा है/

साक्षात्कारकर्त्ता : क्या  तुम्हे ईश्वर और नर्क से भय नहीं लगता?

साक्षात्कारदाता : बिजली और ए.  सी. के बिना रहना नारकीय है/

साक्षात्कारकर्त्ता : ईश्वर के बारे में तुम्हारी क्या अवधारणा है ?

साक्षात्कारदाता : कुछ भी नहीं/


साक्षात्कारकर्त्ता : 


 क्या तुम जानते हो , जैक !
यह अन्धकार का साम्रज्य है/
एक बार तुमने इस राह पर कदम बढ़ाये 
वापिस जाने का कोई अवसर नहीं रहेगा?


साक्षात्कारदाता :
वापिस बुद्धिमता में जाने का लाभ ही क्या है?
बुद्धि को तो मैंने पीछे छोड़ दिया है/
धर्म की मृत्यु हो चुकी है/ ईश्वर भी मर चुका है/
युवा पीढ़ी  रोमांच में यकीन रखती है/
नए साहसिक कार्य, वयस्कों की वेब सीरीज़ में /
अब नहीं रहे वे देशभक्त /
जोकि सेना में लड़ते थे तंग घाटियों में 
अब कोई भी आश्रम में रहना पसंद नहीं करता ,
और मंदिरों में क्रियाशून्य जीवन बिताना पसंद नहीं करता /


साक्षात्कारकर्त्ता : 

आप क्या सोचते है 
और क्या नया किया जाना चाहिए 
ताकि जनसाधरण को उच्चतम स्तर के *'जॉम्बीज़'
बनाया  जा सके /

साक्षात्कारदाता :


हमें मनुष्य की निज पहचान नष्ट करनी ज़रुरी है/
उसके सभी विशिष्ट गुण धुंधले पड़ जाने चाहिए /
वह एक परछाई जैसा प्रतीत होना चाहिए/
कूची का एक व्यापक स्पर्श 
दूसरे शब्दों में, वह एक जनसाधारण लगना चाहिए /



पाठशालाओं में और विश्वविद्यालयों में 
केंद्रबिंदु होना चाहिए 
मस्तिष्क पर नहीं, जैसा कि भूतकाळ में था 
पर शरीर और जीविका उपार्जन पर /



(साक्षात्कारदाता का चयन हो गया 

उसके विचारों की मौलिकता के आधार पर )



अंधरे के साम्राज्य के सभी नायकों को 
निर्देशित किया जाता है कि
वे आस पास पवन वेग सा बिखर जाएँ 
और ऐसे योग्य लोगों को तलाशें 
जो नवाचार की सोच के साथ आगे आएं 
लस्टस और उसकी धार्मिक योजनाओं को सशक्त करने के लिए /


राज्य सचिव द्वारा हस्ताक्षरित
 
परिपत्र पूर्ण हुआ/  भय अपनी वीडियो शुरू करता है/
मालिक वीडियो चैट पर है:


*  जोम्बीस :  विवेकहीन व्यक्ति 


लस्टस :


भय,
तुम हमारा सब से सशक्त्त हथियार होगे /
अपने पंख पसारो और 
मानवता के रक्तरस में आंतक स्थापित कर दो/ 

अपने साथbil   को ले जाओ/
और उनके दिमाग पर काबू पाओ /
सब से भयावह प्रकार के 
सभी दानवों को साथ ले लो /
और मनुष्यों का रक्त उनकी धमनियों में भावहीन होने दो/


भय :


स्वर्ग को खो देने  का कोई भय नहीं है/
वास्तविक भय तो यह है कि 
हम दुनिया को खो देंगे/
अपने रिश्तेदारों को खो देंगे/
समाज में अपना स्तर खो देंगे/


समाज ही तो स्थायी प्रहरी हैं परिवर्तन के विरुद्ध 
यथापूर्व स्थिति हमारा प्रमुख प्रावधान है /
जो हमारी निर्धारित प्राथमिकताएँ हैं 
किसी को भी उन्हें बदलने के बारे में मत सोचने दो /
अभिव्यक्ति की आज़ादी के सभी समर्थकों को गोली मार दो 
और उन सब को भी जो निंदा करते हैं 
हमारे दिग्गजों की जो कि इस विस्तृत संसार की 
पतवार संभाले हुए हैं/



टेंसोनिआ :


(एक और कर्मचारी जोकि भय के साथ लिव-इन-सम्बन्ध में है )

यह आनंद का विषय है कि हम ईश्वर की सर्वोत्तम रचना को 
यातना दे रहे है ऐसे बेरोक साधनों के द्वारा /
यह एक विचित्र प्रक्रिया है 
कि उन्हें सहजगामी जीवन पसंद ही नहीं/
जो उन्हें कोई तनाव न दे/
कौन ऐसा चलचित्र देखेगा 
जिसमें लड़ाई, रहस्य या विवाद न हो?


आनंद, शांति, प्रसन्नता, प्रेम और एक सहजगामी जीवन 
ईश्वर  की वसीयत के सबसे करीब समझे जाते हैं/
इन सब में, द्रुत गति से बढ़ने वाली पीढ़ी को 
कोई रूचि नहीं रही/


निरंतर काम करना, निरंतर चिंता करना 
निरंतर गतिमान रहना, घोषणा करते हैं  
एक के बाद एक खौफनाक ख़्वाब की/


यहां तक कि जब वे देवालयों में जाते हैं 
वे हज़ारों वरदान मांगते हैं जिन को सुन कर 
देवताओं के भी पसीने छूट जाते हैं /
अपनी जादुई शक्तियों के बावजूद भी, 
 उन्हें एहसास होता है कि मनुष्य केवल तनाव में यकीन करता है/
वे तनावयुक्त आते हैं और देवताओं को भी तनावयुक्त कर देते हैं /
और, उसके बाद, तनावग्रस्त ही, वहां से वापिस चले जाते हैं/


शायद, वे नहीं जानते कि 
घटनाएं तो ख़ुद -बख़ुद घटित होती हैं 
यदि आप दस लोगों को सलाह देते हैं नींबू पानी पीने की 
उन में से दो या तीन का उपचार तो हो जाएगा 
और चार या पांच, बिना इसके उपभोग के भी ठीक हो जायेंगे/
पर यह आपको नीम-हक़ीम बना देता है /



(लस्टस शहीद-चौक पर पहुंचता है , दरबारियों के साथ शामिल होकर /

एक लघु नाटिका का मंचन चालू है/)


लस्ट्स :


यह क्या तमाशा चल रहा है ?

     

सैमुएल :

यह एक नुक्कड़ नाटक है, राजकुमार/ 

(कुछ लोग जिनकी पीठ नहीं है, 

गली में इधर उधर चल रहे हैं 

और वे रो रहे हैं /

जैसे कि कोई बहुत भारी बोझ उठाने के कारण टूटी हो/)


लस्टस :

यह मैं क्या देख रहा हूँ? इनकी पीठ कहाँ हैं?


सैमुएल :

राजा साहिब, उनकी पीठ टूट चुकी है 

करों के भार और ज़बर्दस्ती वसूली के कारण 


लस्टस:

यह बढ़िया है/ इन में से किसी को भी 

सीधी गर्दन के साथ मत छोड़ो /

इनके चेहरे क्यों नहीं दिखाई दे रहे ?

क्या इस पर कोई पाबंदी है?


सैमुएल :

प्रभु ! बीते समय में इनके चेहरे थे 

परन्तु अब ,

आपके शासनाधीन होने के बाद 

लोग व्यक्तिगत तीखे नैन नक्श पसंद नहीं करते/

वे अपने चेहरे को कपड़े से ढके रखना पसंद करते हैं/

उनका चेहरे से किसी आदमी या औरत की 

हलकी सी साम्यता झलकती है/

और इसके अलावा कुछ नहीं /

यह चेहरे जो आपको दिखाई दे रहे हैं, राजकुमार 

यह मुखौटे हैं/


वे बेवजह मुस्कुराते रहते है/

और इन मुखौटों के पीछे, निष्ठाहीनता छुपी है/


लस्टस :

यह दो व्यक्ति कौन हैं 

इन में से एक ने आदमी की पोशाक पहनी है

और दूसरा औरत जैसा लग रहा है/


सैमुएल :

यह दोनों इस नाटक का हिस्सा हैं /

राजा साहिब, यह समलैंगिक हैं/

लेसबिआ , लेसबिआ, वह पुकारता है

एक युवती सामने आती है/

लेसबिआ, झुक कर राजकुमार का अभिवादन करो/

(वह झुक कर अभिवादन करती है/)


लस्टस:

इस में क्या विशेषता है सिवाय इसके कि सुंदर दिखती है/


सैमुएल :

लेस्बिआ  और उसकी मित्र अमारा आज शादी कर रहे हैं/


लस्टस:

दो लड़कियां आपस में शादी रच रही हैं/

क्या आदमियों का अकाल पड़ गया है?


लेस्बिआ:

क्योंकि हम एक दूसरे को प्रेम करते हैं और गृहस्थी बनाना चाहते हैं/


 लस्टस:

जो स्वतंत्रता हमने तुम्हें  दी है, उसका आनंद उठाओ /

यह एक नया राज्य है,

जहाँ नए विचारों का निषेध नहीं किया जाता /

जो तुम्हारे मन में आए , तुम सोचो/

 

और हमारे पास अमीर निजी निवेशक भी हैं/

यह कौन हैं जो  दिखने में विकृत पुरुष जैसे लगते हैं?


सैमुएल:

राजा साहब , आप उन्हें 'महंत' कहिये (किन्नर )

यह वह लोग हैं जो 

सब से पहले नवजात शिशु की ख़ुशख़बर देते हैं/


लस्टस:

वे किसी श्राप के शिकार हैं ,

या कुछ पापों के परिणाम भुगत रहे हैं 

हम यहाँ उन सब को ताज पहनाये रखते हैं 

क्योंकि उन्हे घातक दंड दिए गए हैं/


कभी कभी देवताओं से भी ग़लती हो जाती है 

और यह उनकी गल्तियो का परिणाम है/

 विनिर्माण दोष के साथ उत्पन्न हुए ,

उन्हें संसार द्वारा अस्वीकरण का दुःख भोगना पड़ता है/


लस्टस :

सैमुएल , इन महान प्राणियों को देखना अच्छा लगा/

अब मुझे कुछ रैप सुनाओ /

रैप संगीत बजाया जाता है/


(लस्टस को अपने मोबाइल पर कॉल आती है/ वह नाटक को अधूरा ही छोड़ कर  चल देता है/)


दैवीय वाणी :

लस्टस जैसे लोग 

गलतफहमियों पर ही केंद्रित रहतें  है/

और उसी मनोस्थिति से चलते हुए 

साधारण सी बात को भी उलझा देते हैं/



देवताओं का  मानवता से कोई मतभेद नहीं 

यद्यपि 'मात लोक' में कुछ भी सही नहीं है/

दानव अपनी साजिशों के तहत 

बढ़ती हुई हलचल देख रहे हैं /

विवेक और अविवेक की सीमा रेखाओं पर,

मानवता वहशीपन की बाँहों में है/

लस्टस और उसके चालित अपवित्र प्रशासन के कारण,

नैतिक शुष्कता के भंवर में दम  तोड़ रही है/


दैवीय इच्छा से परे कुछ भी नहीं है /

जो मारे गए और जिन्होंने ने मारा 

लस्टस की रचना किसने की ?

और अफवाहों की चक्की कौन चलाता है ?



 सर्ग  6 

राक्षसीय राजनीति की तैयारियां 

ब्रासिल : 

अमाजीनिआ की ताज़पोशी हुुई है सौंदर्य साम्राज्ञी के रूप में /

उसने संसार के विभिन्न भागों से आयी 70 सुंदर प्रतिद्वंदी  युवतियों के साथ मुक़ाबला किया था./

कैओस में कार्यक्रम चल रहा है

जहाँ लस्टस भी उपस्थित है/


समूहगान :

अमाजीनिआ जिसका वास्तविक नाम तमर  था 

वे लिलिथ की बेटी थी 

जोकि एक मादा-राक्षस  थी 

अत्यंत सुन्दर और विचारहीन आकर्षण युक्त 

और उसे क्रोध आया जब सेटन ने 

ईव का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की /

उसने देखा था उसे उस महिला पर अति अनुरक्त होते हुए,

परन्तु जब सेटन ने उसे इसका प्रयोजन बताया 

उसे यकीन हो गया और उसने पहली बातें अनदेखी कर दीं /

और सेटन को पहले से भी अधिक प्यार करने लगी/


अमाजीनिआ उसकी बेटी है/

वह सुंदर देश यू. एस. का भ्रमण कर आयी है/ 

वह कनाडा भी घूम कर आयी है/

उसने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से अध्ययन किया था/

उसके पास भौतिक केमिस्ट्री में डॉक्ट्रेट की डिग्री है/


ज्ञान के बिंना मुक्ति नहीं है /

यदि इसे घातक खुराक में ले लिया जाये 

यह मानसिक भय का कारक बन जाता है 

और मानवीय अनुभूति को नष्ट कर देता है/

लस्टस को प्रबुद्ध विकृति की लपटों से पकाया गया था/



वह  शारीरिक रूप से भी उतना ही सशक्त है,

 जितना कि  वह बौद्धिक रूप से जीवंत है/

लस्टस की आयु अधिक नहीं है, पर अधिक समृद्ध है 

बुराइयों के साम्राज्य के मार्गदर्शन  हेतु,

अपनी खतरनाक योजना के विस्तार के लिए 

मनुष्यों से जानवरों, पक्षियों और पौधों तक /


ग्रेडा लस्टस पर विशेष मेहरबान है

और उसने उसे अतिरिक्त शक्तियां प्रदान की हैं/

मानव में स्वाद सम्बंधित विकार पैदा करने की 

और उन सभी को हानि पहुँचाने की 

जो शांति,  करुणा और क्षमा में विश्वास रखते हैं 

बिल्कुल बेकार की बातें /


लस्टस:

अमाज़ीनिआ, पाताल लोक को  तुम पर गर्व है 

देवता रोते रहे, ईव लालायित  हो गयी 

परन्तु वे हमारी तैयारियों का आंकलन नहीं कर पाए/

तुमने तो सभी अवरोधों को दूर फ़ेंक दिया/

और अब एक नये संसार का प्रतिनिधित्व कर रही हो 

जोकि सुंदरता में यकीन रखता है 

और अपनी बुद्धि के सहारे चलता है, 

ईमानदारी और पवित्रता का लिहाज न करते हुए/


अमाज़ीनिआ: 

मैं आपकी आभारी हूँ 

कि मैं इस अन्धकार के साम्राज्य का प्रतिनिधित्व कर रही हूँ/

हम चाहते हैं कि और महिलाऐं सामने आएं/

यह कोई पुराना संसार नहीं है, जहां औरतें 

केवल गृहस्थी सँभालने के लिए ही होती थी/

अब गावों का परित्याग कर 

औरतों को शहर जाना ही चाहिए/

अपनी आजीविका को आगे बढ़ाते हुए, अपनी मर्ज़ी करनी चाहिए/


अब से, कुछ सदियों तक,

पति घर में बच्चे संभालेंगे और रसोई में आराम से काम करेंगे/

यह एक नई दुनिया है/

यहाँ बुद्धिमानी का कोई मूल्य नहीं 

समानता ही आपकी सम्पति है/

आप अपना मूल्य स्वंय निर्धारित कीजिये/

आप मुझ से किस काम की उम्मीद रखते हैं,लस्टस ?


लस्टस :


 आप वापिस जायें और साथ में अपने मित्रों को भी लेती  जाएँ 

अन -सिविल इंजीनियरिंग में 

एक छः महीने का डिप्लोमा करने के लिए/


अमाज़ीनिआ: 

यह अन -सिविल इंजीनियरिंग क्या है?


लस्टस :

यह दानवों की एक सूक्ष्म स्तर की राजनीति है/

पुरातन समय में, हमारे लोग धरती पर जाते थे ,

डकैतों का वेश धारण कर के ,

 छल पूर्वक कार्य करते थे 

परन्तु सभ्य होने का दिखावा करते थे /


पुराने षड्यंत्रों की ओर देखो /

राजा के दरबार के षड़यंत्रकारी 

दिखने में बहुत सभ्य दरबारी प्रतीत होते थे 

जो गुप्त  रूप से कार्य करने के लिए 

बहुत प्रयत्न  करते थे/

और राजा अथवा उनके राजकुमारों की 

सुरक्षा की जड़ें खोख़ली करने में लगे रहते थे /

अब, हालात बदल गए हैं /

बुराई, जिस का ज़िक्र करना भी वर्जित था 

अब सिखाई जाती है और उसका अभ्यास करवाया जाता हे 

इन विश्वविद्यालयों में भारी मात्रा में /


अमाज़ीनिआ: 

मैं हैरान हूँ/ ऐसा कैसे ?


 लस्टस :

वह समय पवन वेग से बीत गया 

जब लोगों के दिमाग में कुछ शब्द तैरते रहते थे /

भलाई, ईमानदारी, यथार्तता और चरित्र ,

प्रामाणिकता, पारदर्शिता , धर्मशीलता 

देवभक्ति और पवित्रता /


मैं खुश हूँ कि हमने रिकॉर्ड कायम किया है 

और आभारी हूँ यह स्वीकारते हुए 

हमारी पूर्व-व्यव्सथा ने 

इस महान कार्य को सम्पन्न किया है/


अमाज़ीनिआ, वह विष जिसने सुकरात की जान ली थी 

उसका प्राधान्य अभी भी है 

तुम्हें हर घर में 'क्रॉस' दिखाई देगा/

जो एक प्रेत अस्तित्व में सिमट गया है/


ज्ञान की अत्याधिक ख़ुराक से बिगड़ गया है 

ईश्वर का क्षेत्र /

लोग अब उस से आगे सोचने लगे हैं 

उन वस्तुओं के बारे में 

 जिनका अभी तक कोई अस्तित्व ही नहीं ,

वे वस्तुए, जिन्हे वे खुद रच रहे हैं /


भविष्य क्या है ?

यह भगवान नहीं जो हर प्राणी का भविष्य लिखता है 

यह लिखा जाता है मनुष्य के अपने कर्म, अपने वचनों ,

अपने विचारो के द्वारा /

और  प्रिय अमाज़ीनिआ,

इन विचारों को हम नियंत्रित करते है,


यद्यपि बीता हुआ कल, हो सकता है 

ईश्वर के नाम लिखा गया हो, पर भविष्य तो लस्टस का है/


अमाजीनिआ :

पर कैसे, लस्ट्स ,

सभी लोग अपनी धार्मिक मान्यताओं के साथ जीते हैं/

उनके अपने धार्मिक ग्रन्थ होते हैं/

गीता है, बाइबल है/

क़ुरान  है, तल्मूड है/

आप ऐसा सोच भी कैसे सकते हैं  

कि सुदृढ़ धार्मिक परिशोधन वाले यह लोग 

अपनी  राह से हटाए जा सकते हैं 

और आपका अनुकरण करने के  लिए बाध्य किये जा सकते हैं?


लस्टस :

बेचारी लड़की / तुम मुझे बताओ 

क्या धार्मिक प्रतिष्ठान में सब कुछ सही चल रहा है/

क्या वहां वासना नहीं/ घोटाले नहीं ?

कोई अपराध नहीं? कोई पाप नहीं?

वास्तविक प्रश्न तो यह है :

कि कैसे इन स्थलों की पवित्रता को और अधिक नष्ट  किया जाए 

ताकि वे लोग जो इन धार्मिक रीति -रिवाज़ों में यकीन रखते हैं 

उन्हें आंतरिक रूप से कोई समर्थन न मिले/

हमें, यह सुनिश्चित करना होगा  

कि उनके दिल ओ -दिमाग इतना अधिक औपचारिकताओं से भर दिए जाएँ

कि वे हमारे संधि योजन को समझ ही न पाएं/


 मैं तुमसे सहमत हूँ, अमाजीनिआ , ईश्वर ने  ईसा की उत्पति की 

और उसका सन्देश प्रकाश की एक प्रखर तरंग की तरह है/

पर एक अँधेरे ज्ञानक्षेत्र के आगे  

एक मोमबत्ती कहाँ टिक पाएगी/

एक टिमटिमाती रौशनी 

कितनी देर तक तेज़ हवाओं का दबाव झेल पाएगी?  


पंजाब में भी कुछ गुरु थे 

जिन्होंने सारे माहौल को आलोकित कर  दिया /

इसी भाँति , प्रभु कृष्ण, प्रभु राम 

महान  ईश्वरीय सृष्टि 

जिन्होंने हमारे कई महान लोगों की जान ली.

परन्तु वास्तविकता यह है, प्रिय 

कि वे सब आये और चले गए ,

परन्तु अँधेरा हर चमकते  सितारे पर हावी रहता है/

हम कुछ और नाम भी जानते है ,

ओशो, रामतीर्थ, विवेकानंद, दयानन्द 

और ईसाई समुदाय के कई महान संत 

जैसे कि सेंट ज़ेवियर 

जिन्होंने हमारी  शक्ति से उलझने की कोशिश की/

अंधकार सब प्रकार के प्रकाश की माँ है /

इसी प्रकाश में वे हमारे चेहरे देखते हैं 

और ख़ुद के भी/

और जब प्रकाश गायब हो जाता है 

वे भी अन्धकार की आग़ोश में चले जाते हैं/


ज़िंदगी भी तो एक टिमटिमाती लौ है/

रात के गर्भ से उत्पन्न  

रात में ही निवृत हो जाती है/

जैसे जैसे समय इस आग को बुझाता है/

इसलिए , प्रिय अमाजिनिआ/

हम सभी इस अधर्मी विस्तार के सहभागी हैं/

मृत्य एक भय की तलवार है 

जिसे ईश्वर ने मनुष्य के सिर पर लटकाया हुआ है 

ताकि वे अपने अनिश्चित भाग्य से भयभीत रहें/

और ऐसी भीड़ हमारे स्टालों पर एकत्रित हो रही है


कि सारी गणनाएं गलत हो गयी/ 

एक के बाद एक, एक पंक्ति के बाद दूसरी 

मृतक नर्क की ओर रवाना हो रहे है/

नर्क की ओर दस हज़ार 

और शाश्वतता की ओर एक/

यह हमारे लिए गर्व का विषय है 

कि हमें आशातीत लोकप्रियता मिली है 


हालाँकि यह संतुष्टि का विषय है 

कि वे सारी प्रणालियाँ 

जिन्होंने मनुष्यो को दैवीय गुण सिखाये 

इस समय अस्त -व्यस्त हो चुकी हैं/

अगर आप मंदिरों की बात करें,

वे अब केवल संगमरमर की प्रतिमाएं हैं/

और पुजारी केवल भौतिक स्तर पर व्यस्त हैं/


अधिकतर संतों ने एक सीधा लिंक  बना लिया है

नर्क के सर्वर्स के साथ 

और हमारे आइवरी टावर से 

उन्हें रिमोट कण्ट्रोल किया जाता है /

संसार के कैदखानों में संतो की संख्या देखो /

सुधारगृह तो नाममात्र के हैं 

यह सभी हमारे सर्रोगेट नर्क हैं/

जहाँ पर हमारे एजेंट्स हमारे उत्पाद बेचते हैं 

और परिपूर्ण व  प्रचुर मात्रा में राक्षसी वृति पैदा करते हैं/


अमाजिनिआ :

आप किस तरह के संसार की  परिकल्पना कर  रहे है, लस्टस ?

किस चीज़ की कमी है?

जहाँ तक मुझे समझ आता है , 

संसार में सभी कुछ गलत ही तो है/

अब आप और किस तबाही की योजना बना रहे हैं/



लस्ट्स : 

ईव  के साथ मुख्य मुद्दा था, वर्जित फल। 

इसे हमने पीछे छोड़ दिया है /

सभ्यता की रगों में ,

ज्ञान विष की तरह प्रवाहित हो रहा है/

सेटन ने इस मासूम वरदान को भृष्ट कर दिया,

और मानवता में दखल करते हुए 

इसे विकृत भाईचारे में बदल डाला/

निःसंदेह ,वे ईश्वर की संतति है 

उसके बेहद प्रिय 

पर अब मुझे उसका चेहरा सदैव मायूस दिखता है/

विचारों में खोया,

उसके  माथे पर चिंता की लकीरें दिखती है/

वह किसी सर्वनाश की प्रतीक्षा करता है/

सब कुछ अब उसके नियंत्रण से परे है/

मनुष्य जिन्होंने ने ज्ञान प्राप्त किया था 

उन्होंने भी अपनी राह स्व-नियंत्रित करने के 

ढंग खोज लिए हैं/

जिन लोगों को वह अपना संमझता था, नकली हैं /

केवल उन पर उसके ब्रांड का लेबल लगा हुआ है/

आंतरिक रूप से, वे दैवीय गुण खो चुके हैं/

हर धर्म अब संगमरमर की मूर्तियों का व्यापार करता है/

जबकि देवताओं की मूर्तियां अपने मोबाइल फोन पर व्यस्त हैं/


अब और क्या जानना बाकी  है?

फेफड़ों को कितनी वायु की आवश्यकता होती है /

तुम कितना खा सकते हो?

तुम कितना ऊँचा सुन सकते हो?

हर वस्तु की एक सीमा  होती है/

यहाँ तक की बुद्धिमता की भी सीमा  होती है/

परन्तु , मूर्खता ,,,,,,

अमाजिनिआ 

मूर्खता सीमाहीन है/


और सेटन ने अत्याधिक ज्ञान फ़ैला दिया 

रोशनी के तीव्र प्रकाश सरीख़ा, जो आँखों को अँधा कर देता  है/

अगर आपको किसी व्यक्ति की पाचन शक्ति बिगाड़नी है 

मिठास भरे व्यंजन बनाओं 

और उसे भरपेट खिलाओ /


ज्ञान जो जानकारी का जन्मदाता है 

इतना लालायित करने वाला व्यंजन था 

इस से मनुष्य के मुँह में पानी आ जाता था/

और देखो उसे 

वह बिना भूख़ के खा रहा है,

और बिना कोई हास्य चैनल देखे, उसे हँसी ही नहीं आती /

ज्ञान के फल का अत्याहार करने से 

मनुष्य को  इसका नशा महसूस होता है,

 इसका जादुई असर होता है/

और वह सीधे नर्क की राह पकड़ लेता है/



दैवीय वाणी :

सभी मृतकों को निर्देशित किया जाता है स्टालों की ओर 

जोकि नर्क के द्वार पर सहायता की पेशकश कर रहे हैं /

एक सप्ताह या लगभग इतने ही समय में , 

मात्र एक या दो आत्माएं ही ऐसी दिखाई देती हैं 

जिन्हे स्वर्ग की राह पर भेजा जाता है/


अगर हम भीड़ के हिसाब से देखें,

ऐसा प्रतीत होता है कि दानवो ने देवदूतों से बाज़ी मार ली है/

देवता संकट ग्रस्त प्रतीत होते हैं/

क्या उन्होंने इस ओर ध्यान दिया ?

याकि, वे केवलअपने सुखद निवास में नृत्य देखने में व्यस्त हैं?


या फ़िर, वे पृथ्वी के प्राणियों को कोसने में लगे हैं,

उनके दोषों के लिए जिस वजह से असमंजस  फ़ैला 

संसार में/

जबकि दानव तो परवाह ही नहीं करते उनकी धृष्टताओं की/


नरकद्वार पर बढ़ती हुए भीड़ ने  

लस्टस  को और शक्ति दी है 

जिसका घमंड तो अपरिमित हो गया है/

यह प्रसन्नचित लोग उसका नया खोजा गया खज़ाना हैं/



लस्टस :

सर्ग  7 : दस आज्ञा-पत्र 


लस्टस :

जानवरों का  साम्राज्य निषेध मुक्त है,
जिस से उन्हें अपना संतुलन और शांति 
बनाये रखने में मदद मिलती है,
कुछ ऐसा ही पक्षियों के साथ हैं/
एक भी पक्षी कभी भी  सैक्स से वंचित नहीं रहता /
आप देखिये, वे सब कितने शांत रहते हैं!

 परन्तु मानव में इस से बड़ी कोई क्षुद्धा ही नहीं कि 
उनकी सौंदर्य और शरीर के प्रति प्यास 
कभी तृप्त ही नहीं होती/
और देवत्व की राह तलाशने की बजाय, 
और यहाँ तक कि संसार को बेहतर बनाने के 
तौर- तरीके खोजने की बजाय 
मानव प्रजाति अपना यौवन और वृद्धावस्था 
को व्यर्थ गवांने में लगी है/
सांझेदारों के पीछे लालायित रहना ,
विवाह के बारे में और गृहस्थी बसाने के बारे में सोचते रहने में/


इस समय यह लोग व्यस्त रहेंगे 
सुयोग्य मिलान ढूंढने और विवाह रचाने में 
और उसके बाद कचहरियों के चक्कर लगाने में 
दानव व्यस्त रहेंगे, अपने किलों को सुदृढ़ बनाने में /



किलर इंस्टिंक्ट:

यह एक बहुत पेचीदा षड़यंत्र प्रतीत होता है,

विनाश के स्वामी 

इस सब से आपको अंत में क्या प्राप्त होगा?


लस्टस :

किशोरावस्था से लेकर , वयस्कता तक 

आदमी और औरतें विपरीत सैक्स के ही सपने लेते रहते हैं/

उनके दिमाग पर शादी का ही भूत चढ़ा रहता है/

अधिकतर, बेमेल विवाह हो जाते हैं/

पेज 69 

और यौन कुंठा 
इस संसार का एक बड़ा मुद्दा बन चुका है/
एक व्यक्ति जिसका सारा अस्तित्व ही सैक्स पर केंद्रित हो, 
वह ईश्वर के बारे में कैसे सोच सकता है?
वह मोक्ष के बारे में कैसे सोच सकता है?
और हम इसका सम्मिश्रण बना देंगे,  इसे धर्म के साथ मिश्रित करते हुए/
 
वे जो यह अनुभव करते हैं के वे पथ भृष्ट हो गए हैं/
वे धार्मिक संघ में शामिल हो जाते हैं कुंवारे के रूप में। 
कुंवारेपन से बड़ा असत्य तो  कुछ हो ही नहीं सकता /
और शुचिता  के विचार से बड़ा और खरनाक 
कोई भी क्रूर कानून नहीं हो सकता/


अगर प्रकृति ने तुम्हे एक काया दी है,
इस में देखने के लिए आँखे हैं,
इस में हाथ है जिनसे आप भोजन कर सकें,
जिसमें टाँगे है जिनसे आप दूर दूर तक चल सकें/
और मानव के जननिक किस लिए है?
केवल भूखे मरने के लिए ?


एक पवित्र व्यक्ति तो वह है जो,
मन और शरीर दोनों ही से पूर्ण  महसूस करता है/
हमारे खास व्यवहार की ओर जीवों का स्वाभाविक झुकाव पवित्र है/
और यह उतना ही आग्रहपूर्ण है जितना कि मूत्र करने की प्रबल इच्छा/
जिसे अगर रोका जाये, तो दिमाग़ को दूषित कर  देती है/
और व्यक्ति तब तक शांत नहीं रह पाता
जब तक उसकी यह स्वाभाविक वृतियां मुक्ति नहीं पाती/



किलर इंस्टिंक्ट :

आप कहते है, महादूत, कि विश्वविद्यालयों के 
शीर्ष पद उन लोगों को दिए जाने चाहिए,
जो सब से निम्न पद के योग्य हैं/
आप शिक्षा प्रणाली का करना क्या चाहते हैं?
आपके मन में क्या चल रहा है ?

पृष्ट 70 

लस्टस :

ज्ञान ही तो मूल पाप है/
मेरी नज़र में यही सबसे बड़ा पाप है/
सर्वप्रथम, हम यह सुनिश्चित करेंगे कि आदर्शों पर रोक लगा दी जाएँ/
और केवल सौदेबाजी ही रहें/
अल्प  ज्ञान बहुत खतरनाक होता है 
आप सब यह जानते हो 
और ज्ञान जितना अधिक होगा, खतरा भी उतना ही अधिक होगा/


हम सुनिश्चित करेंगे कि सभी असाधारण दिमाग वाले लोग 
जोकि विज्ञान और तकनिकीकरण में 
सभी मानवीय सीमायें पार कर
देवताओं के राज्य में भटकते रहें,
ताकि, वे ईश्वर को चुनौती दें 
और, क्रोधित होकर,
ईश्वर उन्हें हमारी गोद में फ़ेंक दे/


हमारे विश्वविद्यालाय ज्ञान के दाहगृह होंगे/
हम सुनिश्चित करेंगे कि शीर्ष पर वे लोग रहें 
 जिनकी बुद्धि में कोई हिस्सेदारी नहीं है/
जो प्रकाश से वंचित हैं 
जो अंधकार फ़ैलाने में यकीन रखते हैं 
अन्धकार का मतलब रात नहीं 
न देखने की क्षमता अन्धकार है/
 और हम सुनिश्चित करेंगे कि 
यह संसार अपने सभी दैवीय प्रावधानों से वंचित हो जाये /



लस्टस  :

सेटन की क्या उपलब्धियां  रही/
और उसके क्या  ध्येय अधूरे रह गए,
जिनको पूरा करने का दायित्व आपने लिया है?

पृष्ट 71 

तुम्हे मेरे कार्य की पूर्व योजना की जानकारी चाहिए/
सेटन का युग अच्छा युग था ,
संसार पर धर्म का राज्य था/
धार्मिक लोगों को आमंत्रित किया जाता था 

राजाओं की गतिविधियों का अधीक्षण करने के लिए ,
और अधिकांश समय 
शासक उनकी बुद्धिमता की बातें मानते थे/

यह वह समय था जब संसार अधिकतर 
देवीय गुणों से निर्मित था ,
लोग प्रकृति प्रेमी थे 
ईश्वर में यकीन रखते थे, उस से डरते थे 
अपनी मिथ्या प्रवृतियों को सम्मोहित रखते थे 
और देवालयों में जाते थे उपासना के लिए /


पर हमारा समय उलटा है,
जबकि लोगों को ईश्वर में कोई आस्था ही नहीं। 
जिसका अप्रत्यक्ष अभिप्राय यह है कि वे हमारे जाल में उलझ गए हैं/
वे देवालयों में तो जाते है, परन्तु मात्र दिखावे के लिए/
वे विश्वविद्यालयों में जाते हैं, केवल नकली ज्ञान के लिए/
वे भले हैं, पर नाम मात्र के लिए /
उन्हें ईसा मसीह में कोई आस्था नहीं,
क्षमादान, दान- पुण्य , पाप स्वीकरोक्ति ,
यह सब फैशन में परिवर्तित हो गए हैं/


यह एक क्रूर संसार है, अथक महत्वाकांक्षा का/
धर्म को तो नकेल डाल दी गयी है 
चतुर राजनेताओं द्वारा/
नेकी, सुविचार, आदर्श /
अब इन सब की तो कोई प्रासंगिकता ही नहीं रही /
यह तो सभी को मुफ़्त में मिलते हैं/
एक बार विप्लव का सामना करना पड़ा था /


पृष्ठ ७२


मिल्टन के 'पैराडाइस लॉस्ट ' में 
अब यही विप्लव संसार की संसद में आकर बस गया है/
जहाँ लोग मतदान तो करते हैं, पर कोई उच्च विचार नहीं दे सकते/
प्रचार करता 

हमने पूरे संसार में अपने साम्राज्य फैला दिया है/
अब हम 
आगे बढ़ रहे हैं प्रकृति को आध्यमिकता -विहीन करने के लिए/
और जानवरों  के संसार के ओर /


(प्रेस कांफ्रेंस समाप्ति )


किलर इंस्टिंक्ट का एक संवाददाता, जिसे की राजकीय कोष से मानदेय मिलता है और वह दानव की योजनाओं का प्रचार करता है , दुनिया  को जानकारी दे रहा है, इन योजनाओं के बारे में :

महामान्य , नरकवास के स्वामी 
महान लस्टस /
चाहते हैं प्राथमिकता के आधार पर नर्क को पुनर्जीवित करना /
संसार से सारी अच्छाइयाँ ख़त्म कर दी जाएंगी,
और मानव बुराई को ही एकमात्र उपलब्ध अच्छाई के रूप में जानेगा/
यह ईश्वर के लिए एक कठिन परिदृश्य होगा/
हमारे अनुमान के अनुसार, ईश्वर अत्यंत कमज़ोर विकेट पर है 
शीघ्र ही हम जवाबी हमले का आयोजन करेंगे/
और ईश्वर के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन करेंगे/


दैवीय वाणी :

क्या देवगण बिल्कुल अनभिज्ञ थे 
कि दानवों के राज्य में क्या गतिविधियाँ चल रही थी?
क्या उन्होंने स्वंय ही निरीह लोगों को 
बाध्य नहीं किया था 
दानव की गोद में जाने के लिए/
क्या यह देवताओं की ही एक अभूतपूर्व योजना नहीं थी ?
सेटन और उसके रिश्तेदार लस्टस को 
पूरी ढील देने की 

 

और अंत में जल्लाद का फंदा खींचने की?
और उस सब को अक्षम करने की 
और इस तरह से उनके पतन के योजना बनाने की/
पर, यह सच भी ही तो , कोई इस पर यकीन नहीं करेगा/
जो कुछ भी दिखाई दे रहा था. 
यह चिंताजनक और निराशाजनक था/





 

 लस्टस : सर्ग 8 

जवाबी विस्फ़ोट 

स्थान: स्वर्ग 
ईश्वर अपने सिंहासन पर विराजमान है/


किलर  इंस्टिंक्ट: 

महास्वामी ,आपको पता ही है कि 
नर्क में क्या घटित हो रहा है/
कैसे लस्टस ने सत्ता संभल ली है 
और किस तरह से पूर्ण रूप से तैयारी कर ली गयी है
दानवो की सैन्य शक्ति के द्वारा 
आप क्या कहना चाहेंगे?
आप धरती पर अपने दुर्गों की रक्षा  कैसे करेंगे?
आपकी धरती को तो  गंभीर खतरा है/
ऐसा ही आपके वायु-मंडल को /
आपका आकाश भी अब पहले जैसा पवित्र नहीं है 
उन्हें पूछो की क्या कल बारिश  होगी। 
तुरंत उत्तर मिलता है,नहीं, हिमपात होगा/


विज्ञान ने उन सब रहस्यों का पर्दाफाश कर  दिया है 
जोकि धर्मात्मा दिग्गज़ अपने दिल में छुपाये रखते थे/

रामायण और भगवान कृष्ण के समय में 
ऐसा माना जाता है कि भगवान अपने योद्धाओं को 
आशीर्वाद स्वरूप, कुछ वरदान देते थे ,
कभी यह वरदान सूर्य देवता द्वारा दिए जाते थे 
कभी गंगा माँ के द्वारा,
ऐसी थी उनकी शक्ति और ऐसा था इनका आतंक,
जिसके फस्वरूप, भीष्म जैसा योद्धा तब तक जी पाया
जब तक उसने प्राण त्यागने की इच्छा प्रकट नहीं की/

 
अब साधारण इंसान के साथ भी ऐसी घटनाएं हो रही हैं ,
शरीर के अंगों का प्रत्यारोपण हो रहा है,
और, मनुष्य न भी रहें,
उनके मस्तिष्क हमेशा के लिए रह सकते हैं/
महास्वामी ,यह आपके लिए बहुत बड़ी चुनौती है/
ऐसा प्रतीत होता है कि आज जिसने 
'पैराडाइस लॉस्ट' लिखा है, वह मिल्टन यदि 
उसी महाकाव्य का दोबारा नामकरण 'सेटन' कर दे/
हमने देखा है कि दानव की नागरिक सेना ने 
अपनने  धार्मिक ग्रन्थ 'डेलिसिआ 'का प्रमोचन किया है/
आप इस बारे में क्या कहना चाहेंगे?


ईश्वर बोलने की चेष्टा करते हैं , परन्तु चित्रगुप्त माइक पकड़ लेते हैं/


चित्रगुप्त:


मैं ईश्वर के जन- संपर्क विभाग का प्रमुख हूँ/
कृपया आप अपने सभी प्रश्न मुझे सम्बोधित करें/


किलर  इंस्टिंक्ट :

ठीक है, उत्तर देने के लिए आपका स्वागत है/


चित्रगुप्त :


मैंने लस्टस की प्रेस कांफ्रेंस सुनी है,
और अति-आत्म विश्वास में वह जो कुछ कह रहा है, वह भी सुना है/
सेटन को ज्ञान था उन वज्रपातों के बारे में, जो ईश्वर के पास थे 
और कैसे उसे आग की झील में फ़ेंक दिया गया था 
विद्रोही स्वर्गदूतों के समूह के साथ/


आग तो एक छोटी चिंगारी सरीखी होती है 
जोकि मौन वनों के हृदय में निवास करती है/
दैवीय वृति भी एक अलौकिक चिंगारी सम होती है
जोकि हर प्राणी के केंद्र में निहित है/


 
यहाँ तक कि यह लस्टस के ह्रदय में भी बसती है,
और उन सबके भी, जो उसके संग हैं/ 
सम्पूर्ण धरती के आर- पार, अरबों की  संख्या में लोग,
जिन के बारे में उस का दावा है कि वे उसके साथ  गए हैं 
उनमें  पहले भी यह आग थी और अब भी वही दैवीय चिंगारी है/
और यह मोटी त्वचा की बहुत सी परतों के कारण है,
जिन्हे उन्होंने उस चिंगारी के ऊपर लपेट रखा है 
ताकि यह नीचे दबी रहे 
और दानवों में इतनी गहरी गाड़ दी गयी  है 
कि उसके लपट के रूप में उठने की कोई आशा नहीं 
और जो इसके ऊपर ढेर लगा दिए गए हैं/
 उस मलबे से बाहर निकलने की भी नहीं /


हमें चिंता सत्ता रही कि अधिकाधिक लोग
गंदगी के ढेर में बदलते जा रहें है,
फिर भी हमें विश्वास है कि 
दैवीय चिंगारी अभी भी उनमें निहित है 
और वह दिन दूर नहीं जब 
यह गन्दा पैक, पूरी तरह से विघटित हो जायेगा/
और उन आत्माओं की झिलमिलाती आवाज़ फिर से  गुँजायमान होगी/


हम जैकबूटों की कदमताल की गर्जना भरी आवाज़ें सुन रहे हैं 
पूर्व और पश्चिम सब ओर से 
और धार्मिक क्रोधी व्यक्तियों की आवाज़ें 
जो दैवीय शब्दावली का प्रयोग करते हुए
बेचारी जनता को गुमराह कर रहे हैं/
हम देख रहे हैं कि धार्मिक स्थल 
राजनीति और यौन दुराचार केअड्डे बन गए हैं/ 
हम जानते हैं कि हमारे योग्यतम व्यक्ति
 विश्वविद्यालयों से सेवामुक्त हो चुके हैं/
और पाठशालाओं का संचालन
 राजनेताओं और उद्योपतियों द्वारा किया जाता है 
हम जानते हैं कि बहुत अधिक दूषित पानी 
पवित्र गंगा नदी में बह गया है/
और यहाँ तक कि , संत भी दानवों की तरह 
आग उगलना बंद नहीं कर रहे/


हम जानते हैं कि सेटन को हमारी शक्तियों के बारे में पता था,
जोकि लस्टस की जानकारी में नहीं हैं 
और उसने ईश्वरीय लोगों को एक कठिन परिस्थिति में डाल दिया है/ 
इस कारण, हमें बहुत सोच समझ कर निर्णय लेना पड़ेगा 
और लस्टस  को समूल नष्ट करने के लिए युद्ध की घोषणा करनी पड़ेगी, 
जोकि सब से ज़्यादा अपवित्र कीट है/


किलर  इंस्टिंक्ट :


क्या आप सोचते हैं कि आप 
दानवों के इस धावे के विरुद्ध युद्ध कर पायेंगे/
हो सकता हैं आपको  भगवान कृष्ण को दोबारा भेजना पड़े 
दानवों को युद्ध में परास्त करने के लिए/
या कि  फिर मान लें कि यह दुनिया तो आपके हाथ से गयी /
आप मानव प्रजाति को कैसे बचा पाएंगे?


यह  ईसा मसीह के बाद का युग है/
बाइबल के होते हुए भी ,
यह इसके दूसरे भाग ' नवविधान ' की ओर मुड़ गया है/
और अब शेष कुछ भी नहीं रहा 
सिवाय पवित्र शब्दों के /

सब से नेक मनुष्यों के आचरण पर भी प्रश्न उठाये जा रहे हैं/
जो सब से उत्तम बिंदुओं 
राजनीति, धर्म और शिक्षा पर नियंत्रण रखते हैं/
अब लोग किस के प्रति अपनी आस्था रखें /
नशीले पदार्थों में ? जिसके अँधेरे में तो वे पहले ही रास्ता टटोल रहे हैं/



 चित्रगुप्त :


सारा परिदृश्य बदतर के लिए बदल गया है/
दानवों की  शक्ति में वृद्धि हो रही है,
और वे सारे संसार को बंदी बना रहे हैं/
उन्होंने सब ओर घेराबंदी कर  दी है/
प्रत्येक संस्था पर लस्टस का जादू चल गया है/
लोग चिल्लाते है, धर्म, धर्म 
मन से, धर्म जा चुका है/
एक नकली रोना, वो भी बढ़ा चढ़ा कर/
चाहे कितना भी गर्म माहौल हो, 
प्रकाश की सेनायें हार नहीं मानने वाली /

एक क्रांति आ कर ही रहेगी/
कोई और महापुरुष प्रकट होगा 
ईसा बहुत नम्र और विनम्र थे,
उनके बलिदान का असर पड़ा /

परन्तु लस्टस के उत्थान के बाद 
सारी बातें गायब हो गयी 
सात पापों के और नर्क के बारे में 

परन्तु अब हमें भगवान कृष्ण सरीखे 
 किसी अवतरण की आवश्यकता महसूस हो रही है 
जोकि इनका सांस लेना दूभर कर दे 
और इन दानवों के प्राण हर ले/
आज कल में ही ,आप देखेंगे 
कि लस्टस का यही अंत होगा/


(प्रेस कॉन्फ्रेंस समाप्ति )

दैवीय वाणी :

पैग़म्बर आते है, पैग़म्बर जाते हैं 
अपने पीछे अँधेरे की चादर को और सघन छोड़ जाते हैं/





 लस्टस : सर्ग  9 

निकट भविष्य में युद्ध 


एक घोषणा :

अरे! सभी गणतंत्रवादी  केओस पहुंच जाओ/
एक घंटे  के बाद पेंडीमोनियम में सत्र शुरू हो जाएगा/
दानवों की संसद, पेंडीमोनियम, एक गोल हॉल जैसी लगती है, जिसमें उच्च गुणवत्ता वाली कुर्सियां,, ए. सी. , वाई फाई और एक बड़ा स्क्रीन लगे हैं/

एक आवाज़ :

तबाही के अधिपति , महान लस्टस पधारने वाले हैं/
सब खड़े हो जाते हैं और लस्टस केन्द्रीय मेज़  की ओर जाता है और अपना आसान ग्रहण करता है/ उसके दोनों और उसके राज्य के सचिव बैठे हैं /
हाल में लाखों पंखधारी जीव बैठे थे ,
जोकि इतना बड़ा था जितना कि भारत और अफ़ग़ान के बीच की दूरी जितना क्षेत्र /


 क्वारंटाइन :  ( महाराधिराज का विशेष सचिव)

मित्रों, साथियों और महान ज्वलंत आत्माओ,
आज हमें ख़बर मिली है कि  
देवगण बहुत निराश हैं/
और उन्होंने इस सारे मुद्दे पर 
बहुत गंभीरता से सोचा है/
और वे योजना बना रहे हैं कि 
किसी महान आत्मा को धरती पर भेजें /

और आप अच्छी तरह से जानते हैं, क्यों. 
इस से पता चलता है कि वे कितने मायूस हैं/
वे कितना घिरा हुआ महसूस कर रहें हैं/
सर्वप्रथम, मुझे आपको बधाई देने दो /
आपने नदियों का रुख़ बदल दिया है 
मानवता दिशाहीन हो चुकी है/
कवि , गायक और दार्शनिक 
महसूस करते हैं जैसे कि वे अप्रासंगिक हैं/ 
ऐसा युद्ध पहले न कभी लड़ा गया था, न जीता गया था,
जिसमें शरीर आत्मा को भीतर से नष्ट कर  देता है/
अब मैं, आदरपूर्वक,
महान लस्टस को आमंत्रित करता हूँ , आपको संबोधित करने के लिए/


लस्टस :

शैतानो , सेनापतियो, उच्च अधिकारियो,  बदला लेने वालो, रक्षको , दावेदारो, छापा मारनेवालो और 
छद्मवेशियो राजनीतिज्ञो, अध्यापको, वकीलों षडयंत्रकारियो , मिलावटखोरो,  कॉरपोरेट मित्रो साथियो और अन्धकार प्रेमियो 
क्वारंटाइन ने सही कहा है 
ईश्वर इस समय गहन चिकित्सा इकाई में है 
और उसका संसार लगभग मर चुका है/
तुमने उस प्रकाश  पर अन्धकार के परदे  डाल दिए हैं 
जो स्वर्ग से उत्पन्न होता है/
मनुष्य अब मुसीबत के समय,
ईश्वर को या उसके ऊतकों को याद नहीं करते 
पर हमें पुकारते हैं उनकी समस्याएं हल करने के लिए/
मैं एक बात पर आपका ध्यान पुनः केंद्रित करना चाहता हूँ
तुम्ही सब से मूल धारक हो 
इस संसार के सभी अधिकारों के 
सब से पहले, एक शून्य के अलावा कुछ भी नहीं था/
अन्धकार के अलावा कुछ भी नहीं था/
और यही अँधेरा प्रकाश का उत्पति स्त्रोत है/

केवल हम में ही अन्धकार देखने की शक्ति है 
जबकि देवगण और उनके मनुष्य,
प्रकाश की उपस्थिति में भी कुछ नहीं देख पाते/
ईसा ने उन्हें कहा कि मदद मांगो,
पर उसने उन्हें यह नहीं बताया कि जब वे,
ऊपर की ओर देखते हुए चलेंगे,
सम्भवतः वे बुराई से टकरा कर अपना संतुलन खो देंगे,
जो लोगों की नज़र से बच कर  रहती है 
परन्तु एक साँप की तरह कुन्डली मारे रहती है 
और मनुष्य के दिमाग को वास्तव में अव्यवस्थित कर देती है/


वह प्रकाश -पुँज जो देवदूतों के पास है 
और जिसे वे लोगो में बिखेरते हैं,
जिनके दिमाग तो टिमटिमाते ही रहते हैं 
मृत्यु के क्षण तक भयग्रस्त और प्रार्थनारत रहते हैं/
वे हमारी इस शक्ति से अनभिज्ञ हैं  
कि हम तो एक ही फूँक से इसे बुझा सकते हैं/

दुनिया में जितनी भी शमाएँ हैं, जितने भी लैम्प हैं 
उन सब में एक अंतर्निर्मित अदृढ़ता है;
वे लड़खड़ा जाते हैं,
जब उनका सामना गहरे रहस्यों से होता है/

आप जागते हैं 
और दोबारा सो जाते हैं
लहरों की और कोई मंज़िल नहीं होती 
सागर के अलावा/

कौन हमेशा के लिए चमकता रह सकता है?
कौन इतना शूरवीर है?
जीवन, प्रकाश की तरह ही, वापिस धकेल दिया जाता है    
कब्र के अँधेरे की ओर /

इसलिए, आप जो इस महान साम्रज्य के गौरान्वित उत्तराधिकारी हैं 
जिनका सूर्य कभी अस्त नहीं होता 
याद रखना, ईसा आएँगे और जाएंगे,
परन्तु तुम अपनी चमक को बनाये रखोगे/


वे सोचते हैं 
कि ईसा बहुत निर्बल थे 
हमारी गर्म सांसों को झेलने के लिए/
इसलिए, प्रभु योजना बना रहे हैं कि 
धरती को सुरक्षित रखने के लिए 
भगवान कृष्ण या उनके जैसा ही कोई भेजें/

तुम्हे, चिंतित होने की आवश्यकता नहीं ,
डरने जैसी कोई बात नहीं /
दुर्योधन ! कहाँ हो तुम ?
अपनी उपस्थिति बताओ और अपने निन्यानवे भाइयों की भी/
तुम सोचते हो कि तुम महाभारत में पराजित हुए/
भगवान कृष्ण के कारण। 
बिलकुल नहीं /

तुम इसलिए हारे क्योंकि कर्ण पांडवों का जवाबी विस्फोट नहीं था/
तुम्हे अपने दिमाग से काम लेना चाहिए था 
जिसे कि तुमने अपने मामा शकुनि को रहन रख  दिया था/
जिसके निजी स्वार्थ थे 
और उसने अपनी लड़ाई तुम्हारे कन्धों पर लाद दी , छिपे तौर पर/

फिर भी, तुम्हें एक अवसर और मिल सकता है 
कृष्ण का  सामना  करने के लिए/
इस बार अच्छे से तैय्यारी करना/
यहाँ, हमारे पास अधिक अनुभवी योद्धा हैं/
मुझे संदेह है कि देवता कृष्ण को दोबारा चुनेंगे/
क्योंकि कृष्ण ने बहुत हत्याएं की,
फिर भी दानव  तो अभी भी फलफूल रहें हैं/
हमारे अस्तित्व को कोई ख़तरा नहीं है/
क्योंकि हम अदृश्य हैं/
हम अमूर्त हैं/
हम आभासी वास्तविकता हैं/
हम लोगों के दिलों में बसते हैं /
हम उनके विश्वास में जीते हैं/
हम अमर हैं/  
निडर /
और उतने ही शाश्वत 
और चिरस्थायी  जितना कि भगवान/

(लस्टस मंच से नीचे आ जाता है/)


दैवीय वाणी :

भगवान उनके गर्व के अभिकथन सुन रहे हैं/
और उनके स्वयं -निर्मित संसार में
उन्हें  इस विश्वास की घुड़सवारी करने दे रहें है/
कौन जानता  है 
कि आज का सूर्य किस प्रतिशोध के साथ उदित होगा/
वही सूर्य जो कल कोमलता से अस्त हो गया था/
 


 लस्टस :   सर्ग १० 

ब्रम्हांड में भूकम्प 

ब्रह्मा इंद्र और विष्णु से विचार विमर्श कर रहे हैं/


ब्रह्मा :

संसार में एक विचित्र स्थिति उत्पन्न हो रही है/

हमें ऐसी प्रतिध्वनियो की अनुभूति हो रही है 

जैसे कि युद्ध की पूर्व सूचना हो/

दानव दोबारा अपना सिर उठा रहे हैं,

और एक के बाद एक चुनौतियां दिए जा रहे हैं/

लस्टस सिँहासनासीन हो चुका है /

और उसने  दृढ़तापूर्वक दावा किया है

कि सम्पूर्ण धरती उसके क़ानूनी अधिकार- क्षेत्र में है/


विष्णु, जाइये और तथ्यों की पुष्टि कीजिये/

और वापिस आकर स्थिति से अवगत करवाएं /

यह एक खतरनाक विस्तार है/ 


विष्णु :

क्या मैं इंद्र को साथ ले जा सकता हूँ ?


ब्रह्मा :

इंद्र ,आप विष्णु के साथ जाईये/

मुझे स्थिति का सही जायज़ा मिलना चाहिए/


(रास्ते में उन्हें नारद मिलते हैं/) 


नारद:

तो, आप धरती की ओर बढ़ रहे हैं/ 

आपको पासपोर्ट लेना पड़ेगा /


विष्णु :

पासपोर्ट? हमारी जाँच कौन करेगा?


नारद :

यह देखिये/ मैं पासपोर्ट-धारी हूँ. 

आपको प्रवेश द्वार पर ही रोक दिया जायेगा/

अब संसार की घेराबंदी हो चुकी है/


विष्णु :

नारद, अगर ऐसा बदलाव आ चुका है 

आपने मुझे अभी तक सूचित क्यों नहीं किया?

क्या दानव इतने अभिमानी, 

इतने गर्वीले और इतने मूर्ख  हो सकते हैं  

कि देवदूतों की शक्ति को ललकारें/

क्या वे दुर्गा को भूल चुके हैं ?

क्या वे भूल चुके हैं *शुंम्भ  और *निशुम्भ को 

कहाँ पहुंचा दिया गया था/


नारद :

आपको ज्ञात है बुराई में 

जीवित रहने की प्रबल  भावना होती है/

यह कभी मरती नहीं/

यह केवल अपने रूप बदलती रहती है/

मैंने  वहां दुर्योधन को देखा है/

मैंने *शुंम्भ और *निशुम्भ को भी देखा है 

पेंडीमोनियम में गरजते हुए /


देवराज इंद्र , क्या आप यकीन करेंगे 

*महिषासुर लौट आया है आप से लड़ने के लिए/

* रक्तबीज भी वहीँ पर है/



* शुंम्भ, निशुम्भ, महिषासुर और रक्तबीज पौराणिक कथाओं में दानव 


आपके पास कोई भी नहीं है, इन राक्षसों का सामना करने के लिए/

यह बेहतर विकल्प होगा यदि आप दुर्गा को ही भेजें 

एक बार फिर से  /


वे धरती की बाहरी सीमा  पहुँच जाते हैं/और देखते हैं कि सीमा रेखा पर अंधकार  के साम्राज्य के रक्षक योद्धा  तैनात है/ उन्हें पता चलता हैं कि यहाँ तक हवाई-मार्ग अवरुद्ध हैं/ 

अब वे केवल दूर से ही संसार की झलक देख सकते थे. यह रात में जगमगा रहा था /


विष्णु :

(इंद्र, मुझे अपनी दूरबीन दो/)

confirm 

विष्णु:

मुझे एक जुलूस दिखाई दे रहा है /

लोगों ने गणेश की मूर्ति उठायी हुई  है /

वे उसे नदी तक ले कर जाते है 

और जल में विसर्जित कर देते है/

और उसके तुरन्त  बाद ,

कुछ लोग धड़ पर झपटते है 

इसे तोड़ देते है और मोती ले कर चल् देते हैं/


बहुत से ऐसे धार्मिक जुलूस होते हैं

जिन में विभिन्न नारे लगाए जाते है/

और लोग एक दुसरे से धक्का-मुक्की करते हैं 

लड़ाई करते हैं/

हत्याएं, दंगे,  रक्तस्नान 

धर्म के नाम पर/


इंद्र:

देखो तो,  यह क्या है वहां?


विष्णु:  

वहां बहुत से झंडे हैं 

और एक नेता 



और बहुत से लोग उसका भाषण सुनने आये हैं/


इंद्र :

नेता! क्या वहां कोई चुनाव है?


विष्णु :

यह विचित्र लग रहा है/

उनकी कल्पना शीलता पर 

लस्टस कैसे अपनी शक्ति का प्रयोग कर  रहा है?

जस्टिस की जगह वे *लस्टिस की बातें कर रहे हैं/

जस्टिफिकेशन की बजाय, वे लस्टिफिकेशन की बात कर  रहे हैं 

और वे *लस्टिट्यूशन के प्रति अपनी निष्ठा दर्शा रहे हैं/   


(भौंचकित हो कर, वे ब्रह्मा के पास लौट आते हैं)


विष्णु: 

स्थिति वास्तव में बुरी है, देवराज ब्रह्मा 

हमारे पास 'टेली शॉटस' (वीडियो) हैं  

कि दानव धरती पर किस तरह काम कर रहे हैं 

जहाँ हमारे प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया था /

यह रही  एक 'पेन ड्राइव '

आप  इसे फुर्सत से देखिये/

पर जितने जल्दी सम्भव हो, देख लीजिये/

ऐसा प्रतीत होता है, स्थिति हाथ से निकली जा रही है/


(अगले दिन)

  ब्रह्मा(विष्णु से)

विष्णु, मैंने 'पेन ड्राइव' देख ली है/

इंद्र को भी बुलाइये ,

धरती पर जो पूरी स्थिति चल रही है 

हमें उसका पूरा लेखा जोखा रखना होगा/

एक निर्णायक युद्ध का वक़्त आ गया लगता है/


(इंद्र भी उनके साथ शामिल हो जाता है/)


आओ सब प्रभु के पास चले और जा कर सारी  ख़बर दें/

यह एक बहुत गंभीर मुद्दा है/


(वे प्रभु  के समक्ष उपस्थित होते हैं.)


प्रभु:  

क्या आप फिर से दानवों को ठिकाने लगाने में असमर्थ रहे हैं 

ब्रह्मा?

मैं गुरु नानक और नौ गुरुओं को भेजा 

जिन की गुरबाणी अभी तक गूँज रही है 

पूरे ब्रह्माण्ड में / 

अनगिनत लोग उनका पाठ करते हैं/

और धन्य महसूस करते हैं/


मैंने ओशो को भेजा,  मैंने बुद्ध को भेजा /

मैंने महावीर को भेजा, मैंने विवेकानंद को भेजा/

ऐसा नहीं कि हमने प्रयास नहीं किये/

वो आग जो दानवों ने भड़कायी  है 

दफ़न होने से  इंकार कर रही  है/


मैं लस्टस  की प्रेस कांफ्रेंस  देख रहा था/

वह तो हर हद से गुज़र रहा है/

बुराई तो अच्छाई का ज़ोरदार खंडन है/ 

दोनों खतरनाक संतुलन के कग़ार पर हैं/

इसके बावजूद , यदि बुराई  मैदान पर कब्ज़ा करने की कोशिश करती  है

जोकि अच्छाई की धरोहर है,

असंतुलन हो कर ही रहेगा,

और सारी धरती हिल सकती है/

और नीचे भी भूकंप आ सकते 

और यहाँ ब्रह्माण्ड में भी। 



लस्टस को एक चुनौती भेजो कि 

वह अपने तौर तरीके सुधार ले/

यदि वह ऐसा नहीं  करता, तब 

वह  विनाश  को आमंत्रित कर  रहा है /



(प्रभु आराम करने चले जाते हैं)

लस्टस को प्रभु की चेतावनी मिल जाती है/


(धरती के किसी भाग में

एक गायक काले कपड़ों  में प्रकट होता है/

वह विलियम वर्ड्सवर्थ से  मिलता है/

विलियम वर्ड्सवर्थ शोकाकुल है)


गायक :

आप रो क्यों रहे हैं विलियम वर्ड्सवर्थ? 


विलियम वर्ड्सवर्थ :

लूसी ग्रे की मृत्यु हो चुकी है/
गायक:

उसकी मृत्यु तो आपके जीवन काल में ही हो गयी थी/

आपने लिखा था कि 

वह धरती के दैनिक चक्र का भाग बन चुकी है 

अब क्या मसला है?


विलियम वर्ड्सवर्थ :

उसका उत्तर भारत में पुनर्जन्म हुआ था 

चरवाहों के एक परिवार में 

मेरी लूसी ग्रे ,

उसका अपहरण किया गया और 

सामूहिक बलात्कार किया गया/

और उसके बाद, उसे मार दिया गया/


और उसने एक समाचारपत्र की कटिंग दिखाई

जिसमें  लिखा था कि उच्च -वर्गीय  लोगों ने 

उस नन्ही मासूम का अपहरण किया 

सामूहिक बलात्कार किया और उसके बाद 

उसका क़त्ल कर  दिया/


(गायक को  सांस लेना दूभर हो जाता है/

वह बेहोश हो  कर वर्ड्सवर्थ की बाँहों में  गिर जाता है/)


दैवीय  वाणी :

देवदूतों आओ! अब समय आ गया है  

चिंतित होने का/

प्रतीत होता है कि तुम्हारे लोग 

पथभृष्ट हो चुके है और बहुत निराश हैं/


कहाँ गयी आपकी शक्ति ?  

कहाँ  गया आपका ख़ौफ़ ?

अब  राजा की सुनता ही कौन है ?

क्या आप अभी भी इसे साम्राज्य कहते हैं?


 



लस्टस :  सर्ग  11 

महायुद्ध 

(लस्टस युद्ध कक्ष में )

किल्लर इंस्टिंक्ट : 

युद्ध छिड़ चुका है/
प्रभु ने धरती और आकाश को हिला कर रख दिया है 
भूकम्प और वज्रपात के द्वारा /
देवता अपने रथों पर सवार हो कर 
धरती और आकाश में  विचर रहें है/

और अपने पवित्र शस्त्रों के द्वारा 
दानव के किलों को विंध्वस करने की कोशिश कर रहे हैं/
नदियों को निर्देश दे दिए गए हैं कि 
वे अपनी सीमायें लांघ कर तटों से बाहर बहें 
और शहर की गलियों में बाढ़ ले आएं,
जहाँ दानवों का नृत्य पूरे जोर- शोर से चल रहा है ,
वेश्यालयों में और डांस बार में,
और अपराध सरगना महानगरीय क्षेत्रों में /


आकाशवाणी :  

(एक रेडियो चैनल )

वृहद स्तर पर सैन्य आंदोलन चल रहा है 
एक महायुद्ध लड़ा जा रहा है/
प्रभु ने सभी देवदूतों को निर्देश दिए हैं कि 
वे अच्छाई की सेनाओं का नेतृत्व करें 
और राजनीतिज्ञों पर हमले करें 
उनके फार्म हाउस पर जा कर  
और अध्यापकों पर उनके विश्वविद्यालयों में जा कर 
और पूरी दुनिया में जितने भी धर्म गुरु हैं
जो दानवों के आक्रोश की अगुवाई रहे हैं 
देवताओ के विरुद्ध , उन पर भी हमले करें/



किल्लर इंस्टिंक्ट:



देवता अपनी अलौकिक शक्तियों का प्रयोग कर रहे हैं/
उनके जितने भी ब्रह्मास्त्र हैं, उन से दानवों की अग्नि-शक्ति का 
सामना करने में कठिनाई आ रही है ,
क्योंकि दानवों के पास ब्रह्मा-विरोधी मिसाइल्स हैं/
उन्होंने हर व्यक्तिगत देवता पर निशाना साधा है 
और सैकड़ों की  संख्या में उन्हें पराजित किया है/

ईश्वरीय श्रेणियों में भयंकर उथल पुथल मची है/
दानवों ने बहुत से देवदूतों का अपहरण कर  लिया है 
जो कि ईश्वर की ओर से लड़ रहे थे 
और दोनों ओर के लोग असामान्य रूप से स्पष्ट दावे कर रहे हैं/


ईश्वर :

जब हम शान्ति से सो रहे थे 
ये लोग अग्नि शक्ति जुटाने में लगे थे 
हमारे आदमी तो बहुत नेक और विनम्र हैं/
और इन दानवों से युद्ध नहीं कर सकते /
हम तो अनुनय में यकीन रखते हैं,
हम प्यार और करुणा ,
क्षमादान और दान पुण्य में यकीन रखते हैं/
परन्तु , वे तो हमारे इन दयालुता पूर्ण तरीकों से अलग हैं 
कितनी  निंदनीय बात है! वे बाइबिल का अपमान करते हैं /
उन्होंने तो ईसा के सुविचारों  का मज़ाक बना कर  रख दिया है/
इतने में भी, उनकी अधर्मता का अंत नहीं होता/
इन मूर्खों ने हमारे संतों को आक्रमण का निशाना बना दिया है/
यह असहनीय है /
उन्हों सपूर्ण दैवीय मसलों से हाथ झाड़ लिए है/
और इन में से अधिकांश तो अपराधों  के कारण जेल जा चुके हैं/
मैं इतना विवरण नहीं  दे सकता/
उन्होंने सामान्य लोगों की कल्पना शक्ति को दबोच लिया है 
यह इतनी बड़ी बात नहीं,
पर संतों के विघटन के लिए जो उनका सूक्ष्म कार्य है,           
वास्तव में, बहुत भयानक  प्रतीत होता है 
हमारे साम्रज्य के लिए /


सब कुछ समाप्त हो गया है,
केवल सफ़ेद परिधान और धार्मिक प्रतीक बचे हैं/
अरे पक्षियो, अरे जानवरो, अरे हवाओ,अरे जल,
सब सतर्क रहो !
लस्टस तुम सब को तुम्हारी दैवीय धरा से हटाना चाहता है/
तुम्हारी दिव्यता, तुम्हारी शांति, तुम्हारी ख़ुशी 
तुम्हारी संपदा 
सभी दाव  पर लगे हैं/


उसकी वहशी शेखियाँ मत सुनो ,
ज्ञान तो तुम्हारा पक्का दुश्मन है 
मेरे प्यारो, खुश रहो !
मैं मनुष्यों को सेटन की राह पर जाने से नहीं रोक पाया /
अब लस्टस आ चुका है बुराई के निगमित के रूप में /
उसने अपने आदमियों को कॉलेज और विश्वविद्यालयों ,
कार्यालयों और सैनिक पदों पर लगा दिया है/
हमारे आदमी जिन पर हम यकीन करते थे,
दल बदल चुके हैं और दुश्मन के साथ शामिल हो गए हैं/



परन्तु, हमें लड़ना तो होगा ही/
कृष्ण ने उन लाखो लोगों को मौत के घाट उतार दिया 
जो कौरवों की ग़लत नीतियों का समर्थन करते थे /
अपनी इस  प्यारी धरती की छाती पर 
मैं  खून की नदियाँ देख कर दुखी हूँ!!!




चित्रगुप्त :

पिताश्री , हम इस युद्ध में पराजित हो जायेंगे 
यदि हम ऐसी नकरात्मक सोच रखेंगे/
लस्ट्स तो सेटन से भी दुगुना घातक प्राणी है/
उसने पूरे संसार की मानव सम्पदा पर 
कब्ज़ा कर  लिया है/
उसकी युद्ध की लाइनों की सारणी तो देखो 
 

राजनीतिज्ञ, शिक्षक, प्रचारक, विद्यार्थी 
सभी तो हमारा सामना करने के लिए खड़े हैं 


घरों में , भी 
कोई भी अब हमारा नाम नहीं लेता /

कोई भी सात्विक गुण विकसित करना नहीं चाहता/
हमारे संत, जिनके बारे में हम सोचते हैं कि 
उन्होंने मानवता को मोक्ष की राह दिखाई 
अब वे, किसी के भी नायक नहीं है/
लोग केवल ईसा की प्रतिमा के आगे नतमस्तक होते हैं /
यह पादरियों के लिए एक व्यवसाय है,
और रविवार को चर्च में आराधना 
अब एक धार्मिक रिवाज़ के अलावा कुछ नहीं /


बाकी  के दिनों में तो सब  हमेशा जैसे व्यस्त रहते हैं//
किसी को भी ईसा मसीह, 
दान-पुण्य, क्षमादान और आप की भी परवाह नहीं /
हम सोचते थे कि यह सारी सैन्य -शक्ति  हमारी है 
यह दल बदल गए हैं  और 
दानवों से जा मिले हैं/
वे उन्हें पेश करते है रोमांच, ख़ुशी, धन और कामुक आनंद,
हम उन्हें इन सब से वंचित रखते है /
सूखी अच्छाई का कोई ख़रीददार नहीं /


राँझा 


अरे हीर! किसने तुम्हे मार डाला ?
क्या अब मैं जीवित बचूंगा?


तुम्हारा निर्जीव शरीर 
मेरी आँखों के सामने है 
क्या तुम्हारे भाग्य में यहीं बदा था 
कि प्यार का ज़ायका लेने के लिए 
और यह दुल्हन का रूप पाने के लिए 
अपनी जान देनी पड़े ?
हे, देवो! 


क्या तुम्हारे सम्बन्धियों का दानवों से कोई नाता है ?
क्या माता-पिता को कुछ भी नज़र नहीं आता है /?
जब कन्याओं का विवाह होता है।
वे चिल्लाती है और रो रो कर आसमान  सिर पर उठा लेती हैं/


यह मूर्ख  माता पिता सोचते है 
उनकी बेटियां इस लिए रो रही हैं कि वे विदा हो रही हैं
अपने पैतृक घर को छोड़ के जा रही हैं/ 
हीर, यह दहेज़ तो एक घूंस है 
तुम्हारे आँसुओं को शांत करने के लिए ,

ताकि तुम्हारे जैसी लाखों 
जिनका विवाह जबरन कर  दिया जाता है 
इन टुकड़ो पर पलती रहें/
प्यार की  एक तुच्छ भरपाई 
जिस से कि उन्हें वंचित किया जा रहा है 
और उनकी ज़िंदगी से जिसे घटा दिया गया है/


वे रोती - सुबकती हैं 
क्योंकि, अरे माता पिता, उनके जीवन संगी तुम चुनते हो/
तुम निर्णय लेते हो, किसके पास अधिक ज़मीन जायदाद है 
अधिक धन है 
और जहाँ तुम्हारी बेटी को पूरी ज़िंदगी 
भरपेट खाने को मिलता रहे/
आह! तुम सोचते हो कि 
भरपूर खाना मिलना ही ज़िंदगी का एकमात्र काम है?


मुझे समझाओ, हे मेरे रब!
तुम्हारे बेटे ने प्यार का प्रचार किया/
तुम्हारे राजदूत प्यार का प्रचार करते है/
परिवार में प्यार कहाँ है/
इस श्रापित देश के किसी भी घर में झाँक के देखो 
एक भी औरत अपने आदमी को प्यार नहीं करती/
उनका गठ- बंधन तो जबरन कर  दिया गया है,
परम्पराओं के आधार पर 


और इस बंधन  को अटूट बनाने के लिए.
वे अग्नि देवता का आह्वान करते हैं. 
और एक बार जब वे सात  फेरे ले लेते हैं 
वे हमेशा के लिय बंध जाते हैं/
   

और इन अप्रस्सनता से युक्त शादियों से 
हीर, मुझे बताओ 
यदि एक पत्नी अपने पति से प्रेम नहीं करती 
और न ही पति अपनी पत्नी से प्रेम करता है 
इस तरह के उदासीन संबंधों से कैसी संतान उत्पन्न होगी ?



यह तो हरामियों की दुनिया है/
दानव  चाहते थे कि सारी दुनिया 
विवाह में लिप्त हो जाये 
प्यार की बजाय 
और दोयम दर्ज़े के नागरिक पैदा हों 
जिनका रुझान प्यार से अधिक धन में हो/



हीर, हमारा मिलन न हो सका 
फिर भी, हमने इस ज़िंदगी की पर्याप्त खुशियां प्राप्त की /
तुम्हारी अंतिम विदाई ने मुझे असम्बद्ध कर दिया है/
मैं यहाँ हाज़िर हूँ. 
हे देवताओ, किसी महान गीतकार को भेजो 
कवितायेँ  लिखने के लिए 
ताकि भविष्य में लोग 
कुछ सीख सकें,
कि यह दुनिया इतनी बुरी क्यों है 
लोग इतने बुरे क्यों है/ 
माता पिता इतने असंवेदनशील क्यों हैं 
और औरतों को,अगर जान से मार नहीं दिया जाता,
सारी उम्र मानसिक यातनाएं , क्यों दी जाती है/




(राँझा और हीर भूतपूर्व पंजाब, भारत के प्रेमी -युगल है, जो विभिन्न सामाजिक अवरोधों के कारण विवाह नहीं कर 
सके/ वारिस साहब ने 'हीर वारिस' प्रेम -ग्रन्थ लिखा इस दुखांत प्रेम कहानी पर)


दैवीय वाणी : 

हे प्रभु, मैं जो देख रहा हूँ अविश्वसनीय है 
यह जो इस व्यक्ति रांझा ने कहा है 
एक ऐसा व्यक्तव्य है जो 
सोने से भी ख़रा है और चट्टान से भी दृढ /

आप एक ऐसे संसार पर राज्य कर रहे हैं 
जहाँ मासूमियत, प्यार और करुणा खो चुके हैं/
जहाँ के मनुष्य घूस पर पलते हैं 
और बेईमानी और नकली रिवाज़ों का आनंद लेते हैं/


यह बेचारी जनता आपको सम्मान देती है 
अग्नि प्रज्जल्वित करती है और अपनी अन्धता में
प्रचारकों का अनुकरण करती है 
जोकि आपके नाम पर अज्ञानी जनता को लूट रहे हैं/


पर आपने तो पलायनवादी रवैया अपनाया हुआ है
खुशी मनाते  हैं 
और नृत्य का आनंद उठाते हैं 
स्वर्ग के हवादार क्षेत्र में 
जबकि जनश्रुति के पूर्ण निराशा-युक्त कथन यह हैं कि 
*''हम तो देवताओं के लिए ऐसे हैं जैसे उच्श्रृंखल लड़कों के लिए मक्खियाँ 
वे अपने  खेल के लिए हमारे प्राण हर लेते हैं "/


आपके इसी रवैये ने 
प्रबुद्ध जन समुदाय को आपसे अलग -थलग कर दिया है 

और लस्ट्स  ने अपनी पकड़ और  मज़बूत कर ली है
उनकी कल्पना पर 
मात्र अपने तर्क की शक्ति से /

(* शेक्सपियर  द्वारा रचित 'किंग लीयर ' में से )




वह अपने ज्ञान की जादुई छड़ी हिलाता है 
और सारा संसार झुक जाता है 
उसके उपहास पर/       
जबकि आप तीखी नज़रों से देख रहे होते हैं 
अपने पवित्र सिंहासन पर बैठे 
आपका क़बीला जो सीमित होता जा रहा है, उस से बेखबर।



(देवदूतों और महादूतों , देवता और देवियों में बहुत हलचल मची है/) 

ब्रह्मा: 


इस रहस्य्मयी आवाज़ ने जो कहा 
स्पष्ट करती हैं व्यापक उलट-फेर को 
दानवों से  निपटने में हमें बहुत परेशानी हुई  है/
हमें तो अज्ञानता के आनंद में यकीन है 
जो जनमानस को आंदोलित करने में असफल रहा/

अत्याधिक् संख्या में लोग जब देवालयों में जाते है 
उन्हें देख कर एक राहत भरी भ्रान्ति होती है /
परन्तु वास्तिविक तथ्य तो चौंकाने वाले हैं/
क्या यह वास्तविकता है या मात्र विस्मरण ?


क्योंकि हमने अपनी  रण नीतियों की समीक्षा ऐसे नहीं की 
जैसे कि दानवों ने की 
सेटन के बाद की अवधि प्रबोधन की अवधि है/
ज्ञान ने सब मकड़ी के जाले हटा दिए हैं 
आध्यतमिकता की ओर झुके हुए लोगों 
के दिमाग  से 
और प्राचीन अतीत की मृत शाखाओं को फ़ेंक दिया है 
हम अपनी शक्तियों का राग अलापते रहते हैं 
जिनका प्रयोग हमने उस समय किया था 
जब सेटन ने विद्रोह किया था /
हमारी सफलता के बाद 
हम केवल आराम फरमाते रहे हैं /
हम बहुत लापरवाही से उनके विश्वास के साथ खेलते रहें है/
और अब परिणाम सामने हैं 


दुश्मन ने तो अपनी शक्ति समेकित कर ली है 
और हमारे सैनिकों को अपनी ओर परिवर्तित कर लिया है/
हमें भौचंक्का करते हुए 
जिस समय हम अतीत की अपनी जीतों का 
जश्न मनाने में व्यस्त थे 
जिनकी आज के युग में प्रांसगिकता पर सवाल उठाये जा रहें हैं /
पुराना संसार हमारा था 
पर इस संसार ने एक निर्णयात्मक मोड़ लिया है 
परम्परा से हट के 
पुराने फ्रेम से यह एक बहुत बड़ा बदलाव था 
जब नियंत्रण हमारे हाथों से फिसल गया 
और दानवों ने लगाम अपने हाथों में ले ली/


विष्णु :


1990 में संसार बदल गया 

जब कम्प्यूटरों  का प्रयोग किया जाने लगा 
ज्ञान को संसाधित करने के लिए/
और ज्ञान का कृत्रिम प्रकाश इतनी तीव्र गति से फैला 
कि इसने प्रकाश के प्राकृतिक स्त्रोतों को सुखा दिया/
संसार ने अलविदा कह दी, बुद्विमता को 
धार्मिक ग्रंथों को और यहाँ तक की देवताओं को भी 
और दैवीय सजा के भय  से भी मुक्त हो गए /

अब कोई पाप के बारे में परेशान नहीं होता 
किसी को भी स्वीकारोक्ति की परवाह नहीं/
किसी को भी क्षमादान में यकीन नहीं/
दान अभी भी दिया जाता है, पर राजनेताओं  द्वारा 
ऐयाशी में इस्तेमाल हो जाता है/

हमारे मंदिरों को क्या हुआ है 
हमारे धर्मात्माओं को क्या हुआ है?
क्या हमने कभी चाहा था कि 
सब जगह संगमरमर लगा दें 
और प्रधान ही वास्तविक राजनीति करें?
ईसा के सुविचारों की किसने गलत व्याख्या की ?
ज़रा, गौर फरमाईये, आज कल किस तरह के लोग 
हमारे मंदिरों में जाते हैं /


क्या  उनमें से कोई एक भी वहाँ 
शांति और मोक्ष की तलाश में आया है?
क्या कितनी अप्रीतिकर स्थिति है !
हमारी  परस्पर चिंताएं और उम्मीदें 
सभी  ग़लत साबित हुए हैं/


दानव जोश के गहरे नशे में धुत हैं,
इस कारण वे पूरी तरह से होश ,
सारे अनुपात, सारे संतुलन खो चुके हैं/
उनके आचरण में कोई शालीनता नहीं रही/
उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की है /
उच्च डिग्रियां धारक हैं /
फिर भी उनका आचरण तो देखो!
क्या वे केवल मुँह हैं? केवल पेट हैं/
केवल बाँहें है? केवल सिर है?
 पूर्ण मनुष्य नहीं?



इंद्र:

हम वंश-वृद्धि में  यकीन रखते हैं/
और हमने मनुष्यों को प्रजनन अंग प्रदान किये/
फिर भी, मानवता का इस से बढ़ कर भी कोई उद्देश्य था/
सेक्स जीवन का मात्र एक हिस्सा है/
फिर भी बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा/ 
और इन लोगों ने, आह!
इस आवेग को वर्जित किया/
और दानवों ने इस तंत्र का उपयोग किया/
अपनी अशिष्ट अभियांत्रिकी के लिए/
अब हर कोई काम-लोलुप है/
आदमी और औरत एक दूसरे को यूं निहारते हैं 
जैसे कि वे यौन संतुष्टि की वस्तु हों/
और क्योंकि यह वर्जित है 
एक गंभीर क्षति पहुंचाता है
मानवता के भावनात्मक और हार्मोनल संतुलन को /


और यह रहा परिणाम 
वे मनुष्य, जिनका संतुलन बिगड़ गया है/
वे सेक्स के लिए जुनूनी हो गए हैं, मनोरोगी ,
असामाजिक प्रवृति वाले व् बलात्कारी बन गए हैं/
हमारे छद्म संतों के बावजूद 
जो  दिखावटी नैतिकता का उपदेश देते हैं/


दानवों ने यह सुनिश्चित कर लिया है कि 
युवक व्यस्त रहें, अपने लिए अनुकूल दुल्हन ढूंढ़ने के लिए 
और लड़कियां सुयोग्य वर तलाशने में व्यस्त है,
और यह  मोहक और उत्तेजक नृत्य  जारी है/ 
 यदि कोई पति या पत्नी का गलत चुनाव कर लेता है 
 वह जीवन की सारी खुशियों से वंचित हो जाता है/


ऐसे लोगों से हम क्या उम्मीद रख सकते हैं?
भले आप उन्हें एक  ही सांस में सारे धार्मिक ग्रन्थ सुना दें,
चाहे कितनी ही बार गीता सुना दें ,
अगर उनमें शरीर की भूख बाकी  है, 
वे आत्माहीन हैं/


और इसी बिंदु पर दानवों ने हम पर प्रहार किया है/
पूरी जनसंख्या विक्षप्त हो गयी है/

रसोई से मुक्ति,
घर के बंधन से मुक्ति ,
बच्चे पैदा करने और उनको पालने से मुक्ति,
मुक्ति तो एक महान नाम है,
जिसे कि दानवों ने शर्मसारकर दिया है /



लस्टस : (ईश्वर से)
 
महान रचेयता,
आपने एक बड़ी भूल कर दी /
आदम को वर्जित फ़ल खाने की छूट दे कर  
यही तो वह ज्ञान है 



जिसे हमने अपने लाभ के लिए प्रयोग में लिया है/
क्या आप नहीं जानते थे 
आज्ञाकारिता और अज्ञानता 
हाथों में हाथ मिला कर चलते हैं ?
अब, देखिये, वे सब लोग जिनका टीकाकरण किया गया था 

थोड़ी सी, बिल्कुल थोड़ी सी या नाम मात्र की जानकारी के साथ 
आपके विरोध में सिर उठाये खड़े हैं/


हमारी सेनाओं की यह लम्बी कतारें देखिये/
हमारे दानव उनके पीछे खड़े हैं ,
परन्तु यहाँ पर लम्बी पंक्तियाँ हैं, अधिकारियों,
उद्योगपतियों, बेंकर्स, विक्रेता, 
सरकारी अफ़सर , कचहरी में काम करने वालों ,
भविष्यवाणी करने वालों, पैग़मबरों,  गुरुओं और संतों  की/


इन्हे पूछिए की वे हमारी तरफ क्यों हो गए हैं?
हमने उन्हें  केवल आज़ादी की पेशकश की 
और उन्होंने आपका साथ छोड़ दिया /
आपके आदर्शों को , आपकी नेकी 
और आपकी भव्यता को मँझदार में छोड़ दिया/


इन ग़रीब औरतों से पूछो,
जिन्हे भरपेट भोजन नसीब नहीं होता,
कि उन्हें क्या चाहिए?
क्या उनमें से कोई भी मोक्ष चाहता है/ याकि, यहाँ तक कि भगवान ? 


आवाज़ें :


नहीं, नहीं, नहीं 
हमें भोजन चाहिए/ हमें फ़्रिज चाहिए/ हमें कारें चाहिए/
हम विदेश देखना चाहते हैं/ 

युवकों से पूछिए/ वे क्या चाहते है?

पृष्ठ 103 

आवाज़ें :

आज़ादी, प्यार, सैक्स , मौज-मस्ती, मदिरा, नशीली औषधियाँ 

लस्ट्स :

क्या तुम्हे भगवान् नहीं चाहिए ? क्या तुम्हे स्वर्ग चाहिए?


आवाज़ें :

हम जीना चाहते हैं, हम मरना नहीं चाहते/
भूख़ और ज़रूरत यही सच्चाई है/
भगवान तो मात्र कपोल कल्पना है /
ज़िंदगी कल्पना नहीं/


हे, साधुओ ! यहाँ आओ और बताओ 
आपकी समस्या क्या है/
आपने भगवान से मुँह क्यों मोड़ लिया/


आवाज़ें :


हमें शक्ति चाहिए और शक्ति आती है
बंदूक की दुनाली से 
और केवल राजनेता के पास ही बंदूक होती है/


लस्टस :


भगवान, अब मुझे दिखाईये , कितने लोग 
आपकी ओर से लड़ने वाले हैं?

ईश्वर :


लस्टस , यह कौरवों की सेना है 
लाखों की तादाद में, जो भूसे में यकीन रखते थे,
ख़ुद भूसा  बन गए/
और राख़ का ढेर हो गए/
वे हमें हमारी नेकी के रास्ते से 
पथभृष्ट नहीं कर सकते/
हमने केवल जानकारी नहीं दी, 
परन्तु बुद्धिमता भी दी 
जिसे इन लोगों ने नहीं खरीदा/

इसलिए, ये यहाँ आपके साथ रह कर  यातनाएं झेल रहे हैं/

आप क्या सोचते हैं कि आपको बक़्श दिया जाएगा/

और यह सारे लोग यहाँ से सही सलामत और जीवित वापिस जा पाएंगे/?


जो कोई भी युद्ध-भूमि में गया , जीवित नहीं छोड़ा गया/

कुरुक्षेत्र में , कौरवों  की तरफ 

महान भीष्म, द्रोण,  कर्ण 

और वह सिरफिरा दुर्योधन था/

क्या वे सब केवल पांच पांडवों का सामना कर पाये ?


हम यह देख कर उदास हैं  

कितने ही लोग, जिन्हें  हमने शान्ति और खुशी की पेशकश की थी 

उन्होंने आप की ओर रहने का विलल्प चुना /

इसबात  से बेपरवाह कि उनके इस कदम का क्या मतलब निकलेगा/ 

यह अध्यापक, यह डॉक्टर, 

यह धर्म के ठेकेदार 

हमने कभी नहीं सोचा था कि यह हमें धोखा देंगे/


यह दयनीय बात है कि आपके शूरवीरों की सेना को विश्वास है  

कि वे हमारे संभावनाओं को ग्रहण लगा देंगे/

मैं हमेशा से एक स्नेही पिता रहा हूँ,

पर क्या वे मुझे इस तरह से धोखा देंगे, 

और बेईमानी करेंगे?

यह उनके स्वभाव के विरुद्ध है 

और मेरे स्वाभाव् से भी मेल नहीं खाता 

कि मैं उन्हें माफ़ कर  दूँ/


तुम्हारी खातिर, अरे ओ मानव की विशेष प्रजाति 

अध्यापक, यूनिवर्सिटी प्रोफेसर और डॉक्टर, 

जिन्हे विशेष शक्तियां और प्रतिष्ठा दी गयी थी 

मानवता की सहायता करने के लिए 

मुझे उन सब पर तरस आ रहा है

 जिन्हे अच्छी नौकरियां औरअच्छी  तनख्वाह नहीं  मिली 

यद्यपि वे जो उद्यमी बन गए 

और उन्होंने बहुत से कॉलेज शुरू कर  दिए/


और मेडिकल संसथान 

वे माफ़ी के लायक नहीं है/

क्या आप सोचते हैं कि सभी कुछ बिकाऊ है?


आपको कभी भी माफ़ नहीं किया जायेगा/

मैं विशेष निर्देश दूंगा कि 

इस पवित्र युद्ध में आपकी जान न ली जाये 

आप जीवित बचेंगे और आपको त्याग दिया जायेगा/

आपको कभी भी क्षमा नहीं मिलेगी/

और राजनीतिज्ञों के लिए भी कोई क्षमादान नहीं  है 

वे तो इस पूरी खेप में सब से गंदे हैं/

हम घोषित करते हैं कि आपका अपराध अक्षम्य है/

और आपको दानवों के सुपुर्द करते हैं/


(जब यह महान व्यक्ति युद्ध सम्मेलन में हैं, स्वर्ग के अर्ध -भूमि क्षेत्र में युद्ध ज़ोर शोर से लड़ा  जा रहा है/

 ईश्वर चिंतित मुद्रा में प्रकट होते हैं/)


ईश्वर :

ब्रह्मा! मैं बहुत खून खराबा देख रहा हूँ/

हमने अपने बहुत से महान योद्धा गवाँ दिए हैं/

और मुझे क्षोभ है  कि ये सारी सेनाएं 

दानवों की ओर हो  गयी हैं/

लस्टस हम पर बहुत भारी पड़ रहा है /

अच्छा रहेगा यदि हम कुछ समय के लिए कदम पीछे हटा लें /

युद्ध विराम संधि की बात करो 

और वार्ताकारों को भेजो इस युद्ध का अंत करने के लिए/ 


ब्रह्मा :  

पिताश्री , केवल इतना ही नहीं 

यदि  परिचालन को विराम दिया जाता है 

हम अपनी सेनाएं पुनः संयोजित कर पाएंगे/ 


और इसी दौरान 

हम देखेंगे कि कैसे इस असुंतलन को 

ठीक किया जा सके, 

पिताश्री, हमें समय चाहिए/

(एक युद्ध परिषद् को बुलाया जाता है)

चित्रगुप्त एक प्रस्ताव रखते हैं, जिसका अनुमोदन सभी के द्वारा किया जाता है/  परन्तु दुर्गा इसे मानने से इंकार कर  देती है/)


दुर्गा:

मैं  उनके खून की नदियाँ बहा दूंगी/

देख ती हूँ, वे कैसे मुड़ कर आ सकते हैं?

"केवल एक बार मुझे उन्हें रोकने का प्रयास करने दीजिये/"

" दुर्गा आ रही है, इंद्र, जाओ और उन्हें  बताओ/''

सब ख़ामोश हो जाते हैं/

ईश्वर  दुर्गा के इस अंतिम प्रहार की प्रतीक्षा करते हैं/)


किल्लर इंस्टिक्ट :

दुर्गा दानवों पर प्रहार करती है 

जो मिसाइलों से सुसज्जित थे और जिनके पास 

सशस्त्र प्रणालियाँ, टैंक्स और रॉकेट् थे/


विस्फ़ोटक सामग्री का खुल कर उपयोग हो रहा था 

जिस से वे स्वर्ग के स्टेशनों को  आग लगा रहे थे /

इस से दुर्गा क्रोधित हो गयी/

और दानव् समूह  पर टूट पड़ी 

अपने शस्त्र और अस्त्र के साथ 

जिसके परिणाम स्वरूप 

मामोँन , एसमॉडस , लेविथान और बेलफिगोर 

की मृत्यु हो गयी/


( लस्टस  युद्ध परिषद् बुलवाता है)

 बिल्जेबब, लूसिफ़र और सेटन इसमें शामिल होते  हैं/)


किल्लर इंस्टिंक्ट :

दुर्गा के इस  क्रुद्ध प्रहार ने दानवों के होश उड़ा  दिए हैं/ 

 लस्ट्स ने युद्ध परिषद को बुलाया है/

मध्यस्थ लोग युद्ध विराम संधि  की कोशिश कर रहें  हैं/

जबकि आग लगने वाली स्थिति ज़ारी है/

मृत्यु -दर बढ़ रही है 

और दोनों ओर के लोगों ने लाखों जानें ली हैं/

इतना लहू बहा दिया गया है 

कि आँखों के आगे भीष्ण  महाभारत का 

भयानक दृश्य उभरने लगा है/


अप्पोलीअन  मुख्यालय से आ रही 

नवीनतम खबर बता रही है कि 

युद्ध विराम संधि हो गयी है/

युद्ध रुक गया है /

और  युद्धविराम  की यह शर्ते हैं/


ब्रह्मा और सेटन द्वारा हस्ताक्षरित युद्ध-विराम संधि :

युद्ध की गतिविधियाँ तुरंत प्रभाव से  रोक दी जाएँ/

इस युद्ध में न तो कोई विजेता है 

और न ही कोई पराजित हुआ है/

लस्टस स्वर्ग की सीमाओं से पीछे हट जायेगा

 और दैवीय  सेनाएं भी वापिसी का रुख़ लेंगी/

उन क्षेत्रों से जो पहले लूसिफर के अधिकार क्षेत्र में थी/

अब से, दोनों दल अपने अपने कार्यक्षेत्र में  कार्यरत होंगे/



लस्टस दैवीय  शक्तियों का अधिकार प्राप्त करके,

 मासूम मानवता को पथ भ्रमित करना बंद करेगा/

अपने प्रचुर आशीर्वाद के साथ/

देवता वादा करते हैं कि वे पीछे हट जायेंगे 

और वापिस चिंतन मनन में लग जाएंगे/

लस्टस धार्मिक पूजा स्थलों से दूर रहेगा/


लस्ट :

यह बहुत रोचक बात लग रही है कि  

देवताओं ने राजनेताओं को भी वर्जित लोगों की सूची में डाला है/

पर लस्ट्स  इस  मांग पर अड़ गया  

कि यह अधिकार क्षेत्र उसका ही रहे/

शिक्षा को समवर्ती सूची में रखा गया/

और लस्टस ने वादा किया कि  वह 

 धरती और आकाश में जितने भी देवीय सैन्य शिविर निगरानी हेतु हैं 

उन्के काम में  कभी भी बाधा नहीं डालेगा/ 


टाइम :

सम्पूर्ण  ब्रह्माण्ड में एक असहज सी शांति व्याप्त है/

वृक्ष , पक्षी , नदियाँ ,पहाड़ 

एक सधी हुई ख़ामोशी ओढ़े हुए हैं/\

कोई भी खुलकर बात नहीं कर रहा 

 न तो किसी के समर्थन में,  न किसी के विरोध में 

न लस्ट्स  के  और न  देवताओं के/

हवाएं वापिस अपना संतुलन प्राप्त कर रही हैं/

धरती फिर से  सामान्य  हो रही है/

दोनों ओर के इतने वज्रपातों  से हिलने के बाद भी/


लस्टस का अभिमान खंडित हो गया है 

और पूरे ब्रह्माण्ड पर साम्राज्य स्थापित करने की  

जो उसकी भव्य योजना थी,वह भी धराशायी हो गई /

उस के पर क़तर दिए गए हैं 

और वह ईर्ष्यालु  झील में डूब रहा है 

वे देवता जो दुर्गा द्वारा,  विनाश से बचा लिए गए 

उन्हें पछतावा हो रहा हैं 


और वे अनुभव क र रहे हैं कि उन्होंने धरती के प्राणियों की अवहेलना की 

और इस तरह दानवों को जगह दे दी 

अपने पंख पसारने  के लिए/


लोग अपने काम पर पहले जैसे सामान्य रूप से जा रहे हैं 

वे अभी भी घातक पाप के बीज अपने कन्धों पर लादे हुए हैं/

ऐसा लगता है जैसे कुछ भी घटित नहीं हुआ था/

ऐसी है हमारी मानव प्रजाति /

उदासीन, संवेदनहीन /

अपनी ही होनी  के प्रति उदासीन /

हमेशा की तरह, भावनाओं में बह कर 

अनैतिक तत्वों के हाथों में  खेली जाने वाली 

और पूर्ण अनभिज्ञता के कारण

 दानव और उसके अभिकर्ताओं के आगे अपनी आत्मा गवाँ देने वाली /


फ़ॉस्टस बिलजेबब से 

कुछ भी नहीं गवायाँ  हम ने, अगर हम  अभी भी जीवित हैं /

भूल जाओ, उस संघर्ष को 

उम्मीद पर ही तो दुनिया क़ायम है/


बिलजेबब: 

फ़ॉस्टस, तुमसे बेहतर कौन जानता है 

स्वर्ग खोने का मतलब 

और आशा भी/


लस्टस :

आदरणीय भाई,सेटन 

देवता हमारे लिए यातनाएँ और क्षति लाये /

शायद हमने अधिक ऊंची उड़ान ले ली थी ,

और बहुत  ऊँचे सपने देखने लगे थे /

हमारे पंख पिघल गए

और हम समुद्र में गिर गए/


क्या हम अपना मिशन त्याग दें ?

देवदूतों से डरने लग जाएँ और विषाद ग्रस्त हो जाएँ/



क्या हम इस महान आक्रमण से मिले फायदे 

 यूं ही व्यर्थ जाने दें ?


क्या हुआ ,अगर हम ये युद्ध हार गए तो/

हमने धरती और आकाश को  हिला के रख दिया/

हमारा सम्मान, हमारी शक्ति 

सब कुछ तो दाँव पर लगा था /


मैंने उस महान कौतुक को देखा है/

हमारे भृत्य इतने शौर्य से लड़े /

हमारे सेनापति, हमारे योद्धाओं ने 

स्वर्गदूतों को  युद्ध में व्यस्त  दिया/


भय :

तुम सभी साझेदारों, 

अध्यापकों, अभियंताओं 

वास्तुकारों, व्यापारियों को नोटिस भेजो 

जिन्होंमे अथक मेहनत की युवा वर्ग से  

काम, काम और काम करवाने के  लिए 

जब तक के वे स्वचालित नहीं हो गए ,

अपना चमकता अस्तित्व खो कर ,


लस्टस  के आधिपत्य में सुरक्षित रहने करने के लिए /

हम दोबारा आक्रमण करेंगे/

केवल एक हिस्सा ही दो,

जब पूरा खोने का खतरा हो /

हम ने सब कुछ नहीं गंवाया, अगर हम अब भी नियन्त्रण में रहें /


(प्रस्थान) 


 लस्टस 

उपसंहार 

हमारा ब्रह्माण्ड तो एक विभाजित घर है,

बुराई की उपस्थिति से अच्छाई पूर्णतः संतुलित है/

दानव नमक की तरह हैं जो कि 

 सभी स्वर्गदूतों के, सभी शक्कर युक्त खाद्य पदार्थों को 

ख़लाओं  के लिए  सुपाच्य बनाते हैं/



अतीत में कौन से युग ,

सतयुग, त्रेता, द्वापर बुराइयों से मुक्त थे ?

कलयुग में जो एक मात्र भिन्नता हम देखते हैं, वह यह है  

कि बुराई का मानवीकरण किसी एक व्यक्ति के रूप में नहीं किया गया 

जैसे कि पहले रावण या कंस अथवा दुर्योधन के रूप में किया गया था /


कलयुग एक् टाइम कैप्सूल  है, जिस में 

ज्ञान ने अपनी बुरी शक्तियां दिखाई हैं 

लोग ईश्वर के प्रति आस्था-हीन हो जाते हैं/

हठधर्मी हो जाते हैं 

और अपने वैकल्पिक देवता बना लेते हैं/


लस्टस सेटन का एक काल्पनिक पुनः  रूप है/    

अधिक ख़ौफ़नाक  क्योंकि वह प्रयत्न करता है 

पौधों,  पक्षियों और जानवरों के साम्राज्य में   
उच्च -स्तरीय आत्म ज्ञान देने की/


 देवताओं और बुराईयों के संगठनों में 

युद्ध छिड़ जाता है 

युद्ध के वीभत्स हादसे बाध्य करते हैं दोनों पक्षों को 

एक युद्ध -संधि विराम के लिए ताकि 

अंतिम आक्रमण से पूर्व थोड़ा समय जुटाया जा सके/


लस्टस अभी भी अपने ओहदे पर क़ायम है/

अग्नि  के सबसे महत्वपूर्व प्रारूप सम 

यहाँ-वहाँ यदि कुछ उलट-फेर करने पड़ें  

इसे केवल कुछ क्षति ही आंका  जाएगा, व्यवसाय के साम्राज्य में /


अब समय आ गया है कि देवता पुनर्विचार करें 

किस तरह से वे पुनः प्राप्त  सकते हैं 

मानव हृदय पर अपनी खोयी हुई पकड़ /

उन्हें दूसरों को अधिक भावनात्मक समर्थन देना होगा  

और कम  लापरवाह और कम निर्दयी बनना पड़ेगा/


क्या वे सूचना मिलते ही तुरंत ध्यान देंगे 

यदि कहीं कोई मानवीय क्षति हुई हो/

दानवों जैसे, जो हमेशा मनुष्यों के आदेश मानते हैं 

और उनके लिए  तत्परता से कार्यशील रहते हैं?


दानव उनके मन की बात समझते हैं 

उनके  लिए मल्हम जुटाते हैं/

और उन्हें ऐसे स्थानों में जाने के लिए लालायित करते हैं 

जहाँ पर अंत में उनकी शांति नष्ट हो जाती है/


सृजना और कुशलक्षेम के देवताओ 

लस्टस और उसके  दानवों ने 

मानवता का संतुलन बिगाड़ दिया है /

लोग विक्षिप्त हो गए हैं/

पुनर्विचार कीजिये उन्हें इस उत्तेजना के संसार  से 

वास्तिविकता और स्थिरबुद्धिता के  संसार में 

कैसे वापिस लाया जाये /

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मूल लेखक :  डॉ. जे. एस।   आनन्द 

अनुवादिका :   रजनी छाबड़ा 















































*लस्टिस :  लस्टस के द्वारा बनाई गयी न्याय-प्रणाली 

*लस्टीटूटूशन : लस्टस द्वारा बनाया गया संविधान 


(भौंचकित हो कर , वे ब्रह्मा के पास लौट आते हैं)





















 





















































        













































 




















































        













































 


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