जीवन के पल पल की महक संजोये 'गुलाबी गलियारे'

  पुस्तक- गुलाबी गलियारे- संस्मरण

लेखिका- डॉ. अंजु दुआ जैमिनी
पृष्ठ संख्या- 116
प्रकाशक- अयन प्रकाशन,वर्ष 2023
मूल्य 280 रुपये

जीवन के पल पल की महक संजोये  'गुलाबी गलियारे'

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जीवन पथ पर चलते चलते कुछ यादें ऐसी अमिट छाप छोड़ जाती हैं स्मृति पटल पर कि उनकी महक आजीवन हमारे साथ रहती है/ 'गुलाबी गलियारे' संस्मरण में  जीवन के पल पल की महक संजोये, अंजू दुआ जेमिनी ने बचपन से अब तक की अनुभूतियाँ सहज, सरल, सरस व् रुचिकर ढंग से कलमबद्ध की हैं /

बचपन से लेकर अब तक की जीवन यात्रा के विभिन्न छोटे -बड़े अवसरों का उल्लेख इतने जीवंत ढंग से किया गया है कि पाठक अनायास ही स्वयं को उमसे एकाकार करने लगता है / लेखिका का भोगा हुआ यथार्थ , केवल एक व्यक्तत्व के रूप में नहीं उभरता, अपितु कई घटनाओं व् बिम्बों के माध्यम से हम जीवन के कई पहलुओं को गहनता से समझ पाते हैं/

बचपन की छोटी-छोटी नादानियाँ, शोखियाँ व् शरारतें , सहजता व् सरसता से लेखिका अपने पाठकों के समक्ष रखती है/ धीरे -धीरे जीवन परिपक्वता की राह पर चलने लगता है/ शिक्षा, व्यवसाय, वैवाहिक जीवन की जिम्मेवारियां, परिवार के साथ वैचारिक समन्वय कायम रखने के साथ ही साथ अपने लिए समय निकालना, अपने सपनो को जीवित रखने के लिए और अपनी पहचान बनाये रखने के लिए, 'गुलाबी गलियारे' के लिखने का यही उद्देश्य प्रतीत होता है/

किशोरावस्था की परेशानियां, शिक्षा व् नौकरी की चुनौतियां , कार्यस्थल पर पहुँचने के  लिए सार्वजानिक यातायात साधनों के प्रयोग के दौरान परेशनियाँ, विशेषकर जो स्त्री-वर्ग को झेलनी पड़ती हैं और फिर भी खुले-आम विरोध न कर पाने की मनोस्थिति, पुरुष प्रधान समाज की मानसिकता पर करारी चोट की गयी है ,इस आत्म -कथ्य के माध्यम से / स्त्री का मानसिक शोषण , चाहे वह गृहस्थिन हो या कामकाजी महिला, विभिन्न घटनाओं के माध्यमसे इंगित किया गया है/ इस यात्रा में अंजू जी ने कामकाजी महिलाओं की जद्दोजहद का वह चित्र उकेरा है जिससे हर कामकाजी स्त्री जूझती है, विशेषकर उस समय जब नौकरी और ममत्व में समीकरण बनाये रखना कठिन हो / जीजिविषा चुनौतियां स्वीकारने के लिए उकसाती है और जीवन में सफलता दिलाती है/

नारी-विमर्श की लेखिका के रूप में विशिष्ट पहचान बना चुकी डॉ , अंजू दुआ के इस संस्मरण के माध्यम से जीवनके कई अनदेखे पहलू नज़रों के सामने आते हैं और आत्म मंथन के लिए प्रेरित करते है/

लेखिका ने साहित्यिक यात्रा के वृत्तांत, सह-अस्तित्व के लिए संघर्ष, परिवार में समन्वयन की प्रसन्नता, उलझन भरी कंटीली राहों को आत्म-विश्व से समतल बनाना, लेखिका ने सधी हुए कलम से , सजीवता के साथ प्रस्तुत किये हैं/ लेखिका की इस यात्रा में मासूमयित है, शरारतें है, जिज्ञासा है, बेबाकी है, निर्भीकता है , जिसे रोचक ढंग से उन्होंने इस प्रकार प्रस्तुत किया है कि पाठक इसे पढ़ना शुरू करने की बाद, अंत तक बिना रुके पढता ही जाता है/उनके ही शब्दों में कहा जाए तो 'गुलाबी गलियारे मेरे जीवन की सच्चाइयों की पदचापों से सजे हैं। इसमें सभी रसों की बौछार हैं, सभी मौसम दिखाई देंगे और जीवन रूपी सिक्के के दोनों पहलू भी देखने को मिलेंगे।'

पुस्तक के अंतिम पृष्ठों पर दी गयी चित्र-वीथिका में लेखिका के जीवन के खूबसूरत यादगार पलों का झरोखा है और इस प्रस्तुतिकरण से पुस्तक के सौंदर्य को चार चाँद लगा दिए है /

अयन प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक का आवरण प्रभावी है और शीर्षक के अनुकूल है/

डॉ. अंजु दुआ को इस उत्कृष्ट लेखन के लिए हार्दिक बधाई/

रजनी छाबड़ा

बहु-भाषीय कवयित्री व अनुवादिका

गुरुग्राम (हरियाणा)




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