प्रस्तावना : जड़ां नाल रिश्ता सपनों का वितान और यादों का बिछौना/ नहीं रहता इनसे अछूता/ मन का कोई भी कोना/
जीवन की छोटी छोटी खुशियाँ और यादों के मधुबन हमारी अमूल्य निधि हैं/ रिश्तों की गरिमा, अपनों का सानिध्य, अस्तित्व की पहचान और सौहार्द पूर्ण सह-अस्तित्व यही तो ताने -बाने हैं हमारे सामाजिक परिवेश के/ यदि यही सामजिक ताना -बाना तार-तार होने के कगार पर हो, कवि का संवेदनशील मन अछूता कैसे रह पायेगा/ यही अनुभूतियाँ कलमबद्ध करने का प्रयास किया है, अपनी काव्य-कृति ' जड़ां नाल रिश्ता' के माध्यम से / भावों और अभावों के कुछ संवेदनात्मक शब्द-चित्र
बचपन से लेकर उम्र के आख़िरी पड़ाव तक का सफर, बहुआयामी चिंताएं, अन्याय, उत्पीड़न, नगरीकरण का दबाव, अपनी माटी की महक, जीवन मूल्यों के प्रति निष्ठा, संस्कारों के प्रति आस्था, अबोले बोल और आकुलता ऐन्द्रिय धरातल पर कुछ बिम्ब बनाते हैं/ इन्हे शब्दों का रूप दे कर उकेरा है/
जो दूसरों के दर्द को
निजता से जीता है
भावनाओं और संवेदनाओं को
शब्दों में पिरोता है
वही कवि कहलाता है
यही दायित्व निभाने की कोशिश की है, अपनी रचनाओं के माध्यम से/
अब तक हिंदी और इंग्लिश में तो मेरे काव्य संग्रह प्रकशित होते रहे हैं और बहु भाषीय अनुवाद के क्षेत्र में भी निरंतर योगदान रहा है/ परन्तु कहीं न कही मन को यह ख्याल कचोटता रहा था कि मैंने अपनी मातृभाषा सिराइकी को कैसे अनदेखा कर दिया/ इस काव्य संग्रह को रचने के बाद, कुछ राहत महसूस हो रही है कि मातृभाषा के ऋण से उऋण होने का एक छोटा सा प्रयास कर पायी/ उम्मीद करती हूँ कि भावों और अभावों के कुछ संवेदनात्मक शब्द-चित्रों को संजोये, इस संग्रह की कविताओं में अपनेपन के मेह की अनुभूतियां व् जड़ों से रिश्ता पाठक महसूस कर सकेंगे/ इन कविताओं का मूल्यांकन मैं अपने सुधि पाठकों पर छोड़ती हूँ/ आपकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा रहेगी/
मैं आभारी हूँ बहु भाषीय कवयित्री डॉ. अंजु दुआ जैमिनी की, मुझे सिराइकी भाषा में लिखने के लिए प्रेरित करने के लिए/ वरिष्ठ लेखक व् चिंतक डॉ. चंद्र भानु आर्य के मार्गदर्शन के बिना यह कार्य पूरा करना संभव नहीं था/ उनका तहे-दिल से शुक्रिया/
रजनी छाबड़ा
बहु-भाषीय कवयित्री व् अनुवादिका
Raajesh Chadha
जवाब देंहटाएंबहुत मुबारक़
सरायकी में एक प्रोग्राम इसीलिए नाम से हमारे air suratgarh से sarc यानी दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (South Asian Association for Regional Cooperation) के अंतर्गत आज भी प्रसारित होता है। आपका ये कार्य भाषाई समृद्धता में महत्वपूर्ण योगदान है।
मंगलकामनाएँ।Comment by Rajesh Chadha Ji, Clipped from my facebook page
Hardik Abhaar
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