भीगी गलियाँ, बिखरा काँच :ओम प्रकाश गासो समीक्षक : रजनी छाबड़ा

 

भीगी गलियाँ, बिखरा काँच
कविता
रचेयता: ओम प्रकाश गासो
पेपर बेक एडिशन
मूल्य: ५०/-
प्रकाशक: मित्र मंडल प्रकाशन, बरनाला
मानवीय संवेदनाओं की कलात्मक प्रस्तुति
पंजाबी के लब्ध प्रतिष्ठित उपन्यासकार और चिन्तक श्री ओम प्रकाश गासो जी वयोवृद्ध लेखक हैं व् पंजाबी में ५० से अधिक पुस्तकें लिखने के साथ ही साथ बीसंवी सदी के अंतिम दशक से हिंदी साहित्य में भी अपनी सशक्त लेखनी से विशिष्ट पहचान बना चुके हैं/
भीगी कलियाँ, बिखरा काँच सामाजिक मूल्यों के पतन, राजनेतिक व् धार्मिक क्षेत्र की विसंगतियों पर सटीक प्रहार है/ पारिवारिक व् व्यक्तिगत जीवन यथार्थ को सहज ढंग से उजागार करती, ओम जी की यह लम्बी कविता, छटपटाहट और आक्रोश की सशक्त अभिवय्कति है/ विलुप्त होते जीवन मूल्यों और आधुनिकता की अंधी दौड़ से कवि क्षुब्ध है, परन्तु कलम का हथियार हाथ में लिए, इस परिवेश को बदलने के लिए पूरे हौंसले से प्रयत्नशील है/ इसी संकल्प से ही तो उभरी हैं इतनी गहन और चेताने वाली कवितायेँ/
ओम जी के इसी काव्य से कुछ पंक्तियाँ
काँच का कर्म घायल करना
कला का कर्म मरहम लगाना (पृष्ठ ४१)
कोई भी ज़माना,
कभी कमबख्त नहीं था
काम चोरों ने
समय के माथे पर लगाये कलंक
कला पोंछती रही कलंक को (पृष्ठ ३८)
पारिवारिक रिश्तों में बनावट की बुनावट पर भी कवि ने सशक्त प्रहार किया है
सोचती है सोच
कहती है कोयल
हर सांस कठपुतली क्यों हैं?
घर का आंगन रंगमंच बन कर
रचाता क्यों नाटक
नाटक से बाहर निकलो
साँसों को गिरवी मत रखो
आँगन को आनंद बनाओ(पृष्ठ ४६)
राजनेतिक और धार्मिक विसंगतियों से आहत कवि हृदय , अपनी भावनाओं को कुछ यूं व्यक्त करता है
भीगी गलियों में काँच को बिखराने का कर्म-
राजनीति का धर्म
धर्म की राजनीति को
काश्मीर की कली से क्या लेना है?
कुर्सी, काश्मीर और कला,
काँच, कुकर्म और कहकहों की कहानी
ऐसे जैसे
भीगी गलियों में बिखरा हो काँच/
साहित्य की साधना का उनका यह सफ़र निरंतर चलता रहे, ईश्वर से यही प्रार्थना है/
मैं हृदयतल से आभारी हूँ आदरणीय ओम गासो जी की कि उन्होंने हाल ही में तेजिंदर चंडहोक जी द्वारा पंजाबी में अनुदित ਹੋਣ ਤੋ ਨ ਹੋਣ ਤਕ ( मेरे हिंदी काव्य संग्रह ‘होने से न होने तक’ का अनुवाद) में मेरे लिए आशीर्वचन दिए/
रजनी छाबड़ा
बहु भाषीय कवयित्री व् अनुवादिका
1
People reached
2
Engagements
Distribution score
Boost unavailable
1
1 Share
Like
Comment
Share

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मेरी अनुदित कृति SWAYAMPRABHA :श्री राम शरण अग्रवाल जी की पाठकीय प्रतिक्रिया